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I have reached 3K followers! Thank you for your continued support. I could not have done it without each of you. 🙏🤗🎉
30/04/2023

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07/02/2023
आप सभी के लिए प्यारा-सा निमंत्रण। पटियाला में होने जा रही है श्रीमद् भागवत कथा। आइए कथा श्रवण करें और अपने जीवन को सफल ब...
04/02/2023

आप सभी के लिए प्यारा-सा निमंत्रण। पटियाला में होने जा रही है श्रीमद् भागवत कथा। आइए कथा श्रवण करें और अपने जीवन को सफल बना श्रीराधा कृष्ण जी की भक्ति और प्रेम में सराबोर हो जाएं।

श्रीकृष्ण लीला में भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई के रूप में जो श्रीबलराम जी हैं , वही श्रीचैतन्य महाप्रभु जी की लीला में श...
02/02/2023

श्रीकृष्ण लीला में भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई के रूप में जो श्रीबलराम जी हैं , वही श्रीचैतन्य महाप्रभु जी की लीला में श्री नित्यानंद प्रभु बनकर आए । कल अर्थात् 3 फरवरी को श्री नित्यानंद प्रभु जी का शुभ प्राकट्य दिवस है । सभी भक्तों को उनके शुभ प्राकट्य दिवस की बहुत-बहुत बधाई हो।

1 फरवरी 2023, बुधवार ❝ श्री जया (भैमी) एकादशी ❞ उपवास Iअगले दिन पारण का समय~2 फरवरी 2023, गुरुवार प्रातः 10:01 बजे से पह...
31/01/2023

1 फरवरी 2023, बुधवार
❝ श्री जया (भैमी) एकादशी ❞ उपवास I

अगले दिन पारण का समय~
2 फरवरी 2023, गुरुवार प्रातः 10:01 बजे से पहले I

+ ❝ श्री वराह द्वादशी ❞ श्री भगवान वराहदेव जी का आविर्भाव I
(पारण से पहले भगवान श्री वराह देव का अर्चन करें।)

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे l
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ll

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸.

अपने कल्याण के लिए एकादशी व्रत अवश्य करें।
18/12/2022

अपने कल्याण के लिए एकादशी व्रत अवश्य करें।

04/01/2022

Shrimad Bhagwat Katha || Day 1 ||Swami Devkinandan Dass Gokul || CHANDIGARH || KATIK MAAS

04/01/2022

Shrimad Bhagwat Katha || Day 1 ||Swami Devkinandan Dass Gokul || CHANDIGARH || KATIK MAAS Welcome to the Official YouTube Channel of Swami Devkinandan Dass...

🏵🏵 सफला एकादशी 🏵🏵                        ( 30 दिसंबर 2021 वीरवार )                       सफला एकादशी पौष महीने की कृष्ण-...
30/12/2021

🏵🏵 सफला एकादशी 🏵🏵

( 30 दिसंबर 2021 वीरवार )


सफला एकादशी पौष महीने की कृष्ण-पक्ष की एकादशी है । ब्रह्मांड पुराण में धर्मराज युधिष्ठिर श्रीकृष्ण संवाद में इस एकादशी की महिमा का वर्णन हुआ है । भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर महाराज से कहते हैं -- जैसे नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़, यज्ञों में अश्वमेध यज्ञ, नदियों में गंगा जी, देवताओं में विष्णु तथा मनुष्यों में ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं ,उसी प्रकार समस्त व्रतों में एकादशी व्रत सर्वश्रेष्ठ है । हे भरतवंश कुलभूषण युधिष्ठिर ! जो सदैव एकादशी का व्रत करता रहता है, वह मेरा अत्यंत प्रिय है । पांच हज़ार वर्षों की तपस्या का पुण्य केवल एक एकादशी के व्रत से ही मिल जाता है।

