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25/12/2025

रावण परम शिव भक्त था। भगवान शिव को उसने ऐसा प्रसन्न किया कि खुद भगवान शिव ने घोषित किया कि रावण उनका परमभक्त है। रावण ने...
02/10/2025

रावण परम शिव भक्त था। भगवान शिव को उसने ऐसा प्रसन्न किया कि खुद भगवान शिव ने घोषित किया कि रावण उनका परमभक्त है। रावण ने खुद को शिव का सबसे बड़ा भक्त मान लिया। इस बात का उसे अहंकार हो गया। एक दिन जब रावण सोने की लंका में बैठा था, तो उसे ख्याल आया कि उसके आराध्य भगवान शिव कैलाश पर्वत पर रहते हैं, जहां ना कोई भवन है ना कोई महल । रावण ने तय किया कि वो भगवान शिव को लंका में लेकर आएगा, ताकि वो उनके पास भी रह सके और भगवान भी सोने की लंका का वैभव भोग सके। रावण कैलाश पर्वत की ओर चल दिया। उसने भगवान शिव को लंका ले जाने के लिए कैलाश पर्वत को उठाने की कोशिश की। एक हाथ कैलाश पर्वत के नीचे लगाया और उठाने लगा तो भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। रावण का हाथ दब गया। वो कुछ कर नहीं पा रहा था। तब उसने शिवतांडव स्तोत्र की रचना कर शिव को प्रसन्न किया। भगवान ने उसे समझाया कि वो अपनी भक्ति का अहंकार ना करे। अहंकार ही उसके विनाश का कारण हो सकता है।

रावण ने रिश्तों में समर्पण से ज्यादा अधिकार पर जोर दिया, इसलिए उसे लगभग हर रिश्ते से हाथ धोना पड़ा। भाई विभीषण छोड़ गया, कुंभकर्ण मारा गया, सारे बेटे मारे गए, पत्नियां अकेली रह गईं। रिश्तों में अधिकार Re की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि समर्पण रिश्तों को बचाता है।

16/08/2025

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31/10/2024

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धनधान्यसमृद्धि तव भवतु ।
धनतेरसस्य पुण्यदिने ते स्वस्ति।।
🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
दीपावली का ये शुभ दिन आया,
सबके लिए नई खुशियां लाया,
लक्ष्मी, गणेश विराजे आपके घर में,
और आपके परिवार पर सदा रहे
खुशियों की छाया!
🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇
आपके घर में धन की बरसात हो,
शांति का वास हो,संकटों का नाश हो,
लक्ष्मी का वास हो,

🧨🪔 #दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।"🧨🪔
🙏 #दिवाली जय लक्ष्मी माता🙏

13/06/2024
*🌿🌿क्या आप जानते है दुनिया की सबसे महँगी जमीन खरीदने वाला आदरणीय टोडरमल जी था🌿🌿**-- क्या आप जानते हैं दुनिया की सबसे महं...
26/12/2023

*🌿🌿क्या आप जानते है दुनिया की सबसे महँगी जमीन खरीदने वाला आदरणीय टोडरमल जी था🌿🌿*

*-- क्या आप जानते हैं दुनिया की सबसे महंगी ज़मीन कहां पर है ? --*

*आज तक किसी एक भूमि के टुकड़े का सबसे अधिक दाम चुकाया गया है वो हमारे भारत में ही पंजाब में स्थित सिरहिन्द में, और, विश्व की इस सबसे महंगी भूमि को ख़रीदने वाले महान व्यक्ति का नाम था दीवान टोडरमल जी*
*गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे-छोटे साहिबज़ादों बाबा फ़तह सिंह और बाबा ज़ोरावर सिंह की शहादत की दास्तान शायद आप सबने कभी ना कभी कहीं ना कहीं से सुनी होगी..... यहीं सिरहिन्द के फ़तहगढ़ साहिब में मुग़लों के तत्कालीन फ़ौजदार वज़ीर खान ने दोनो साहिबज़ादों को जीवित ही दीवार में चिनवा दिया था.*
*दीवान टोडरमल जी , जो कि इस क्षेत्र के एक धनी व्यक्ति थे और गुरु गोविंद सिंह जी एवं उनके परिवार के लिए अपना सब कुछ क़ुर्बान करने को तैयार थे। उन्होंने वज़ीर खान से साहिबज़ादों के पार्थिव शरीर की माँग की, और वह भूमि, जहाँ वह शहीद हुए थे वहीं पर उनकी अंत्येष्टि करने की इच्छा प्रकट की .... । वज़ीर खान ने धृष्टता दिखाते हुए भूमि देने के लिए एक अटपटी और अनुचित माँग रखी....*।
*वज़ीर खान ने माँग रखी कि इस भूमि पर सोने की मोहरें बिछाने पर जितनी मोहरें आएँगी वही इस भूमि का दाम होगा.......*
*दीवान टोडरमल जी ने अपने सब भंडार ख़ाली करके जब मोहरें भूमि पर बिछानी शुरू कीं तो वज़ीर खान ने धृष्टता की पराकाष्ठा पार करते हुए कहा कि मोहरें बिछा कर नहीं बल्कि खड़ी करके रखी जाएँगी ताकि अधिक से अधिक मोहरें वसूली जा सकें.......... ख़ैर.....दीवान टोडरमल जी ने अपना सब कुछ बेच-बाच कर और मोहरें इकट्ठी कीं और 78000 सोने की मोहरें देकर चार गज़ भूमि को ख़रीदा ताकि गुरु जी के साहिबज़ादों का अंतिम संस्कार वहाँ किया जा सके......*
*विश्व के इतिहास में ना तो ऐसे त्याग की कहीं कोई और मिसाल मिलती है ना ही कहीं पर किसी भूमि के टुकड़े का इतना भारी मूल्य कहीं और आज तक चुकाया गया.*

