17/07/2020
Om namah shivaya,,,,,,,,,,,,,,,सहस्त्रलिंग: नदी की तेज धार से होता है शिवलिंगों का अभिषेक..
पूरी दुनिया में धर्म से जुड़े बहुत से रहस्य और विचित्र स्थल होते हैं। कर्नाटक में भी ऐसा ही स्थल बना हुआ है जिसे विचित्र तो नहीं कह सकते हैं लेकिन अद्भुत जरूर कहा जा सकता है क्योंकि यहां पर नदी के किनारे आपको हजारों शिवलिंग के दर्शन एक साथ होते हैं। जिनके दर्शन करना किसी भी भक्त को रोमांचित कर सकता है।
सहस्त्रलिंग, सिरसी
कर्नाटक के सिरसी से 14 किमी दूर बसा है सहस्त्रलिंग स्थल। इस जगह की बहुत अधिक धार्मिक आस्था है। क्योंकि यहां शाल्मला नदी के तट पर करीब एक हजार शिवलिंग और उसके साथ ही पत्थरों पर उकेरे हुए नंदी यानी कि बैल की प्रतिमा के दर्शन होते हैं
इतिहास है प्राचीन
इतिहास के अनुसार इन शिवलिंगों का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के राजा सदाशिवराय ने करवाया था। इस तट पर आज भी महाशिवरात्रि के समय बहुत ही भव्य मेले का आयोजन किया जाता है
इस मेले में पूरे देश से बहुत से भक्त आते हैं और इन शिवलिंग के दर्शन करते हैं। क्योंकि एक साथ हजारों शिवलिंग के दर्शन नदी के तट पर करना बहुत ही अद्भुत होता है। तट पर होने के कारण ये शिवलिंग नदी में पानी अधिक होने से बारिश के मौसम में डूब जाते हैं।
कंबोडिया में भी है ऐसे ही शिवलिंग
कंबोडिया देश में भी कुछ ऐसे ही शिवलिंग के दर्शन हुए हैं। यह स्थल अंगकोरवाट से 25 किमी दूर बने है। लेकिन यहां तक आम आदमी का पहुंचना थोड़ा मु्श्किल है क्योंकि इस क्षेत्र को जंगली वन्य क्षेत्र घोषित किया गया है। नदी के किनारे बने हुए इन शिवलिंग की खोज 1969 में की गई थी जो कि हजारों साल पुराने है ।
भारतवर्ष में इस प्रकार की वास्तु कला एवं शिल्प कला पिछले हजारों साल से चली आ रही है जिसमें पहाड़ों को काटकर मूर्तियां मंडप मंदिर बनाए जाते हैं इसी तरीके से आप कंबोडिया इंडोनेशिया एवं गोवा में भी समुंदर एवं नदी के किनारे मूर्तियां एवं शिवलिंग देख सकते हैं जो आज भी पूरे वैभव के साथ बने हुए हैं