25/01/2026
आज वही *25 जनवरी* का दिन है... जो हम सभी सुंदरसाथ के लिए एक स्वर्णिम अध्याय की याद दिलाता है। यह डाक टिकट केवल एक कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि गुरुजी के संघर्ष, आचार्यों के आशीर्वाद और समस्त सुंदरसाथ के प्रेम की *'अखंड विजय'* है। यह सम्मान हमारे इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में हमेशा चमकता रहेगा। 🚩🏅
इंडिया गेट के पास - मावलंकर हॉल, दिल्ली" 🖋️📜
बात सिर्फ एक डाक टिकट की नहीं है, बात उस 'तड़प' की है जो हम सबके दिलों में अपने "प्राण महामति श्री प्राणनाथ जी" के सम्मान के लिए थी। "25 जनवरी 2019" की वह सुबह... दिल्ली की फिजाओं में एक अलग ही आत्मीयता की सुगंध थी। ❄️✨
मावलंकर हॉल के उस ऐतिहासिक मंच पर जब "परम पूज्य गुरुजी श्री 108 मोहन प्रियाचार्य जी महाराज" खड़े थे, तो उनकी आँखों में वह 5 साल का लंबा संघर्ष झिलमिला रहा था। वह संघर्ष, जो उन्होंने 2014 से बिना थके, बिना रुके जिया था। मुझे ("प्रकाश शर्मा") उनके चरणों में रहकर उस भाग-दौड़ और समर्पण को पूर्ण रूप से महसूस करने का सौभाग्य मिला।
जहाँ हर दिन एक नई चुनौती थी, पर गुरुजी का संकल्प हिमालय जैसा अडिग था। 🏔️ मुझे याद है वो दौर, जब मैं अपनी कार में ही प्रिंटर और लैपटॉप लेकर चलता था ताकि मंत्रालयों की मांग पर तुरंत दस्तावेज तैयार कर सकूं। मेट्रो स्टेशन पर बंदर के काटने के दर्द को सहकर भी इस कार्य की निरंतरता को नहीं टूटने दिया, क्योंकि लक्ष्य महान था। 💻🚗
"एकता का अद्भुत नजारा:" मंच पर "श्री कृष्ण प्रणामी निजानंद संप्रदाय के पूज्य आचार्यजन", विशिष्ट गुरुजनों के साथ तत्कालीन संचार मंत्री "माननीय श्री मनोज सिन्हा जी" और तत्कालीन सांसद "श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी" विराजमान थे। लेकिन सबसे भावुक कर देने वाला नजारा हॉल के भीतर था, जहाँ सामने की पंक्तियों में समस्त पूज्य और "वंदनीय गुरुजन" और देश-विदेश से पधारे "सुंदरसाथ जी" उपस्थित थे। उनके दिव्य सान्निध्य ने उस सरकारी आयोजन को एक भव्य **'धर्म-सभा'** में बदल दिया था। 🙏🤝
जब **"डाक टिकट"** का लोकार्पण हुआ, तो सुंदरसाथ के जयकारों से मावलंकर हॉल की दीवारें गूँज उठी थीं। वह पल ऐसा था मानो महामति श्री प्राणनाथ जी स्वयं अपनी 'अखंड चेतना' के साथ वहां उपस्थित होकर हम सबको निहाल कर रहे हों। 📯🕊️
इस पुनीत कार्य में पन्ना की पावन माटी से "अधिवक्ता श्री किशोर श्रीवास्तव जी" और "पत्रकार श्री नीलम राज शर्मा जी" का वह नि:स्वार्थ साथ भी याद आता है, जिन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर इस गौरव को दिल्ली के गलियारों तक पहुँचाया। 🏛️🌿
आज वही "25 जनवरी" का दिन है... जो हम सभी सुंदरसाथ के लिए एक स्वर्णिम अध्याय की याद दिलाता है। यह डाक टिकट केवल एक कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि "गुरुजी" के संघर्ष, आचार्यों और संतो के आशीर्वाद और समस्त सुंदरसाथ के प्रेम की 'अखंड विजय' है। यह सम्मान हमारे इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में हमेशा चमकता रहेगा। 🚩🏅
आज भी इस ऐतिहासिक डाक टिकट का संरक्षण "श्री प्राणनाथ मिशन, दिल्ली" के पास उपलब्ध है।
"समस्त गुरु चरणों में वंदन और सुंदरसाथ जी को इस गौरवशाली दिन की कोटि-कोटि बधाई!" 🙏🌹
— प्रकाश शर्मा
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