श्री खेरेश्वर धाम मंदिर, हरिगढ़

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श्री खेरेश्वर धाम मंदिर, हरिगढ़ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्

|| श्री शिवाय नमस्तुभ्यं ||
आप सभी का श्री खेरेश्वर धाम मंदिर, अलीगढ़ में स्वागत है। खेरेश्वर धाम मंदिर एक ऐतिहासिक धर्मस्थल है, जिसका इतिहास द्वापर काल से जुड़ा हुआ है । साक्षात भगवान श्री कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम के साथ सिद्धपीठ खेरेश्वर धाम आए थे ।यह मंदिर भगवान शिव के लिए समर्पित है और अधिक जानकारी के लिए चैनल पर बने रहें ।

14/07/2025

सावन का पहला सोमवार श्री खेरेश्वर धाम मंदिर, अलीगढ़ में भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस पावन दिन भोलेनाथ की पूजा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।
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11/07/2025
20/03/2025

Har har mahaadev SHIV KA DAWAR श्री खेरेश्वर धाम मंदिर, हरिगढ़ Shree Somnath Temple Shri Khereshwar Mahadev

08/03/2024

ॐ नमः शिवाय सभी भक्तों को महा शिवरात्रि बहुत बहुत शुभकामनाये हर हर महादेव

शिव जी की महान रात  श्री खेरेश्वर धाम मंदिर, हरिगढ़ आपके लिए प्रतिदिन लाभकारी जानकारी लाएगा, जो आपके ज्ञान और विकास में ...
01/03/2024

शिव जी की महान रात श्री खेरेश्वर धाम मंदिर, हरिगढ़ आपके लिए प्रतिदिन लाभकारी जानकारी लाएगा, जो आपके ज्ञान और विकास में सहायक होगा। 🌟🔱
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गाय से निकला ताजा दूध भगवान शिव को समर्पित किया जाता है। इस कार्य के माध्यम से, व्यक्ति के मस्तिष्क और आत्मा को अच्छाई, करुणा और नेक विचारों का पोषण मिलता है। 🙏🌸

लिली के सफेद दूध में गुण होते हैं जो मानव के लिए फायदेमंद होते हैं। जब हम इसे शिवलिंग पर चढ़ाते हैं, तो हम प्रार्थना करते हैं कि इस दूध के गुण हमें शारीरिक, आध्यात्मिक और मानसिक रूप से फायदा पहुंचाएं। 🕉️💫

आपकी इस उत्तम प्रार्थना को सुनकर, आपके जीवन में भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद सदैव बना रहे। 🙏🌟
"नमस्ते सभी! @श्री खेरेश्वर धाम मंदिर, हरिगढ़ पेज को बनाया है ताकि हम सभी धार्मिकता, भक्ति और आध्यात्मिकता के बारे में साझा कर सकें। इस पेज पर हम भगवान शिव, माँ पार्वती, भगवान राम, और उनकी भक्ति के विषय में अधिक जानकारी और प्रेरणा साझा करेंगे। यहाँ आपका स्वागत है और हमें खुशी होगी जब आप हमारे साथ जुड़ेंगे। कृपया हमारे पेज को लाइक और फॉलो करें ताकि आप हमारे साथ जुड़े रहें। धन्यवाद!"🙏🙏🙏🙏 Shri Ram Mandir Devghar Shiva Temple, Jharkhand Hanuman Chalisa Everyone Shri Khereshwar Mahadev Ram Mandir Aayodhya Ram bhakt Shiv Temple
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भगवान शिव ने ‘राम-नाम’ कण्ठ में क्यों धारण किया है!!!! #भगवानशिव  #रामनाम  #रामभक्ति  #ध्यान  #मन्त्र  #शिवराम  #हिन्दूध...
28/02/2024

