आचार्यशंकर भारत उद्भासक मण्डल

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आचार्यशंकर भारत उद्भासक मण्डल शास्त्र सम्मत सनातन धर्म की रक्षा एवं प्रबोधन

हृदय विदारक अतिशय दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल के संस्थापक सदस्य और महासचिव परमादरणीय ...
11/05/2026

हृदय विदारक अतिशय दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल के संस्थापक सदस्य और महासचिव परमादरणीय विद्वत वरिष्ठ श्रीमान आशुतोष वाजपेयी जी हम सभी का साथ छोड़कर शिवलोक गमन कर गये।
पूज्य भाईसाहब के असमय कालकवलित हो जाने से मण्डल सहित हमारी और हमारे जैसे अनेक लोगों की व्यक्तिगत अपूर्णीय क्षति हुई है।
हम सभी भगवान अवढरदानी आशुतोष से पूज्य आशुतोष भाईसाहब के सद्गति की प्रार्थना करते हैं।
शांतिः शांतिःशांतिः।

शिवावतार भगवत्पाद आदिशंकराचार्य महाभाग प्राकट्य महोत्सव।
20/04/2026

शिवावतार भगवत्पाद आदिशंकराचार्य महाभाग प्राकट्य महोत्सव।

गोला गोकर्णनाथ नगर की पावन धरा एवं भगवान श्री गोकर्णनाथ के सान्निध्य में द्विज सहायता समिति, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित ...
20/04/2026

गोला गोकर्णनाथ नगर की पावन धरा एवं भगवान श्री गोकर्णनाथ के सान्निध्य में द्विज सहायता समिति, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित एवं आचार्य शंकर भारत उद्भासक मंडल (ईकाई गोला गोकर्णनाथ) के संयोजन में श्रीसंकट मोचन हनुमान मंदिर में आयोजित आवेशावतार भगवान श्री भार्गव राम के प्राकट्यदिवस पर दिव्य ज्ञान से संपन्न मनीषी, तपस्या के तेज से विभूषित परमपूज्य स्वामीश्री सिद्धेश्वरानंद गिरी जी महाभाग (महंत, नीलकंठेश्वर महादेव-वैष्णव माता मंदिर, लखनऊ एवं नागा सन्यासी जूना अखाड़ा) एवं श्री शांकरपथानुगामी श्री रामबाबू पांडेय जी (कृपापात्र शिष्य श्रीमद् शंकराचार्य महाभाग पुरी/प्रतिष्ठित लेखक एवं विचारक) का आगमन हुआ। जिनकी धर्मनिष्ठ वाणी ने उपस्थित भक्तवृंदों को धर्म के स्वरूप, श्री भगवान परशुराम की लीला एवं ब्राह्मणत्व व उसके उद्भासन पर मार्गदर्शन प्रदान किया।

इस कुशल आयोजन के लिए मंडल के केंद्रीय सचिव श्री मिलिंद शुक्ल जी, मंडल इकाई गोला गोकर्णनाथ सदस्य श्री कमल नयन शुक्ल, श्री दिवाकर पांडेय, श्री लवकुश अवस्थी सहित समिति के पदाधिकारी श्री डॉ. सौरभ दीक्षित , श्री डॉ. आदर्श दीक्षित, श्री दीपक मिश्र, श्री मनोज मिश्र, श्री आचार्य लवकुश अवस्थी शास्त्री आदि विशेष प्रशंसा के पात्र हैं।

आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल* के द्वारा *आचार्यशंकर निबंध,चित्रकारी एवं भाषण प्रतियोगिता*१.निबंध प्रतियोगिता:- १००० शब्द...
02/04/2026

आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल* के द्वारा *आचार्यशंकर निबंध,चित्रकारी एवं भाषण प्रतियोगिता*

१.निबंध प्रतियोगिता:- १००० शब्दों में भारतोद्धारक आचार्यशंकर विषय निबंध लिखकर [email protected] इस अणुडाक पते पर वैशाख शुक्ल प्रतिपदा(१८ अप्रैल २०२६) दिन - शनिवार तक भेजना होगा।

