Islamic Sms On Kamarhatti Kolkatta City. ज़िक्र-ए-इलाही

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 #दुरुद_शरीफ तमाम आमाल से ज़्यादा बरकत वाला और अफ्ज़ल अमल है।
02/04/2026

#दुरुद_शरीफ तमाम आमाल से ज़्यादा बरकत वाला और अफ्ज़ल अमल है।

इंशा अल्लाह बहुत जल्द...---⭐ सरकार ﷺ की आमद ⭐          ☆मरहबा☆---🌹"मीलाद शरीफ़"🌹📚"शरीअत की रोशनी में"📚✿पहले यह जान लें क...
20/08/2025

इंशा अल्लाह बहुत जल्द...
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⭐ सरकार ﷺ की आमद ⭐
☆मरहबा☆
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🌹"मीलाद शरीफ़"🌹
📚"शरीअत की रोशनी में"📚

✿पहले यह जान लें कि अहले-सुन्नत के नज़दीक ईद मीलाद-उन-नबी ﷺ मनाना कोई फ़र्ज़ या वाजिब नहीं,
यह एक मुस्तहब अमल है,
जो करेगा उसको सवाब मिलेगा और जो नहीं करेगा उस पर कोई गुनाह नहीं.....

अब बात यह आती है कि क्या इस्लाम हमें इजाज़त देता है ईद मीलाद-उन-नबी ﷺ मनाने की या नहीं ?

इसका जवाब यह है कि कुरआन-ओ-हदीस की रोशनी में ईद मीलाद-उन-नबी ﷺ
मनाना बिल्कुल जायज़ है।
कोई भी दूसरे मसलक का आलिम आज तक शरीअई दलील मीलाद के हराम या नाजायज़ होने की
मआज़ अल्लाह
ना आज तक ला सका है, ना ला सकेगा।

इंशा अल्लाह इस सिलसिले में आने वाले पोस्ट में हम जानेंगे कि किस तरह ईद-ए-मीलाद मनाना जायज़ है कुरआन-ओ-हदीस की रोशनी में !
इस पोस्ट के कुछ खास टॉपिक हैं जिनमें से कुछ ये रहे... 👇👇👇

✅ आक़ा-ए-करीम ﷺ की विलादत कब हुई ?
✅ कुरआन क्या फ़रमाता है ?
✅ आप ﷺ ने क्या अपना मीलाद मनाया ?
और आपने ﷺ अपने मीलाद के मुतल्लिक क्या फ़रमाया ?
✅ क्या किसी सहाबी ने ईद-मीलाद मनाई है ?
✅ अबू लहब ने भी मीलाद मनाया...
✅ जुलूस निकालना किसकी सुन्नत ?
✅ झंडे लहराना किसकी सुन्नत ?
✅ नात शरीफ़ पढ़ना किसकी सुन्नत ?
✅ मीलाद पर खर्च करना कैसा ?
✅ शैतान की रुसवाई...
✅ शब-ए-क़द्र से भी अफ़ज़ल रात...
✅ किस-किस आइमा वा मुहद्दिसीन ने "मीलाद-उन-नबी ﷺ" को जायज़ कहा है ?

🎇और कुछ जाहिलाना एतराज़ के जवाबात भी देने की कोशिश करेंगे इंशा अल्लाह...

🌠आप सभी भाई-बहन दुआ फ़रमाएँ कि जिस काम की नीयत की है, वह मुकम्मल हो सके !

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दुआ का तालिब :- मोहम्मद समीर अली
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20/08/2025

☆मदयन का कुंआ......