भगवान शिव ने ‘राम-नाम’ कण्ठ में क्यों धारण किया है!!!!
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त्रिलोकी में यदि श्रीराम का कोई सबसे बड़ा भक्त या उपासक है तो वे हैं भगवान शिव, जो ‘राम-नाम’ महामन्त्र का निरन्तर जप करते रहते हैं । रामायण के सबसे प्राचीन आचार्य भगवान शिव ही हैं । उन्होंने राम-चरित्र का वर्णन सौ करोड़ श्लोकों में किया । शिवजी ने देवता, दैत्य और ऋषि-मुनियों में इन श्लोकों का समान बंटबारा किया तो हर एक के हिस्से में तैंतीस करोड़, तैंतीस लाख, तैंतीस हजार, तीन सौ तैंतीस श्लोक आए । एक श्लोक शेष बचा । देवता, दैत्य और ऋषि—ये तीनों एक श्लोक के लिए लड़ने-झगड़ने लगे । यह श्लोक बत्तीस अक्षर वाले अनुष्टुप छन्द में था । शिवजी ने देवता, दैत्य और ऋषि-मुनियों—प्रत्येक को दस-दस अक्षर दे दिए । तीस अक्षर बंट गए और दो अक्षर शेष रह गए । तब भगवान शिव ने देवता, दैत्य और ऋषियों से कहा—‘मैं ये दो अक्षर मैं किसी को भी नहीं दूंगा। इन्हें मैं अपने कण्ठ में रखूंगा।’ ये दो अक्षर ‘रा’ और ‘म’ अर्थात् ‘राम-नाम’ हैं । यह ‘राम-नाम’ रूपी अमर-मन्त्र शिवजी के कण्ठ और जिह्वा के अग्रभाग में विराजमान है। ऐसा माना जाता है कि सती के नाम में ‘र’कार अथवा ‘म’कार नहीं है, इसलिए भगवान शिव ने सती का त्याग कर दिया। जब सती ने पर्वतराज हिमाचल के यहां जन्म लिया, तब उनका नाम ‘गिरिजा’ (पार्वती) हो गया। इतने पर भी ‘शिवजी मुझे स्वीकार करेंगे या नहीं’–ऐसा सोचकर पार्वतीजी तपस्या करने लगीं। जब उन्होंने सूखे पत्ते भी खाने छोड़ दिए, तब उनका नाम ‘अपर्णा’ हो गया। ‘गिरिजा’ और ‘अपर्णा’–दोनों नामों में ‘र’कार आ गया तो भगवान शिव इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने पार्वतीजी को अपनी अर्धांगिनी बना लिया। इसी तरह शिवजी ने गंगा को स्वीकार नहीं किया परन्तु जब गंगा का नाम ‘भागीरथी’ पड़ गया, (इसमें भी ‘र’कार है) तब शिवजी ने उनको अपनी जटा में धारण कर लिया। इस प्रकार राम-नाम में विशेष प्रेम के कारण भगवान शिव दिन-रात राम-नाम का जप करते रहते हैं।
तुम्ह पुनि राम राम दिन राती।
सादर जपहु अनंग आराती।।
भगवान शिव को राख और मसान इसलिए प्रिय हैं क्योंकि राख में ‘रा’ और मसान में ‘म’ अक्षर है जिनको जोड़ देने से ‘राम’ बन जाता है और भगवान शिव का राम-नाम पर बहुत स्नेह है। कुछ लोगों का कहना है कि भगवान शिव द्वारा हलाहल विष का पान करना पार्वतीजी के स्थिर सौभाग्य के कारण हुआ और कुछ अन्य लोगों के अनुसार यह भगवान शिव के कण्ठ में राम-नाम है, उसी के प्रभाव के कारण संभव हुआथा। भगवान श्रीराम का नाम सम्पूर्ण मन्त्रों का बीज-मूल है, वह मेरा जीवन है, मेरे सर्वांग में पूर्णत: प्रविष्ट हो चुका है, अत: अब हलाहल विष हो, प्रलय की अग्नि की ज्वाला हो या मृत्यु का मुख ही क्यों न हो, मुझे इनका किंचित भय नहीं है।
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koi kahe tu Kashi me hai..🙏🙏            😍नित्य दर्शन के श्रृंगार दर्शन। महादेव को चाहने वाले फॉलो करें हर-हर महादेव   'M...
27/02/2024

koi kahe tu Kashi me hai..🙏🙏 😍नित्य दर्शन के श्रृंगार दर्शन। महादेव को चाहने वाले फॉलो करें हर-हर महादेव

