हिन्दू राष्ट्र मिशन

हिन्दू राष्ट्र मिशन "एक कदम हिन्दू राष्ट्र के लिए"
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13/08/2024

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कृष्ण के जीवन के उपाख्यानों और आख्यानों को आम तौर पर कृष्ण लीला कहा जाता है ।

छह बार राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर हिंदू महासभा की बागडोर संभालने वाले  वीर विनायक दामोदर सावरकर जैसे राष्ट्रपुत्र, वास्तवि...
23/03/2024

छह बार राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर हिंदू महासभा की बागडोर संभालने वाले वीर विनायक दामोदर सावरकर जैसे राष्ट्रपुत्र, वास्तविक रूप से राष्ट्रपिता की उपाधि धारण करने हेतु सर्वाधिक उपयुक्त व्यक्ति के बारे में लिखना अपने आप में बेहद दुरुह कार्य है, सावरकर का व्यक्तित्व और कृतित्व को चंद शब्दों में समेटना बेहद मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी है, विभिन्न आयामों जैसे एक पत्रकार एक नाटककार, एक इतिहासकार, एक अधिवक्ता, बैरिस्टर, कहानीकार, राजनीतिज्ञ, और एक भविष्य दृष्टा और भी न जाने कितने आयाम? फिल्म अभिनेता रणदीप हुड्डा जी ने सावरकर के ऊपर एक फिल्म का निर्माण किया है? और बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से हिंदू हिंदुत्व और सावरकर विरोधियों ने इस फिल्म को फ्लॉप करने के लिए एक अभियान चला रखा है मैं उन सभी वास्तविक हिंदुओं, हिंदुत्व के प्रति अपना लगाव रखने वाले सावरकर वादियों से यह निवेदन करूंगा कि सावरकर के ऊपर बनी इस मूवी को सफल करने में अपना महिती योगदान प्रदान करें जहां भी जैसे भी मौका मिले इस फिल्म को देखने सिनेमा हॉल में अवश्य जाएं आपकी इस छोटे से प्रयास से वामपंथियों हिंदुत्व विरोधियों को निश्चित रूप से मुंहतोड़ जवाब मिलेगा ऐसा मेरा विश्वास है जय श्री राम वंदे मातरम हर हर महादेव आपका ही
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रजिस्टर्ड से जो सरकार बनती है वह पार्टी की , पार्टी के लिए और पार्टी का नकली लोकतंत्र लाती है ।आजाद निर्दलीयउम्मीदवारों ...
29/09/2023

रजिस्टर्ड से जो सरकार बनती है वह पार्टी की , पार्टी के लिए और पार्टी का नकली लोकतंत्र लाती है ।आजाद निर्दलीयउम्मीदवारों के जीतने के बाद जो सरकार बनती है वह दलविहीन लोकतंत्र की स्थापना कर जनता की अपनी असली सरकार होती है ।यहाँ जनता मालिकत्व का अनुभव करती है, वहाँ पार्टियों द्वारा दी गयी गुलामी का 1947 से आज तक राजनैतिक पार्टियों का राज रहा।क्या आप इन राजनैतिक पार्टियों के राज से संतुष्ट हैं?
ऐसा नहीं है कि और कोई अच्छी पार्टी आ जाएगी वह अच्छा कर देगी।असम्भव!!
जो भी राजनैतिक पार्टी राज करेगी वह अस ली व सच्चा लोकतंत्र ला ही नहीं सकती ।
वह पार्टी तंत्र तक ही सीमित रहेगी ।पार्टी तंत्र को छोड़ यदि वह असली लोकतन्त्र की तरफ जाएगी तो स्वतः अपना आत्मघात कर लेगी।
यह राजनैतिक पार्टियों का सिस्टम अंधेरे जैसा है, अस ली व सच्चा लोकतंत्र प्रकाश के जैसा है ।अंधेरा कभी प्रकाश को नहीं अपना सकता ।
राजनैतिक पार्टियों से मोहभंग आवश्यक है ।
इतनी राजनैतिक पार्टियों के भ्रष्टाचार की कहानियां देखकर भी जो लोग राजनैतिक पार्टियों की सरकारों से आशा लगाते हैं वे देख कर मक्खी निगल रहे हैं ।
इतना उपद्रव है राजनैतिक पार्टियों का , क्या मन नहीं भरा ?
बहुत अच्छे लोग आए राजनीति में, परन्तु राजनैतिक पार्टियों के चंगुल में फंसकर फिसड्डी साबित हुए ।उदाहरण के लिए आज की सभी राजनैतिक पार्टियों में झांककर देख लीजिए ।
यदि एक भी पार्टी शुद्ध निकल जाए तो मैं राजनैतिक पार्टियां बीमारी हैं- कहना छोड़ दूंगा ।
ऐसी गलतफहमी में मत रहिए कि कोई आदमी ऐसी भी पार्टी बना सकता है जो सौ प्रतिशत सच्चाई और ईमानदारी पर चले ।
इन सारी राजनैतिक पार्टियों के अनुभव से सीखकर इनकी माया में न पड़कर दलविहीन लोकतंत्र के लिए आजाद उम्मीदवारों को चुनाव में जिताकर असली जनता की सरकार बना कर भारत में असली व सच्चे लोकतंत्र की स्थापना करें!!
जयहिन्द, जय भारत !!👍👍👍👍
मेरी बातों को कोई अन्यथा ना लेगा जिन पार्टियों के लिए दिन रात यहां तक पूरी जिंदगी और जवान लोग खफा देते हैं पता चलता है की परियां उनको बाहर का रास्ता दिखा देती हैं
मैं नहीं कहता सबके विचार ऐसे ही हों बहुत लोगों की विचारधारा मुझे नहीं मिलती होगी मैं उनसे पहले ही क्षमा प्रार्थी हूं
आप खुद ताकतवर बनिए अपनों को ताकतवर बनाया और देश के आम जानकी सरकार बनाने में हर संभव अपना योगदान करें जय हिंद जय भारत जय हिंद राष्ट्र
अपना बस एक ही सपना
इस्लाम मुक्त हो भारत अपना
हर हिंदू की बने सरकार
जाति-पाति का मीटे विकार

