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Jai Jai Mahashraman

महाश्रमण ही सहारा है ✨✨
04/12/2024

महाश्रमण ही सहारा है ✨✨

https://youtu.be/LuyVfEybnUg?si=6VUXMSbSkyKqTCfWसाध्वीप्रमूखा विश्रुतविभा जी के मनोनयन दिवस के अवसर पर साध्वी श्री त्रिश...
22/05/2024

https://youtu.be/LuyVfEybnUg?si=6VUXMSbSkyKqTCfW

साध्वीप्रमूखा विश्रुतविभा जी के मनोनयन दिवस के अवसर पर साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी द्वारा रचित गीतिका ।

रचियेत्री :- साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी
स्वर :- निलेश बाफना
वीडियो :- खुशाल भंसाली
संप्रसारक :- जय जय ज्योतिचरण (media)

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साध्वीप्रमूखा विश्रुतविभा जी के मनोनयन दिवस के अवसर पर साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी द्वारा रचित गीतिका ।रचियेत....

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11/08/2023

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02/09/2022

मैत्री का महान पर्व है क्षमा याचना पर्व - साध्वी त्रिशलाकुमारी जी

पर्युषण महापर्व का अंतिम दिवस - क्षमापना दिवस

महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी के सानिध्य में राजा राजेश्वरी गार्डन में क्षमा याचना महापर्व का कार्यक्रम तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल के मंगल संगान से हुआ। संस्थाओं की तरफ से तेयूप के अध्यक्ष वीरेंद्र घोसल, टी पी एफ राष्ट्रीय सहमंत्री ऋषभ दुगड़, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष प्रकाश जी भंडारी, महिला मंडल की अध्यक्ष अनीता जी गिड़िया, महासभा परिवार से श्री ललित जी बैद, ज्ञानशाला परिवार से संगीता जी गोलछा, कर्मठ कार्यकर्ता प्रकाश दफ्तरी ने क्षमा का महत्व बताते हुए सभी श्रावक समाज अपनी अपनी संस्थाओं की तरफ से क्षमा याचना की। तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद के अध्यक्ष श्रीमान बाबूलाल जी बैद ने पूरे श्रावक समाज की ओर से सभी साध्वियो से बारंबार क्षमायाचना की। सभा अध्यक्ष ने सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों से भी क्षमायाचना की। पर्युषण महापर्व के दौरान जिन्होंने कार्य में सहयोग दिया उन सभी महानुभाव के प्रति भी आभार व्यक्त किया। आर्थिक सहयोग के लिए भी सभी दानदाताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। जैन तेरापंथ वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष महेंद्र जी भंडारी ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। निवर्तमान अध्यक्ष सुरेश जी सुराणा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए सभी श्रावक समाज से क्षमायाचना की। साध्वी श्री रश्मि प्रभा जी ने इस अवसर पर गीतिका के माध्यम से सबको भीतर तक झंझोर दिया।
इस क्षमापना के अवसर पर साध्वी कल्पयशा जी ने कहा जिन शासन शासन मिलना सौभाग्य की बात है और ऐसा विनीत समाज मिलना उससे भी और ज्यादा सौभाग्य की बात है। साध्वी श्री जी ने कहा श्रावक समाज का अथक श्रम ही सफलता का हेतु बना है जो ये पर्युषण पर्व इतना सफल हुआ है। श्रावक समाज की संबोधित करते हुए कहा आप सभी संघ सेवा के लिए इसी प्रकार अपनी शक्ति का नियोजन करते रहे, यही समाज के प्रति शुभाशंशा है।
विदुषी साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहां मकान और मन की समय-समय पर सफाई करते रहना चाहिए। क्योंकि यदि हम मकान की समय पर सफाई नहीं करेंगे तो मकान में कूड़े करकट के साथ-साथ अनावश्यक सामान जमा हो जाएगा और एक दिन ऐसा आएगा कि हमारा मकान मकान नहीं रहेगा, वह कबाड़ खाना बन जाएगा। ऐसे ही यदि हम मन की भी समय पर सफाई नहीं करेंगे तो मन में अनावश्यक गलतफहमियां भर जाएगी। और फिर रिश्तो में इतनी दूरियां बढ़ जाएगी उन्हें पाटना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जरूरी है कि हम समय-समय पर मन की सफाई करते रहें।
जैन धर्म में क्षमा याचना का पर्व मन की सफाई का पर्व है। जैसे एक मण उबलते तेल को एक चुटकी बावना चंदन डालते ही तेल ठंडा हो जाता है। वैसे ही कोई व्यक्ति कितना भी आवेशित क्यों ना हो उसमें यदि क्षमा का चंदन डाल दिया जाए तो वो शांत हो सकता है। साध्वीश्री जी ने कहा भूल होना कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात होती है भूल को भूलना। क्षमा करने वाला बड़ा होता है। "क्षमा वीरस्य भूषणम्" क्षमा वीरों का आभूषण है। और क्रोध कायरों का लक्षण है। क्रोधाग्नि को शांत करने क्षमा का नीर जिसके पास है वही साधक जीवन में सुख शांति और अमन चैन को अनुभव कर सकता है। कार्यक्रम का संचालन श्रीमान बिमल जी पुगलिया ने किया। इस अवसर पर श्रावक श्राविकाओं ने छापर में विराजित आचार्य श्री महाश्रमणजी एवं सभी साधु साध्वीयो से भाव पूर्वक क्षमायाचना की। यहा विराजित साधु साध्वियों से भी श्रावक समाज ने सामूहिक क्षमायाचना की। तत्पश्चात श्री लक्ष्मीपत जी बैद ने सभी श्रावक श्राविकाओं से एक दूसरे से आपस में सामूहिक रूप से क्षमा याचना करवाई। कार्यक्रम के पश्चात सामूहिक पारणे की व्यवस्था रखी गई थी।

