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With Karim Yusop Page – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
06/03/2026

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06/03/2026

प्रेम एक साधना है 🏵️🏵️🏵️

05/03/2026

अच्छा समय अपने आप नहीं आता,
उसे मेहनत, धैर्य और सही कर्मों से बनाना पड़ता है।
जो समय को बदलने की हिम्मत रखता है,
समय भी उसी के लिए बदल जाता है।
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#अच्छा_समय

05/03/2026

Shiv Sutra 1.7

05/03/2026

I got over 200 reactions on my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

जय श्री कृष्ण! 🙏​आज हम आपके साथ साझा कर रहे हैं पौराणिक कथाओं के एक ऐसे राजा की कहानी, जिनका जीवन हमें 'इच्छाओं की निस्स...
04/03/2026

जय श्री कृष्ण! 🙏
​आज हम आपके साथ साझा कर रहे हैं पौराणिक कथाओं के एक ऐसे राजा की कहानी, जिनका जीवन हमें 'इच्छाओं की निस्सारता' और 'वैराग्य के महत्व' का गहरा पाठ पढ़ाता है - महाराज ययाति।
​कहानी का सार:
​महाराज ययाति, एक महान और शक्तिशाली राजा, अपनी युवावस्था और सांसारिक सुखों के प्रति अगाध मोह रखते थे। एक बार, एक ऋषि के शाप के कारण वे समय से पहले ही वृद्ध हो गए। बुढ़ापे के दुःख और अधूरी इच्छाओं से परेशान होकर, उन्होंने अपने पुत्रों से एक अनोखी विनती की - "क्या तुम मुझे अपनी जवानी दे सकते हो?"
​उनके सबसे छोटे और आज्ञाकारी पुत्र, पुरू, ने अपने पिता के लिए खुशी-खुशी अपनी युवावस्था बलिदान कर दी। ययाति फिर से युवा हो गए और हज़ारों वर्षों तक सुख भोगते रहे। लेकिन... क्या उनकी इच्छाएं पूरी हुईं?
​हज़ारों साल के भोग के बाद, ययाति को एक परम सत्य का ज्ञान हुआ। उन्होंने महसूस किया कि:
​"जिस प्रकार आग में घी डालने से वह और भड़कती है, उसी प्रकार भोग विलास से कामनाएं कभी शांत नहीं होतीं, बल्कि और बढ़ती जाती हैं।"
​अंततः, उन्होंने अपने पुत्र पुरू को उसकी जवानी वापस लौटा दी, अपना राजपाठ त्याग दिया और वैराग्य का मार्ग अपनाकर आत्म-ज्ञान की प्राप्ति की।
​कथा की सीख:
​यह कथा हमें सिखाती है कि बाहरी सुख क्षणिक हैं। सच्चा और शाश्वत आनंद केवल अंतर्मुखी होकर, ईश्वर की भक्ति में और अपनी इच्छाओं पर विजय प्राप्त करके ही मिल सकता है।
​आइए, हम सब भी महाराज ययाति के जीवन से प्रेरणा लें और संसार की क्षणिक वस्तुओं में सुख खोजने के बजाय, वास्तविक शांति और आत्म-संतोष की ओर बढ़ें।
​(अपने विचार ज़रूर साझा करें!) 👇

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Manoj Budhathoki, Nirankar ' ', Ram Ram, Mobatsinh Chauha...
04/03/2026

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Manoj Budhathoki, Nirankar ' ', Ram Ram, Mobatsinh Chauhan, Bishnu KCee, Kirtika Fulmali

मत झुको। अपनी अवस्था से मत गिरो।यह एक चेतावनी है।जो योगी ब्रह्मांडीय पूर्णता का स्वाद चखता है, उसमें सूक्ष्म रूप से अहंक...
04/03/2026

