Himalayan Divine Meditation

Himalayan Divine Meditation I'm a Yogi. A Himalayan Rishi. My Aim is to purify the mind through meditation. Om Namah Shivaya. Page Being managed by the Disciples of Himalayan Rishi.

05/06/2022

*केवल आज शाम ५ बजे तक*

*हिमालयन डिवाइन गहन ध्यान शिविर*

तारीक - *05 जून से 16 जून 2022*

समय-
*मध्यरात्रि 10.00 बजे से 11.30 बजे*

संपर्क ~ 9811755301

हर सेशन में साधक अपनी जिज्ञासा, प्रश्न कर सकता है, इसके सभी साधको को समय दिया जाएगा।

*शिविर की दक्षिणा- सेवा 3100/-*

*-जो साधक सेवा करने में असमर्थ है या फिर किसी कारणवश सेवा कम देना चाहता है, उन सभी के लिए द्वार सदैव ही खुले हैं। वह अपनी पूरी ईमानदारी के साथ ऑर्गेनाइजर अमित कुमार जी से 9811755301 पर या सीधा योगी महाराज जी से निसंकोच अपनी बात कह सकता है। किसी भी प्यासी आत्मा को किसी भी कारण से अलग नहीं किया जाएगा, सभी का हृदय से स्वागत होगा।-*

संपर्क ~ 9811755301

सेवा- दक्षिणा भेंट करने के लिए बैंक डिटेल-

Swami Shivnarayan Puri
PNB A/C NO.-
2779000100025209
IFSC CODE-
PUNB0442500

UPI- G/PAY, P/PAY, PAYTM-- 6230606526 ( CANARA BANK)

अपनी सेवा का स्क्रीनशाट हमें और ऑर्गेनाइजर को अवश्य भेजेगे ताकि आपकी रजिस्ट्रेशन कन्फर्म हो सके।

(योगी महाराज गुरुदेव श्री के तरफ से)(शाम live Facebook परपर जुड़े)ॐ नमः शिवाय प्रिय आत्मन मित्रो...!!!___ चरित्र से ही च...
02/06/2022

(योगी महाराज गुरुदेव श्री के तरफ से)
(शाम live Facebook पर
पर जुड़े)

ॐ नमः शिवाय
प्रिय आत्मन मित्रो...!!!
___ चरित्र से ही चित्र का निर्माण होता है।
अगर चित्र से चरित्र का निर्माण करना चाहोगे तो असत्य हो जाएगा।
---- भले ही तुमने श्रीराम का चित्र नहीं देखा, पर अगर तुम श्रीराम के चरित्र को जानते हो तो चित्र बना सकते है, चित्र बनेगा उनके त्याग, मर्यादा, आज्ञा, संयम के रंगों से।
अगर तुम्हें श्रीकृष्ण के चित्र को बनाना पड़े तो बना लोगे, तुम जानते हो श्रीकृष्ण प्रेम के अवतार हैं, धर्म की रक्षा के लिए हर प्रकार के नियम तोड़ने को तैयार हैं।
भगवान बुद्ध का चित्र बनेगा तो उसमें तपस्या झलकेगी।

प्यारे साधको! अपने बच्चों में संस्कार सींचो, दिव्य चरित्र सींचो ताकि उनके चित्र का निर्माण कोई भी कर सके।

उसी दिशा में हमारा एक कदम-
गुरुओं की कृपा और उनके आशीर्वाद से
हिमालयन डिवाइन मेडिटेशन-
करनी कथनी, प्रेक्टिकल जीवन...
जो जाना, जितना जाना, उतना अनुभव बांट देना है-

02/06/2022

ये शरीर तो प्रकृति के नियमों से बंधा है, इसका जन्म भी है और इसकी मृत्यु भी। जो स्थाई नहीं है, उसका क्या कहना।

कुछ समय पहले मेरा शरीर बीमार हुआ था, पर मैं कभी ही बीमार नहीं हो सकता--

मैं तो उस परमात्मा का अंश आत्मा हूँ।

प्रभु कृपा से मेरा ये शरीर काफी ठीक हो गया है। स्वस्थ हूँ!