संप्रसारक :
💮 श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद 💮

#क्षमापानादिवस

27/08/2022

पर्युषण पर्वधिराज - 2022

हैदराबाद 27/8/2022

साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी आदि ठाणा-५ के पावन सान्निध्य में 'पर्युषण महापर्व' का चतुर्थ दिवस "वाणी संयम दिवस" के पुनीत अवसर पर श्री राजा राजेश्वरी गार्डन, सिकंदराबाद में गुरु आज्ञा अनुसार आयोजित "शनिवारिक सामायिक" का भव्य आयोजन।

संप्रसारक
🌼 श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद 🌼

#खाद्यसंयमदिवस

26/08/2022

"अहंकार - पतन का द्वार" - साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी

पर्युषन महापर्व का तृतीय दिवस - "सामायिक दिवस"

आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या कार्य साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी के पावन सान्निध्य में पर्युषण महापर्व के तीसरा दिन सामायिक दिवस के रूप में आयोजित किया गया। सामायिक दिवस के उपलक्ष में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में स्थानीय तेयुप के तत्वाधान में 'अभिनव सामायिक' का आयोजन किया गया। साध्वी सम्प्रति प्रभा जी ने त्रिपदी वंदना ध्यानयोग आदि के प्रयोग करवाये। कार्यक्रम का शुभारंभ बिकानेर गंगाशहर चोखला के भाई-बहनों के मंगल संज्ञान से हुआ। "संघ अपना प्राण है" गीत की पंक्तियों ने सभी बहनों और भाईयों को 'ॐ अर्हम' बोलने के लिए विवश कर दिया। तेयुप के अध्यक्ष वीरेंद्र जी घोषल ने आगन्तुक सभी भाई-बहनों का तहेदिल से स्वागत किया।

साध्वी रश्मिप्रभा जी ने सामायिक की महत्ता को उजागर करते हुए अपने सारगर्भित विचारों की प्रस्तुति दी। "सामायिक समता साधना" गीतिका की पंक्तियों ने पूरे परिसर को सामायिकमय बना दिया। साध्वी कल्पयशा जी ने पांच तिथियो का महत्व बताते हुए भाई-बहनो को उन पांच तिथीयों पर जमीकंद का परिहार करने का आह्वान किया।

