11/03/2026
||श्री गणेशाय नमः||
"अश्वमेध सहस्त्राणि वाजपेय शतानि च |
पार्थिवस्य कलां नार्हन्ति षोडशीम् ||"
अर्थ:-
हजारों अश्वमेध यज्ञ और सैकड़ों वाजपेय यज्ञ करने से जो पुण्य प्राप्त होता है,
वह पार्थिव शिवलिंग के पूजन से मिलने वाले पुण्य के सोलहवें हिस्से (एक अंश) के बराबर भी नहीं है।
आप सभी से विनम्र निवेदन से है की इस ऐतिहासिक महायज्ञ में सहभागी बनकर धर्म लाभ अर्जित करें और सपरिवार प्रतिदिन कुछ समय निकालकर शिवलिंग निर्माण, महारुद्राभिषेक एवं भागवत कथा का श्रवण कर अपने जीवन को पुण्यमय बनाएं।
हर हर महादेव
जय श्री कृष्ण