21/11/2025
जो माया सब जगहि नचावा । जासु चरित लखि काहूँ ना पावा ।।
सोई प्रभु भू बिलास खगराजा । नाच नटी इव सहित समाजा ।।
सोई सच्चिदानंदन घन रामा । अज बिग्यान रूप बल धामा।।
ब्यापक ब्याप्य अखण्ड अनंता । अखिल अमोघशक्ति भगवंता ।।
अगुन अदभ्र गिरा गोतिता । सबदर्शी अनबध अजिता ।।
निर्मम निराकार निर्मोहा । नित्य निरंजन सुख संदोहा ।।
प्रकृति पार प्रभु सब उर बासी । ब्रह्म निरीह बिरज अभिनाशी ।।
ईहा मोह कर कारण नाही । रबी सन्मुख तम कबहुँ की जाही ।।
भगत हेतु भगवान प्रभु, राम धरेउ तनु भूप ।
किए चरित पावन परम, प्राकृत नर अनुरूप ।।
जथा अनेक बेश धरि, नृत्य करइ नट कोई ।
सोई सोई भाव देखावई, आपूँन होई ना सोई ।।