04/10/2026
जीवन का चक्रव्यूह !
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जीवन सचमुच एक चक्रव्यूह बनता जा रहा है। हर इंसान अपने घर-परिवार और नौकरी-कारोबार के बीच उलझा हुआ है। सुबह से रात तक बस एक ही चिंता रहती है- कुछ और हासिल करना है, कुछ और जुटाना है, बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना है और जिंदगी को थोड़ा और आरामदायक बनाना है।इसी दौड़ में हम सोचते रहते हैं- कहाँ रहना है? अपना घर कब बनाना है? लोन कैसे चुकाना है? ईएमआई कैसे जाएगी? बच्चों की पढ़ाई और उनका करियर कैसे बनेगा? फिर कार, घर, सुविधाएँ और भविष्य के लिए पैसा जुटाने की चिंता शुरू हो जाती है। धीरे-धीरे जरूरतें बढ़ती जाती हैं और उनके साथ हमारी दौड़ भी।
लेकिन इस सबके बीच एक बात का पता ही नहीं चलता कि जिस जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए हम इतना भाग रहे हैं, वही जिंदगी धीरे-धीरे हमारे हाथ से निकलती जा रही है।हम सोचते हैं कि पहले सब कुछ ठीक कर लें, फिर आराम से जीएँगे। पहले घर बन जाए, फिर चैन मिलेगा। पहले पैसा जमा हो जाए, फिर घूमने जाएँगे। पहले बच्चों की जिम्मेदारी पूरी हो जाए, फिर अपने लिए समय निकालेंगे।
लेकिन जिंदगी किसी का इंतजार नहीं करती।कल कभी आता नहीं, वह हमेशा आज बनकर ही आता है। और इसी तरह भविष्य को बेहतर बनाने की तैयारी करते-करते कहीं ऐसा न हो कि जीने की तैयारी में ही जीवन जीना भूल जाएँ।मैंने कई लोगों को इसी तरह का जीवन जीते देखा है। फिर बाद में जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर जाकर इंसान पीछे मुड़कर देखता है तो समझ आता है कि जिन चीजों के लिए उसने अपना इतना समय और सुकून खो दिया, उनमें से बहुत-सी चीजें वास्तव में इतनी जरूरी थीं ही नहीं।
हमारे बड़े-बूढ़े हमेशा समझाते आए हैं कि जो हमारे पास है, उसका आनंद लेना सीखो। अपने लोगों को समय दो। रिश्तों को संभालो। अपनों से प्यार करो। क्योंकि अंत में याद यह नहीं रहता कि बैंक में कितना पैसा था, कितनी बड़ी गाड़ी थी या कितना बड़ा पद था। याद रहता है तो यह कि किसके साथ हँसे थे, किसके साथ बैठे थे और किसके जीवन में हमारे होने से थोड़ी खुशी बढ़ी थी। जीवन केवल आगे बढ़ने का नाम नहीं है। जीवन रास्ते में रुककर आसपास देखने का नाम भी है। किसी सुबह अपनों के साथ चाय की चुस्कियाँ,बच्चों की हँसी सुनना, परिवार के साथ बैठना, पुराने मित्र से बात करना, प्रकृति को देखना और कभी-कभी बिना किसी कारण मुस्कुरा देना भी जीवन है।
जीवन जीने के लिए है, केवल कमाने और जमा करने के लिए नहीं।हमें भविष्य की चिंता बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, ऐसा भी नहीं है। जिम्मेदारियाँ निभानी जरूरी हैं, भविष्य के लिए योजना बनाना भी जरूरी है। लेकिन भविष्य के लिए वर्तमान को पूरी तरह कुर्बान कर देना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है, पर लोग ऐसा ही कर रहे हैं ।
जीवन का चक्रव्यूह शायद कभी पूरी तरह खत्म नहीं होगा। जिम्मेदारियाँ रहेंगी, परेशानियाँ रहेंगी, उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। लेकिन इस चक्रव्यूह के बीच भी हम अपने लिए एक छोटी-सी जगह बना सकते हैं-जहाँ चिंता कम हो और जीवन थोड़ा ज्यादा हो।इसलिए सब कुछ पाने की कोशिश में अपना आज मत खोइए। जो मिला है, उसे महसूस कीजिए। जो अपने हैं, उन्हें समय दीजिए। जो पल सामने है, उसे पूरी तरह जी लीजिए।तभी आप इस चक्रव्यूह को भेदने वाले अभिमन्यु कहलाएँगे।