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(पोस्ट- 72) ``सच्ची हिकायत``

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♥हजरत मुसा अलैहिस्सलाम ने बड़े होकर जब हक का ब्यान और फिरऔन और फिरऔनीयो की गुमराही का ब्यान शुरू किया तो बनी इसराइल के लोग आपकी बात सुनते और आपकी इत्तेबा करते।

आप फिरऔनीयो के दीन की मुखालाफत फरमाते। रफ्ता-रफ्ता इस बात का चर्चा हुआ । फिरऔनी जुस्तजु मे हुए। फिर फिरऔन के बावरची का मुसा अलैहिस्सलाम के मुक्का से मारा जाना भी जब उन लोगो को मालूम हुआ तो फिरऔन ने हजरत मुसा अलैहिस्सलाम के कत्ल का हुक्म दिया।

लोग हजरत मुसा अलैहिस्सलाम की तलाश मे निकले। फिरऔनियो मे से एक मर्दे नेक, हजरत मुसा अलैहिस्सलाम का खैर ख्वाह भी था । वह दौड़ते हुआ आया और हजरत मुसा अलैहिस्सलाम को खबर दी। कहा : आप यहां से कही तशरिफ ले जाए । हजरत मुसा अलैहिस्सलाम उसी हालत मे निकल पड़े और मदयन की तरफ रूख किया।

मदयन वह मकाम है, जहां हजरत शोएब अलैहिस्सलाम तशरिफ रखते थे । यह शहर फिरऔन के हुदुदे सल्तनत से बाहर था। हजरत मुसा अलैहिस्सलाम ने उसका रास्ता भी न देखा था न कोइ सवारी साथ थी न कोइ हमराही।

चुनांचे अल्लाह ने एक फरिश्ता भेजा जो आपको मदयन तक ले गया ।

हजरत शोएब अलैहिस्सलाम इसी शहर मे रहते थे। आपकी दो लड़कीयां थी और बकरिया आपका रोजी रोटी का जरिया । मदयन मे एक कुआं था। हजरत मुसा अलैहिस्सलाम पहले उसी कुंए पर पहुचे । आपने देखा की बहुत से लोग उस कुंए मे से पानी खिचते है। और अपने जानवरो को पिला लेते है। हजरत शोएब अलैहिस्सलाम की दोनो लड़कीयां भी अपनी बकरियों को अलग रोक कर वही खड़ी है।

हजरत मुसा अलैहिस्सलाम ने उन लड़कीयों से पुछा कि तुम अपनी बकरियों को पानी क्यों नही पिलाती??

उन्होने कहा की हमसे डोल खिंचा नही जाता। यह लोग चले जायेगे तो जो पानी हौज मे बच जायेगा वह हम अपनी बकरियों को पिला लेंगें ।

हजरत मुसा अलैहिस्सलाम को रहम आ गया । पास ही एक दुसरा कुआं था जिस पर एक बहुत बड़ा पत्थर ढका हुआ था और जिसको बहुत से आदमी मिलकर हटाते थे। आपने तन्हा उसको हटा दिया और उस मे से डोल खिचकर उनकी बकरियो को पिला दिया ।

घर जाकर उन दोनो लड़कीयों ने हजरत शोएब अलैहिस्सलाम से कहा अब्बाजान! एक बड़ा नेक और नया मुसाफिर आया है जिसने आज हम पर रहम खाकर हमारी बकरियों को सैराब कर दिया है। हजरत शोएब अलैहिस्सलाम ने एक शहबजादी से फरमाया की जाओ और उस नेक मर्द को मेरे पास बुला लाओ ।

चनांचे बड़ी शहबजादी चेहरे को आस्तीन से ढ़के हुए और जिस्म को छुपाए हुए बड़ी शर्म व हया से चलते हुई हजरत मुसा अलैहिस्सलाम के पास आयी और कहा की मेरे अब्बाजान आपको बुलाते हैं ताकी आपको

उजरत दे।

हजरत मुसा अलैहिस्सलाम उजरत लेने पर तो राजी न हुए मगर हजरत शोएब अलैहिस्सलाम की ज्यारत और उनकी मुलाकत चे लिए चल पड़े। उन साहबजादी से फरमाया की आप मेरे पिछे रहकर रास्ता बताती जाए।

