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वे इस संसार के सबसे सुंदर वर हैं। इतने सुंदर, कि जब जनकपुर में आये तो पूरे नगर में हलचल मच गई। पूरा नगर बउआ गया जैसे... ...
18/12/2023

वे इस संसार के सबसे सुंदर वर हैं। इतने सुंदर, कि जब जनकपुर में आये तो पूरे नगर में हलचल मच गई। पूरा नगर बउआ गया जैसे... अभी धनुष टूटने की कोई आशा भी नहीं दिखाई दे रही थी, पर पूरा नगर हाथ जोड़ कर देव को गोहराने लगा, "हे सूरज बाबा! हे संझा माई! राजा जी की बिटिया के लिए इनसे अच्छा वर नहीं मिलेगा। किरपा कीजिये कि ये ही धनुष उठा लें..."
जनकपुर के मार्ग पर भगदड़ मची है। सारे नर नारी बेचैन हैं उन दो युवकों को देख लेने के लिए, जो स्वयं जनकपुर देखने निकले हैं। एक युवती अपनी सखी से कहती है- "राजकुमारी से इनका विवाह हो जाय तो हमारा भला हो जाएगा। ससुराल के नाते ई जब जब जनकपुर आएंगे, तब तब इन्हें निहार लेने का सौभाग्य तो मिलेगा। पर यह राजा इतना मूरख हो गया है कि जाने किस धनुष उठाने वाले प्रण पर अटका हुआ है। इतने कोमल लड़के भला क्या ही धनुष उठाएंगे। काश! कि यही उठा लेते..."
बच्चे उन्हें छू कर देख रहे हैं। एकाएक जाने कितनी प्रकार की हवाएं बहने लगी हैं। कोयल, तोता, चकोर, पपीहा सब एक साथ ही गाने लगे हैं। समूचे जनकपुर में जैसे एक पवित्र गंध पसर गयी है। लोग बाग सबकुछ भूल गए हैं, बस याद हैं तो वे दो युवक, जो अजोध्या वाले राजा दशरथ के बेटे हैं और विश्वामित्र बाबा के साथ आये हैं।
मुनि बाबा के साथ दोनों भाई धनुष यज्ञ मंडप पहुँचे हैं। सभा में अनेक राजा महाराजा बैठे हैं पर राजकुटुम्ब के हर नर नारी की दृष्टि बस उसी युवक पर टिकी हुई है। माताओं को उनमें अभी से अपना पुत्र दिखने लगा है। वे उनकी ओर देखती हैं तो अनायास ही आंखों में जल उतर आता है।
एक एक कर के राजा लोग धनुष के पास अपनी शक्ति दिखाने पहुँच रहे हैं। जैसे ही कोई राजा धनुष तक पहुँचता है, सारी स्त्रियां हाथ जोड़ कर प्रार्थना करने लगती हैं- हे भगवान! इससे न उठे! जब वह हार कर वापस लौटता है तो सबके कलेजे को शांति मिलती है। मन ही मन कहती हैं, "भाग भकचोन्हरा! जाने कहाँ से आ गया था धनुष उठाने..." सब हाथ जोड़ कर प्रार्थना करती हैं- किसी से धनुष न उठे, बस वह साँवला सा जो बैठा है... अजोध्या वाला...
नाता कोई एक दिन के लिए थोड़ी जुड़ रहा है! वर ऐसा ढूंढना है जिससे लाख बरस तक नाता निभे... वैसा अब तक बस एक ही दिखा है...
सबके हार जाने पर राजा जनक उदास हो कर कहते हैं- "क्षत्रित्व समाप्त हो गया क्या देव?" इसपर लक्ष्मण जी का क्रोध और समूची पृथ्वी को उठा लेने का दावा... पर आम मैथिल जन का मन नहीं मानता! महिलाएं सोच रही हैं, "ये पश्चिम वाले ऐसे ही लम्बी लम्बी हाँकते हैं क्या रे? कहाँ महादेव का विशाल धनुष और कहाँ ये कोमल किशोर..."
सबके हाथ प्रार्थना में जुड़े हैं। लखन की बातों पर भरोसा नहीं होता, फिर भी सभी चाहते हैं कि उनकी बात सत्य हो... धनुष सँवरके उठाये हे देव! हे मइया, हे महादेव, किरपा करो...
गुरुजी ने साँवले को आदेश दिया है। वे उठ कर धीरे धीरे धनुष की ओर बढ़ते हैं। अचानक हजारों लोगों की धड़कन बढ़ गयी है। गला भर आया है, आंखों में जल उतर आया है... सब मन ही मन जोर जोर से जप रहे हैं- महादेव, महादेव, महादेव.... बस यही, यही, यही...
वे धीरे धीरे चल रहे हैं। बाबा लिखते हैं, जैसे हजार 'काम' चल रहे हों, वैसे हमारे राम चल रहे हैं। कोटि मनोज लजावन हारे...
वे धनुष के पास पहुँचे हैं। भयभीत मैथिलों ने क्षण भर के लिए अचानक अपनी आंखें बंद कर ली है। उसी एक क्षण में बिजली चमकी है, आकाश गरजा है, धरती कांपी है... लोग आँख खोलते हैं तो दिखता है, धनुष टूट गया है और सिया के राम मुस्कुरा रहे हैं।
बोलिये दूल्हा सरकार की जय।
लगे हाथ बाबा तुलसीदास जी महाराज की जय।

