Islam Tv Hindi

24/08/2022

*Bismillahirrahmanirrahim*

*✦ Tauba Astigfar karne walo ke liye inaamat*
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*أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الَّذِي لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَىُّ الْقَيُّومُ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ*

Al Quran : Apne RABB se maafi maango
✦ Wo bada maaf karne wala hai
✦ Wo Aasman se tum par (Rahmat ki) baarish barsayega
✦ Aur maal se tumhari madad farmayega
✦ Aur aulad se (tumhari madad farmayega)
✦ Aur tumhe baag (garden) ata karega
✦ Aur unmein tumhare liye nahrein baha dega
Surah Al-Nooh (71), Verse 10-12

✦ Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam ne farmaya jo Astigfar karne ko apne upar lazim karega to Allah subhanhu usko har tangi se nikalne ka ek raasta ata farmayega aur har Gam se Nijat dega aur aisee jagah se Rozi ata farmayega jahan se usko Guman bhi nahi hoga
Sunan Abu Dawud, Jild 1, 1505 -Hasan
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*أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الَّذِي لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَىُّ الْقَيُّومُ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ*

القرآن : اپنے پروردگار سے معافی مانگو
وہ بڑا معاف کرنے والا ہے
وہ تم پر آسمان سے لگاتار مینہ برسائے گا
اور مال اور بیٹوں سے تمہاری مدد فرمائے گا
اور تمہیں باغ عطا کرے گا
اور ان میں تمہارے لئے نہریں بہا دے گا
سورة نوح ١٠-١٢

رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا: جو کوئی استغفار کا التزام کر لے ۱؎ تو اللہ اس کے لیے ہر تنگی سے نکلنے اور ہر رنج سے نجات پانے کی راہ ہموار کر دے گا اور اسے ایسی جگہ سے رزق عطا فرمائے گا، جس کا وہ تصور بھی نہیں کر سکتا ۔
سنن ابو داوود جلد ١ ١٥٠٥ حسن
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*أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الَّذِي لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَىُّ الْقَيُّومُ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ*
अस्तगफिरुल्लाह अल लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवा अल हय्युल-कयूम वा अतुबू इलैही

✦ अल क़ुरान : अपने रब से माफी माँगो की वो बड़ा माफ़ करने वाला है
✦ वो आसमान से तुम पर (रहमत की) बारिश बरसाएगा
✦ और माल से तुम्हारी मदद फरमाएगा
✦ और औलाद से (तुम्हारी मदद फरमाएगा )
✦ और तुम्हे बाग अता करेगा
✦ और उनमें तुम्हारे लिए नहरें बहा देगा
अल क़ुरान , सुरह नूह (71), आयत 10-12

✦ रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो अस्तिग्फार (तौबा) करने को अपने ऊपर लाजिम कर ले तो अल्लाह सुबहानहु उसको हर तंगी से निकलने का एक रास्ता अता फरमाएगा और हर गम से निजत देगा और ऐसी जगह से रोज़ी अता फरमाएगा जहाँ से उसको गुमान भी नहीं होगा
सुनन अबू दाऊद जिल्द 1, 1505 - हसन......................
*أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الَّذِي لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَىُّ الْقَيُّومُ وَأَتُوبُ إِلَيْه*ِ
Astagfirullah Al-lazi la ilaha illa Huwa Al-Hayyul-Qayyum wa atubu ilaih

✦ Al Quran : Ask forgiveness from your Lord,
✦ Verily, He is Oft-Forgiving
✦ He will send rain (of mercy) from the sky to you in abundance
✦ And give you increase in wealth
✦ And children,
✦ And bestow on you gardens
✦ And bestow on you rivers.
Surah Al-Nooh (71), Verse 10-12

✦ The Prophet peace be upon him said: If anyone continually asks pardon, Allah will appoint for him a way out of every distress, and a relief from every anxiety, and will provide for him from where he did not reckon.
Sunan Abu Dawud, Book 8, Number 1513-Hasan