पर कभी कभी जानबूझकर भी बीमार हो जाना चाहिए, ताकि ये एहसास होता रहे कि यहां पर आपका अपना केवल परमात्मा है दूसरा कोई नहीं...
Himalayan Divine Meditation
Himalayan Rishi_

ॐ नमः शिवाय प्रिय आत्मन मित्रो...!!!मैं तुम्हे गुरुडम के भर्मजाल से मुक्त करना चाहता हूँ...____ कभी विचार करना____"गुरु"...
01/06/2022

ॐ नमः शिवाय
प्रिय आत्मन मित्रो...!!!
मैं तुम्हे गुरुडम के भर्मजाल से मुक्त करना चाहता हूँ...
____ कभी विचार करना____
"गुरु" अपने चेले की जरूर परीक्षा लेगा और चेला भी जरूर परीक्षा देगा। कारण?-
-क्योंकि दोनों ही संसारी हैं, व्यपारी हैं, व्यपार में नफा नुकसान देखा ही जाता है। "गुरु क्या देगा- केवल भौतिक संसार। और चेले को वही ही चाहिए।

दूसरी ओर सद्गुरु है और शिष्य है।
सद्गुरु तो स्वयं एक शिष्य होता है, शिष्य, शिष्य की परीक्षा कैसे ले सकता है। सद्गुरु भी अनन्त की यात्रा पर है।
सद्गुरु एक निष्पक्ष इंसान है, साक्षात भगवान है। एक बहती हुई गंगा है।
कभी गंगा ने पूछा है कि तुम पशु हो या पक्षी या फिर इंसान। गंगा अपनी यात्रा पर है, उसके पास समय ही नहीं है रुककर किसी की योग्यता को परखने का। कोई भी आए उसका अमृत रस पान कर जाए।
सद्गुरु और शिष्य दोनों ही एक निस्वार्थ रिश्ते में जुड़े हैं सद्गुरु ने कोई प्रलोभन नहीं दिया, कि आओ तुम्हे आत्मज्ञान दूंगा, भीतर की ज्योति दूंगा। इधर शिष्य की भी कोई अपेक्षा ही नहीं। बस अकारण समर्पण है, सेवा है। अगर बदले में कुछ भी चाहिए तो किसी व्यपारी गुरु के पास जाना, वो ठन्काएगा, लताड़ेगा, गाली भी देगा, चेला दिल पर पहाड़ रखकर सुनेगा क्योंकि जो गाय दूध देने वाली होती है उसकी लात खाना भी मंजूर है।

-----प्यारे साधको-मित्रो! तुम किसी सद्गुरु के पास जाना, वह अमृत की खान लिए बैठा होता है, तुम पाने की अपेक्षा से मत जाना, वो तो तुम पर स्वतः ही बरस जाएगा। जो बादल जल से भरे हैं, वो तो स्वतः ही बरस जाएंगे।.... वास्तविक सद्गुरु आपकी आत्मा है जो हर पल तुम्हारे साथ है। कभी अपने सद्गुरु के साथ भी बैठ लेना। हर समय बाहर ही बाहर गुरुओं की खोज में लगे हो।
---जिन खोजा तिन ही पाइयां। ये खोज भीतर के लिए कही गई है।
आइये, चलें स्वयं के भीतर, स्वयं को जानें
---शुभरात्री-शिवरात्रि---

योग से दूर हो सकते हैं मानसिक रोग___शारीरिक रोग से ज्यादा कष्टकारी होते हैं मानसिक रोग_____तन अस्वस्थ हो तो दवा काम करती...
25/05/2022

योग से दूर हो सकते हैं मानसिक रोग_
__शारीरिक रोग से ज्यादा कष्टकारी होते हैं मानसिक रोग_____
तन अस्वस्थ हो तो दवा काम करती है पर मन अस्वस्थ हो जाए तो दवा नहीं दुआ काम करती है, दुआओं को शक्ति मिलती है योग से।
आइये सनातनधर्म के ऋषियों-मुनियों की धारा ध्यानयोग की ओर वापस मुड़ें_

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(Page being managed by Disciple's Himalayan Rishi )ॐ नमः शिवाय   प्रिय आत्मन मित्रो...!!!____  वीणा के तारों को छेड़िये, ...
22/05/2022

(Page being managed by Disciple's Himalayan Rishi )

ॐ नमः शिवाय
प्रिय आत्मन मित्रो...!!!
____ वीणा के तारों को छेड़िये, भले ही गलत बजाओ, पर बजाओ। मैं तो कहूंगा, गलत ही बजाओ ताकि कोई भी सद्गुरु चैन से न बैठ सके। कोई सद्गुरु स्वयं में खो जाए उससे पहले उसे छेड़ देना। कोई भी सद्गुरु अपने शिष्यों को गलत राह पर जाते देखकर चुपचाप नहीं बैठ सकता। सद्गुरु से तुम्हे बहुत कुछ पाना है, अगर वही मौन हो गया तो फिर.... इसलिए जानबूझकर ही सही, पर वीणा के तारों को छेड़ देना।

