24/08/2022
राजा राजेश्वरी गार्डन में पर्युषण महापर्व का शुभारंभ
आओ जाने महापर्व की महिमा- साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी
"पर्युषण महापर्व का प्रथम दिवस - खाद्य संयम दिवस"
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद के तत्वावधान में डायमंड प्वाइंट स्तिथ राज राजेश्वरी गार्डन में आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी के पावन सानिध्य में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सरदारशहर, मोमासर, आडसर,गंगानगर, पीलीबंगा आदि क्षेत्रों के भाई बहनों के द्वारा नमस्कार महामंत्र के अखंड जाप से हुआ। गुलाबी रंग के परिधानों में लिपटी हुई बहने तथा सफेद प्रधानों में सुसज्जित भाइयों की गरिमामय उपस्थिति से ऐसा लग रहा था मानो पूरा राजश्री गार्डन इठला रहा है।
प्रवचन का कार्यक्रम सरदारशहर, मोमासर आदि क्षेत्रों की बहनों के समवेत स्वरों की मंगल प्रस्तुति से हुआ। सभा के अध्यक्ष बाबूलाल जी बेद ने आगंतुक सभी महानुभावों का स्वागत किया। साध्वी संपतिप्रभा जी ने क्षमा धर्म की महत्वता को उजागर किया। खाद्य संयम दिवस पर साध्वी रश्मि प्रभा जी ने सारगर्भित विचारों की प्रस्तुति देते हुए "जितनी छोटी कमर, उतनी बड़ी उम्र" विषय पर अपने विचार रखे। आओ जाने अपने इतिहास को विषय के अंतर्गत साध्वी श्री कल्पयशा जी ने महासती दीपा जी के जीवन को उजागर किया।
विशाल जनमेदिनी को संबोधित करते हुए साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी ने महापर्व की महत्ता का उजागर करते हुए कहा हमारी भारतीय संस्कृति पर्व और त्योहारों की संस्कृति है। हर धर्म में अपने अपने पर्वों का महत्व है। मुस्लिम समाज में रमजान का महत्व है तो ईसाइयों में क्रिसमिस त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वही बौद्ध धर्म में वैशाखी पर्व को बहुत उमंग के साथ मनाया जाता है। वैसे ही जैन धर्म में भी अनेक पर्व मनाए जाते हैं लेकिन आज जिस पर्व को हम मना रहे हैं वह पर्व नहीं महापर्व है। महर्षि गौतम ने बहुत ही सुंदर कहां है जैसे रत्नों में चिंतामणि रत्न का महत्व है तो दान में अभय दान सर्वश्रेष्ठ है। ध्यान में शुक्ल ध्यान का विशेष महत्व है तो पर्वों में महापर्व पर्युषण का विशेष महत्व है। महापर्व का संदेश है बाहर की दुनिया से हटकर अपनी आत्मा के पास रहना। इंद्रियों को अन्तरमुखी बनाना है तथा अतीत में हुई भूलो का सिंहावलोकन कर शुभ संकल्पों से भविष्य को सजाना है। साध्वीश्री जी ने इस अवसर पर कहा चक्रवर्ती की खेती सुबह बौवो, शाम को फसल तैयार हो जाती है। जैन धर्म की खेती 8 दिनों में फसल तैयार होगी। इसके लिए हमें अपनी चेतना की धरती को समतल बनाना है। जहां कहीं भी राग द्वेष मनमुटाव की घास फूस उगी है उसे उखाड़कर हमें वहा आध्यात्मिक फसलें लहलहानी हैं। सबके साथ मैत्री, प्रेम और सौहार्द के भाव के साथ जीने की कला सिखेंगे तभी महापर्व को मनाने की सार्थकता हो सकेगी। पर्युषण महापर्व जप, तप, ज्ञान, स्वाध्याय आदि करने का उत्तम अवसर है। साध्वी श्री के सानिध्य में 24 घंटे का अखंड जाप आज शुरू हो गया है। उपवास, तेले, अठाई तप की और भी श्रावक श्राविकाएं अग्रसर है। लक्ष्मीपत जी बेद ने सभा की तरफ से आवश्यक सूचनाये दी। कार्यक्रम का संचालन साध्वी कल्प्याशा जी ने किया।
संप्रसारक
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद
#खाद्यसंयमदिवस