जय माँ गढ़देवी

जय माँ गढ़देवी Mata Garhdevi aadi sakti jagdamba hai. Ye sabi bhakto ki sari manokamna puri karti hai.

!!Jai Maa Garhdevi!!
20/09/2025

!!Jai Maa Garhdevi!!

19/04/2023
10/04/2023

भोजन के बाद ये चीजे हैं ज़हर के समान।
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भोजन करने के बाद हम कभी कभी भूलकर कुछ ऐसे काम करते हैं जिस से हमारे शरीर पर और स्वास्थय पर बुरा प्रभाव पड़ता हैं। आइये जाने इनके बारे में और इनसे होने वाले हानियों को और यथा संभव इनसे बचने का प्रयत्न करे। प्रयतन करें के भोजन पेट भर कर ना करें, हमेशा भूख से थोडा कम भोजन करना चाहिए, जिस से पेट में भोजन को पचाने का प्रयाप्त स्थान मिल सके. और भोजन के बाद कम से कम एक घंटा तक कुछ भी खाना या पीना नहीं चाहिए.

भोजन के तुरंत बाद ठंडा पानी न पिएं
वैसे तो भोजन के उपरांत पानी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है पर आवश्यकता पडऩे पर बीच में थोड़ा कम तापमान वाला पानी पी सकते हैं। ठंडा पानी तो बिल्कुल नहीं पीना चाहिए क्योंकि खाना खाने के बाद शरीर का तापमान अधिक होता है यदि हम ठंडा पानी पिएंगे तो वह हमारे स्वास्थ्य को नुक्सान पहुंचाएगा। शरीर के लिए वैसे गुनगुना या गर्म पानी ही लाभप्रद होता है इससे हमारे शरीर के बुरे टॉक्सिन पेशाब के जरिए बाहर निकल जाते हैं और हमें जाने-अंजाने कितनी बीमारियों से दूर रखते हैं। और पानी भोजन के 1 से डेढ़ घंटे बाद ही पीना चाहिए।

भोजन के तुरंत बाद धूम्रपान न करें
बहुत से लोग खाना खत्म करने के तुरन्त पश्चात सिगरेट सुलगा लेते हैं खाना खाने के तुरन्त बाद धूम्रपान करना भी सेहत को खराब करता है खाने के बाद एक सिगरेट दिन भर की 10 सिगरेट के बराबर नुक्सान पहुंचाती है।

भोजन के तुरंत बाद ना खाएं फल
कुछ लोगों को भोजन के पश्चात फल खाने की आदत होती है इससे पेट में वायु बनती है फल को भोजन खाने से एक घंटा पूर्व या दो घंटे बाद लेना चाहिए।

भोजन के तुरंत बाद चाय न पिएं
चाय की पत्ती में अम्ल की मात्रा अधिक होती है जिससे भोजन में उपस्थित प्रोटीन सख्त हो जाता है और उसका पाचन कठिन हो जाता है अत: भोजन के पश्चात चाय का सेवन कदापि न करें।

भोजन के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिए
खाना खाने के तुरन्त बाद सोने से खाना सही ढंग से नहीं पचता तुरन्त सोने से गैस्ट्रिक समस्या पैदा होती है रात्रि भोजन और सोने के बीच दो से तीन घंटे का अंतराल होना जरूरी है दिन के खाने के बाद थोड़ी-सी झपकी सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है।

भोजन के तुरंत बाद स्नान न करें
इससे टांगों, हाथों और शरीर में खून का प्रवाह बढ़ जाता है और पेट के आसपास यह कम हो जाता है जो हमारे स्वास्थ्य और पाचनतंत्र को हानि पहुंचाता है।

जय मां गढ़देवी आपकी सदा ही जय ही।।

हनुमान जी वानरराज सुग्रीव के साथ पहले किष्किंधा रहते थे पर प्रभु राम के साथ बाद में अयोध्या आ गए,  वह कुछ समय मकरध्वज के...
10/04/2023