२.आचार्य शंकर चित्रकारी प्रतियोगिता:- भगवत्पाद आदिशंकराचार्य से संबंधित चित्र बनाकर वैशाख शुक्ल पंचमी (२१ अप्रैल २०२६) दिन मंगलवार को प्रातः काल १० बजे तक चित्र जमा करना होगा।

भाषण प्रतियोगिता- २१ अप्रैल को लखनऊ विश्वविद्यालय में अपराह्न ०२:०० बजे भाषण प्रतियोगिता आयोजित होगी।

प्रथम पुरस्कार:- ३००० रुपये
द्वितीय पुरस्कार:- २०००रुपये
तृतीय पुरस्कार :- १००० रुपये
चतुर्थ एवं पंचम:- ५०० रुपये

इस प्रतियोगिता में स्नातक,परास्नातक एवं शोधछात्र सम्मिलित हो सकते हैं। सम्मिलित होने के लिये पंजीकरण अनिवार्य है और पंजीयन शुल्क ५० रुपये है।

प्रतियोगिता मे पंजीकरण हेतु निम्नलिखित गूगल फार्म पर क्लिक करें

https://forms.gle/FhJ3UknSXcE9qef29

आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल द्वारा आयोजित द्विज बालकों का उपनयन संस्कार कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।           इस संस्कार कार...
27/02/2026

आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल द्वारा आयोजित द्विज बालकों का उपनयन संस्कार कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस संस्कार कार्यक्रम में मंडल के प्रमुख संरक्षक पूज्य आचार्यश्री रामशंकर शुक्ल जी,मंडल संरक्षक द्वय पूज्य महाराजश्री सिद्धेश्वरानन्द गिरी जी एवं पूज्य आचार्यश्री विद्यावारिधि श्यामलेश त्रिपाठी जी, मण्डल के प्रमुख संरक्षक श्रीमान रामबाबू पाण्डेय जी,शांकर न्याय सेना प्रमुख श्रीमान सुदेश तिवार जी व सामाजिक कार्यकर्ता के के शुक्ल जी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

16/02/2026

अनंतानंतश्री विभूषित पूज्यपाद श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज महाभाग ने दो विषयों पर "प्रथम वैराग्य लिया हुआ व्यक्ति क्या वैतनिक पद पर कार्य कर सकता है तथा द्वितीय वैराग्य लिए हुए व्यक्ति के अधिकार क्षेत्र में क्या मांस का व्यापार उचित है" पर युगल रूप में वाद - संवाद(पक्ष - विपक्ष में) एवं एकल पक्ष अथवा विपक्ष में सभी सनातनी बंधु अपने अपने मत वीडियो के माध्यम से संलग्न संपर्क सूत्र पर व्हाट्सएप के माध्यम से अपना नाम,पता और संपर्क सूत्र लिखकर प्रेषित करें।
उत्कृष्ट दस लोगों को पूज्यपाद श्रीमज्जगद्गुरु जी द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।
संपर्क सूत्र:-7417417414,9670296702

11/02/2026

यु.५१२६ ।।श्रीहरि।। वि.सं.२०८२
आचार्यशंकर भारत उद्भासक मण्डल
सादर अभिवादन!
कुशलोपरांत कुशलाकांक्षी! मण्डल के सभी बंधुओं को सूचित किया जाता है कि मण्डल के द्वारा द्विज बालकों का उपनयन संस्कार(यज्ञोपवीत),चतुर्थ वर्ण के बंधुओं का कंठीमाला संस्कार एवं मातृशक्तियों के लिये सत्संकल्प- सार्थक प्रबोधन कार्यक्रम निम्नवत सूचनाओं के अनुसार आहूत किया जा रहा है।इच्छुक जन संपर्क करें...