धर्म और अध्यात्म:-
अध्यात्म का पहला पड़ाव, पहला अध्याय धर्म है। धर्म देश काल स्थिति के अनुसार बदल जाता है।
सीमा पर खड़ा एक जवान अपने देश के दुश्मनों को मारता है उसे कोई दोष नही लगता। वैसे कोई इंसान किसी को मारता है तो उस पर दुनियाभर के नियम दण्ड लागू हो जाते हैं। हत्या दोनों ही जगह हुई है। सीमा पर खड़े जवान को पुरुस्कार और दूसरे को दण्ड मिलता है।
एक स्थिति में किसी की जान लेना पुण्य है और दूसरी स्थिति में पाप।
______ शास्त्र, न तो ढोंग है और न ही पाखण्ड।
धर्म की खोज असत्य से शुरू होती है और सत्य के द्वार पर जाकर पूर्ण होती है।
इस अस्तित्व के कण कण में केवल परमात्मा ही परमात्मा है, उस कण कण में बसे हुए परमात्मा को देखने और जानने के लिए अष्टांयोग की स्थापना हुई है। किंतु उस अष्टांयोग को सही सही जान लेना भी एक तपस्या है।
धर्म:- मन बुद्धि इंद्रियों का विषय है और
अध्यात्म;- अध्यात्म की शुरुआत ही वही से होती है जहां पर मन बुद्धि इंद्रियां शेष नही रहती।
धर्म के 6 अंग हैं:-
यम
नियम
प्राणायाम
प्रत्याहार
आहार
धारणा----

अध्यात्म:- अध्यात्म के 2 अंग हैं:-
ध्यान
समाधी...

अष्टांयोग में जिन 8 अंगों की बात कही गई है, वह वास्तव में सभी भीतर का विषय हैं।

सीधा सीधा किसी को express way पर उतारा जाए, ऐसी योग्यता किसी विरले में ही होगी।
इसलिए ऋषियों मुनियों सद्ग्रन्थों की रचना की।
____ बाहर से भीतर की ओर, ज्ञान से ध्यान की ओर।
अगर सीधा सीधा भीतर के हवनकुण्ड यज्ञ की बात करेंगे तो कोई विरला ही समझ पाएगा। इसलिए ऋषियों ने बाहर हवनयज्ञ की रचना। बाहर जितने भी देवी देवताओं को आहुति दी जाती है, वास्तव में तो वह सब संकेत ही है- जैसे A for Apple, B for Bat, C for Cat...

अष्टांयोग का एक एक अंग वास्तव में भीतर खुलता है।
किन्तु समझने के लिए उसके दो भाग किये गए।

_____ वास्तव में जो मेरी (मन) की समझ मे आ गया वही सत्य है, शेष सब असत्य है।.... मन बुद्धि इंद्रियों रहते रहते कोई भी सत्य को जान नही सकता।
______ इसलिए कहा- ज्ञान से ध्यान की ओर। इसका अर्थ ये न लगाना की ज्ञान व्यर्थ है।......अगर मैने आज PHD कर ली है तो इसका मतलब ये नही है कि प्राइमरी स्कूल की कोई importance नही है। PHD की पहली सीढ़ी ही पहली क्लास है।

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Dear All,As we approach towards last session of our current Buddha Purnima Meditation Retreat, we invite you all to atte...
20/05/2022

Dear All,

As we approach towards last session of our current Buddha Purnima Meditation Retreat, we invite you all to attend and enjoy the collective bliss.

Today’s session will be open and free for all. Feel free to join this for collective bliss.

Request you to share this with your friends and families.

Himalayan Divine Meditation - Buddha Purnima Meditation Retreat Closing Session
20-May-2022 from 10:00 PM to 11:00 PM(IST).

Regular attendees please note the change of timings.

You can click on below link to join today’s session -
meet.google.com/cea-ubdm-rnn

Thanks,

Real-time meetings by Google. Using your browser, share your video, desktop, and presentations with teammates and customers.

ॐ नमः शिवायप्रिय आत्मन मित्रो...!!!_____ USA New York से पधारे गुरुजी महामंडलेश्वर 1008 श्री स्वामी हरिश्चंद्र पुरी जी म...
10/05/2022

ॐ नमः शिवाय
प्रिय आत्मन मित्रो...!!!
_____ USA New York से पधारे गुरुजी महामंडलेश्वर 1008 श्री स्वामी हरिश्चंद्र पुरी जी महाराज, शिव शक्ति पीठ करनाली से गुरु बहन श्री मीरा पुरी जी, आ अन्य भक्तगणों के साथ-
करुक्षेत्र, करनाली, हरिद्वार की कुछ झलकी-
परमपिता परमात्मा सदाशिव सदा सबका कल्याण करें-