यह आप ने पर्दे के एहतेराम से फरमाया और इसी तरह तशरिफ लाए।

जब हजरत शोएब अलैहिस्सलाम के पास पहुचे तो शोएब अलैहिस्सलाम से आपने फिरऔन का हाल और अपनी विलादत से लेकर फिरऔन के बावर्ची के मारे जाने तक सारा किस्सा सुनाया ! हजरत शोएब अलैहिस्सलाम ने फरमाया : अब फिक्र न करो । तुम जालिमो से बचकर यहाँ चले आये। अब यहाँ मेरे पास रहो।।

📕 कुरआन करिम, पारा-20, रूकू-6, खजाइनुल इरफान-548

❀मोहम्मद समीर अली❀

🌹 सबक ~

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♥ जालीम और मगरूर हाकीम अल्लाह वालो के पिछे पड़ जाते है। अल्लाह वाले परेशानियां बर्दाश्त फरमा लेते है। मगर इशाअते हक से नही रुकते। अल्लाह तआला अपने उन हक गो बंदो की हिफाजत फरमाता है।।

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!!.... मूसा अलेहिस्सलाम का तमाचा....!! ``सच्ची हिकायत`` (पोस्ट - 71) --❤️हज़रत मुसा अलेहिस्सलाम के पास जब मलक-उल-मौत हाज...
17/08/2025

!!.... मूसा अलेहिस्सलाम का तमाचा....!!
``सच्ची हिकायत`` (पोस्ट - 71)
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❤️हज़रत मुसा अलेहिस्सलाम के पास जब मलक-उल-मौत हाज़िर हुआ।
तो हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम ने मलक-उल-मौत को एक ऐसा तमाँचा मारा। के मलक-उल-मौत की आँख निकल आई। मलक-उल-मौत फौरन वापस पलटा और अल्लाह के हुज़र अर्ज़ करने लगा।
इलाही आज तो तूने मुझे एक ऐसे अपने बन्दे की तरफ भेजा है। जो मरना ही नहीं चाहता। ये देख के उसने मुझे तमाँचा मार कर मेरी आँख निकाल दी है। खुदा ने मलक-उल-मौत की वो आँख दुरस्त फरमा दी। और फरमाया मेरे बन्दे मूसा के पास फिर जाओ और बैल साथ लेते जाओ। और मूसा से कहना के अगर तुम चलना चाहते हो तो उस बैल की पुश्त पर हाथ फैरो। जितने बाल तुम्हारे हाथ के नीचे आ जाएँगे। उतने ही साल और जिन्दा रह लेना।
चुनाँचे मलक-उल-मौत बैल लेकर फिर हाज़िर हुआ। और अर्ज करने लगा।
हुज़र ! उसकी पुश्त पर हाथ फेरिये। जितने बाल आपके हाथ के नीचे आजाएँगे इतने साल आप और जिन्दा रह लें। हज़त मूसा अलेहिस्सलाम ने फरमाया और उसके बाद फिर तुम आ जाओगे?
अर्ज किया। हाँ! तो फरमाया । फिर अभी ले चलो।
📚(मिश्कात शरीफ सफा 499)
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पोस्ट क्रिएटर :- मोहम्मद समीर अली
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❤️सबक:- अल्लाह के नबियों की ये शान है के चाहें तो मलक-उल-मौत को भी तमाँचा मार दें। और उसकी आँख निकाल दें। और नबी वो होता है जो मरना चाहे तो मलक-उल-मौत करीब आता है और अगर ना मरना चाहे तो मलक-उल-मौत वापस चला जाता है। हालाँके अवाम की मौत उस और के मिसदाक होती है के

“लाई हयात आए क्ज़ा ले चली चले”
“अपनी खुशी ना आए ना अपनी खुशी चले”

!!.... मूसा अलैहिस्सलाम का मुक्का.......!!! ``सच्ची हिकायत`` (पोस्ट - 70) -❤️हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम जब तीस बरस के हो गए।...
16/08/2025

!!.... मूसा अलैहिस्सलाम का मुक्का.......!!!

