Sanatan Guruji Abhijit Pathak

Sanatan Guruji Abhijit Pathak सनातन धर्म के उत्थान के लिए सनातन धर्म के वैज्ञानिक पहलुओं को सामने लाकर व्यक्तित्व और समाज का विकास के उद्देश्य से आपकी सेवा में

सनातन महाकाव्यों की व्याख्या एवं प्राकृतिक युक्तियुक्त साधनाओं का प्रयोग करते हुए वैज्ञानिक रीति-रिवाजों से अध्यात्म, जीवन शैली एवं सनातन विकास।
व्याख्यान, प्रवचन और प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित करें।
Spirituality, life style and eternal development by scientific rituals using explanation of sanatan epics and natural rational practices. Invite for lectures, prawachan and training. Abhijit Pathak
15 years experience)
CLC, DHyp, ANLP, CMed.,DYC

17/05/2026
एक गहन काल्पनिक दृष्टिकोण से यदि सृष्टि को समझें, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा ब्रह्मांड एक निरंतर “यज्ञ” की प्रक्रिय...
27/03/2026

एक गहन काल्पनिक दृष्टिकोण से यदि सृष्टि को समझें, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा ब्रह्मांड एक निरंतर “यज्ञ” की प्रक्रिया में संचालित हो रहा है, जहाँ कोई एक सत्ता नहीं बल्कि अनेक सार्वभौमिक शक्तियाँ मिलकर संतुलन, निर्माण और परिवर्तन का कार्य करती हैं; यह यज्ञ केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि ऊर्जा के रूपांतरण, नियमों की स्थापना और कारण-परिणाम के सिद्धांतों का प्रतीक है—जैसे भौतिकी में ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, बल्कि एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती रहती है, उसी प्रकार सृष्टि में हर क्रिया एक नई प्रतिक्रिया को जन्म देती है, जिससे जीवन, प्रकृति और ब्रह्मांड का चक्र चलता रहता है। इस दृष्टि से “यज्ञ” को एक कॉस्मिक सिस्टम की तरह देखा जा सकता है, जहाँ सृजन (creation), संरक्षण (sustainability) और परिवर्तन (transformation) तीनों प्रक्रियाएँ साथ-साथ सक्रिय रहती हैं; प्रकृति के नियम—गुरुत्वाकर्षण, ऊष्मागतिकी, जैविक विकास—सब मानो उसी यज्ञ के अंग हैं, जो जीवन को संतुलित रखते हैं। इस काल्पनिक संरचना में कर्म ही आहुति है, संकल्प ही मंत्र है और परिणाम ही प्रसाद है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सृष्टि का संचालन किसी एक घटना से नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली वैज्ञानिक और दार्शनिक प्रक्रियाओं के समन्वय से होता है, जो हर क्षण ब्रह्मांड को व्यवस्थित, गतिशील और जीवंत बनाए रखती हैं।

आश्विन (शारदीय) दुर्गा पूजा: मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत आने वाले देवी महात्म्य में आश्विन मास की दुर्गा पूजा का प्रमुख औ...
26/03/2026

आश्विन (शारदीय) दुर्गा पूजा: मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत आने वाले देवी महात्म्य में आश्विन मास की दुर्गा पूजा का प्रमुख और विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसमें माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की कथा है; इसका धार्मिक महत्व अधर्म पर धर्म की विजय और नकारात्मक शक्तियों के नाश से जुड़ा है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह समय मानसून के बाद मौसम परिवर्तन का होता है जब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए व्रत, सात्विक आहार, हवन और अनुशासन शरीर को detox कर इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं।
चैत्र दुर्गा पूजा: चैत्र नवरात्रि का सीधा और विस्तृत वर्णन किसी एक पुराण में आश्विन जितना प्रमुख रूप से नहीं मिलता, लेकिन इसकी अवधारणा वेद और उपनिषद में वर्णित शक्ति उपासना तथा सृष्टि के आरंभ से जुड़ी मानी जाती है; इसका धार्मिक महत्व नई सृष्टि, नववर्ष और सकारात्मक ऊर्जा के आरंभ में है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह सर्दी से गर्मी के संक्रमण काल में आता है, जहां उपवास, हल्का भोजन और अनुशासित जीवनशैली शरीर को नए मौसम के अनुसार ढालने, metabolism सुधारने और ऊर्जा संतुलन बनाने में मदद करती है।

