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12/04/2023

JAIN YUVAK MANDAL, BELAGAVI provides a wonderful opportunity for 7th, 8th & 9th Jain English medium students

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Pt. Shri Sudharm Ravindra Mudalgi :+91 855 361 0008.

Shri Nemesh B. sooji : +91 944 848 2570.

Shri Shridhar S. Patravali : +91 944 809 4242.

03/04/2023

दुनिया पैसे और रसूख वालों की शरण लेती है, पैसे और रसूख वाले तांत्रिक-मांत्रिक साधुओं की शरण लेते हैं, तांत्रिक-मांत्रिक साधु स्वर्ग के देवी-देवताओं की शरण लेते हैं, स्वर्ग के देवी-देवता भगवान की शरण लेते हैं और भगवान अपने आत्मा की शरण लेते हैं। तम्हा आदा हु मे सरणं - इसलिए मेरा आत्मा ही मेरा शरण है।

यही कारण है कि अपना आत्मा ही सर्वोच्च सत्य है; अपने आत्मा का ही ज्ञान ही सर्वोच्च ज्ञान है और अपने आत्मा में लीन होना ही सर्वोच्च धर्म है।

भगवान के आत्मा में लीन होने के बजाय खुद के आत्मा में लीन होने को परम धर्म के रूप में प्रतिपादित करना स्वाधीनता की पराकाष्ठा है। ऐसे पराधीनता-शून्य परम-स्वाधीन धर्म के मर्मोद्घाटक भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के अवसर पर परम-स्वाधीनता और आत्मलीनता की प्राप्ति हेतु हार्दिक शुभकामना! 🙏

17/02/2023

आकुलित मन का, मन को संदेश।

जो अमर है उन्हें मरा हुआ क्यों देखते हो। जिन्होंने तुम्हे आत्मा दिखाया तुम उन्हें मात्र शरीर क्यों देखते हो?
#भावपूर्णश्रद्धांजलि डॉ. संजीवजी गोधा।

24/01/2023

मेरे गुरुदेव का नाम पूज्य कानजी स्वामी है । *जिन्हें आपके गुरु कंजाइष्ट कहते है। हम तो अपने गुरु को प्यार से *गुरुदेव श्री* कहते है। मेरे गुरुदेव कहते है कि सच्चे गुरु तो मोक्षमार्गी दिगम्बर मुनिराज ही होते है उनके लिए तो यह देह भी न्यौछावर है।

आपको मालूम है इतिहास में हमारे गुरुदेव श्री के द्वारा व उनके अनुयायियों के द्वारा सिर्फ और सिर्फ मंदिर स्वाध्यय भवन का निर्माण ही हुआ है। एक भी मंदिर न उनकी प्रेरणा से तोड़ा गया न ही कब्जा किया गया न ही कही पर भी नाम मिटा कर अपना लिखवाया गया। *आप दिया लेके भी ढूंढने जाओगे न तो भी आपको* एके भी मंदीर ऐसा नही मिलेगा।

स्वाध्यय हेतु मूल गर्न्थो का पठन पाठन ही किया व करवाया गया है तथा मूल ग्रंथो को ही विश्व लेवल पर छापा गया है। उनकी लागत से या तो 99 गुना कम कीमत पर अथवा निशुल्क ही उपलब्ध करवाया गया है। मात्र अपने प्रवचन अथवा अपनी पुस्तक का प्रचार किया हो ऐसा आपको न मात्र के बराबर भी नही मिलेगा परन्तु मूल गर्न्थो का नाम जो आज *मित्र पक्ष भी* जानता है न वह हमारे गुरुदेव की ही देन है।