``सच्ची हिकायत`` (पोस्ट - 70)

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❤️हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम जब तीस बरस के हो गए। तो एक दिन फिरऔन के महल से निकल कर शहर में दाखिल हुए तो आपने दो आदमी आपस में लड़ते झगड़ते देखा। एक तो फ्रिऔन का बावर्ची था और दूसरा हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम की कौम यानी बनी इस्राईल में से था। फ्रिऔन का बावर्ची लकड़ियों का गठ्ठा उस दूसरे आदमी पर लाद कर उसे हुक्म दे रहा था। के वो फिरऔन के बावर्ची खाने तक वो लकड़ियाँ ले चले हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम ने, ये बात देखी तो फिरऔन के बावर्ची से फरमाया। उस गरीब आद‌मी पर जुल्म ना कर लेकिन वो बाज़ ना आया। और बद ज़बानी पर उतर आया।

हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम ने उसे एक मुक्का मारा। तो उस एक ही मुक्के से उस फिरऔन का दम निकल गया। और वो वहीं ढेर हो गया।

📚(कुरआन करीम पारा 20 रूकू 5 रूह-उल-बयान सफा 925 जिल्द 2)

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Post by :- Mohammed Sameer Ali

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❤️सबक :- अमंबियाकिराम अलेहिमुस्सलाम मजलूमों के हामी बनकर तशरीफ लाए हैं और ये भी मालूम हुआ के नबी सीरत व सूरत और ज़ोर व ताक़त में भी सबसे बुलंद व बाला होता है और नबी का मुक्का एक इम्तियाज़ी मुक्का था। के एक ही मुक्के से ज़ालिम का काम तमाम हो गया।

!!......... फिरऔन की बेटी........!! ``सच्ची हिकायत`` (पोस्ट - 69)-----💚फिरऔन की एक बेटी थी। फलबहरी का मर्ज़ था। फिरऔन ने...
14/08/2025

!!......... फिरऔन की बेटी........!!
``सच्ची हिकायत`` (पोस्ट - 69)
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💚फिरऔन की एक बेटी थी। फलबहरी का मर्ज़ था। फिरऔन ने उसका बड़े बड़े अत्तिबआ से इलाज कराया। मगर वो अच्छी ना हुई। आख़िर फिरऔन ने काहिनों से उसके मुतअल्लिक पूछा। तो उन्होंने बताया के उसको शिफा दरया से मिलेगी। चुनाँचे एक दिन फिरऔन और उसकी बीबी आसिया और 'फ्रिऔन की बेटी, दरया के किनारे बैठे थे के हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम का संदूक बहता हुआ आया। जब ये संदूक फिरऔन के सामने लाया गया। और खोला। तो मूसा अलैहिस्सलाम नज़र आए जो अपने अंगूठे को चूस रहे थे। फिरऔन की बीबी आसिया को, मूसा अलैहिस्सलाम बड़े प्यारे लगे और उसने उन्हें उठा लिया। और फिरऔन की बेटी ने मूसा अलैहिस्सलाम को देखा तो उसे भी ये नूरानी बच्चा बड़ा प्यारा लगा। और उसने आपके दहन मुबारक की थूक मुबारक लेकर अपने बदन पर मल ली। इस थूक मुबारक के असर से फिरऔन की बेटी का फलबहरी का मर्ज़ फौरन जाता रहा।
📚(नुजहत-उल-मजालिस सफा 208 जिल्द 2)
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Post by :- Mohammed Sameer Ali
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❤️ सबक:- अम्बियाक्राम की थूक मुबारक भी दाफओ-उल-बलाने होती है। फिर जिन लोगों की थूक बीमारी के खतरनाक जरासीम का घर हो वो उन नफूस कुदसिया की मिस्ल कैसे हो सकते हैं?

🥀फिरऔन का ख़्वाब...... ``सच्ची हिकायत `` (पोस्ट - 68) ----▪️फिरऔन ने एक बार ख़्वाब में देखा। के उसका तख़्त औंधा होकर गिर...
13/08/2025

🥀फिरऔन का ख़्वाब......