"भव परम्परा से गुजरते महावीर" के जीवन को बहुत ही रोचक व आकर्षक शैली में प्रस्तुत करते हुए साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी ने विशाल जन भेदनी की उदबोधन देते हुए कहा - अहंकार हथौड़ा है और विनम्रता चाबी है। हथौड़ा ताले को तोड़ता है और चाबी ताले को खोलती है। ताले पर हथौड़ा लगने से ताला बेकार हो जाता है। ताले मे चाबी लगने से वो हमारी सुरक्षा का साधन बन जाती है। हमें हथौड़ा बनना है या चाबी ये हमारे पर निर्भर है। बहुत सुन्दर कहा गया है - मृत्यु प्राणो को खत्म कर देती है, ईर्ष्या धर्मचर्चा को नाश कर देती है, क्रोध लक्ष्मी को और अनार्य सेवा शील को नाश कर देती है लेकिन अभिमान एक ऐसा दूर्गण है जो सर्वगुणों को खत्म कर देता है। ज्ञानी कहते है जब तक अहं की कनात रहेगी तब आत्मदर्शन नहीं हो सकते हैं। कहा गया है - मैं गया कि मंजिल मिली।

साध्वी श्री जी ने बताया कि कैसे भगवान महावीर की आत्मा ने तीसरे भव में अहंकार करके नीचगौत्र का बंध कर लिया। तीसरे भव भगवान की आत्मा महाराज भरत के यहां जन्म लेती है नाम रखा गया मरीचि । मरीचि बड़ा होकर भगवान ऋषभ के पास दीक्षित होता है। लेकिन साधु जीवन के कष्टो को सहन नहीं कर पाता है। आखिर मरीचि परिव्राजक का वेश धारण कर भगवान के साथ रहने लगा है।

भरत के द्वारा पूछने पर भगवान ने मरीचि का शुभ भविष्य बताया। मरीचि अपना उज्ज्वल भविष्य सुनकर अहंकार में फूल कर कुम्पा हो गया। अहंकार में नाचने लगा। मरीचि ने अहं का जाल बुनकर स्वयं को फांस किया। आयु सम्पन्न कर 5 वे ब्रह्म देवलोक में जाता है। अहंकार के कारण भगवान की आत्मा भवो तक याचक (कुल में उत्पन्न होती है। कहा गया है - तूफान में कश्तियां और अहंकार में हस्तियां डूब जाती है।

चतुर्दशी के उपलक्ष में साध्वी श्री जी ने तेरापंथ की मर्यादाओं का सांगोपांग वर्णन किया। श्रावकओं के लिए श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया गया। जप के क्रम में आज का अखंड जाप बिकानेर, गंगाशहर, चोखला निवासियों का है। बहुत ही उत्साह के साथ भाई-बहन जप में अपनी सहभागिता दर्ज करा रहे है। गुरुवार के दिन मेवाड़ मारवाड के भाई बहनों में चार सौ पांच सामायिक रिकॉर्ड बनाया।