हमारे गुरुदेव श्री के सान्निध्य में उनकी निष्राय में अंगिनत ऑथेंटिक विद्धवान तैयार हुए है जो पूरे विश्व में लोहा लेने की ताकत रखते है। आप ऐसे विद्धवान को ढूंढने के लिए जाएंगे तो शायद आप पाएंगे कि उनके अनुयायिओं के हर घर मे एक विद्धवान मौजूद है। घर का प्रत्येक सदस्य ही विद्धवान हो ऐसा भी होना अतिसम्भव है। और विद्धवान से मतलब मात्र विद्या वान नही अपितु श्रद्धावान विवेकवान क्रियावान आज्ञावान सादा जीवन वान उससे अधिक यह ज्ञान मेरे मोक्ष का कर्म निर्वाण का कारण नही है इसलिए गर्व करने योग्य नही है। यह ज्ञान दिया है मुझे मेरे गुरुदेव ने पर ज्ञान का घमंड नही दिया।

हमारे गुरुदेव ने *गोली का जवाब गाली से भी नही* ऐसी ताकत हमे दी है।

मुझे गर्व है कि में मनुष्य हुआ भारत मे हुआ उसमे भी जैन हुआ और जैन में भी गर्व की बात की में दिगम्बर जैन हुआ और अधिक गर्व किया जब गुरुदेव श्री मिले.

परन्तु उन्होंने मेरा ये सारा घमंड ही चूर कर दिया जब उन्होंने बताया कि यह सब पर्याय दृस्टि है पर दृस्टि है घमंड करने योग्य ही नही, अरे भुलेला जीव तू तो भगवान है स्वंम भगवान आहा सच मुच् मेरे गुरुदेव ने मुझे सच में जगा दिया।

सभी जीव स्वभाव से अभी ही भगवान है।

न सर्दी की हवा रोक पाती हैन गर्मी की लू रोक पाती हैयह मुमुक्षओ का तत्व प्रेम, आत्म प्रीति, संसार भय, तत्व  जिज्ञासा ही ह...
23/01/2023

न सर्दी की हवा रोक पाती है
न गर्मी की लू रोक पाती है

यह मुमुक्षओ का तत्व प्रेम, आत्म प्रीति, संसार भय, तत्व जिज्ञासा ही है जो इन्हें सब जगह खिंच ले जाती है।

इन पांडालों में कही भी किसी प्रकार के न ac तथा न ही हीटर लगे है।, फिर भी प्रत्येक के चेहरे पर साधर्मी वात्सल्य, शांति व प्रसन्ता के फूल खिले है।

शुद्ध चेतन्य तत्व का स्वरूप समझने बैठे है बस।

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12/01/2023

जो तत्व जानता नही है वह बाल है
जो तत्व जानने को उत्सुक हुआ है वह युवा है
जो तत्व पी रहा है वह प्रौढ़ है
जो तत्व मय हो गया है वह वृद्ध है, अज्ञानी इसे उम्र से देखता है।

21/12/2022

वो पर्याय मेरी है जिससे मेरी खबर पढ़े। जिससे मेरी खबर न पड़े, वह मेरी प्रयाय भी नही!

कुछ दिनों से यह प्रश्न बार बार कई लोगो द्वारा सोशल मीडिया पर उठाया जा रहा है कि शास्त्र ग्रन्थ आगम मुनिराजों के लिए है श...
02/11/2022

कुछ दिनों से यह प्रश्न बार बार कई लोगो द्वारा सोशल मीडिया पर उठाया जा रहा है कि

शास्त्र ग्रन्थ आगम मुनिराजों के लिए है श्रावको को इन्हें पढ़ने का अधिकार नही।

उत्तर व प्रमाण तो इसके बहुत से हो सकते है और है भी परन्तु सामान्य ज्ञान में इसका उत्तर इस प्रकार से जान सकते है कि

मोक्षमार्गी, मोक्षभिलाषी जीव के लिए गर्न्थो का निर्माण आचार्यो द्वारा किया जाता है।

ग्रन्थ का ओरिजन क्या है? कन्हा से ग्रन्थ निर्माण होता है? आचार्यो द्वारा ऐसा ही है न? आचार्यो को वह ज्ञान परम्परा से गणधरों द्वारा प्राप्त होता है और गणधरों को अरिहंतो से अर्थार्त सामान्य भाषा में कहें तो गर्न्थो के मूल मालिक अरिहंत भगवान है जिनकी वाणी को गठित करके ग्रन्थ बनाये गए है।

उन अरिहंत परमात्मा के समवशरण में जब दिव्यध्वनि खिरती है तो वह किसके लिए खिरती है कितने टाइम खिरती है और कौन कौन उस समवशरण में बैठ कर उस दिव्यध्वनि के लाभ ले सकता है? यदि वंहा मात्र मुनिराजों की एंट्री है तो ग्रन्थ भी मात्र मुनिराजों के लिए ही होंगे श्रावक के लिए नही....