22/03/2026

🔱 1. व्रत का संकल्प (शुरुआत कैसे करें)
पहले दिन स्नान करके माँ दुर्गा का ध्यान करें
कलश स्थापना (घटस्थापना) करें
संकल्प लें कि आप कितने दिन का व्रत रखेंगे (1, 3, 5, 7 या पूरे 9 दिन)
👉 वैज्ञानिक कारण: संकल्प लेने से आपका मन और शरीर एक लक्ष्य के लिए तैयार होता है (psychological conditioning)
🍽️ 2. व्रत में क्या खाएं (सात्विक आहार)
शास्त्रों के अनुसार:
फल (सेब, केला, पपीता)
दूध, दही
साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़ा
सेंधा नमक
सूखे मेवे
❌ नहीं खाना चाहिए:
लहसुन, प्याज
गेहूं, चावल (सामान्य)
मांसाहार, शराब
👉 वैज्ञानिक कारण:
यह “detox diet” की तरह काम करता है
पाचन तंत्र को आराम मिलता है
शरीर में inflammation कम होती है
🧘 3. दिनचर्या (Daily Routine)
सुबह जल्दी उठना (ब्रह्म मुहूर्त में)
स्नान के बाद पूजा और दुर्गा सप्तशती का पाठ
दिन में एक या दो बार ही भोजन
अधिक से अधिक ध्यान और जप
👉 वैज्ञानिक कारण:
ध्यान से stress कम होता है
हार्मोन संतुलन बेहतर होता है
🚫 4. आचरण नियम (Behavior Rules)
क्रोध, झूठ, नकारात्मक सोच से दूर रहें
ब्रह्मचर्य का पालन करें
साफ-सफाई और शुद्धता बनाए रखें
👉 वैज्ञानिक कारण:
मानसिक detox
dopamine control और emotional stability
🔥 5. व्रत के प्रकार
निर्जल व्रत – बिना पानी (कठिन)
फलाहार व्रत – केवल फल और दूध
एक समय भोजन – दिन में एक बार सात्विक भोजन
👉 आपके शरीर के अनुसार व्रत चुनना जरूरी है
🌿 6. व्रत खोलने का सही तरीका (पारण)
अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करें
माँ दुर्गा को भोग लगाएं
फिर स्वयं सात्विक भोजन से व्रत खोलें
👉 वैज्ञानिक कारण:
धीरे-धीरे normal diet में आने से digestion खराब नहीं होता
⚖️ 7. वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific View)
नवरात्रि व्रत का समय अक्सर मौसम परिवर्तन (seasonal transition) पर आता है (जैसे गर्मी से सर्दी या सर्दी से गर्मी)।
यह शरीर को detox करता है
immune system को मजबूत बनाता है
metabolism को reset करता है
⚠️ महत्वपूर्ण सावधानी
यदि आपको diabetes, BP या कोई बीमारी है तो डॉक्टर से सलाह लेकर व्रत रखें
शरीर की क्षमता के अनुसार ही व्रत करें, अंधाधुंध कठोर व्रत न रखें

22/03/2026

घर में खुशहाली, शांति और समृद्धि लाने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय बताए गए हैं। ये उपाय ज्योतिष, कर्म और व्यवहार—तीनों पर आधारित होते हैं।
By Sanatan Guruji Abhijt Pathak
नीचे मुख्य उपाय सरल भाषा में दिए गए हैं:
🏡 1. घर की साफ-सफाई और ऊर्जा
घर हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें
टूटे-फूटे सामान, बंद घड़ियाँ, खराब इलेक्ट्रॉनिक्स तुरंत हटाएँ
👉 इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
🪔 2. नियमित दीपक जलाना
रोज शाम को घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं
मुख्य द्वार पर भी दीपक जलाना शुभ माना जाता है
👉 इससे सकारात्मक ऊर्जा और लक्ष्मी का वास होता है
🐄 3. पशु-पक्षियों को भोजन
गाय को रोटी, कुत्ते को रोटी/बिस्किट, और पक्षियों को दाना डालें
👉 यह पुण्य और ग्रह दोष कम करने का सरल उपाय है
🌿 4. तुलसी का महत्व
घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाएं
रोज जल दें और सुबह-शाम दीपक जलाएं
👉 इससे घर में शांति और सुख बढ़ता है
💧 5. जल से जुड़े उपाय
हर रविवार घर में गंगाजल छिड़कें
घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को साफ रखें
👉 यह स्थान भगवान का माना जाता है
🍚 6. रसोई का ध्यान
रसोई हमेशा साफ रखें
पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी कुत्ते के लिए निकालें
👉 इससे अन्न का आशीर्वाद मिलता है
👪 7. बुजुर्गों और माता-पिता का सम्मान
लाल किताब के अनुसार माता-पिता और बुजुर्गों का आशीर्वाद सबसे बड़ा उपाय है
👉 इससे सभी ग्रह स्वतः अनुकूल होते हैं
🚫 8. झूठ और कलह से बचें
घर में झगड़ा, गाली-गलौज, और धोखा न करें
👉 यह सबसे बड़ा “नकारात्मक उपाय” माना गया है
🧿 9. विशेष उपाय (जरूरत अनुसार)
शनिवार को सरसों का तेल दान करें
बहते पानी में नारियल प्रवाहित करें (कभी-कभी)
👉 ये उपाय ग्रह दोष कम करने के लिए किए जाते हैं
🧘 10. पूजा और मंत्र
रोज कम से कम 5–10 मिनट पूजा/ध्यान करें
“ॐ नमः शिवाय” या “गायत्री मंत्र” का जाप करें

चैत्र नवरात्रि का महत्व (एक पैराग्राफ):चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जो देवी शक्ति की उपासना के...
18/03/2026

चैत्र नवरात्रि का महत्व (एक पैराग्राफ):
चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जो देवी शक्ति की उपासना के लिए मनाया जाता है और यह नए संवत्सर (हिंदू नववर्ष) की शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जो जीवन में शक्ति, सकारात्मकता और आत्मबल का संचार करते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह बुराई पर अच्छाई की विजय और आत्मशुद्धि का समय है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह मौसम परिवर्तन (सर्दी से गर्मी) का समय होता है, जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए व्रत, हल्का सात्विक भोजन और उपवास शरीर को डिटॉक्स करने और पाचन तंत्र को संतुलित करने में मदद करता है। इन दिनों ध्यान, योग और संयम रखने से मानसिक शांति मिलती है। इस समय क्या करना चाहिए—सात्विक भोजन करना, नियमित पूजा-पाठ, स्वच्छता और सकारात्मक सोच रखना; और क्या नहीं करना चाहिए—तामसिक भोजन (मांस, शराब), क्रोध, नकारात्मक विचार और गलत आचरण से बचना चाहिए। इस प्रकार चैत्र नवरात्रि न केवल धार्मिक बल्कि स्वास्थ्य और आत्मिक उन्नति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है।

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