09/05/2022

*छात्रवृत्ति*

अध्यात्म एवम परमात्मा के मार्ग में केवल बाधा होती है तो वो है हमारा अप्रशिक्षित मन ना की भौतिक संसाधन।
जो भी बंधु या बहने बुद्ध पूर्णिमा ध्यान शिबीर में भाग लेना चाहते है लेकिन अभी आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे है, उनके लिए छात्रवृत्ति की सुविधा रखी गई है।
उन्हें अमित कुमार जी या गुरुदेव के पर्सनल नंबर अपना अनुरोध रखना है।
ये सेवा राशि इसलिए रखी जाती है, ताकि सहभागी को मिलने वाली वस्तु का महत्व मालूम रहे , और हमे भी ध्यान के इस प्रचार प्रसार के लिए संसाधन रूपी बल मिले।

*पंजीकरण आखिरी 2 घंटे के लिए खुला है*
संपर्क ~ अमित त्रिवेदी जी +91 9811755301

09/05/2022

(हिमालय ऋषि के साधकों के तरफ से)

``` _मन कि अनंत संभावनाएं_ ```

ॐ नमः शिवाय!
अभी हाल ही में हमारे दादागुरु ,स्वामी हरिश्चंद्र पूरी जी से मिलने पर उन्होंने बहुत सुंदर मार्गदर्शन मुझे दिया, आप सब से साझा करता हु।
इस विश्व की सबसे तीव्र वास्तु/वाहन हमारा मन है। यह प्रकाश की गति से भी तीव्र है। क्षण भर में ये अमेरिका की यात्रा कर सकता है और अगले क्षण को मंगल ग्रह, सूर्य या अन्य तारा मंडल की।
इस प्रकृति कि सारी उपलब्धियां इस मन की तीव्र गति के कारण संभव हो पाए है।
लेकिन यह तभी संभव है जब मन को सहीं दिशा में लगाया जाए।
जीवंत सदगुरु के ठीक ठीक मार्गदर्शन के साथ ध्यान , धारणा, जप, क्रिया साधना करने से इस मन की अनंत संभावनाएं खुल सकती है।
तो आइए हम सब मिलकर आगामी बुद्ध पूर्णिमा के सुनहरे अवसर पर जीवंत सदगुरु के साथ इस मन को सही दिशा देना जाने।

```*बुद्ध पूर्णिमा ध्यान शिबीर*```
*पंजीकरण आज शाम ६ बजे तक*

अमित त्रिवेदी जी - +91 9811755301
या comment एवम message करें

08/05/2022

ॐ नमः शिवाय
प्रिय आत्मन मित्रो-साधको...!!!..... बाहर का सद्गुरु वह सब युक्ति जानता है जहां से मुक्ति का द्वार खुल सकता है, अनेकों मन्त्र, अनेकों क्रियाएं हैं जो हमारे भीतर की बन्द नाड़ियों को खोलते है, केवल जरूरत है तो अनुभवी मास्टर के संग की।
भीतर न तो अंधकार की सत्ता है और न ही प्रकाश की। क्योंकि अंधकार और प्रकाश दोनों ही हमारी बुद्धि की पकड़ में आ रहे हैं और सत्य प्रबुद्धि का विषय है। प्राबुद्धि को जगाता है ध्यान।

_____ गुरुपूर्णिमा और बुद्धपुर्णिमा पर गुरुजनों के द्वारा सूक्ष्म रूप से बहुत कुछ उड़ेला जाता है। पूनम अपने आपमें पूर्ण है। यूं तो हर पूनम ही विशेष है पर इस पूनम में अनेकों प्रकार के योग बनते हैं। हम साधको की यात्रा, मुक्ति की यात्रा है, हर जन्म बंधे बंधे आए और बंधे बंधे ही चले गए इसलिए ये जन्म और मृत्यु का खेल चल रहा है। इस खेल का अंत होना जरूरी है तभी हम अनन्त की यात्रा पर उतर सकते हैं।
अनेकों बार इस धरा पर बुद्ध आए, हमें जगाने का प्रयास किया और वह आगे अपनी यात्रा पर निकल गए।
ये पूनम हमारे भीतर की अमावस को सदा सदा के लिए अलविदा कर दे और जो हमारी आत्मा के आगे अंधकार के, विकार के, वासनाओं के पर्दे चढ़ गए हैं उन्हें ये पूनम धो दे।

*हिमालयन ऋषि*

*सद्गुरु के संग बुद्धपूर्णिमा ध्यान शिबीर*

11 दिवसिय 10 से 20 मई

रजिस्ट्रेशन केवल कल शाम 6 बजे तक ही होगा_

*Contact - Amit Trivedi - +91 9811755301*

Address

Shiv Dhyan Yog Mandir, Vill./Dandi Ghat, I Koti Hai
Kotkhai
171202

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