19/09/2023
हमारे जितने मित्रो ने हमारे इस यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब किया है उनको हृदय से धन्यवादhttps://youtube.com/सनातनी परिवार ...
02/03/2023

हमारे जितने मित्रो ने हमारे इस यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब किया है उनको हृदय से धन्यवाद

https://youtube.com/

सनातनी परिवार के जिन लोगों ने अभी तक सब्सक्राइब नहीं किया है उनसे विनम्र निवेदन सब्सक्राइब कर ले कोई चंदा नहीं मांग रहा हूं भाई कि कि आप को कष्ट हो
और अगर आप उचित समझें तो इसे और लोगों को सब्सक्राइब करने हेतु भेजने की कृपा करें

28/02/2023

शराब के साथ पानी भी जरूरी है। क्यों Arvind Kejriwal जी सही कहा न हमने ?
तो शराब घोटाले के साथ पानी का घोटाला क्यों ना हो ?

दिल्ली जल बोर्ड के डायरेक्टर नरेश सिंह भी 20 करोड़ घोटाले में गिरफ्तार
राजेश मणि त्रिपाठी समर्थक
Rajesh Mani Tripathi
हिन्दू राष्ट्र मिशन
Hindu rajesh mani tripathi

भारतीय संसदऔर विधायिकाओ की मूलचरित्रपरंपराकहां खो गई?वैसे भी हमारी संसदीय परंपरा को काफी हद तक राजनैतिक लोगों के संरक्षण...
24/02/2023

भारतीय संसदऔर
विधायिकाओ की मूलचरित्र
परंपराकहां खो गई?
वैसे भी हमारी संसदीय परंपरा को काफी हद तक राजनैतिक लोगों के संरक्षण को ध्यान में रखकर बनाया गया था उसके बाद भी संसदीय परंपरा का अपने हितों के प्रयोग के लिए लगातार हनन हो रहा है।बिलों पर बहस नहीं
आज बहस की संसदीय परंपरा तकरीबन समाप्त हो गई। जबकि दुनिया के किसी भी नागरिक से पूछा जाय तो उनका एक ही उत्तर होगा विधान पर बहस संसदीय लोकतंत्र की घोषित परम्परा है।
अब जन तंत्र के मंदिर महज डाकघर बनकर रह गई है?