हनुमान जी वानरराज सुग्रीव के साथ पहले किष्किंधा रहते थे पर प्रभु राम के साथ बाद में अयोध्या आ गए, वह कुछ समय मकरध्वज के पास आज के दक्षिण अमेरिका के होंडूरास (पूर्व माया सभ्यता ) में भी रहे, कुछ समय तक अफ्रीका के कुछ जगहों पर भी उनका निवास हुआ। त्रेता युग के समापन के बाद हनुमान जी किम्पुरुष वर्ष में निवास करने लगे। किम्पुरुष वर्ष हिमालय के उत्तर में हेमकीता के निकट का क्षेत्र है जिसका वर्णन पौराणिक आख्यायनों किया गया है। ऐसा माना जाता है यहाँ के लोगों की आयु सामान्यत: दस हजार वर्ष की होती है। यहाँ यति, नरसिंघ, रीछ, वानर गण के लोग रहते हैं। एशिया के अतिरिक्त हनुमान जी की आज भी लैटिन अमेरिका अफ्रीका के देशों में उपासना होती है। उनकी मूर्तियां जो हजारों बरस पुरानी हैं, प्रायः पुरानी सभ्यता वाली जगहों पर मिलती हैं।

हनुमान जी व्याकरण (शब्द शास्त्र) के आचार्य हैं, क्योंकि बातचीत के समय उनके मुख से कोई त्रुटि नहीं होती है। सुर, नर, नाग, गन्धर्व से भी बढ़कर हनुमान जी ने अखण्ड ब्रह्मचर्य धारण किया हुआ है। कर्नाटक में एक जगह हनुमान जी की पत्नी के साथ पूजा होती है किंतु वह विवाह प्रतीकात्मक था जो उन्होंने सूर्य की पुत्री के साथ किया था।

हनुमान जी शैव और वैष्णव के मध्य सेतु हैं। वह एकादश रूद्र हैं जो विष्णु अवतार भगवान राम के अनन्य भक्त हैं।हनुमान जी की पूजा के बिना भगवान श्रीराम की पूजा पूर्ण फलदाई नहीं होती है। हनुमान जी तेज एवं बल में श्रीराम और लक्ष्मण के समान है। हनुमान जी ऐसा कोई पराक्रम प्रकट नहीं करते हैं, जिससे प्रभु श्रीराम के यश - कीर्ति का क्षय हो। हनुमान जी ऐसे एकमात्र राम के सेवक हैं जिन्हें माता सीता ने अपना पुत्र कहा था। भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के समय हनुमान जी चार समुद्र और 500 नदियों से जल लाए थे। यह उनकी असाधारण शक्ति का द्योतक है। हनुमान जी की कृपा से समस्त व्याधियों से छुटकारा प्राप्त होता है।

हनुमान जी बुद्धि, विवेक, धैर्य और विनम्रता के स्रोत हैं। छोटे बालक से लेकर वयोवृद्ध के हृदय में एक समान भाव के साथ विद्यमान बजरंग बली हर उस स्थान पर रहते हैं जहाँ राम कथा का पारायण होता है। राम कथा कहने से पहले बजरंगी का आह्वाहन किया जाता है और उनके लिए अलग चौकी रखी जाती है जिस पर बैठ कर वह कथा सुनते हैं।

हर सनातनी के कंठ और घर में हनुमान चालीसा स्थापित है। हर भय से अभय होने का राम बाण उपाय हनुमान चालीसा का पाठ है। बजरंगी का आशीर्वाद और कृपा इस देश और हम सनातनियों पर बनी रहे।

जय बजरंग बली 🙏

( चित्र: दक्षिण अमेरिका के होंडुरास में प्राप्त हनुमान जी की मूर्ति )

कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई हो आप लोगों के जीवन में शांति और समृद्धि हो।
19/08/2022

कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई हो आप लोगों के जीवन में शांति और समृद्धि हो।

