05/12/2025
गोवा, त्रिपुरा, और उत्तर प्रदेश के गवर्नर रहे, रोमेश भंडारी ने अपने नाम में जुड़े “भंडारी” शब्द के बारे में बताते हैं की उनके पूर्वज कारोबारी थे। शादी के कई साल गुज़र जाने के बाद भी घर पर कोई वारिस न था। तब किसी ने उनसे कहा के तुम हज़रत ख़्वाजा फ़रीदउद्दीन गंजशकर के पास जाओ, वो अल्लाह से दुआ करेंगे, तब तुम्हारे घर बरकत आएगी।
वो कारोबारी ख़्वाजा फ़रीदउद्दीन गंजशकर के ख़ानकाह में जाते हैं, ख़्वाजा फ़रीदउद्दीन गंजशकर अपने हुजरे में इबादत कर रहे थे। हमेशा की तरह ख़ानकाह में फ़ाका काशी का आलम था। ये देख कारोबारी ने वहाँ लंगर शुरू करवा दिया। वहाँ मौजूद लोगों में खाना तक़सीम करवाया।
जब ख़्वाजा फ़रीदउद्दीन गंजशकर हुजरे से बाहर आये तो देखा के वहाँ मौजूद सारे लोग खाना खा रहे हैं, काफ़ी चहल पहल है। उन्होंने इसके बारे में पूछा तो ख़ानकाह के एक ख़ादिम ने बोला की आपका एक चाहने वाला आया है, आपकी दुआओं का तलबगार है। ताकि इनके घर औलाद की आमद हो। ये सुनते ही हज़रत ख़्वाजा फ़रीदउद्दीन गंजशकर ने कहा कि ये तो ख़ुद ही एक “भंडारी” है।
इसके बाद वो कारोबारी हज़रत से दुवाएँ लेकर वापस चला जाता है, उसके घर औलाद की आमद हुई। तब उसने बच्चे के नाम के साथ ख़्वाजा फ़रीदउद्दीन गंजशकर के द्वारा दिया लक़ब “भंडारी” भी जोड़ दिया। जो विरासत के साथ रोमेश भंडारी तक पहुँची।