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र देश के रूप में अपने को कहते हुए हमें गर्व होता है परंतु लोकतंत्र की परंपरा को हमने कितना जीवंत रखा है यह विचारणीय है । कुछ उदाहरण -
2013 में अमेरिका में सीनेटर टेड क्रूज को ओबामा केयर पर बोलने के लिए संसद में 21 घंटे और 19 मिनट मिले। जब संसदीय कार्यवाही में इस तरह की बहस के लिए अलग से समय दिया जाता है, तो आम सहमति बनाते हुए कानून की गुणवत्ता में सुधार का रास्ता साफ होता है। इस बीच, भारत में कृषि कानून निरसन विधेयक-2021 महज आठ मिनट (लोकसभा में तीन मिनट, राज्यसभा में पांच मिनट) में पारित हुआ। इस तरह सांसदों की संख्या कर्मचारियों की गिनती तक सीमित होकर रह गई। संविधान बनाने के लिए भारत की संविधानसभा की बहस दिसंबर 1946 को शुरू होकर 166 दिन तक चली, जो जनवरी 1950 में समाप्त हुई।

भारतीय संसद के 2021 के मानसून सत्र में लोकसभा ने 18 से ज्यादा विधेयकों को औसतन 34 मिनट की चर्चा के साथ मंजूरी दे दी। पीआरएस इंडिया के आंकड़े बताते हैं कि अनिवार्य रक्षा सेवा विधेयक (2021) को लोकसभा में सिर्फ 12 मिनट की बहस के बाद मंजूरी मिल गई, जबकि दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक ( 2021) पर महज पांच मिनट बहस हुई। एक भी विधेयक को संसदीय समिति के पास नहीं भेजा गया। सभी विधेयक ध्वनिमत से पास हुए। संसद की कार्य उत्पादकता का आलम यह है कि वह इस साल के हालिया सत्र में 129 फीसद आंकी गई लेकिन क्या
संसद में विधेयक पास तो हो रहे हैं, लेकिन बिना बहस और चर्चा के

वेस्टमिंस्टर में, ब्रिटिश प्रधानमंत्री को हर बुधवार हाउस ऑफ कॉमंस में सांसदों के सवालों के जवाब देने होते हैं। यह पटल पर रखे और दूसरे सवालों के अनुपूरक प्रश्नों का मिश्रण होता है। प्रधानमंत्री को नहीं पता होता कि कौन से सवाल पूछे जाएंगे। इसका इतना महत्व है कि कोविड-19 के दौरान भी प्रधानमंत्री को वर्चुअली सांसदों के सवालों के जवाब देने पड़े, जबकि इस अवधि में भारत में प्रश्नकाल को ही समाप्त कर दिया गया।

जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक और साधन संसदीय समितियां हैं। अमेरिका में संसदीय समितियां कानूनों की जांच करती हैं, सरकारी नियुक्तियों की पुष्टि करती हैं, तफ्तीश करती हैं और सुनवाई करती हैं। 2013 में यूके में हाउस ऑफ कॉमंस ने एक सार्वजनिक सुनवाई तंत्र चलाया। इसके तहत जनता एक वेब पोर्टल के माध्यम से मसौदा कानून पर टिप्पणियां कर सकती थी। इस प्रक्रिया में 1,400 से अधिक टिप्पणियों के साथ करीब एक हजार लोगों ने भाग लिया। इसके उलट सामान्य तौर पर अपने देश में लंबी अवधि की विकास योजनाएं संसदीय जांच के अधीन नहीं हैं और इन्हें सालाना खर्च की घोषणा के तहत मंजूरी मिल जाती है। हालांकि इस तरह की समितियों को जब भी हस्तक्षेप का मौका मिला है, बेहतर नतीजे सामने आए हैं। मसलन, संयुक्त संसदीय समिति ने अक्टूबर 2013 में टेलिकॉम लाइसेंस और इनके आवंटन पर तथा दिसंबर 1993 में प्रतिभूतियों और बैकिंग लेनदेन में अनियमितताओं पर विचार किया और इसका प्रभावशाली नतीजा सामने आया।

संसदीय लोकतंत्र की एक बड़ी खासियत सांसदों को स्वायत्त पहल की इजाजत देना भी है। यह पहल कई बार प्राइवेट मेंबर बिल के तौर पर भी होती है। 2019 के बाद से यूके में सात निजी सदस्य विधेयक पास हुए हैं। यह संख्या कनाडा में छह रही। बात करें भारत की तो 1952 से दोनों सदनों द्वारा केवल 14 निजी सदस्य विधेयक पारित किए गए हैं। दिलचस्प है कि इनमें भी छह विधेयक तब पास हुए जब पंडित नेहरू सत्ता में थे। 1956 में फिरोज गांधी ने संसदीय कार्यवाही के तहत प्रेस की आजादी को सुरक्षित करने के लिए प्राइवेट मेंबर बेल पेश किया था। आगे चलकर इस बिल ने संसदीय कार्यवाही (संरक्षण और प्रकाशन) कानून (1956) की शक्ल ली।