तिथि:- फाल्गुन शुक्ल एकादशी
दिनांक:- २७ फरवरी
दिन:- शुक्रवार
स्थान:- श्रीनील कंठेश्वर महादेव - वैष्णव माता मंदिर,संत आश्रम, निकट छन्नी लाल चौराहा महानगर लखनऊ
आलोक:- समस्त कार्यक्रम पूज्य आचार्यश्री रामशंकर शुक्ल जी महाभाग शिष्य धर्म सम्राट स्वामीश्री करपात्री जी महाराज के आचार्यत्व में होगा।
निवेदक:-
अध्यक्ष द्वय महंत
कपिल शुक्ल सिद्धेश्वरानन्द गिरी
शिवाजी तिवारी
महासचिव
आशुतोष वाजपेयी
संरक्षक:-पूज्य आचार्यश्री रामशंकर शुक्ल जी,पूज्य महंत सिद्धेश्वरानन्द गिरी जी महाराज,पूज्य आचार्यश्री दीनदयाल मणि त्रिपाठी जी,प्रो अजय मिश्र जी,प्रो.राकेश द्विवेदी जी,श्रीमान पंकज झा जी
संपर्क सूत्र:-9648122191,9415251404,8318846476

25/01/2026

"शास्त्र सम्मत धर्म,समाज और मान्य आचार्यपीठों के प्रति षडयंत्र"
इस कलिकाल में वेदविरोधी सत्ता,व्यवस्था,विधान,प्रावधान,विचार सहित विचारकों का समूलनाश करने वाली दैदीप्यमान सतत संघर्षशील परम्परा का नाम ही शांकर परम्परा है।भगवान आदिशंकराचार्य ५०७ ईसा पूर्व केरल के कालटी ग्राम में वेदनिष्ठ नंबूदरी ब्राह्मणश्रेष्ठ शिवगुरु के यहाँ माता आर्यांबा के द्वारा प्रकट हुए थे।भगवान आदि शंकराचार्य के काल में सत्ता और समाज में नास्तिकता,भौतिकवाद और पाखण्ड के कारण अराजकता छाई हुई थी।भगवान आदि शंकराचार्य ने नास्तिकता,भौतिकवाद और पाखण्ड का पूर्णतः खंडन करके मान्य सनातन संप्रदायों का शोधन करके सत्य सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म के यथारूप को पुनर्स्थापित किया।संपूर्ण भारत को वैदिक सूत्र में बांधकर आध्यात्मिक और राजनैतिक दृष्टि से भी एक किया। युधिष्ठिर के वंशज महाराज सुधन्वा को भारत का सम्राट घोषित किया।सत्य सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म के सैद्धांतिक रक्षण तथा मठ मंदिरों की आर्ष परंपरा के संरक्षण के लिये चार दिशाओं में चार आचार्य पीठ की स्थापना की।भगवान आदिशंकराचार्य ये सब महत्तकार्य मात्र ३२ वर्ष की आयु में पूर्णकर ब्रह्मलीन हो गए।भगवान आदिशंकराचार्य के द्वारा स्थापित चार मान्य पीठों पर अधिष्ठित आचार्य भगवान आदिशंकराचार्य के अनुरूप पूज्य शंकराचार्य कहे गए।भगवान आदि शंकराचार्य के शिवसायुज्य प्राप्त करने के पश्चात अनुवर्ती आचार्यों ने भारत में सत्य सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म की सैद्धांतिक रक्षण के लिए सततरूप से कार्य किया।भारत वर्ष में जब राजतंत्र ही नास्तिकता की भेंट चढ़ने लगा तब इन्हीं मान्य आचार्यों ने धर्म और धार्मिक मान बिंदुओं के रक्षणार्थ नागा संन्यासियों की परंपरा का सृजन किया।मध्यकाल में पूज्य विद्यारण्य स्वामी ने हरिहर बुक्काराय की म्लेच्छ मत से घर वापसी कराकर पुनः सनातनी घोषित कर विजयनगर साम्राज्य की स्थापना कराई।