29/06/2020

हदीशे नबवी पार्ट - 6

हमको अब्दान ने हदीश बयान की , उन्हें अब्दुल्लाह बिन मुबारक ने ख़बर दी , उनको यूनुस ने , उन्होंने जुहरी से यह हदीष सुनी । ( दूसरी सनद ये है कि ) हमसे बिशर बिन मुहम्मद ने ये हदीष बयान की । उनसे अब्दुल्लाह बिन मुबारक ने , उनसे यूनुस और मअमर दोनों ने , इन दोनों ने ज़ुहरी से रिवायत की पहली सनद के मुताबिक़ जुहरी से उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह ने , उन्होंने हज़रत इब्ने अब्बास ( रजि . ) से ये रिवायत नक़ल की कि रसूलुल्लाह ( सल्ल०) सब लोगों से ज़्यादा जव्वाद ( सख़ी ) थे और रमज़ान में ( दूसरे औक़ात के मुक़ाबले में जब ) जिब्रईल ( अलैहिस्सलाम ) आप ( सल्ल०) से मिलते तो बहुत ही ज़्यादा जूदो - करम फ़र्माते । जिब्रईल ( अलैहिस्सलाम ) #रमज़ान की हर रात में आप ( सल्ल०) से मुलाक़ात करते और आप ( सल्ल०) के साथ कुआन का दौर करते , ग़र्ज़ आँहज़रत ( सल्ल०) लोगों को भलाई पहुँचाने में बारिश लाने वाली हवा से भी ज़्यादा जूदो - करम फ़ार्मया करते थे ।

सहीह बुखा़री हदीश नम्बर - 6
किताब वह्यी का बयान

29/06/2020

हदीशे नबवी पार्ट 5

मूसा बिन इस्माईल ने हमसे हदीष बयान की , उनको अबू अवाना ने ख़बरदी , उनसे मूसा इब्ने अबी आयशा ने बयान की , उनसे सईद बिन जुबैर ने , उन्होंने इब्ने अब्बास ( रजि ) से कलामे इलाही ( लातुहर्रिक ......... ) की तफ़सीर के सिलसिले में सुना कि
रसूलुल्लाह ( सल्ल० ) नुजूले कुआन के वक़्त बहुत सख़्ती महसूस किया करते थे और उसकी (अलामतों) में से एक ये थी कि याद करने के लिए आप अपने होंठों को हिलाते थे ।

इब्ने अब्बास ( रजि . ) ने कहा मैं अपने होंठ हिलाता हूँ जिस तरह आप (सल्ल०) इसी तरह हिलाते थे । सईद कहते हैं मैं भी अपने होंठ हिलाता हूँ जिस तरह इब्ने अब्बास ( रजि ) को मैंने हिलाते हुए देखा । फिर उन्होंने अपने होंठ हिलाए ।

( इब्ने अब्बास (रजि) नेकहा ) फिर ये आयत उतरी , ' ऐ मुहम्मद ! कुर्आन को जल्दी - जल्दी याद करने के लिए अपनी जुबान न हिलाओ । #उसका जमा कर देनाऔर पढ़ा देना मेरे ज़िम्मे है । सूरत कियामह आयत नम्बर 16,17,18,19.

#हज़रत इब्ने #अब्बास (रजि.) कहते हैं कि यानी #कुरआन आप ( सल्ल० ) के दिल में जमा देना और पढ़ा देना अल्लाह के ज़िम्मे है । फिर जब हम पढ़ चुके तो उस पढ़े हुए की इत्तिबाअ करो । इब्ने अब्बास ( रजि०) फ़र्माते हैं ( इसका मतलब यह है ) कि आप उसको ख़ामोशी के साथ सुनते रहो । उसके बाद मतलब समझा देना मेरे ज़िम्मे है ।
फिर यक़ीनन यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि आप इसको पढ़ो ( यानी इसको महफूज़ कर सको )