08/06/2022

भगवान् राम धनुष को उठाते हैं । यह भी तौलने की एक प्रक्रिया है । पर तराजू की विशेषता की परीक्षा केवल तौलने मात्र से ही नहीं हो जाती । तौलने से पूर्व तराजू के दोनों पलड़ों को सम होना चाहिये और तौलने के बाद भी। भगवान् राम तो धनुष तोड़ने से पूर्व और तोड़ने के बाद दोनों स्थितियों में सम हैं । उनमें हर्ष , विषाद या अभिमान न पहले है और न ही बाद में ।
भगवान् राम और रावण दोनों ही तौलते हैं , पर रावण तौलने के बाद कहता है कि भगवान् शंकर हल्के हैं और मैं भारी हूँ । पर भगवान् राम गुरु को ' गुरु ' ( भारी ) की ही दृष्टि से देखते हैं । और यही कहते हैं कि धनुष तो गुरुजी की कृपा से ही टूटा , मैं तोड़ने वाला नहीं हूँ । इसीलिये परशुरामजी ने जब यह पूछा कि ' वाणी से तो तुम विनम्र हो , पर धनुष तोड़ने के बाद तुम्हें अभिमान तो अवश्य ही हुआ होगा ? "
*भंजेहु चापु दापु बड़ बाढ़ा ।* १ / २८२/६
इस पर भगवान् राम ने कहा कि ' बिलकुल नहीं ! यदि मैंने धनुष तोड़ा होता , तब तो अभिमान आने की सम्भावना थी , पर जब मैंने तोड़ा ही नहीं , तो फिर अभिमान किस बात का ? '
" जब तुमने नहीं तोड़ा तो फिर धनुष टूट कैसे गया ? " परशुरामजी ने पूछा ।
भगवान् राम ने कहा " गुरुदेव की आज्ञा पाकर मैंने सोचा धनुष के पास चलकर उसे देखना चाहिये । और उसे उठाने से पूर्व जब मैंने गुरुजी को प्रणाम किया
*गुरहिं प्रनामु मनहिं मन कीन्हा।*
तो उनकी कृपा से धनुष हल्का हो गया और मेरे हाथ लगते ही ऊपर उठ गया और अपने आप टूट गया
*अति लाघवँ उठाइ धनु लीन्हा।।*
और जब
*छुअतहिं टूट पिनाक पुराना ।*
*मैं केहि हेतु करौं अभिमाना ।।* १ / २८२ / ८
छूने भर से टूट गया तो इसमें अभिमान करने लायक बात कहाँ है ? " भगवान् राम का यह वाक्य बड़ा सांकेतिक है ।
भगवान् शंकर का धनुष अहंकार है । अब , यदि उसे तोड़ने के बाद तोड़ने वाला यह कहे कि मैंने अहंकार को तोड़ दिया , तो फिर अहंकार टूटा कहाँ ? वह तो तोड़ने वाले के सिर पर सवार हो गया । जहाँ कर्तृत्व बचा हुआ है , ' मैंने किया ' यह भाव शेष है , वहाँ अहंकार कहाँ मिटा ? वह तो वहाँ पूरी तरह से विद्यमान है ।
भगवान् राम मानो बताना चाहते हैं कि अहंकार से रहित होकर , गुरु का आश्रय लेकर ही व्यक्ति परम कल्याण की प्राप्ति कर सकता है । परशुरामजी भी बाद में इस बात को समझ जाते हैं कि भगवान् राम ही ऐसे सच्चे गुरुभक्त हैं जिनमें अभिमान का लेश नहीं है । भगवान् राम अपने चरित्र से गुरु की महिमा और गुरुता को प्रकट करते हैं । वे बताना चाहते हैं कि गुरु की कृपा के द्वारा ताड़का का वध हुआ , अहल्या का उद्धार हुआ और शिवजी का धनुष टूटा । इसका तात्पर्य है कि गुरु ही ब्रह्म को निष्क्रिय से सक्रिय बनाते हैं । इस दृष्टि से प्रभु तीसरी भक्ति के रूप में ' अमान होकर गुरु सेवा ' का जो उपदेश देते हैं , वह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है ।

जय माता दीसभी भक्तगणों से निवेदन है की  "जय माँ गढ़देवी"  का app आ गया है ।  सभी भक्तगण नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरं...
20/05/2022

जय माता दी
सभी भक्तगणों से निवेदन है की "जय माँ गढ़देवी" का app आ गया है । सभी भक्तगण नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और माता रानी की सेवा में अपनी उपस्थिति दर्ज करें।।

"जय माँ गढ़देवी" 

19/05/2022

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हनुमान जी की पत्नी के साथ दुर्लभ फोटोकहा जाता है कि हनुमान जी के उनकी पत्नी के साथ दर्शन करने के बाद घर में चल रहे पति प...
28/11/2021

