23/08/2026
मीडिया नैरेटिव बनाम सनातनी एकजुटता: आसाराम बापू पर धीरेंद्र शास्त्री के बयान और शीर्ष संतों के प्रामाणिक तर्कों की खोजी रिपोर्ट
विशेष खोजी रिपोर्टटेलीविजन चैनल TV9 Bharatvarsh के एक इंटरव्यू में बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जब आसाराम बापू को 'सच्चा संत' मानने से इनकार किया, तो सनातन धर्म के भीतर एक गंभीर वैचारिक और खोजी बहस छिड़ गई। धीरेंद्र शास्त्री ने अदालती फैसलों और मुख्यधारा के मीडिया नैरेटिव का समर्थन किया। लेकिन, इस विषय की गहराई में जाने पर पता चलता है कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित और आदरणीय संतों का दृष्टिकोण धीरेंद्र शास्त्री के इस सतही और मीडिया-प्रेरित बयान से पूरी तरह अलग है।
आइए देखते हैं कि देश के शीर्ष संतों ने इस विषय पर ऑन-रिकॉर्ड क्या तथ्य और विचार सामने रखे हैं:
1. शीर्ष संतों के प्रामाणिक बयान: जो धीरेंद्र शास्त्री के दावे को खारिज करते हैं
परम पूज्य प्रेमानंद जी महाराज (वृंदावन): जब एक भक्त ने वृंदावन के परम पूज्य संत प्रेमानंद जी महाराज से कहा कि आसाराम बापू के जेल जाने से उनकी श्रद्धा टूट गई है, तो महाराज जी ने उसे डांटते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा: "यह मत देखो कि वह जेल में हैं। भगवान कृष्ण का जन्म भी तो जेल में ही हुआ था। आसाराम बापू ही हमारे राम हैं, हमारे ठाकुर हैं। वह चाहे बाहर खेलें या भीतर खेलें, हमारे लिए वह भगवान के स्वरूप हैं। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।"
अनिरुद्धाचार्य जी महाराज: प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने खुलकर इस पूरे मामले को ईसाई मिशनरियों का एक गहरा अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र बताया। उन्होंने ऑन-रिकॉर्ड कहा: "जब आसाराम जी को जेल में डाला गया, तब आज की तरह सबके हाथ में सोशल मीडिया या मोबाइल नहीं था। आसाराम बापू ने लाखों ईसाइयों की सनातन धर्म में घर वापसी कराई थी। इसी कारण मिशनरियों के इशारे पर झूठे आरोपों के तहत उन्हें साजिश में फंसाया गया। मीडिया कई बार झूठ परोसती है, हमें उस नैरेटिव से बचना चाहिए।"
राम जन्मभूमि ट्रस्ट के वरिष्ठ संत कमल नयन दास जी महाराज: अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज के उत्तराधिकारी और प्रखर संत कमल नयन दास जी महाराज ने आसाराम बापू के पक्ष में अपनी आवाज मुखर करते हुए कहा है कि बापूजी को एक गहरी और सुनियोजित साजिश के तहत कानूनी पचड़ों में घसीटा गया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बापूजी पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत और सनातन धर्म की रीढ़ को तोड़ने के लिए विदेशी शक्तियों और उनके एजेंटों द्वारा प्रायोजित हैं। बापूजी का समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण में योगदान अतुलनीय है, जिसे ऐसी साजिशों से धुंधला नहीं किया जा सकता।