प्रभु श्री राम और माता सीता के वैवाहिक वर्षगांठ विवाह पंचमी की समस्त संसार को बधाई...🙏💖🚩

जयशंकरमहाराज❤️

कैलाश पर्वत और चंद्रमा का रहस्य कैलाश पर्वत एक अनसुलझा रहस्य, कैलाश पर्वत के इन रहस्यों से नासा भी हो चुका है चकित.;कैला...
21/07/2023

कैलाश पर्वत और चंद्रमा का रहस्य

कैलाश पर्वत एक अनसुलझा रहस्य, कैलाश पर्वत के इन रहस्यों से नासा भी हो चुका है चकित.;

कैलाश पर्वत, इस एतिहासिक पर्वत को आज तक हम सनातनी भारतीय लोग शिव का निवास स्थान मानते हैं। शास्त्रों में भी यही लिखा है कि कैलाश पर शिव का वास है।

किन्तु वहीं नासा जैसी वैज्ञानिक संस्था के लिए कैलाश एक रहस्यमयी जगह है। नासा के साथ-साथ कई रूसी वैज्ञानिकों ने कैलाश पर्वत पर अपनी रिपोर्ट दी है।

उन सभी का मानना है कि कैलाश वास्तव में कई अलौकिक शक्तियों का केंद्र है। विज्ञान यह दावा तो नहीं करता है कि यहाँ शिव देखे गये हैं किन्तु यह सभी मानते हैं कि, यहाँ पर कई पवित्र शक्तियां जरूर काम कर रही हैं। तो आइये आज हम आपको कैलाश पर्वत से जुड़े हुए कुछ रहस्य बताते हैं।

कैलाश_पर्वत_के_रहस्य.

रहस्य 1– रूस के वैज्ञानिको का ऐसा मानना है कि, कैलाश पर्वत आकाश और धरती के साथ इस तरह से केंद्र में है जहाँ पर चारों दिशाएँ मिल रही हैं। वहीं रूसी विज्ञान का दावा है कि यह स्थान एक्सिस मुंडी है और इसी स्थान पर व्यक्ति अलौकिक शक्तियों से आसानी से संपर्क कर सकता है। धरती पर यह स्थान सबसे अधिक शक्तिशाली स्थान है।

रहस्य 2 - दावा किया जाता है कि आज तक कोई भी व्यक्ति कैलाश पर्वत के शिखर पर नहीं पहुच पाया है। वहीं 11 सदी में तिब्बत के योगी मिलारेपी के यहाँ जाने का दावा किया जाता रहा है। किन्तु इस योगी के पास इस बात के प्रमाण नहीं थे या फिर वह स्वयं प्रमाण प्रस्तुत नहीं करना चाहता था। इसलिए यह भी एक रहस्य है कि इन्होंने यहाँ कदम रखा या फिर वह कुछ बताना नहीं चाहते थे।

रहस्य 3 - कैलाश पर्वत पर दो झीलें हैं और यह दोनों ही रहस्य बनी हुई हैं। आज तक इनका भी रहस्य कोई खोज नहीं पाया है। एक झील साफ़ और पवित्र जल की है। इसका आकार सूर्य के समान बताया गया है। वहीं दूसरी झील अपवित्र और गंदे जल की है तो इसका आकार चन्द्रमा के समान है।

रहस्य 4 - यहाँ के आध्यात्मिक और शास्त्रों के अनुसार रहस्य की बात करें तो कैलाश पर्वत पे कोई भी व्यक्ति शरीर के साथ उच्चतम शिखर पर नहीं पहुच सकता है। ऐसा बताया गया है कि, यहाँ पर देवताओं का आज भी निवास हैं। पवित्र संतों की आत्माओं को ही यहाँ निवास करने का अधिकार दिया गया है।

रहस्य 5 - कैलाश पर्वत का एक रहस्य यह भी बताया जाता है कि जब कैलाश पर बर्फ पिघलती है तो यहाँ से डमरू जैसी आवाज आती है। इसे कई लोगों ने सुना है। लेकिन इस रहस्य को आज तक कोई हल नहीं कर पाया है.

रहस्य 6 – कई बार कैलाश पर्वत पर *सात तरह के प्रकाश* आसमान मेंदेखे गये हैं। इस पर नासा का ऐसा मानना है कि यहाँ चुम्बकीय बल है और आसमान से मिलकर वह कई बार इस तरह की चीजों का निर्माण करता

रहस्य 7 - कैलाश पर्वत दुनिया के 4 मुख्य धर्मों का केंद्र माना गया है। यहाँ कई साधू और संत अपने देवों से टेलीपैथी से संपर्क करते हैं। असल में यह आध्यात्मिक संपर्क होता है।

रहस्य 8 - कैलाश पर्वत का सबसे बड़ा रहस्य खुद विज्ञान ने साबित किया है कि यहाँ पर प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है कि यहाँ से *ॐ* की आवाजें सुनाई देती हैं।

समझ गये होंगे कि, कैलाश पर्वत क्यों आज भी इतना धार्मिक और वैज्ञानिक महत्त्व रखे हुए है। हर साल यहाँ दुनियाभर से कई लोग अनुभव लेने आते हैं, और सनातन धर्म के लिए कैलाश सबसे बड़ा आदिकालीन धार्मिक स्थल भी बना हुआ

यहाँ पर सूर्य और चंद्रमा के संधि काल (सायं काल) प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है कि यहाँ से *ॐ* की आवाजें सुनाई देती हैं

हर हर महादेव 🙏 🚩

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