``सच्ची हिकायत `` (पोस्ट - 68)

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▪️फिरऔन ने एक बार ख़्वाब में देखा। के उसका तख़्त औंधा होकर गिर गया है। फिरऔन ने काहिनों से उसकी तअबीर पूछी। तो उन्होंने बताया के एक ऐसा बच्चा पैदा होगा। जो तेरी हकूमत के ज़वाल का बाइस होगा। फिरऔन को उस बात की फिक्र हुई और उसने बच्चों को मरवाना शुरू कर दिया। जो बच्चा किसी के हाँ पैदा होता। वो उसे मरवा देता था। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम जब पैदा हुए तो अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम की माँ के दिल में ये बात डाली। के उसे दूध पिलाओ और जब कोई खतरा देखो, तो उसे दरया में डाल दो। चुनाँचे चन्द रोज़ हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम की माँ ने हज़रत को दूध पिलाया। इस अर्से में हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम ना रोते थे ना उनकी गोद में हरकत करते थे। और ना आपकी बहन के सिवा किसी को आपकी विलादत का इल्म था। फिर जब तीन माह का अर्सा गुज़र गया। तो मूसा अलेहिस्सलाम की माँ को कुछ ख़तरा महसूस हुआ। तो खुदा ने दिल में ये बात डाल दी। के अब तो मूसा को एक संदूक में बन्द करके दरया. में डाल दे। और कोई फिक्र ना कर। हम उसे फिर तुम्हारी गोद में ले आएँगे। चुनाँचे उम्मे मूसा ने एक संदूक तैयार किया। और उसमें रूई बिछाई और मूसा अलेहिस्सलाम को उसमें रख कर संदूक बन्द कर दिया। और ये संदूक दरयाऐ नील में डाल दिया। उस दरया से एक बड़ी नहर निकल कर फ्रिऔन के महल में गुज़रती थी। फिरऔन मजे अपनी बीबी आसिया के नहर के किनारे बैठा था। जब एक संदूक नहर में आते देखा। तो उसने कनीज़ों और गुलामों को संदूक निकालने का हुक्म दिया वो संदूक निकाल कर सामने लाया गया। खोला। तो उसमें एक नरानी शक्ल फरजन्द जिसकी

निशानी से वजाहत व इक्बाल के आसार नमूदार थे। नजर आया। देखते ही फिरऔन के दिल में ऐसी मोहब्बत पैदा हुई। के वो वारिफ्ता हो गया। लेकिन कौम के लोगों ने उसे वरगलाया। और कहा के मुमकिन है। यही वो बच्चा हो। जिसने आपकी हकूमत को बर्बाद करना है।

चनाँचे फिरऔन आपके कत्ल पर आमादा हुआ। तो फिरऔन की बीबी आसिया जो बडी नेक खातून थी। कहने लगी के ये बच्चा मेरी और तेरी आँख की ठंडक है। इसे कत्ल ना कर। क्या मालूम ये किस सरजमीन से बहता हुआ आया है। और तझे जिस ऊँचे से अन्देशा है वो तो इसी मुल्क के बनी इस्राईल से बताया गया है। आसिया की ये बात फ्रिऔन ने मान ली और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम फिरऔन के महल में ही रहने लगे। और फिरऔन ने आपको दूध पिलाने के लिए दाईयाँ बुलाई। मगर हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम किसी दाई का दूध ना पीते थे। अब फ्रिऔन को फिक्र हुई। के इस बच्चे के लिए कोई ऐसी दाई मिले। जिसका ये दूध पीने लगे। इधर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की माँ अपने बच्चे की जुदाई में बेकार थी। और मूसा अलेहिस्सलाम की बहन जिसका नाम मरयम था। वो आपके तजस्सुस करने और मालूम करने के संटूक कहाँ पहुंचा और आप किस के हाथ आए आपकी तलाश में थी हत्ता के पता चलाते चलाते वो फ्रिऔन के महल में पहुँच गई और जब मालूम हुआ के मेरा भाई इसी महल में है। और किसी दाई का दूध नहीं पी रहा। तो फिरऔन से कहने लगी। क्या मैं एक ऐसी दाई की खबर दूं? जिसका दूध ये बच्चा ज़रूर पियेगा। फिरऔन ने कहा। हाँ ज़रूर ऐसी दाई को लाओ। चुनाँचे वो उसकी ख्वाहिश पर अपनी वालिदा को बुला लाई। और जब वो आई तो मूसा अलैहिस्सलाम फिरऔन की गोद में थे। और दूध के लिए रो रहे थे। फिरऔन आपको बहला रहा था। जब आपकी वालिदा आई। और आपने उनकी खुश्बू पाई। तो आप चुप हो गए। और अपनी वालिदा का दूध पीने लगे फिरऔन ने पूछा। तू इस बच्चे की कौन है? जो उसने किसी दाई का दूध नहीं पिया और तेरा झट पी लिया है। उन्होंने कहा मैं एक पाक साफ औरत हूँ मेरा दूध खुशगवार है। जिस्म खुश्बूदार है। इसलिए जिन बच्चों के मिकज में नफासत होती है। वो और औरतों का दूध नहीं पीते हैं। मेरा दूध पी लेते हैं। फिरऔन ने बच्चा उन्हें दिया। और दूध पिलाने पर उन्हें मुर्कार करके फरजन्द्र को अपने घर ले जाने की इजाजत दे दी।