समर्थ रामदास जब बद्रीविशाल में तपस्या करने गए तो तत्कालीन ज्योतिष पीठ के आचार्य ने उन्हें धर्म रक्षणार्थ अभियान चलाने के लिए प्रेरित किया,परिणाम स्वरूप समर्थगुरु रामदास जी ने शिवा जी को तैयार किया जब शिवा जी को आगरा में औरंगज़ेब ने कैद कर लिया तब अपने पूर्वाश्रम के भाई कवि कलश को भेजकर शिवाजी को बंधन मुक्त करने की योजना की,अनेक मठ मंदिरों और हिंदू राजाओं के रक्षणार्थ नागा संन्यासियों को युद्ध के लिए भेजा(देश की स्वतंत्रता के पश्चात १९५४ में षडयंत्र पूर्वक नेहरू द्वारा अखाड़ा परिषद बनाकर पूज्य शंकराचार्य के सैनिक नागाओं को उनसे अलग कर दिया गया),अंग्रेजों के शासन में अनेक विद्रोह किए,ब्रिटिश राजा को विष्णु न घोषित करने पर तत्कालीन पुरी शंकराचार्य को कारावास दिया गया।देश और धर्म के रक्षणार्थ शांकर परम्परा के अनेक आचार्य जेल गए।ये सब होते हुए हिंदू समाज में ब्राह्मण और ब्राह्मणों से अधिक संतों और संतों में भी आचार्यों के प्रति और उनमें भी पूज्य मान्य शंकराचार्यों के प्रति दृढ़ निष्ठा को देखते हुए; ईसाइयत को भारत में थोपने और ईसाई सत्ता को भारतीयों द्वारा स्वीकार करने में ईसाई शासन तंत्र को सर्वाधिक रोड़ा हिंदू समाज का ब्राह्मणों,संतों,आचार्यों पर दृढ़ निष्ठा ही लगी।इसलिए अंग्रेजों ने षड्यंत्र पूर्वक कृत्रिम धार्मिक मत और पंथ खड़ा करना प्रारंभ किया और उनके द्वारा हिंदू समाज में ब्राह्मणों, संतों और मान्य आचार्यों के प्रति वैमनस्यता उत्पन्न कराई जाने लगी। सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म के पारम्परिक ढांचे को विरूपित करके समाज के सम्मुख प्रस्तुत किया जाने लगा,जो कुछ हिंदू समाज के धर्मनिष्ठ बने रहने के लिए सुरक्षाकवच था उन पर आघात कराया जाने लगा।इस दिशा में सतीप्रथा,देवदासी प्रथा,शूद्रों के साथ शोषण की कहानियाँ मनमाने ढंग से गढ़ी जाने लगी।जबकि अंग्रेजों के आने के पूर्व इस भारत ने राणा प्रताप और शिवाजी जैसे हिंदू मान बिंदुओं पर अधिष्ठित शासन को देखा था किंतु उनको धत्त बुलाकर हिंदू मान बिंदुओं पर अधिष्ठित शासन को अत्याचारी, अन्यायी,शोषणकारी सिद्ध किया जाने लगा।भारत की शिक्षा प्रणाली अपने लक्ष्य और दृष्टि के अनुरूप गढ़ी गई,भारत में काले अंग्रेज तैयार किए गए।परिणामतः भारत में धर्मशास्त्रों पर विश्वास न करने वाले विधर्मी हिंदू खड़े होने लगे जिनकी परिणिति आगे चलकर ईसाई,मुस्लिम,कम्युनिस्ट अथवा नास्तिक और छद्म हिंदू हो जाने में हुई।इन अंग्रेजों के द्वारा भारत की प्रत्येक विधा और व्यवस्था में धर्मशास्त्र,देव,गौ,ब्राह्मण,संत द्रोही लोग स्थापित किए गए।धर्मजगत में अनेकानेक नवीन मत उभरकर आए, प्रशस्त राजतंत्र को विकृतकर म्लेच्छ मानसिकता पर राजनैतिक,सांस्कृतिक,सामाजिक संस्थाएं और तथाकथित धार्मिक दल तैयार किए गए।इन अंग्रेजों ने भारत के मनोविज्ञान के भी सुरक्षाकवच को भेदकर वहाँ नास्तिकता और म्लेच्छता का बीज बो दिया।भारत से जब अंग्रेज जाने लगे तो भारत की प्राचीन प्रशस्त राजनैतिक विधा को नाशकर भारत को उन्मादतंत्र रूपी भेड़तंत्र के अधीन कर दिया।इस भेड़तंत्र का संचालन अंग्रेजों के ही मानसिक गुलामों ने ही किया। स्वतंत्र भारत में अंग्रेजों के मानसिक गुलामों ने सत्ता तो पा ली किंतु उन्हें सार्वभौम विष्णु स्वरूप शासक मानने में भारत में वही समस्या दिखी जो अंग्रेजों को दिखी थी।