संसद से परे, भारत में ज्यादातर सांसदों के लिए उनके निर्वाचन क्षेत्रों में परिवर्तन लाने की क्षमता सीमित है। एमपीएलएडी पर विचार करें, जो सांसदों को स्थानीय जिला प्राधिकरण को चुनिंदा विकास पहलों की सिफारिश करने में सक्षम बनाती है और जिसकी अधिकतम सीमा पांच करोड़ रुपये है। इसकी तथ्यात्मक सचाई इस पूरी व्यवस्था और उसकी मंशा पर सवाल खड़े करती है। देश में 6,38,000 गांवों की संख्या से हिसाब लगाएं तो हर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के हिस्से तकरीबन हजार गांव आएंगे। एक अध्ययन के मुताबिक इस तरह खर्च और उसकी उत्पादकता का आलम यह होगा कि बमुश्किल तीन मीटर कंक्रीट सड़क का निर्माण प्रत्येक गांव-कस्बे के हिस्से आएगा। खास बात यह कि पिछले डेढ़ साल से सांसदों को क्षेत्रीय विकास के लिए यह पैसा भी नहीं मिल रहा। इसके बदले 6,320 करोड़ रुपये की सरकारी बचत का ढोल पीटा जा रहा है।

व्हिप की मजबूरी
यही नहीं, हमारे पास सांसदों की बहस को दबाने और उनकी पहल को हतोत्साहित करने वाला संस्थागत तंत्र है। दल-बदलविरोधी कानून किसी भी ऐसे सांसद या विधायक को दंडित करता है जो एक पार्टी को दूसरी पार्टी के लिए छोड़ देता है। सांसद केवल व्हिप द्वारा हाइलाइट किए गए बटन को दबाने के लिए मजबूर हैं। भारत की 543 लोकसभा सीटों में से 250 पर ऐसे राजनेताओं का कब्जा है जो किसान होने का दावा करते हैं। कृषि कानूनों पर आवाज उठाने का हक इनमें से कितने सांसदों को हासिल हुआ? क्या यह दुर्भाग्यपूर्ण नहीं कि लोकतंत्र के मंदिर में एक सांसद के लिए आत्मविवेक के आधार पर अपनी बात कहना और मतदान करना असंभव हो गया है? हमारी संसद नए भारत की बदलती आकांक्षाओं और बेचैनियों को प्रतिबिंबित करे यह दरकार अगर खारिज हुई तो यह संसदीय लोकतंत्र के लिए तो अच्छा नहीं ही होगा, यह नौबत भी आ सकती है कि विधायिका सीधे-सीधे कार्यपालिका की मोहताजी में काम करने लगे। इस तरह के खतरे के प्रति सचेत होना संसदीय लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह होना है
*राजेश मणि त्रिपाठी* पक्षकार श्री कृष्ण जन्म भूमि
्री_कृष्णा_हर_हर_महादेव

Rajesh Mani Tripathi

21/02/2023

जिसके संस्कार इतने घटिया होकि खुदकी बेटी भी साथ छोड़ दे वह समाज को हिंदू धर्म के महान ग्रंथ रामायण पर शिछा दे रहा है...

गौ हत्या करने वाले राक्षसों का वध करना हर हिंदू का नैतिक कर्तव्य है और यह हमारा धार्मिक और आस्था का प्रश्न है इस पर प्रश...
20/02/2023

गौ हत्या करने वाले राक्षसों का वध करना हर हिंदू का नैतिक कर्तव्य है और यह हमारा धार्मिक और आस्था का प्रश्न है इस पर प्रश्न उठाने वाले तुम-कौन
अगर तुमको प्रश्न उठाना है तो गौ हत्या और गौ हत्यारों पर उठाओ
कि लोग ऐसा पाप कर्म करे हि ना
Rajesh Mani Tripathi
Hindu rajesh mani tripathi

16/02/2023

#होश_उड़ाने_वाली -
ये युवा लड़कियां श्रीमद भगवद गीता के 700 संस्कृत श्लोकों के साथ अंताक्षरी खेल रही हैं और उनकी गति और सहजता अद्भुत है।
गीताप्रेस गोरखपुर 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Hindu rajesh mani tripathi
Rajesh Mani Tripathi
Rajesh Mani Tripathi
राजेश मणि त्रिपाठी समर्थक

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