चनाँचे आप मुसा अलैहिस्सलाम को घर ले आई। और अल्लाह तआला का ये वादा पूरा हो गया के हम उसे फिर तम्हारी गोल में लाएँगे।

इस तरह मसा अलैहिस्सलाम

का अपने घर ले जाने की इजाजत दे दी। चुनाँचे आप मूसा

की परवरिश खुद फिरऔन ही के जरिये होने लगी। आप दूध पीने के जमाने तक अपनी वालिदा के पास रहे। उस जमाने में फिरऔन उन्हें एक अशर्फी रोज़ाना देता रहा। दूध छोड़ने के बाद आप मूसा अलेहिस्सलाम को फिरऔन के पास ले आईं और आप वहाँ परवरिश पाते रहे।

📚(कुरआन करीम प० 16 रूकू 11 प० 20 रूकू 4 खज़ायन-उल-इर्फान सफा 444, सफा 544)

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🌹[पोस्ट क्रिएटर:- मोहम्मद समीर अली] 🌹

``

❤️सबक:- अल्लाह तआला बड़ी कुद्रत और बेनियाज़ी का मालिक है। के मूसा अलैहिस्सलाम को खुद फिरऔन ही के महल में रख कर उनकी परवरिश फरमाई और मूसा अलेहिस्सलाम ने अपने बचपन में किसी दाई का दूध ना पी कर, और अपनी माँ को पहचान कर उन्हीं का दूध पी कर ये बता दिया के नबी बचपन में भी ऐसा इल्मो इर्फान रखता है। जिससे अवाम महरूम होते हैं। अम्बिया को अपनी मिस्ल बशर कहने वालों में से अगर किसी को बचपन में कुतिया के दूध पर भी डाला जाए। तो वो उस कुतिया का भी दूध पीना शुरू कर देगा। मगर नबी की शान इल्म ये है। के वो बचपन में अपनी माँ के सिवा किसी दूसरी औरत का भी दूध नहीं पीता फिर अम्बिया की मिस्ल होने का दावा करना किस कद्र जहालत की बात है?

☆हर वक़्त बा वुज़ु रहने के 7 फ़ज़ाइल...... -- ❤️अहमद राजा खान फरमाते है : बाज़ आरिफिन ने फ़रमाया : जो हमेशा बा वुज़ु रहे अल्लाह...
13/08/2025

☆हर वक़्त बा वुज़ु रहने के 7 फ़ज़ाइल......

