23/06/2026
समणसूत्तम गाथा
निव्वाणं ति अबाहं ति, सिद्धी लोग्ग्गमेव य।
खेमं सिवं अणाबाहं, जं चरन्ति महेसिणो।।३४।।
महर्षि को निर्वाण हो, सिद्ध लोक अबाध।
मंगल भी लोकाग्र है, शिव रहे अनाबाध॥३.३४.३४.६२१॥
जिस अवस्था को केवल महान ऋषि और वीतराग महापुरुष प्राप्त करते हैं, वही निर्वाण, सिद्धि, लोकाग्र, क्षेम, शिव और अनाबाध कहलाती है। वह पूर्ण शान्ति, कल्याण और समस्त बाधाओं से रहित परम अवस्था है।
The supreme state attained only by the great sages is called Nirvana, Siddhi, the summit of the universe, welfare, auspiciousness, and unobstructed freedom. It is the ultimate state of perfect peace and liberation from all obstacles.