चुनाँचे उसके बाद जब आपके पास हज़रत जिब्रईल अलैहिस्सलाम ( वही लेकर ) आते तो आप ( तवजह से ) सुनते जब वो चले जाते तो रसूलुल्लाह ( सल्ल०) उस ( वह्यी ) को उसी तरह पढ़ते जिस तरह हज़रत जिब्रईल ( अलैहिस्सलाम ) ने उसे पढ़ा था ।

#सहीह #बुखा़री हदीश नम्बर - 5
किताब वह्यी का बयान

29/06/2020

हदीशे नबवी पार्ट - 5

मूसा बिन इस्माईल ने इमाम बुखारी से ये हदीष बयान की , उनको अबू अवाना ने ख़बरदी , उनसे मूसा इब्ने अबी आयशा ने बयान की , उनसे सईद बिन जुबैर ने , उन्होंने इब्ने अब्बास ( रजि ) से कलामे इलाही ( लातुहर्रिक ......... ) की तफ़सीर के सिलसिले में सुना कि
रसूलुल्लाह ( सल्ल० ) नुजूले कुआन के वक़्त बहुत सख़्ती महसूस किया करते थे और उसकी (अलामतों) में से एक ये थी कि याद करने के लिए आप अपने होंठों को हिलाते थे ।

इब्ने अब्बास ( रजि . ) ने कहा मैं अपने होंठ हिलाता हूँ जिस तरह आप (सल्ल०) इसी तरह हिलाते थे । सईद कहते हैं मैं भी अपने होंठ हिलाता हूँ जिस तरह इब्ने अब्बास ( रजि ) को मैंने हिलाते हुए देखा । फिर उन्होंने अपने होंठ हिलाए ।

( इब्ने अब्बास (रजि) नेकहा ) फिर ये आयत उतरी , ' ऐ मुहम्मद ! कुर्आन को जल्दी - जल्दी याद करने के लिए अपनी जुबान न हिलाओ । उसका जमा कर देनाऔर पढ़ा देना मेरे ज़िम्मे है । सूरत कियामह आयत नम्बर 16,17,18,19.

हज़रत इब्ने अब्बास (रजि.) कहते हैं कि यानी कुरआन आप ( सल्ल० ) के दिल में जमा देना और पढ़ा देना अल्लाह के ज़िम्मे है । फिर जब हम पढ़ चुके तो उस पढ़े हुए की इत्तिबाअ करो । इब्ने अब्बास ( रजि०) फ़र्माते हैं ( इसका मतलब यह है ) कि आप उसको ख़ामोशी के साथ सुनते रहो । उसके बाद मतलब समझा देना मेरे ज़िम्मे है ।
फिर यक़ीनन यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि आप इसको पढ़ो ( यानी इसको महफूज़ कर सको )

चुनाँचे उसके बाद जब आपके पास हज़रत जिब्रईल अलैहिस्सलाम ( वही लेकर ) आते तो आप ( तवजह से ) सुनते जब वो चले जाते तो रसूलुल्लाह ( सल्ल०) उस ( वह्यी ) को उसी तरह पढ़ते जिस तरह हज़रत जिब्रईल ( अलैहिस्सलाम ) ने उसे पढ़ा था ।

सहीह बुखा़री हदीश नम्बर - 5
किताब वह्यी का बयान

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، ‏‏‏‏‏‏حَدَّثَنَا زَائِدَةُ، ‏‏‏‏‏‏عَنِ الْأَعْمَشِ، ‏‏‏‏‏‏عَنْ أَبِي صَالِحٍ، ‏‏‏‏‏‏عَ...
29/06/2020

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، ‏‏‏‏‏‏حَدَّثَنَا زَائِدَةُ، ‏‏‏‏‏‏عَنِ الْأَعْمَشِ، ‏‏‏‏‏‏عَنْ أَبِي صَالِحٍ، ‏‏‏‏‏‏عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، ‏‏‏‏‏‏قَالَ:‏‏‏‏ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:‏‏‏‏ مَا مِنْ رَجُلٍ يَسْلُكُ طَرِيقًا يَطْلُبُ فِيهِ عِلْمًا إِلَّا سَهَّلَ اللَّهُ لَهُ بِهِ طَرِيقَ الْجَنَّةِ، ‏‏‏‏‏‏وَمَنْ أَبْطَأَ بِهِ عَمَلُهُ لَمْ يُسْرِعْ بِهِ نَسَبُهُ .

رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا: جو شخص حصول علم کے لیے کوئی راستہ طے کرتا ہے تو اللہ تعالیٰ اس کی وجہ سے اس کے لیے جنت کا راستہ آسان کر دیتا ہے، اور جس کو اس کے عمل نے پیچھے کر دیا تو اسے اس کا نسب آگے نہیں کر سکے گا ۔

Sunnan e Abu Dawood #3643

Status: صحیح

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29/06/2020
29/06/2020

हदीशे नबवी पार्ट - 4

इब्ने शिहाब कहते हैं मुझको अबू सलमा बिन अब्दुर्रहमान ने हज़रत जाबिर ( रजि . ) बिन अब्दुल्लाह #अंसारी से ये रिवायत नक़ल की किआप ( सल्ल०) ने वही के रुक जाने के ज़माने के हालात बयान फर्माते हुए कहा कि

एक रोज़ मैं चला जा रहा था कि अचानक मैंने #आसमान की तरफ़ एक आवाज़ सुनी और मैंने अपना सर आसमान की तरफ़ उठाया क्या देखता हूँ कि वही फ़रिश्ता जो मेरे पास ग़ारे हिरा में आया था

वो आसमान व ज़मीन के बीच एक कुर्सी पर बैठा हुआ है । मैं उससे डर गया और घर आने पर मैंने फिर कंबल ओढ़ने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की ।

उस वक़्त अल्लाह तअला की तरफ़से ये आयतें नाज़िल हुईं।ऐ कंबल ओढ़कर लेटने वाले ! उठ खड़ा हो और लोगों को अज़ाबे इलाही से डरा और अपने रब की बड़ाई बयान कर और अपने कपड़ों को पाक साफ़ रख और गंदगी से दूर रह । सूरह - मुद्दसीर आयत 1 से 5

इसके बाद वह्य तेज़ी के साथ पे दर पे आने लगी । इस हदीष को यह्या बिन बुकैर के अलावा लैष बिन साअद से अब्दुल्लाह बिन यूसुफ़ और अबू सालेह ने भी रिवायत किया है । और अक़ील के अलावा जुहरी से हिलाल बिन रव्वाद ने भी रिवायत किया है ।

#सहीह_बुखा़री_हदीश_नम्बर_4
किताब वह्यी का बयान

29/06/2020

हदीशे नबवी पार्ट - 3 (२)

कहने लगे की अब मुझे अब अपनी जान का खौफ हो गया है।
आपकी बीवी हज़रत ख़दीजा ( रजि . ) ने आपको ढारस ( हिम्मत ) बंधाई और कहा कि आपका ख़याल सहीह नहीं है । अल्लाह की क़सम ! आपको अल्लाह कभी रुस्वा नहीं करेगा , आप तो अख़लाक़े - फ़ाज़िला ( श्रेष्ठ चरित्र ) के मालिक हैं , आपतो कुम्बा परवर हैं , बेकसों का बोझ अपने सर पर रख लेते हैं , मुफलिसों के लिए आप कमाते हैं , #मेहमान नवाज़ी में आप बेमिषाल हैं और मुश्किल वक़्त में आप हक़ बात का साथ देते हैं । ऐसे औसाफ़े - हसना ( अच्छे गुणों ) वाला इंसान यूँ बेवक़्त ज़िल्लत व ख्वारीकी मौत नहीं पासकता ।

फिर मज़ीद तसल्ली के लिए #हज़रत ख़दीजा ( रजि . ) आप ( सल्ल०) को वार्का बिन नौफ़ल के पास ले गईं , जो उनके चचाज़ाद भाई थे और ज़मान - ए जाहिलिय्यत में ईसाई मज़हब इख़्तियार कर चुके थे और इब्रानी जुबान के कातिब थे !