संप्रसारक
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद

#सामायिकदिवस

24/08/2022

राजा राजेश्वरी गार्डन में पर्युषण महापर्व का शुभारंभ
आओ जाने महापर्व की महिमा- साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी
"पर्युषण महापर्व का प्रथम दिवस - खाद्य संयम दिवस"
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद के तत्वावधान में डायमंड प्वाइंट स्तिथ राज राजेश्वरी गार्डन में आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी के पावन सानिध्य में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सरदारशहर, मोमासर, आडसर,गंगानगर, पीलीबंगा आदि क्षेत्रों के भाई बहनों के द्वारा नमस्कार महामंत्र के अखंड जाप से हुआ। गुलाबी रंग के परिधानों में लिपटी हुई बहने तथा सफेद प्रधानों में सुसज्जित भाइयों की गरिमामय उपस्थिति से ऐसा लग रहा था मानो पूरा राजश्री गार्डन इठला रहा है।
प्रवचन का कार्यक्रम सरदारशहर, मोमासर आदि क्षेत्रों की बहनों के समवेत स्वरों की मंगल प्रस्तुति से हुआ। सभा के अध्यक्ष बाबूलाल जी बेद ने आगंतुक सभी महानुभावों का स्वागत किया। साध्वी संपतिप्रभा जी ने क्षमा धर्म की महत्वता को उजागर किया। खाद्य संयम दिवस पर साध्वी रश्मि प्रभा जी ने सारगर्भित विचारों की प्रस्तुति देते हुए "जितनी छोटी कमर, उतनी बड़ी उम्र" विषय पर अपने विचार रखे। आओ जाने अपने इतिहास को विषय के अंतर्गत साध्वी श्री कल्पयशा जी ने महासती दीपा जी के जीवन को उजागर किया।
विशाल जनमेदिनी को संबोधित करते हुए साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी ने महापर्व की महत्ता का उजागर करते हुए कहा हमारी भारतीय संस्कृति पर्व और त्योहारों की संस्कृति है। हर धर्म में अपने अपने पर्वों का महत्व है। मुस्लिम समाज में रमजान का महत्व है तो ईसाइयों में क्रिसमिस त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वही बौद्ध धर्म में वैशाखी पर्व को बहुत उमंग के साथ मनाया जाता है। वैसे ही जैन धर्म में भी अनेक पर्व मनाए जाते हैं लेकिन आज जिस पर्व को हम मना रहे हैं वह पर्व नहीं महापर्व है। महर्षि गौतम ने बहुत ही सुंदर कहां है जैसे रत्नों में चिंतामणि रत्न का महत्व है तो दान में अभय दान सर्वश्रेष्ठ है। ध्यान में शुक्ल ध्यान का विशेष महत्व है तो पर्वों में महापर्व पर्युषण का विशेष महत्व है। महापर्व का संदेश है बाहर की दुनिया से हटकर अपनी आत्मा के पास रहना। इंद्रियों को अन्तरमुखी बनाना है तथा अतीत में हुई भूलो का सिंहावलोकन कर शुभ संकल्पों से भविष्य को सजाना है। साध्वीश्री जी ने इस अवसर पर कहा चक्रवर्ती की खेती सुबह बौवो, शाम को फसल तैयार हो जाती है। जैन धर्म की खेती 8 दिनों में फसल तैयार होगी। इसके लिए हमें अपनी चेतना की धरती को समतल बनाना है। जहां कहीं भी राग द्वेष मनमुटाव की घास फूस उगी है उसे उखाड़कर हमें वहा आध्यात्मिक फसलें लहलहानी हैं। सबके साथ मैत्री, प्रेम और सौहार्द के भाव के साथ जीने की कला सिखेंगे तभी महापर्व को मनाने की सार्थकता हो सकेगी। पर्युषण महापर्व जप, तप, ज्ञान, स्वाध्याय आदि करने का उत्तम अवसर है। साध्वी श्री के सानिध्य में 24 घंटे का अखंड जाप आज शुरू हो गया है। उपवास, तेले, अठाई तप की और भी श्रावक श्राविकाएं अग्रसर है। लक्ष्मीपत जी बेद ने सभा की तरफ से आवश्यक सूचनाये दी। कार्यक्रम का संचालन साध्वी कल्प्याशा जी ने किया।

संप्रसारक
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, सिकंदराबाद

#खाद्यसंयमदिवस

26/06/2022
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के शिष्य मुनि श्री सुधांशु कुमार जी के जन्म दिवस के मंगल अवसर पर बहुत बहुत अध्यात्मिक ...
18/06/2022

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के शिष्य
मुनि श्री सुधांशु कुमार जी के जन्म दिवस के मंगल अवसर पर बहुत बहुत अध्यात्मिक मंगल कामना

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