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❤️अहमद राजा खान फरमाते है : बाज़ आरिफिन ने फ़रमाया : जो हमेशा बा वुज़ु रहे अल्लाह उसे को 7 फ़ज़ीलत से मुशर्रफ फरमाएगा

① मलाइका उसकी सोहबत में रगबत करे

② कलम उस की नेकिया लिखता रहे

③ उस के आज़ा तस्बीह करे

④ उस से तकबिरे उला फौत न हो

⑤ जब सोये अल्लाह कुछ फ़रिश्ते भेज के जिन्नों ईन्स के शर से उसकी हिफाज़त करे

⑥ सकराते मौत उस पर आसान हो

⑦ जब तक वुज़ु हो अमाने इलाही में रहे

📚(फतावा रज़विय्या मुखर्रज, जी. 1, स. 702)

📚(नमाज़ के अहकाम, स. 6-7)



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▪️बेटे की कुर्बानी...... ``सच्ची हिकायत`` (पोस्ट 67)----❤️हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने एक रात ख़्वाब में देखा। के कोई श...
11/08/2025

▪️बेटे की कुर्बानी......

``सच्ची हिकायत`` (पोस्ट 67)

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❤️हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने एक रात ख़्वाब में देखा। के कोई शख्स गैब से आवाज़ देता है। और कहता है। ऐ इब्राहीम! तुम्हें खुदा का हुक्म है के अपने बेटे को खुदा की राह में जिबह कर दो।

चूंके नबियों का ख़ाब सच्चा और अज़ क्बौल वही होता है। इसलिए आप अपने मेहबूब बेटे हज़रत इसमाईल अलेहिस्सलाम को अल्लाह की राह में कुर्बान करने को तैयार हो गए।

चूंके हज़रत इसमाईल अभी कम उम्र थे। इसलिए आपने उनसे सिर्फ इतना कहा। के बेटा रस्सी और एक छुरी लेकर मेरे साथ चलो।

चुनाँचे अपने बेटे को लेकर आप एक जंगल में पहुँचे। हज़रत इसमाईल ने पूछा। अब्बा जान! आप ये छुरी और रस्सी लेकर क्यों चलते हैं। फरमाया आगे चलकर एक कुर्बानी ज़िबह करेंगे।

फिर आगे चल कर हज़रत इब्राहीम अलेहिस्सलाम ने साफ साफ बयान फरमा दिया। और कहा! बेटा मैं तो अल्लाह की राह में तुझे ही जिबह करने यहाँ आया हूँ। मैंने ख़्वाब में देखा है के तुझे ज़िबह कर रहा हूँ। बेटा ये अल्लाह की मर्जी है। बता तेरी मर्जी क्या है?

हज़रत इसमाईल ने जवाब दिया।

अब्बा जान ! जब अल्लाह की यही मर्जी है। तो फिर मेरी मर्जी का क्या सवाल? आपको जिस बात का हुक्म हुआ है। आप वो कीजिए। इंशाअल्लाह मैं सब्र करके दिखा दूंगा।

बेटे का ये जुराअत आमेज़ जवाब सुनकर हज़रत इब्राहीम अलेहिस्सलाम बड़े खुश हुए और अपने बेटे को अल्लाह की राह में जिबह करने पर तैयार हो गए। और जब बाप ने अपने बेटे को माथे के बल लिटाया और गर्दन पर छूरी रखी और उस चलाया तो छुरी ने गर्दने इसमाईल को बिलकुल ना काटा। आपने और जोर से छुरी चलाई। तो आवाज आई बस ऐ इब्राहीम! तुम हुक्म ए इलाही की तअमील कर चुके ।

और इस सख्त इम्तिहान में पूरे उतरे। आपने मुड़ कर देखा। तो एक दुबा पास ही खड़ा था। और आप से कह रहा था। हज़रत । इसमाईल की जगह मुझे जिबह कीजिए। और उन्हें हटा दीजिए।

चुनाँचे हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने उस दुबे को जिबह फरमा दिया। और हज़रत इसमाईल उठ बैठे और इस इम्तिहान में दोनों बाप बेटे, अलेहिमा अस्सलाम, कामयाब हो गए।

📚(कुरआन करीम प० 23, कतुब तफासीर)

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पोस्ट क्रिएटर- #मोहम्मद_समीर_अली

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💚सबकः अल्लाह वाले अल्लाह की राह में सब कुछ कुर्बान करने पर तैयार हो जाते हैं। हत्ता के औलाद भी। फिर आज जो लोग अल्लाह की राह में एक बकरा भी देने में हज़ार हीलो हुज्जत करते हैं। उनका खुदा से क्या तअल्लुक ?