A collection of granths written by wise people from several thousand years back to till now will be available in our literature section. In which you can find actual Jain dharm principles.

21/10/2022

मेरे गुरुदेव का नाम पूज्य कानजी स्वामी है । जिन्हें आपके गुरु कंजाइष्ट कहते है। हम तो अपने गुरु को प्यार से गुरुदेव श्री कहते है। मेरे गुरुदेव कहते है कि सच्चे गुरु तो मोक्षमार्गी दिगम्बर मुनिराज ही होते है उनके लिए तो यह देह भी न्यौछावर है।

आपको मालूम है इतिहास में हमारे गुरुदेव श्री के द्वारा व उनके अनुयायियों के द्वारा सिर्फ और सिर्फ मंदिर स्वाध्यय भवन का निर्माण ही हुआ है। एक भी मंदिर न उनकी प्रेरणा से तोड़ा गया न ही कब्जा किया गया न ही कही पर भी नाम मिटा कर अपना लिखवाया गया। आप दिया लेके भी ढूंढने जाओगे न तो भी आपको एके भी मंदीर ऐसा नही मिलेगा।

स्वाध्यय हेतु मूल गर्न्थो का पठन पाठन ही किया व करवाया गया है तथा मूल ग्रंथो को ही विश्व लेवल पर छापा गया है। उनकी लागत से या तो 99 गुना कम कीमत पर अथवा निशुल्क ही उपलब्ध करवाया गया है। मात्र अपने प्रवचन अथवा अपनी पुस्तक का प्रचार किया हो ऐसा आपको न मात्र के बराबर भी नही मिलेगा परन्तु मूल गर्न्थो का नाम जो आज मित्र पक्ष भी जानता है न वह हमारे गुरुदेव की ही देन है।

हमारे गुरुदेव श्री के सान्निध्य में उनकी निष्राय में अंगिनत ऑथेंटिक विद्धवान तैयार हुए है जो पूरे विश्व में लोहा लेने की ताकत रखते है। आप ऐसे विद्धवान को ढूंढने के लिए जाएंगे तो शायद आप पाएंगे कि उनके अनुयायिओं के हर घर मे एक विद्धवान मौजूद है।

हमारे गुरुदेव ने गोली का जवाब गाली से भी नही ऐसी ताकत हमे दी है।

15/10/2022

मोक्षमार्ग प्रकाशक जी को बम का गोला बताने वाले बिल्कुल सही कहते है।
यह बम जिसपर भी फटता है, उसके मिथ्यात्व के तीन टुकड़े हो जाते है।

01/06/2022

जो लोग तीर्थ यात्रा को पिकनिक समझते है, और यात्रा को धर्म मानते है, तथा चरित्र का ख्याल भी नही रखते उनसे श्री जिनसेनाचर्य कहते है कि

संसाराबधेरपारस्य तरण तीर्थमिष्यते । चेष्टितं जिननाथानां तस्योक्तिसतीर्थसंकथा ।। 8 ।। चतुर्थ पर्व (आदिपुराण )

जो इस अपार संसार समुद्रसे पार करें उसे तीर्थ कहते हैं ऐसा तीर्थ जिनेंद्र भगवान का चरित्र ही हो सकता है अतः उसके कथन करने को तीर्थाख्यान कहते हैं

31/05/2022

क्या आप जानते है जहाँ आप रहते है उसके आस पास भी एक जैन मंदिर है।

क्या आप व आपके परिवार के सभी सदस्य वहाँ दर्शन पूजन हेतु रोज जाते है?

यदि नही जाते तो एक दिन उस मंदिर के लिए भी फेसबुक पर एक पोस्ट होगी कि वहाँ एक जैन मंदिर हुआ करता था।

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