'Mere Baba' sung Nautiyal, Everyone श्री खेरेश्वर धाम मंदिर,अलीगढ

माघ पूर्णिमा 24 फरवरी 2024 को आ रही है। यह पूर्णिमा हर महीने की तरह ही विशेषता से मनाई जाती है, लेकिन माघ मास की पूर्णिम...
24/02/2024

माघ पूर्णिमा 24 फरवरी 2024 को आ रही है। यह पूर्णिमा हर महीने की तरह ही विशेषता से मनाई जाती है, लेकिन माघ मास की पूर्णिमा को धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्व दिया जाता है। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है।
पौराणिक कथा में एक नगर में धनेश्वर नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी रूपवती, पतिव्रता और सर्वगुण संपन्न थीं। बस दुख था तो सिर्फ़ इस बात का, कि उनकी कोई संतान नहीं थी। यही कारण था, कि वो दोनों बहुत चिंतित रहते थे। एक बार उस नगर में एक महात्मा आए। वो नगर के सभी लोगों से दान लेते थे, लेकिन धनेश्वर की पत्नी जब भी उन्हें दान देने जाती, तो वो उसे लेने से मना कर देते थे। एक दिन धनेश्वर ने उन महात्मा के पास जाकर पूछा- हे महात्मन्! आप नगर के सभी लोगों से दान लेते हैं, लेकिन मेरी पत्नी के हाथ का दान क्यों नहीं स्वीकार करते? हमसे अगर कोई भूल हुई हो तो हम ब्राह्मण दंपत्ति आपसे क्षमा याचना करते हैं।

महात्मा बोले- नहीं विप्र! तुम तो बहुत ही विनम्र और हमेशा आदर-सत्कार करने वाले ब्राह्मण हो! तुमसे भूल तो कदापि नहीं हो सकती। महात्मा की बात सुनकर, धनेश्वर हाथ जोड़कर बोला- हे मुनिवर! फिर आख़िर क्या कारण है? कृपया हमें उससे अवगत कराएं। इसपर महात्मा बोले- हे विप्र! तुम्हारे कोई संतान नहीं है। और जो दंपत्ति निःसंतान हो, उसके हाथ से भिक्षा लेना, अधम या पापी के हाथ से भिक्षा ग्रहण करने के समान है! तुम्हारे द्वारा दिया गया दान लेने के कारण मेरा पतन हो जायेगा! बस यही कारण है, कि मैं तुम दंपत्ति से दान स्वीकार नहीं करता।

महात्मा के ये वचन सुनकर, धनेश्वर उनके चरणों में गिर पड़ा, और विनती करते हुए बोला- हे महात्मन्! संतान ना होना ही तो हम पति-पत्नी के जीवन की सबसे बड़ी निराशा है। यदि संतान प्राप्ति का कोई उपाय हो, तो कृपया उसे हमें बताएं।

महात्मा ने ब्राह्मण को आश्वत्थ वृक्ष के निकट ले जाने का आदेश दिया, और फिर कहा- तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों मिलकर उस वृक्ष के निचे ध्यान लगाओ।

धनेश्वर ने अपनी पत्नी के साथ वहाँ जाकर ध्यान लगाने लगे। कुछ दिन बाद उन्हें एक सुन्दर संतान की प्राप्ति हुई, जिसे उन्होंने धनेश्वरी नाम रखा। इस प्रकार धनेश्वर के पुत्र और पुत्री की प्राप्ति हो गई। #पौराणिककथा
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