भागवत भास्कर श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री (पूज्य ठाकुरजी): भागवत मर्मज्ञ और आदरणीय श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री जी ठाकुरजी ने आसाराम बापू के पक्ष में और मीडिया ट्रायल के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज बुलंद की है। ठाकुरजी ने ऑन-रिकॉर्ड स्पष्ट शब्दों में कहा है: "जो हिंदू लोग बिना पूरा सच जाने संत-महात्माओं पर उंगली उठाते हैं, वे सनातन की शक्ति को कमजोर कर रहे हैं। संत आसाराम जी महाराज के महान परोपकारों, उनके अनगिनत सेवा कार्यों और उनके शिष्यों द्वारा किए जा रहे समाज कल्याण को मैंने बहुत नजदीक से देखा है।" उन्होंने समाज को चेतावनी दी कि बिना साक्ष्यों के केवल बिकाऊ मीडिया चैनलों की झूठी कहानियों के आधार पर एक ब्रह्मज्ञानी संत के जीवनभर के तप को गलत मान लेना पूरी तरह अनुचित है।
आचार्य श्री कौशिक जी महाराज: सनातन धर्म के प्रखर वक्ता और पूज्य कौशिक जी महाराज ने कई मंचों पर संतों के खिलाफ होने वाले सुनियोजित चरित्र-हनन के उद्योगों पर गहरी चिंता जताई है। बापूजी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त करते हुए कौशिक जी महाराज ने ऑन-रिकॉर्ड कहा: "बापूजी कोई साधारण आदमी या इंसान नहीं हैं, सच मानिए वे एक दिव्य चेतना हैं। आज जेल में होते हुए भी वे करोड़ों-करोड़ों लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं। मुझे तो बापूजी के शिष्यों और भक्तों के भीतर भी महापुरुषों की छवि नजर आती है।" उन्होंने बापूजी की जमानत और उनके साथ हुई कानूनी नाइंसाफी पर भी media के झूठ को खुलकर बेनकाब किया है।
देवकीनंदन ठाकुर जी: कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर जी ने झारखंड के एक मंच से तीखा प्रहार करते हुए कहा: "आजाद भारत में हिंदू साधु-संतों को जितना प्रताड़ित होना पड़ा है, उतना तो अंग्रेजी हुकूमत में भी नहीं हुआ था। आसाराम बापू जैसे धर्मगुरुओं को जेल भेज दिया गया, क्योंकि वे सनातनी हैं। अगर कानून में हिम्मत है, तो दूसरे धर्म के गुरुओं पर हाथ डालकर दिखाए।"
विजय कौशल जी महाराज: रामकथा के मर्मज्ञ विजय कौशल जी महाराज ने भी आसाराम बापू के योगदान को याद करते हुए कहा: "भगवान कृष्ण ने गीता कही थी, लेकिन गीता के संदेश को सच्चे मायने में जन-जन तक पहुंचाने का काम आसाराम बापू जी ने किया है। देश का हर निराश व्यक्ति उनके विचारों से प्रभावित है, वे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं।"
2. खोजी विश्लेषण: क्या धीरेंद्र शास्त्री अनजाने में बने एंटी-सनातनी एजेंडे का मोहरा?
इस खोजी रिपोर्ट का सबसे बड़ा सवाल यही है—जो धीरेंद्र शास्त्री खुद media के पक्षपाती रवैये और वामपंथी बुद्धिजीवियों के निशाने पर रह चुके हैं, वे अचानक media के सामने न्यायाधीश कैसे बन गए?