*जब बाद में गुरु गोविन्द सिंह जी को इस बारे में पता चला तो उन्होंने दीवान टोडरमल से कृतज्ञता प्रकट की और उनसे कहा कि वे उनके त्याग से बहुत प्रभावित हैं, और उनसे इस त्याग के बदले में कुछ माँगने को कहा।*

*ज़रा सोचिए, दीवान टोडरमल जी ने क्या माँगा होगा गुरु जी से ????*
*दीवान जी ने गुरु जी से जो माँगा उसकी कल्पना करना भी असम्भव है !*
*दीवान टोडरमल जी ने गुरु जी से कहा कि यदि कुछ देना ही चाहते हैं तो कुछ ऐसा वर दीजिए की मेरे घर पर कोई पुत्र ना जन्म ले और मेरी वंशावली यहीं मेरे साथ ही समाप्त हो जाए।*
*इस अप्रत्याशित माँग पर गुरु जी सहित सब लोग हक्के-बक्के रह गए.....गुरु जी ने दीवान जी से इस अद्भुत माँग का कारण पूछा तो दीवान जी का उत्तर ऐसा था जो रोंगटे खड़े कर दे।*

*दीवान टोडरमल ने उत्तर दिया कि गुरु जी, यह जो भूमि इतना महंगा दाम देकर ख़रीदी गयी और आपके चरणों में न्योछावर की गयी मैं नहीं चाहता कि कल को मेरी आने वाली नस्लों में से कोई कहे कि यह भूमि मेरे पुरखों ने ख़रीदी थी।*
*यह थी निस्वार्थ त्याग और गुरु भक्ति की बहुत बड़ी मिसाल....... ।*

*हमारे पुरखे जो जो बलिदान गुरु भक्ति में देकर गए हैं, वह अभूतपूर्व है और इन्ही बलिदानों के कारण ही हम लोगों का अस्तित्व अभी तक है...... हमारी इतनी औक़ात नहीं कि हम इस बलिदान के हज़ारवें भाग का भी ऋण उतार सकें.*

*✍️त्याग, बलिदान और अपने गुरु पर अटूट विश्वास की गौरवशाली गाथा*

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🎊🙏 गोवर्धन पूजा 🙏🎊दीपावली के दूसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन और गौ पूजा का विशेष महत्व है। आज गोवर्धन प...
13/11/2023

🎊🙏 गोवर्धन पूजा 🙏🎊

दीपावली के दूसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन और गौ पूजा का विशेष महत्व है। आज गोवर्धन पूजा का पावन पर्व है, मान्यता है कि इस दिन गाय की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। आज गोवर्धन पूजा के साथ भगवान विश्वकर्मा की भी पूजा की जाएगी। शिल्पकार और श्रमिक वर्ग गोवर्धन पूजा के दिन दिन विश्वकर्मा का पूजन भी श्रद्धा भक्तिपूर्वक करते हैं। आज अपने घर- व्यवसाय के विकास व वृद्धि की कामना से दीप जलाए जाते हैं।🪔

🎊क्यों होती है भगवान विश्वकर्मा की पूजा🎊

विश्वकर्मा देव शिल्पकार माने जाते हैं जिनका जन्म समुद्र मंथन से हुआ था। भगवान विश्वकर्मा की जयंती वैसे तो 17 सितंबर को होती है लेकिन गोवर्धन पूजा के इनकी विशेष पूजा किए जाने का प्रावधान है। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के वास्तुकार माने गए हैं। इन्हें यांत्रिक विज्ञानं तथा वास्तु कला का जनक कहा जाता है। फैक्ट्री आदि में काम करने वाले मजदूर , मिस्त्री, कारीगर, शिल्पकार, फर्नीचर बनाने वाले, मशीनों पर काम करने वाले लोग गोवर्धन पूजा के दिन मशीनों औजारों आदि की साफ सफाई करते है, पूजा करते हैं और श्रद्धापूर्वक भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाता है।

🙏🙏गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है🙏🙏

पौराणिक कथानुसार, भगवान #श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर संपूर्ण गोकुल वासियों की इंद्र के कोप से रक्षा की थी। इंद्र के अभिमान को चूर करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों से कहा था कि ‘कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करें। #गोवर्धन पर्वत से गोकुल वासियों को पशुओं के लिए चारा मिलता है और यही पर्वत यहां बादलों को रोककर वर्षा करवाता है, जिससे कृषि उन्नत होती है। इसलिए गोवर्धन की पूजा की जानी चाहिए। तभी से गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट बनाकर गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने का विधान है।

अन्नकूट बनाने की विधि🎉

अन्नकूट बनाने के लिए सभी मौसमी सब्जियां, दूध, मावा, सूखे मेवे और चावल का प्रयोग किया जाता है। साथ ही ताजे फल और मिष्ठान से भगवान को भोग लाया जाता है। अन्नकूट में 56 प्रकार के खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। इन सभी से प्रदोष काल (शाम के समय) में विधि-विधान से श्रीकृष्ण भगवान की पूजा की जाती है। इसके साथ ही गाय की पूजा कर उसे गुड़ और हरा चारा खिलाना शुभ माना जाता है।🎊

❤गोर्वधन और विश्वकर्मा पर्व की सभी को सुभकामनाए ❤
#गोवर्धन #विश्वकर्मा 🙏

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