11/09/2026
AI से 80s का रेट्रो लुक बनवाना पड़ सकता है भारी, फोटो अपलोड करने से पहले पढ़ें ये 6 जरूरी बातें
डीपफेक का खतरा
80s वाला लुक पाने के लिए आप अपनी जिस असली फोटो को AI को देते हैं, उसका इस्तेमाल करके AI आपकी ही शक्ल वाला एकदम असली लगने वाले फर्जी वीडियो या फोटो, जिसे डीपफेक भी कहा जाता है, बना सकता है। इससे आपकी पहचान चोरी हो सकती है, जो काफी खतरनाक हो सकता है।
तस्वीर पर आपका कंट्रोल खत्म होना
इस बारे में बेहद कम लोग ही जानते हैं कि एक बार जब आप कोई फोटो इंटरनेट के AI जनरेटर पर अपलोड कर देते हैं, तो उस पर आपका कोई अधिकार नहीं रह जाता। सिस्टम आपकी फोटो से आपकी लोकेशन और पर्सनल जानकारी चुरा सकता है। इससे आपकी फोटो का गलत यूज होने का खतरा बढ़ जाता है।
असली-नकली में फर्क करना मुश्किल
AI टूल्स के इस्तेमाल से बनने वाली तस्वीरों का एक और नुकसान यह है कि जैसे-जैसे AI से बनी तस्वीरें आम हो रही हैं, असली और नकली तस्वीरों के बीच फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। इसकी वजह से विजुअल कंटेंट पर निर्भर दूसरे उद्योगों पर बुरा असर पड़ सकता है।
हो सकता है आपकी तस्वीरों का इस्तेमाल
आपने भले ही बस मनोरंजन के लिए किसी एआई का ऐप इस्तेमाल किया हो, लेकिन ये टेक कंपनियां कई बार आपकी तस्वीर का इस्तेमाल विज्ञापनों या अपने सिस्टम को और स्मार्ट बनाने में कर सकती हैं। वह भी आपकी परमिशन लिए के बिना।
प्राइवेसी को खतरा
जब आप किसी AI ऐप को अपनी फोटो देते हैं, तो आप अनजाने में अपने चेहरे की बारीकियां (बायोमेट्रिक डेटा) उनके सर्वर पर सेव कर देते हैं। ये कंपनियां आपका डेटा थर्ड-पार्टी को बेच सकती हैं, जिससे आपकी प्राइवेसी हमेशा के लिए खतरे में पड़ सकती है।
भेदभाव को बढ़ावा देना
कई बारे AI सिस्टम समाज के पुराने और गलत विचारों को बढ़ावा देता है। इसकी वजह से फोटो बनाते समय ये टूल्स रंग-रूप या नस्ल के आधार पर भेदभाव करते हैं और सुंदरता के गलत पैमाने तय करते हैं, जो समाज के लिए हानिकारक हो सकता है।