हनुमान जी की पत्नी के साथ दुर्लभ फोटो
कहा जाता है कि हनुमान जी के उनकी पत्नी के साथ दर्शन करने के बाद घर में चल रहे पति पत्नी के बीच के सारे तनाव खत्म हो जाते हैं।
आंध्रप्रदेश के खम्मम जिले में बना हनुमान जी का यह मंदिर काफी मायनों में खास है। यहां हनुमान जी अपने ब्रह्मचारी रूप में नहीं बल्कि गृहस्थ रूप में अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान है।
हनुमान जी के सभी भक्त यही मानते आए हैं की वे बाल ब्रह्मचारी थे और वाल्मीकि, कम्भ, सहित किसी भी रामायण और रामचरित मानस में बालाजी के इसी रूप का वर्णन मिलता है। लेकिन पराशर संहिता में हनुमान जी के विवाह का उल्लेख है। इसका सबूत है आंध्र प्रदेश के खम्मम ज़िले में बना एक खास मंदिर जो प्रमाण है हनुमान जी की शादी का।
यह मंदिर याद दिलाता है रामदूत के उस चरित्र का जब उन्हें विवाह के बंधन में बंधना पड़ा था। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि भगवान हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी नहीं थे। पवनपुत्र का विवाह भी हुआ था और वो बाल ब्रह्मचारी भी थे।
कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण ही बजरंगबली को सुवर्चला के साथ विवाह बंधन में बंधना पड़ा। दरअसल हनुमान जी ने भगवान सूर्य को अपना गुरु बनाया था।
हनुमान, सूर्य से अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। सूर्य कहीं रुक नहीं सकते थे इसलिए हनुमान जी को सारा दिन भगवान सूर्य के रथ के साथ साथ उड़ना पड़ता और भगवान सूर्य उन्हें तरह-तरह की विद्याओं का ज्ञान देते। लेकिन हनुमान जी को ज्ञान देते समय सूर्य के सामने एक दिन धर्मसंकट खड़ा हो गया।
कुल 9 तरह की विद्या में से हनुमान जी को उनके गुरु ने पांच तरह की विद्या तो सिखा दी लेकिन बची चार तरह की विद्या और ज्ञान ऐसे थे जो केवल किसी विवाहित को ही सिखाए जा सकते थे।
हनुमान जी पूरी शिक्षा लेने का प्रण कर चुके थे और इससे कम पर वो मानने को राजी नहीं थे। इधर भगवान सूर्य के सामने संकट था कि वह धर्म के अनुशासन के कारण किसी अविवाहित को कुछ विशेष विद्याएं नहीं सिखला सकते
थे।
ऐसी स्थिति में सूर्य देव ने हनुमान जी को विवाह की सलाह दी। और अपने प्रण को पूरा करने के लिए हनुमान जी भी विवाह सूत्र में बंधकर शिक्षा ग्रहण करने को तैयार हो गए। लेकिन हनुमान जी के लिए दुल्हन कौन हो और कहां से वह मिलेगी इसे लेकर सभी चिंतित थे।
सूर्य देव ने अपनी परम तपस्वी और तेजस्वी पुत्री सुवर्चला को हनुमान जी के साथ शादी के लिए तैयार कर लिया। इसके बाद हनुमान जी ने अपनी शिक्षा पूर्ण की और सुवर्चला सदा के लिए अपनी तपस्या में रत हो गई।
इस तरह हनुमान जी भले ही शादी के बंधन में बंध गए हो लेकिन शारीरिक रूप से वे आज भी एक ब्रह्मचारी ही हैं।
पाराशर संहिता में तो लिखा गया है की खुद सूर्यदेव ने इस शादी पर यह कहा की – यह शादी ब्रह्मांड के कल्याण के लिए ही हुई है और इससे हनुमान जी का ब्रह्मचर्य भी प्रभावित नहीं हुआ।

23/08/2021

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*प्रभु-कृपा का अर्थ यह नहीं,*
*कि जीवन में कभी दुःख ही न आए।*

*दुःख में भी आप दुखी न हों,*
*वो घड़ी कब बीत जाए,*

*आप को पता ही न चले,,,*
*यही है "प्रभुकृपा"।।*

🚩🚩🚩 मां गढदेवी की कृपा आप सभी पर बनी रहे।।
🚩🚩🚩

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