मत झुको। अपनी अवस्था से मत गिरो।
यह एक चेतावनी है।
जो योगी ब्रह्मांडीय पूर्णता का स्वाद चखता है, उसमें सूक्ष्म रूप से अहंकार फूल सकता है—
अनजाने में “मैं” फिर लौट सकता है।
“मत झुको” का अर्थ है—
अहंकार, भय या विक्षेप से स्वयं को वक्र न होने देना।
उन्नत समाधि अवस्थाओं में साधक को अनुभव हो सकता है—
व्यापक आनंद
प्रकाशमय पहचान
विराट सर्वव्यापकता
परंतु जैसे ही सजगता में क्षणिक चूक होती है,
द्वैत फिर से स्थापित हो जाता है।
यहाँ शक्ति, विष्णु को निर्देश दे रही हैं—
बिना किसी डगमगाहट के अपनी स्थिति में स्थिर रहो।
यही है स्थितप्रज्ञा — स्थिर, अडिग चेतना।

03/03/2026

🚩 दानवीर कर्ण और 'तीन पत्ता बड़' का अद्भुत रहस्य 🚩
क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सबसे महान दानवीर कर्ण का अंतिम संस्कार कहाँ हुआ था? और क्यों आज भी एक पेड़ पर केवल तीन ही पत्ते आते हैं? आइये जानते हैं महाभारत की यह अनसुनी गाथा:
⚔️ युद्ध के मैदान में धर्म का पाठ
जब अर्जुन और कर्ण के बीच भीषण युद्ध चल रहा था, तब कर्ण के रथ का पहिया जमीन में धंस गया। कर्ण ने युद्ध के नियमों की दुहाई दी, लेकिन भगवान कृष्ण ने उन्हें याद दिलाया कि कहाँ थे नियम जब अभिमन्यु अकेला लड़ रहा था? और कहाँ थे नियम जब भरी सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ? अर्जुन के बाण से कर्ण मृत्यु के करीब पहुँच गए।
🦷 सोने के दांत की अंतिम परीक्षा
मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे कर्ण की परीक्षा लेने श्रीकृष्ण एक ब्राह्मण के रूप में आए और दान माँगा। कर्ण के पास कुछ नहीं था, तो ब्राह्मण ने उनके सोने के दांत की मांग की। कर्ण ने बिना झिझके पत्थर से अपना दांत तोड़ दिया। जब ब्राह्मण ने कहा कि दांत गंदा है, तब कर्ण ने बाण चलाकर धरती से 'बाण गंगा' निकाली और उसे धोकर शुद्ध दान किया।
🔥 सूरत की वो 'कुंवारी भूमि'
श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर कर्ण को वरदान दिया। कर्ण ने अंतिम इच्छा जताई कि उनका अंतिम संस्कार ऐसी 'कुंवारी भूमि' पर हो जहाँ कभी किसी का दाह संस्कार न हुआ हो। पूरी पृथ्वी पर ऐसी जगह केवल गुजरात के सूरत में तापी नदी के किनारे मिली। वहां श्रीकृष्ण ने अपने बाण पर कर्ण का शव रखकर उनका अंतिम संस्कार किया, जिसे आज 'तुलसीबाड़ी मंदिर' के नाम से जाना जाता है।
🌿 तीन पत्तों वाला चमत्कारिक वटवृक्ष
आने वाली पीढ़ियों को इस स्थान की महिमा पता चले, इसके लिए वहां एक वटवृक्ष प्रकट हुआ जिसे 'तीन पत्ता बड़' कहा जाता है। यह वृक्ष हजारों साल पुराना है, लेकिन चमत्कार यह है कि इस पर हमेशा केवल 3 ही पत्ते रहते हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं।
मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना पूरी होती है। 🙏✨

03/03/2026

बाहरी संसार का लय हो जाना और चेतना में स्थिर हो जाना ही शिव है

02/03/2026

Mahabharat Ka Doshi Kaun
゚viralシ

02/03/2026

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। कबीर जी के विचारों में छिपी है वो शक्ति जो समाज को जोड़ती है, तोड़ती नहीं। इस वीडियो को साझा करें और एकता का संदेश फैलाएं। ❤️🤝
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