जब नागपुर विवाद के दौरान धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने के आरोप लगे थे, तब इसी टीआरपी-संचालित media ने उनके खिलाफ चौबीसों घंटे अभियान चलाया था।
आलोचकों का तर्क है कि टीवी एंकरों के उकसाने वाले और जाल में फंसाने वाले सवालों का शिकार होकर धीरेंद्र शास्त्री ने संतों की मर्यादा को भुला दिया। उन्होंने उन जमीनी वास्तविकताओं को नजरअंदाज कर दिया, जिन्हें देश के बड़े-बड़े बुजुर्ग संत खुलेआम स्वीकार कर रहे हैं।
3. सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान: जिसे खारिज करना असंभव है
खोजी पत्रकारों और समाजशास्त्रियों के अनुसार, आसाराम बापू ने भारत के सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूत करने के लिए जो अभूतपूर्व कार्य किए, उन्हें कोई भी सच्चा सनातनी नजरअंदाज नहीं कर सकता:
मातृ-पितृ पूजन दिवस की क्रांति: पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण (जैसे वेलेंटाइन डे) से युवाओं को बचाने के लिए बापूजी ने 14 फरवरी को 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' के रूप में मनाने की शुरुआत की। आज यह अभियान करोड़ों घरों और सरकारी स्कूलों तक पहुंच चुका है।
व्यसनमुक्ति और जेल सुधार: देश भर की जेलों में कैदियों के सुधार के लिए उन्होंने 'दिव्य प्रेरणा शिविर' आयोजित करवाए। उनकी भजन मंडलियों ने करोड़ों लोगों को शराब, जुए और मांस जैसी कुरीतियों से मुक्त कराकर सात्विक जीवन की ओर मोड़ा।
महिला उत्थान और सशक्तिकरण: 'महिला उत्थान मंडल' के माध्यम से लाखों ग्रामीण और वंचित महिलाओं को आत्मरक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार के गुर सिखाए गए।
4. कानूनी विसंगतियां और मिशनरी षड्यंत्र का गहरा कोण
आसाराम बापू के समर्थकों और देश के कई प्रख्यात विधि विशेषज्ञों (जैसे डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी) द्वारा समय-समय पर उठाए गए कानूनी तथ्य और विसंगतियां इस प्रकार हैं:
POCSO कानून का दुरुपयोग और आयु विवाद: मामले के खोजी दस्तावेजों के अनुसार, कथित घटना के समय पीड़िता के बालिग होने के कई विरोधाभासी शैक्षणिक दस्तावेज और मेडिकल रिपोर्ट अदालत में पेश की गई थीं। आलोचकों का दावा है कि मामले को गैर-जमानती बनाने और बिना किसी ठोस गवाह के केवल बयानों के आधार पर सजा सुनिश्चित करने के लिए जानबूझकर पॉक्सो एक्ट की सख्त धाराओं का सहारा लिया गया।
धर्मांतरण पर रोक का बदला: गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे व्यापक धर्मांतरण के खेल को आसाराम बापू के 'आश्रमों' और 'बाल संस्कार केंद्रों' ने पूरी तरह ठप कर दिया था। मिशनरियों द्वारा धर्म परिवर्तन कराए गए हजारों वनवासियों की वापस सनातन धर्म में घर वापसी कराई गई। समर्थकों का आरोप है कि इसी वित्तीय और सांस्कृतिक नुकसान के कारण विदेशी फंडिंग से संचालित एनजीओ ने मिलकर यह कानूनी जाल बुना।
मानवाधिकार और स्वास्थ्य की अनदेखी: 85 वर्ष से अधिक की आयु और कई गंभीर बीमारियों (जैसे हृदय रोग और आंतरिक रक्तस्राव) से पीड़ित होने के बावजूद उन्हें लगातार मेडिकल बेल (चिकित्सीय जमानत) तक से वंचित रखा गया है, जिसे समर्थक एक सोची-समझी क्रूरता का हिस्सा मानते हैं।
निष्कर्ष: विचारणीय प्रश्न
एक तरफ जहां वृंदावन के सिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज, अनिरुद्धाचार्य जी, कमल नयन दास जी महाराज, श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री जी ठाकुरजी, कौशिक जी महाराज और देवकीनंदन ठाकुर जी जैसे बड़े नाम media के फैलाए नैरेटिव को चीरकर संतों की एकजुटता और बड़ी साजिशों को बेनकाब कर रहे हैं; वहीं दूसरी तरफ धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का टीवी स्टूडियो में बैठकर अपने ही वरिष्ठ संतों को खारिज करना हिंदू समाज में विभाजन पैदा करता है।
बागेश्वर सरकार को यह आत्मचिंतन करना होगा कि टीवी चैनलों की अदालतें कभी सनातन की सगी नहीं हो सकतीं। जब तक हिंदू समाज अपने ही संतों के खिलाफ media ट्रायल को सच मानता रहेगा, तब तक बाहरी ताकतें सनातन धर्म के स्तंभों को एक-एक कर गिराती रहेंगी।