सफला एकादशी व्रत के महात्म्य की कथा इस प्रकार है---चम्पावती नामक नगर में महिष्मत् नाम के एक राजा रहते थे । उस राजा के चार पुत्र थे । उनमें सबसे बड़े पुत्र का नाम लुम्पक था । वह दुष्ट-चरित्र वाला पापी था तथा ब्राह्मणों- वैष्णवों से द्वेष करता था । यहां तक कि वह देवताओं की भी निंदा करता था । वेश्यागमन जैसे निन्दनीय कार्य में तथा जुआ खेलने में भी उसकी बड़ी आसक्ति थी। इस कारण राजा ने उसे अपने राज्य से निकाल दिया था । राज्य से निकलकर वह क्या करता ? मजबूरी में वह एक जंगल में रहने लगा और अपने पिता के राज्य के प्रजाजनों की धन-संपत्ति को लूटने लगा । कई बार चोरी करते हुए लोगों ने उसे पकड़ा भी, परंतु राजपुत्र जान कर दया करके वे उसे छोड़ देते थे । वह लुम्पक जंगल में पशुओं की हत्या करके उनका मांस तथा जंगल के फल खाकर जीवन व्यतीत करता था ।
उस वन में एक विशाल पीपल का वृक्ष था, जिसे लोग देवता के समान आदर देते थे । लुम्पक कुछ दिन उस पीपल के नीचे रहा । एक बार लुम्पक की तबीयत बिगड़ गई । उचित औषधि न मिलने के कारण वह बहुत बीमार हो गया । एक दिन तो वह बीमार व कमजोरी से बेहोश हो गया । सौभाग्य से उस दिन दशमी तिथि थी । अगले दिन दोपहर में उसे थोड़ा होश आया । वह उस समय हिलने-जुलने में भी असमर्थ था । अतः उस दिन वह किसी भी जानवर का शिकार न कर सका , किसी प्रकार उसने कुछ जंगली फल इकट्ठे किए और मन-ही-मन भगवान विष्णु को निवेदित कर दिए और खा लिये । बीमारी व भूख से उसे सारी रात नींद नहीं आई ।

लुम्पक के साथ जब यह घट रहा था उस दिन यही सफला एकादशी थी । निराहार व्रत एवं रात्रि जागरण करके व्रत करने से भगवान मधुसूदन उस पर बहुत प्रसन्न हुए ।

द्वादशी के दिन प्रातः काल लुम्पक के सामने एक दिव्य अश्व (घोड़ा) आकर खड़ा हो गया और आकाशवाणी हुई--हे राजकुमार ! इस सफला एकादशी के पुण्य प्रभाव से आपको निष्कंटक राज्य मिलेगा, आप अपने पिता के पास जाओ एवं राजसुख भोगो । उसने वैसा ही किया । घोड़े पर बैठकर, अपने पिता के पास जाकर उसने पिता को प्रणाम किया और सारी बात बताई । लुम्पक की बात सुनकर राजा बड़े प्रसन्न हुए और उन्होंने बड़े प्यार से उसे अपने गले लगाया और उसे राजमहल में अच्छा स्थान दे दिया । कालांतर में राजा महिष्मत् ने अच्छा आचरण व सुंदर व्यवहार देखकर अपना राज्य लुम्पक को दे दिया और उसका विवाह एक सुंदर कन्या से कर दिया । कुछ वर्ष बाद लुम्पक के घर पुत्र हुआ, वह बड़ा ही सुंदर व स्वस्थ था । बड़ा होने पर लुम्पक का वह पुत्र बड़ा ही धार्मिक स्वभाव का व पिता- माता की सेवा करने वाला निकला । सुंदर पत्नी एवं आज्ञाकारी व धार्मिक पुत्र प्राप्त करके सुख से राज्य परिचालन करते हुए लुम्पक ने अपना जीवन व्यतीत किया ।
सफला एकादशी व्रत के फल से मानव इस लोक में यश तथा परलोक में मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है । इस व्रत को पालन करने वाले स्त्री-पुरुष धन्य होते हैं । इस व्रत द्वारा अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है ।

एकादशी व्रत पर
श्रील गुरु महाराज जी की शिक्षा

हमारे पतितपावन परम आराध्यतम श्रील गुरु महाराज जी (अखिल भारतीय श्रीचैतन्य गौड़ीय मठ के प्रधानाचार्य परम पूज्यपाद ॐ विष्णुपाद 108 श्री श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज जी) ने अपने दिव्य प्रवचनों के माध्यम से हमें शिक्षा दी है कि एकादशी व्रत आदि भक्ति साधनाओं का असली उद्देश्य राज्य, सुंदर स्त्री या सुंदर पति अथवा आज्ञाकारी पुत्र प्राप्त करना नहीं है, एकादशी व्रत का असली उद्देश्य तो भगवान श्रीहरि की अहैतु की भक्ति प्राप्त करना है , जो कि नित्य है व जीव का सर्वोत्तम अभीष्ट है । हरिनाम करके या एकादशी व्रत करके भगवान से उसके बदले में दुनियावी वस्तुएं मांगना या मांगने की इच्छा करना बुद्धिमानी नहीं है । दूसरा यह हमेशा आपके पास रह भी नहीं पायेंगी । भगवान से भगवान की सेवा मांगने से जीव का जीवन व उसकी एकादशी व्रत इत्यादि करने की साधना परिपूर्ण रूप में सफल होती है ।

हरे कृष्ण !

देवकीनंदन दास
(गौड़ीय वैष्णव दासानुदास)

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18/06/2021

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