ANANT KABIR

ANANT KABIR सतगुरु सत कबीर बन्दी छोड़ की दया

26/08/2024

*🌹श्री सदगुरुवे नमतस्येः नमो नमः 🌹*
🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵🪵

*सदा सत्संग में लग रहना। करो नाम से प्रीत।।*
*भजन में झुक रहना।चलो संतन की रीत।।*
*थेवा थेवा ठेकरी। घड़ घड़ गया कुम्हार।।*
*घड़ने वाला क्या करें।गया घड़वान हार।।*
*साहेब के दरबार में।लंबी बदी खजूर।।*
*चढ़े सो मेवा चाख ले।गिरे सो चकनाचूर।।*
*हस्ती छूटा थान से।कस्बे भाई पुकार।।*
*नो दरवाजा बंद भय।निकल गया असवार।।*
*हाड जले लोही झरे। झर झर पड़े अंगीर।।*
*रामानंद की शरण में।सम्मुख लड़े कबीर।।*
*सदा सत्संग में लग रहना। करो नाम से प्रीत।।*

सदगुरु कबीर साहेब फरमाते हैं हे मनुष्य प्राणी अगर अपने जीवन का भला चाहता है। एक परमात्मा नाम से प्रीत कर । और सत्य बातों की सत्संग कर। अगर भवसागर से पार होना चाहता है तो संतन की रीत वचन पर चल। जिससे तेरे जीवन में कल्याण मंगलम होगा। इस संसार में जो घड़ा बना है वह एक दिन जरूर फूटेगा। यह मिट्टी रूप घड़ा ज्यादा दिन नहीं रहेगा। इसलिए इस मनुष्य जन्म के सुनहरे अवसर का सदुपयोग कर । ओर सत्संग की सत्य बात का मन में मनन कर। अपना जीवन सतसंग विचार में व्यतीत कर। सांसारिक बातों में कुछ हासिल नहीं होगा। एक दिन शरीर के अंदर नो दरवाजे। २आंखें, २ नाक,२ कान,१ मल,१ मूत्र ,जो हे यह बंद हो जाएंगे । और अंदर वाला पंछी पता नहीं चलगा कहां से गया। और गली मोहल्ले में पुकार हो जाएगी कि मर गया । अब पता नहीं कौन मर गया। इस संसार में आया है, मनुष्य जन्म मिला है, इस हीरे जैसे जन्म को समझ । बार-बार नहीं मिलेगा और यह सारा संसार में पूर्ण जो नजर आ रहा है यह सतगुरु का ही दरबार है। इसी दरबार में खजूर का पेड़ है। अगर चढ़ गया तो मेवा चाख ले। अगर गिर गया तो चकनाचूर है भाई। यह शरीर एक परमात्मा का बना हुआ वृक्ष खजूर ही समझे। और इस शरीर रूपी में मेवा अमृत पान के लिए। काम क्रोध लोभ मोह अहंकार उनको बस में कर । अगर यह बस में नहीं है। इन काम भोग विलास में लिपाई मान रहा तो यह शरीर रूपी घड़ा व्यर्थ ही टूट कर चकनाचूर हो जाएगा। और अंत हाथ सिर्फ दुख पचताना आएगा। और कुछ नहीं। फिर पछताई क्या हो जब चिड़िया चुग जाएगी खेत। भावार्थ। एक दिन यह शरीर से काम क्रोध लोभ मोह अहंकार ढल जाएंगे।यह भी फिके हो जाएंगे। जब तक इन विषयों की शरीर में मजबूती है तभी तू भक्ति कर सकता है। इसलिए इनका विषयों मुख मोड़ और सत्य की सत्संग में लग जाए। और जिन्होंने सत्संग करी उन्होंने शरीर वर्ण आवरण की परवाह नहीं करी। क्योंकि जो सत्संग की रीत पर चलते हैं वह किसी बात से भयभीत नहीं होते। संतजन तन मन से सतगुरु के सम्मुख रहते।और सतगुरु वचन पर ही चलते हैं, चाहे आंधी आए, चाहे तूफान, चाहे जग रूठे, चाहे घर परिवार छूट। लेकिन संत जन सत्य की रास्ता नहीं छोड़ते। जिन्होंने सत्संग का रास्ता छोड़ा वह भटक गए।

🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨🪨

*🙏🙏सप्रेम साहेब बंदगी साहेब जी 🙏🙏*
🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

Address

Gurugram

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when ANANT KABIR posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share