🥀जिब्राईल की मुशक्कत... ``सच्ची हिकायत ``(पोस्ट 66)---❤️हुजूर सल-लल्लाहो तआला ने एक मर्तबा जिब्राईल से पूछा। ऐ जिब्राईल ...
11/08/2025

🥀जिब्राईल की मुशक्कत...
``सच्ची हिकायत ``(पोस्ट 66)
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❤️हुजूर सल-लल्लाहो तआला ने एक मर्तबा जिब्राईल से पूछा। ऐ जिब्राईल कभी तुझे आसमान से मुशक्कत के साथ बड़ी जल्दी और फौरन भी ज़मीन पर उतरना पड़ा है? जिब्राईल ने जवाब दिया। हाँ या रसूल अल्लाह! चार मर्तबा ऐसा हुआ है के मुझे फीअलफोर बड़ी सरअत के साथ ज़मीन पर उतरना पड़ा।

✿हुजूर ने फरमाया......
वो चार मर्तबा किस किस मौके पर?

जिब्राईल ने अर्ज किया।

●1) एक तो जब इब्राहीम अलेहिस्सलाम को आग में डाला गया। तो मैं उस वक़्त अशें इलाही के नीचे था। मुझे हुक्म इलाही हुआ के जिब्राईल ! खलील के आग में पहुँचने से पहले पहले फौरन मेरे खलील के पास पहुंचो। चुनाँचे मैं बड़ी सरअत के साथ फौरन ही हज़रत खलील के पास पहुँचा।

●2) दूसरी बार जब हज़रत्त इसमाईल अलेहिस्सलाम की गर्दने अतहर पर छुरी रख दी गई तो मुझे हुक्म हुआ के छुरी चलने से पहले ही ज़मीन पर पहुँचूं। और छुरी को उल्टा दूं। चुनाँचे मैं छुरी के चलने से पहले ही जमीन पर पहुँच गया। और छुरी को चलने ना दिया।

●3) तीसरी मर्तबा जब हज़रत यूसुफ अलेहिस्सलाम को भाईयों ने कुँए में गिराया तो मुझे हुक्म हुआ के मैं यूसुफ अलेहिस्सलाम के कुँए की तह तक पहुँचने से पहले पहले ज़मीन पर पहुँचूं। और कुँए से एक पत्थर निकाल कर हज़रत यूसुफ को उस पत्थर पर बाआराम बैठा हूं। चुनाँचे मैंने ऐसा ही किया।

●4) और चौथी मर्तबा या रसूल अल्लाह जबके काफिरों ने हुजर का दनदाने मुबारक शहीद किया। तो मुझे हुक्म इलाही हुआ के मैं फौरन ज़मीन पहुँचूं और हुजूर के दनदाने मुबारक का खून मुबारक ज़मीन पर ना गिरने दूं और ज़मीन पर गिरने से पहले ही मैं वो खून मुबारक अपने हाथों पर ले लूं। या रसूल अल्लाह! खुदा ने मुझे फ्रमाया था। जिब्राईल! अगर मेरे मेहबूब का ये खून ज़मीन पर गिर गया। तो क्यामत तक ज़मीन में से ना कोई सब्ज़ी उगेगी। और ना कोई दरख्त। चुनाँचे मैं बड़ी सरअत के साथ जमीन पर पहुँचा।
और हजर के खून मुबारक को अपने हाथ पर ले लिया।
📚(रूह-उल-बयान सफा 411 जिल्द 3)
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POST Creater :-
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❤️सबक:- अम्बिया इक्क्राम अलेहिमुस्सलाम की बहुत बड़ी बुलंद शान है। के जिबाईल अमीन भी उनका खादिम है। और ये भी मालूम हुआ के करोड़ों पहमों मील का तवील सफर अल्लाह वाले पल भर में तय कर लेते हैं।

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