अतः इन मानसिक गुलामों ने भी वेद,ब्राह्मण,संत और मान्य आचार्यों की गरिमा को नष्ट करने की ठान ली। स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर अब तक अनेक दलों ने शासन किया,अनेक तंत्र भारत में कार्य कर रहे हैं किंतु इनमें सभी राजनीतिक दल,सामाजिक दल और तथाकथित धार्मिक दलों के मूल में अंग्रेजों का वेद,देव,गौ,ब्राह्मण और आचार्य विरोधी वायरस ही है।वर्तमान समाजिक संस्थाएं और शासन तंत्र ने भारत के लगभग मान्य सम्प्रदायों को अपने अनुगत बना लिया है।वर्तमान में लगभग सभी मान्य सम्प्रदायों के आचार्य सत्ता के द्वारा सृजित और पोषित अधर्म का प्रशस्त विरोध नहीं कर रहे हैं और समय समय पर सत्ता की प्रशंसा भी करते रहते हैं किंतु इस समय भी शांकर परम्परा इस धारा के विपरीत धर्मशास्त्र,देव,गौ,ब्राह्मण और मान्य आचार्यों के साथ खड़ी है।वर्तमान म्लेच्छ और नास्तिकता से पोषित संस्था और तंत्र ने पहले तो शांकर पीठों को भी अपने अनुगत करने का पूरा प्रयास किया असफल होने पर उन्हें विकृतकर उन पर अपने अनुगत लोगों को स्थापित करने का भी प्रयास किया,इसमें भी असफल होने पर मान्य आचार्य पीठों को अप्रासंगिक सिद्ध करने के प्रयास में लग गई हैं।वर्तमान समय में अपनी कुल परम्परा,कुलाचार,गोत्र,शिखा,संस्कार और संस्कृति से भ्रष्ट धर्मशास्त्रों के परम्परागत ज्ञान से सर्वथा हीन और ईसाई शिक्षापद्धति में निर्मित मानस से युक्त छद्म हिन्दुओं का बहुतायत है।ये छद्महिंदू कलि पोषित और ग्रसित संस्था और पार्टी के चंगुल में फंसकर अपने ही जड़ पर कुल्हाड़ी चला रहे हैं।आज ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है कि जो शिखा,तिलक,स्नान, सूर्यार्घ्य, पितृ और देवोपासना,आहार,विहार,आचार,विचार और संस्कार(ये सब शास्त्रीय पद्धति अनुसार,कुछ म्लेच्छप्राय लोग भी शिखा रखाए और तिलक लगाए दिखते हैं किंतु शास्त्र प्रमाण नहीं मानते हैं) से विहीन है,ऐसे तथाकथित हिंदू उद्घोषणा कर रहे हैं कि हम इन्हें आचार्य नहीं मानते हैं,हम उन्हें आचार्य नहीं मानते हैं तो वास्तव में इन म्लेच्छप्राय प्राणियों के लिए धर्मशास्त्र युक्त आचार्य हैं भी नहीं अपितु इनके लिए कलिनेमाचार्य लोग अपनी दुकान खोले बैठे हैं,इनके वास्तविक आचार्य तो वहीं हैं,जो जिस भी अधर्म को लेकर उनकी शरण में जाए,उसे ही ये कलिनेमाचार्य जी लोग धर्म घोषित करने वाले हैं।किंतु ऐसे संक्रमणकाल में धर्मनिष्ठ सनातनी वैदिक आर्य हिंदू को सजग होने की आवश्यकता है,अपने मान्य आचार्यों को पहचानने और उनसे धर्मबोध प्राप्त कर अपने जीवन को धर्मयुक्त बनाने की आवश्यकता है।आज किसी भी पार्टी और संस्था का व्यामोह छोड़कर प्रामाणिक आचार्यों की शरण में जो पहुँच जायेगा,वही और उसके वंशज सनातनी बचे रह सकते हैं नहीं तो अन्यत्र पहले दिन से ही म्लेच्छता और नास्तिकता प्रविष्ट होने लगती है।
धर्म और धर्मनिष्ठ जनों की श्रीमाननारायण सर्वविध रक्षा करें।
..............रामबाबू पाण्डेय

