01/09/2026
*ब्रह्मांड की मालकिन, जिनके सामने न तंत्र चलता है न मंत्र —*
*दस महाविद्याओं में आद्या शक्ति माँ भुवनेश्वरी देवी।*
*वही माँ आज रेनवालधाम में “माँ कुल्लू वाली” के नाम से विराजमान होकर अपने भक्तों का उद्धार कर रही हैं।*
*वर्तमान समय में रेनवाल धाम (शक्तिपीठ) सच में देवभूमि बन चुका है।*
*जो भी भक्त सच्चे मन से मैया कुल्लू वाली को पुकारता है, माँ उसकी पुकार अवश्य सुनती हैं।*
*श्री कुल्लू वाली माता जी के साथ 18 करोड़ देवी-देवता भी विराजमान हैं।*
*हिमाचल से रेनवाल की पावन धरती पर आकर माँ भुवनेश्वरी देवी सन् 2006 में अपने 108 दिव्य रूपों के साथ साक्षात रेनवाल धाम मे विराजित हुईं।*
*🌺 जय माँ कुल्लू वाली*
*📍 रेनवाल धाम शक्तिपीठ*
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*शक्तिपीठ श्री कुल्लू वाली माताजी मन्दिर किशनगढ़ रेनवाल जयपुर राजस्थान 303303*
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*यह मंदिर 10 महाविद्याओं में से एक मां भुवनेश्वरी को समर्पित है। मां भुवनेश्वरी का नाम कुल्लू वाली इस लिया हुआ कि सन 2006 में उनके भक्त नाथू राम जी द्वारा मां भुवनेश्वरी को हिमाचल राज्य के जिला कुल्लू में घराकड़ की पहाड़ियों से 80 आदमियों एवं महिलाओं द्वारा रथ में विराजमान करके राजस्थान में जिला जयपुर से 70 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव किशनगढ़ रेनवाल में लाया गया एवं देवी के एक छोटे से मंदिर की स्थापना करवाई गई। तभी से मां भुवनेश्वरी मां कुल्लू वाली के नाम से जानी जाने लगी। एवं नव निर्मित मंदिर की स्थापना सन 2023 में हुए है। यह मंदिर मां दुर्गा देवी के भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।*
*यहाँ दूर दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।*
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-Pooran Renwaldham
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