Pramanad ji Maharaj

Pramanad ji Maharaj श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज वृंदावन के पूजनीय संत और राधा वल्लभ संप्रदाय के उपदेशक हैं, जो राधा कृष्ण के प्रति अपनी गहन भक्ति के लिए जाने जाते हैं।

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16/02/2026

वो बारात जो संसार ने नहीं देखी

16/02/2026

गुरुदेव की बात पर अविश्वास, भव-रोग का विस्तार | Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj

16/02/2026

यह एक बहुत ही आम प्रश्न है! 🙏

राम नाम जपने से निश्चित रूप से आध्यात्मिक लाभ होता है, लेकिन धन की प्राप्ति के लिए यह एकमात्र कारण नहीं है। राम नाम जपने से हमारे अंदर की शुद्धि होती है, हमारे विचार पवित्र होते हैं, और हमारी आध्यात्मिक उन्नति होती है।

धन की प्राप्ति के लिए कई अन्य कारक भी जिम्मेदार होते हैं, जैसे कि हमारे कर्म, हमारी इच्छाएं, और हमारे भाग्य। राम नाम जपने से हमारे कर्मों की शुद्धि होती है, लेकिन यह हमारे भाग्य को नहीं बदलता है।

यदि आप राम नाम जपते हैं और धन नहीं आ रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि राम नाम जपना बेकार है। इसका मतलब यह हो सकता है कि आपके भाग्य में कुछ और लिखा है, या आपके कर्मों की शुद्धि अभी बाकी है।

इसलिए, राम नाम जपते रहें, अपने कर्मों को शुद्ध रखें, और भगवान पर भरोसा रखें। यदि आपके भाग्य में धन लिखा होगा, तो वह जरूर आएगा। 🙏

क्या आप राम नाम जपने के बारे में और जानना चाहते हैं?

16/02/2026
14/02/2026

ठाकुर जी ने भक्त को थप्पड़ क्यों मारा?

Bhajan Marg by Param Pujya Vrindavan Rasik Sant Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj, Shri Hit Radha Keli Kunj, Varah Ghat, Vrindavan Dham

यदि आप गुरु और इष्ट के अधीन हैं, तो माया कभी आपको अधीन नहीं कर सकती।Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharajभजन मार्ग...
14/02/2026

यदि आप गुरु और इष्ट के अधीन हैं, तो माया कभी आपको अधीन नहीं कर सकती।
Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
भजन मार्ग | परम पूज्य वृन्दावन रसिक संत श्री हित प्रेमानन्द गोविन्द शरण जी महाराज
श्री हित राधा केली कुंज, वराह घाट, वृन्दावन धाम

सभी संबंधों में भगवान की भावना करने से मोह का नाश हो जाता है।Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharajभजन मार्ग | परम ...
13/02/2026

सभी संबंधों में भगवान की भावना करने से मोह का नाश हो जाता है।
Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
भजन मार्ग | परम पूज्य वृन्दावन रसिक संत श्री हित प्रेमानन्द गोविन्द शरण जी महाराज
श्री हित राधा केली कुंज, वराह घाट, वृन्दावन धाम

13/02/2026

नवधा भक्ति की नौवीं भक्ति है "आत्मनिवेदन" या "समर्पण"। यह भक्ति का सबसे उच्च स्तर है, जहां भक्त अपने आप को पूरी तरह से भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है।

आत्मनिवेदन का अर्थ है अपने आप को भगवान के हवाले कर देना, अपने अहंकार और इच्छाओं को त्याग देना, और भगवान की इच्छा को ही अपनी इच्छा मान लेना। यह एक प्रकार का समर्पण है, जहां भक्त भगवान के प्रति पूरी तरह से आत्मसमर्पण कर देता है।

इस भक्ति में, भक्त अपने आप को भगवान के चरणों में रख देता है और कहता है, "हे भगवान, मैं आपका हूँ, आप जो चाहें करें, मैं आपकी इच्छा को ही अपनी इच्छा मानता हूँ।"

आत्मनिवेदन की इस भक्ति में, भक्त को भगवान के साथ एकाकार होने का अनुभव होता है, और वह अपने आप को भगवान के प्रेम में लिमिटेड पाता है।

क्या आप आत्मनिवेदन की इस भक्ति के बारे में और जानना चाहते हैं? 🙏

Hey meri Ladli Main Apko bhulu nahi 🙏❤️💐 Jai Jai shree Radhe Jai shree Harivansh mere pyare sadguru dev bhagwan 💐🌹🙏 apke...
13/02/2026

Hey meri Ladli Main Apko bhulu nahi 🙏❤️💐 Jai Jai shree Radhe Jai shree Harivansh mere pyare sadguru dev bhagwan 💐🌹🙏 apke charno me koti koti naman Mere pyare sadguru dev bhagwan 💐🌹🙏

13/02/2026

भगवान से प्रेम किया तो परीक्षा निश्चित है

Bhajan Marg by Param Pujya Vrindavan Rasik Sant Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj, Shri Hit Radha Keli Kunj, Varah Ghat, Vrindavan Dham

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Virandavan
Jaipur
281121

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