चुनाँचे इंजील को भी हस्बे मंश - ए इलाही इब्रानी जुबान में लिखा करते थे । ( इंजील सुरयानी जुबान में नाज़िल हुई थी फिर उसका तर्जुमा इब्रानी जुबान में हुआ , वर्का उसी को लिखते थे ) वो बहुत बूढ़े हो गए थे यहाँ तक कि उनकी बीनाई भी जा चुकी थी

हज़रत ख़दीजा ( रजि . ) उनके सामने आपके हालात बयान किए और कहा कि ऐ चचाज़ाद भाई ! अपने भतीजे ( मुहम्मद ) की जुबानी ज़रा उनकी कैफ़ियत सुन लीजिए । वो बोले कि भतीजे आपने जो कुछ देखा है , उसकी तफ़सील सुनाओ । चुनाँचे आप ( सल्ल०) ने शुरू से आख़िर तक पूरा वाक़िआ सुनाया , जिसे सुनकर वक्या बेइख़्तियार होकर बोल उठे कि ये तो वही नामूस ( मुअज़ज़राज़दाँ फ़रिश्ता ) है जिसे #अल्लाह ने हज़रत मूसा ( अलैहिस्सलाम ) पर वह्यी देकर भेजा था !

काश, मैं आपके उस अहदे नुबुव्वत के शुरू होने पर जवान उम्र होता काश ! मैं उस वक़्त तक ज़िन्दा रहता जबकि आपकी क़ौम आपको इस शहर से निकाल देगी रसूले करीम ( सल्ल०) ने यह सुनकर ताज्जुब से पूछा कि क्या वो लोग मुझको निकाल देंगे ?

( हालाँकि मैं तो उनमें सादिक़ व अमीन व मकुबूल हूँ ) वर्क़ा बोला हाँ ! यह सबकुछ सच है । मगर जो शख़्स भी आपकी तरह अम्रे हक़ लेकर आया लोग उसके दुश्मन ही हो गए हैं ।

अगर मुझे आपकी नुबुव्वत का वो ज़माना मिल जाए तो मैं आपकी पूरी पूरी मदद करूँगा । मगर कुछ दिनों बाद वर्का बिन नौफ़ल का इंतिक़ाल हो गया । फिर कुछ वक़्त तक आप ( सल्ल०) पर वह्यी का आना मौकूफ़ ( स्थगित ) रहा । ( करीब दो या ढ़ाई साल तक बंद रहा)
#सहीह_हुखारी_हदीश_नम्बर_3 (२)
किताब वह्यी का बयान
।॥यह हदीश पुरा हुआ।॥

29/06/2020

हदीशे नबवी पार्ट - 3 (१)

( 3 ) हमको यह्या बिन बुकैर ने ये हदीष बयान की , वो कहते हैं कि इस हदीष की हमको लैष ने खबर दी , लैष अक़ील से रिवायत करते हैं । अक़ील इब्ने शिहाब से , वो उर्वा बिन जुबैर से , वो उम्मुल मो'मिनीन हज़रत आइशा ( रजि . ) से नक़ल करते हैं कि उन्होंने बतलाया कि आँहज़रत ( सल्ल०) पर वह्यी का शुरूआती दौर अच्छे - सच्चे #पाकीज़ा ख़्वाबों से शुरू हुआ।