प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर्व पर घटित इस सदी की सर्वाधिक लज्जा जनक वीभत्स घटना के विरोध में  आचार्यशंकर भारतोद्भासक म...
25/01/2026

प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर्व पर घटित इस सदी की सर्वाधिक लज्जा जनक वीभत्स घटना के विरोध में आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल द्वारा आयोजित पूज्य शंकराचार्य जी के घृणित गरिमा-हनन एवम् सनातन धर्म के मानबिन्दुओं पर दुर्दान्त आघात के विरुद्ध हुंकार-धिक्कार-प्रतिकार वार्ता संपन्न हुई।इस अवसर पर मंडल के संरक्षक पूज्य महंतश्री सिद्धेश्वरानन्द गिरी जी महाराज,मंडल महासचिव श्रीआशुतोष जी,श्री विशाल जी ,श्री निशांत जी,श्री सात्विक जी सहित अनेक शास्त्रनिष्ठ सनातनी धर्मावलंबी सम्मिलित हुए...

23/01/2026

आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल*
आवश्यक सूचना
श्रीमन्नारायण!
सभी धर्मशास्त्रनिष्ठ सनातनी हिंदुओं को सूचित किया जाता है कि इस सदी के सर्वाधिक वीभत्स कृत्यों में से एक प्रयागराज में माघ मेले के समय सत्ता के सनातन धर्म विरोध में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना जिसमें सनातन धर्म में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त पूज्य आचार्य के साथ दुर्व्यवहार,वैदिक बटुकों की शिखा पकड़कर घसीटते हुए उन्हें पीटना तथा पूज्य दंडी संन्यासियों को आतंकवादी की भांति घुटने के बल बैठाकर पुलिस के द्वारा गाली दिया जाना तथा पूज्य दंडी संन्यासियों को मारा जाना सम्मिलित है।प्रत्येक सनातनी के लिए इससे लज्जाजनक और कुछ नहीं हो सकता है अतः इसके विरोध में आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल द्वारा कल निम्नवत सूचनाओं के अनुसार विरोध प्रदर्शन किया जायेगा।जिसमें प्रत्येक धर्मशास्त्रनिष्ठ सनातनी हिंदू सादर आमंत्रित है -
तिथि:- माघ शुक्ल षष्ठी
दिनांक:- २४/०१/२०२६
दिन:- शनिवार
समय:- सायंकाल ०७:०० बजे
स्थान:- श्रीनीलकंठेश्वर महादेव वैष्णव माता मंदिर,संत आश्रम,निकट छन्नी लाल चौराहा,महानगर
निवेदक:-
धर्मशास्त्र निष्ठ सनातनी हिंदू

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Lucknow
226010

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