मुहम्मद स.अ.स. का आखरी खुतबा (धर्मोपदेश):
परमेश्वर की स्तुति के बाद:
“ऐ लोगो, में जों कुछ कहू उसे गौर से सुनो, शायद आइन्दा साल या फिर इसके बाद तुम से मुलाकात ना हो सके!
ऐ लोगो, तुम पर एक दूसरे की जान और माल क़यामत तक हराम (अवेध) हैं! जिस तरह आज के दिन और इस महीने जिल-हज में एक दूसरे की बे-हुरमती नहीं करते!
जिस किसी के पास, दूसरे की आमानत जमा हो, आज के बाद उसको लौटा दी जाए ! आज से हर किस्म का
ब्याज खतम किया जाता हैं; दिया हुआ मूलधन के सिवा ! ना तुम किसी पर जुल्म करो, ना कोई तुम पर ज़ुल्म करे, ना क्यामात के दिन तुम्हारे साथ ज़ुल्म किया जायेगा ! अल्लाह ने सूद को अवेध करार दे दिया हैं.
अपने धर्म की सुरक्षा के लिए शैतान से सावधान रहो ! वह आशा खो चूका हैं की बड़े कामो में तुम्हारा नेतृत्व कर बहका सकेगा, मगर शेतान से छोटे कामो और चीजों में ख़बरदार रहो !
इसके बाद मुझे बताना हैं की पति और पत्नी दोनों एक दूसरे के सामने जवाब देह हैं, किसी औरत के लिए किसी गेर मर्द को अपने करीब करने का हक नहीं इसी प्रकार मर्द भी अपनी पवित्रता रखे और तुम भी किसी गेर स्त्री से सम्बन्ध ना रखो ! दस्तूरे आम के मुताबिक उनकी (पत्नि) देनिक ज़रुरते और उनके लिबास का पूरा ख्याल रखो, और उनके मामलों में उनके अधिकार से हाथ ना खिचो, उनसे अच्छा व्यव्हार करो और दयालुता से पेश आओ. वो तुम्हारे निकाह् मे आने से तुम्हारी पाबन्द हो जाती हैं, और अपने नफ्स की मालिक नहीं रहती हैं ! लेकिन तुम भी ख्याल रखो की आखिर कलमा ऐ हिजाबे-औ-काबुल के साथ ही तुमने इनको, अल्लाह की इस अमानत को अपने ताजिर में लिया हैं और इन्ही कलमात के साथ इन्हें खुद पर वेध किया हैं !
सम्पूर्ण मानव जाति आदम और हव्वा से है; एक अरबी मानव एक गेर-अरबी मानव से अधिक श्रेष्ठता नहीं रखता हैं और न ही एक गेर-अरबी, अरबी से; और न ही एक गोरा मानव काले रंग के मानव पर कोई श्रेष्ठता रखता है और न ही एक काले रंग का मानव गोरे रंग के मानव से, [none have superiority over another] हाँ परन्तु धर्मपरायणता और अच्छा ववहार की श्रेष्ठता.
जिसप्रकार दोनों हाथों की उंगलिया बराबार हैं, वैसे मानव प्राणी एक-दूसरे के बराबर हैं, ना तो किसी का किसी दूसरे पर कोई अधिकार और ना ही किसी भी वरीयता का दावा है. आप सब आपस में भाई हैं.
जानो की हर मुसलमान, हर मुसलमान का भाई हैं, और प्रत्येक मुस्लमा मुस्लिम बन्धुत्व की पहचान होगा ! तो इस प्रकार, अपने आप पर अन्याय ना करना! याद रखो, एक दिन तुमको प्रम्वेश्वर का सामना करना हैं और अपनी कर्मो का उत्तर देना होगा ! इसलिए सावधान रहना, मेरे जाने के बाद, धर्म के मार्ग से भटक नहीं जाना !
इन कार्यों को ध्यान से करना; अपने प्रभु की इबादत (स्तुति), प्रत्येक दिन पाँच बार, नमाज़ (प्राथना), रमजान के महीने में उपवास; अपनी संपत्ति पर आसानी से जकात (यह दान नहीं हैं, गरीब का आप पर बकाया Poor’s Due हैं, जों प्रतिवर्ष देना अनिवार्य हैं) का भुगतान; और परमेश्वर प्रभु के लिए मक्का की तीर्थ यात्रा और अपने शासकों के आदेशो का पालन करना और (इसके लिए) आप को आपके प्रभु के स्वर्ग में भर्ती किया जाएगा.
जो मेरी बात सुनें मेरे शब्दों को दूसरों तक पंहुचा दें, और दूसरा फिर से दूसरों तक और यहाँ तक की आखरी सुनने वाला मेरे शब्द इस प्रकार समझे जेसे उन्होंने मुझसे सीधे सुनने वालो से बेहतर समझा हैं. ऐ अल्लाह मेरी गवाह हे कि मैंने आपका सन्देश आपके लोगो को दिया है”.
इसके बाद एक आयात नाजिल हुई जों इस प्रक्कर हैं:
“आज के दिन मेने तुम्हारे लिए दींन को कयाम कर दिया, और अपनी नेमत तुम पर पूरी कर दी, और तुम्हारे लिए दीन-ऐ-इस्लाम ही को पसंद कर लिया.”