28/01/2026
श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणम्…” ✨ गोस्वामी तुलसीदास रचित यह दिव्य स्तुति भगवान श्रीराम की करुणा और सौंदर्य का भावपूर्ण वर्णन करती है। 🙏 तुलसीदास जी ने प्रभु श्रीराम के आदर्श जीवन और करुणामयी स्वरूप को जन-जन तक पहुँचाया। इस स्तुति में वे भगवान को करुणा के सागर के रूप में चित्रित करते हैं — जिनकी कमल समान आँखें, मुख, कर और चरण सौंदर्य, शांति और दिव्यता से भरे हैं। 🌸 इन पंक्तियों का स्मरण मन को भक्ति और शांति से भर देता है, और यह सिखाता है कि सभी भय और दुःख प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना ही सच्ची मुक्ति का मार्ग है। shriramchandrakripalubhajman🚩🕉️ ramstuti