आप ख़्वाब में जो कुछ देखते वो सुबह की रोशनी की तरह सही और सच्चा साबित होता । फिर मिनजानिबे कुदरत आप ( सल्ल०) तन्हाई #पसंद ( एकान्त प्रिय ) हो गए और आप (सल्ल०) ने गारे हिरा में ख़ल्वत नशीनी इख़्तियार फ़र्माई और कई - कई दिन और रात वहाँ मुसलसल इबादत और यादे इलाही व ज़िक्रो - फ़िक्र में मशगूल रहते ।

जब तक #घर आने को दिल न चाहता तौशा ( खाना ) साथ लिए वहाँ रहते।खाना ख़त्म होने पर ही अहलिया मुहतरमा हज़रत ख़दीजा ( रजि . ) के पास आते और कुछ खाना साथ लेकर फिर वहाँ जाकर ख़ल्वत गुज़ी हो जाते , यही तरीक़ा ज़ारी रहा यहाँ तक कि जब आप ( सल्ल० ) पर हक़ ज़ाहिर हो गया और आप ( *सल्ल०) गारे हिरा ही में क़याम - पज़ीर ( ठहरे हुए ) थे !

कि अचानक एक #रात हज़रत जिब्रईल ( अलैहिस्सलाम ) आपके पास हाज़िर हुए और कहने लगे कि ऐमुहम्मद ( सल्ल०) पढ़ो !
आप ( सल्ल०) फ़र्माते हैं कि मैंने कहा कि मैं पढ़ा हुआ नहीं हूँ , आप ( सल्ल०) फ़र्माते हैं कि फ़रिश्ते ने मुझे पकड़ कर इतने ज़ोर से भींचा कि मेरी ताक़त जवाब दे गई , फिर मुझे छोड़कर कहा कि पढ़ो , मैंने फिर वही #जवाब दिया कि मैं पढ़ा हुआ नहीं हूँ ।
उस फ़रिश्ते ने मुझको निहायत ही ज़ोर से भींचा कि मुझको सख़्त तकलीफ़ महसूस हुई , फिर उसने कहा कि पढ़ !
मैंने कहा कि मैं पढ़ा हुआ नहीं हूँ।

फ़रिश्ते ने मुझको पकड़ा और तीसरी बार फिर मुझको भींचा और कहने लगा कि पढ़ो !

अपने रब के नाम की मददसे जिसने पैदा किया और इंसान को खून की फुटकी से बनाया , पढ़ो ! और आपका रब बहुत ही मेहरबानियाँ करने वाला है ।
सूरह अलक आयत 1,2,3.

बस यही आयतें आप हज़रत जिब्रईल . ( अलैहिस्सलाम ) से सुनकर इस हाल में गारे हिरा से वापस हुए कि आपका दिल इस अनोखे वाक़िये से कांप रहा था । आप हज़रत ख़दीजा के यहाँ तशरीफ़ ले गए और फ़र्माया कि मुझे कंबल ओढ़ा दो , मुझे कंबल ओढ़ा दो । उन्होंने आपको कंबल ओढ़ा दिया।

जब आप का डर जाता रहा । तो आपने अपनी जोवज़े मुहतरमा हज़रत ख़दीजा ( रजि . ) को तफ़्सील के साथ यह वाक़िया सुनाया और कहने लगे कि मुझको अब अपनी जान का ख़ौफ़ हो गया है ।
#सहीह #बुखा़री #हदीश #नम्बर_3 (१)
किताब वह्यी,
हदीश लम्बी है इसलिए 2 भाग मे पोस्ट होगा।

29/06/2020

हदीशे नबवी पार्ट - 2

हदीश नम्बर - 2 . इमाम बुखारी को अब्दुल्लाह बिन यूसुफ़ ने हदीस बयान की , उनको मालिक ने हिशाम बिन उर्वा की रिवायत से ख़बरदी , उन्होंने अपने वालिद से नक़ल की , उन्होंने उम्मुल मो'मिनीन हज़रत आइशा ( रजि . ) से नक़ल की। आपने फ़र्माया कि हारिष बिन हिशाम नामी एक शख़्स ने आँहज़रत ( सल्ल०) से सवाल किया था कि हुजूर आप पर वह्यी कैसे नाज़िल होती है ? आप (सल्ल०) ने फ़र्माया कि वह्यी नाज़िल होते #वक़्त कभी - कभी मुझे #घंटी की सी आवाज़ महसूस होती है और वह्यी की यह कैफ़ियत मुझ पर #बहुत शाक़ ( नाक़ाबिले बर्दाश्त । असहनीय ) गुज़रतीहै।जब ये कैफ़ियत ख़त्म होती है तो मेरे दिलो दिमाग़ पर ( उस फ़रिश्ते ) के ज़रिए नाज़िलशुदा वह्यी महफूज़ हो जाती है और किसी वक़्त ऐसा होता है कि फ़रिश्ता बशक्ले इंसान मेरे पास आता है और मुझसे #कलाम करता है । बस मैं उसका कहा हुआ याद रख लेता हूँ । हज़रतआइशा ( रजि . ) का बयान है कि मैंने सख़्त कड़ाके की सर्दी में आँहज़रत ( सल्ल०) को देखा है कि आप ( सल्ल०) पर वह्यी नाज़िल हुई और जब उसका सिलसिला मौकूफ़ ( मुल्तवी / स्थगित ) हुआ तो आप ( सल्ल०) की पेशानी #पसीने से सरोबार थी ।

हदीश नम्बर - 2
किताब वही का बयान, #कुरआन का आयत कैसे नाजिल होती थी।

28/06/2020

हदीशे नबवी पार्ट - 1

शैख़ इमाम हाफ़िज़ अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद बिन इस्माईल बिन इब्राहीम बिन मुग़ीरा बुख़ारी ( रह . ) ने फ़र्माया

बाब 1 : इस बारे में कि #अल्लाह के रसूल ( सल्ल० ) पर वह्य की इब्तिदा कैसे हुई और अल्लाह अज़वजल्ल का ये फ़ार्मन कि मैंने बिलाशुब्हा ( ऐ मुहम्मद ! ) आपकी तरफ़ वह्यी का नुजूल उसी तरह किया है जिस तरह हज़रत नूह ( अलैहिस्सलाम ) और उनके बाद आने वाले तमाम #नबियों की तरफ़ किया था
सूरह निसा आयत 163.

हदीस नम्बर - 1 .इमाम बुखारी कहते है हमको हुमैदी ने ये हदीष बयान की , उन्होंने कहा कि हमको सुफ़यान ने ये हदीस बयान की , वो कहते हैं हमको यह्या बिन सईद अन्सारी ने ये हदीष बयान की , उन्होंने कहा मुझे ये हदीष मुहम्मद बिन इब्राहीम तैमी से हासिल हुई । उन्होंने इस हदीष को अलक़मा बिन वक्कास लैषी से सुना , उनका बयान है कि मैंने मस्जिदे नबवी में मिम्बरे - रसूल ( सल्ल०) पर हज़रत उमर बिन ख़त्ताब ( रजि . ) की जुबान से सुना , वो फ़र्मा रहे थे कि मैंने जनाब #रसूलुल्लाह ( सल्ल०) से सुना । आप ( सल्ल०) फ़र्मा रहे थे कि तमाम आ'माल का दारोमदार निय्यत पर है और हर अमल का नतीजा हर इन्सान को निय्यत के मुताबिक़ ही मिलेगा।पस जिसकी हिजरत ( तर्के - वतन ) दौलते #दुनिया हासिल करने के लिये हो या किसी औरत से शादी की ग़रज़ से हो । पस उसकी हिजरत उन्हीं चीज़ों के लिये होगी जिनको #हासिल करने की निय्यत से उसने हिजरत की ।

#सहीहबुखा़री हदीश नम्बर 1
किताब वही का बयान, #कुरआन की आयत कैसे उतरी

28/06/2020

असल दीन रसूल सल्लअलाहो अलैही वसलम की पैरवि में हैं।

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