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Baba Ramdevji is a folk–deity of Rajasthan in India.Baba Ramdevji is considered to be an incarnation of Lord Krishna (who himself was incarnation of Lord Vishnu). भारत की पवित्र धरती पर समय समय पर अनेक,महात्माओं,वीरों व सत्पुरुषों ने जन्म लिया है | युग की आवश्कतानुसार उन्होंने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व के बल से, दुखों से त्रस्त मानवता को दुखों से मुक्ति दिला कर जीने की सही राह दिखाई |, १५ वी. शता

ब्दी के आरम्भ में भारत में लुट खसोट,छुआछुत,हिंदू-मुस्लिम झगडों आदि के कारण स्थितिया बड़ी अराजक बनी हुई थी | ऐसे विकट समय में पश्चिमी राजस्थान के पोकरण नामक प्रसिद्ध नगर के पास रुणिचा नामक स्थान में तोमर वंशीय राजपूत और रुणिचा के शासक अजमाल जी के घर चेत्र शुक्ला पंचमी वि.स. १४०९ को बाबा रामदेव पीर अवतरित हुए जिन्होंने लोक में व्याप्त अत्याचार,वैर-द्वेष,छुआछुत का विरोध कर अछुतोद्वार का सफल आन्दोलन चलाया | हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक बाबा रामदेव ने अपने अल्प जीवन के तेंतीस वर्षों में वह कार्य कर दिखाया जो सैकडो वर्षों में भी होना सम्भव नही था | सभी प्रकार के भेद-भाव को मिटाने एवं सभी वर्गों में एकता स्थापित करने की पुनीत प्रेरणा के कारण बाबा रामदेव जहाँ हिन्दुओ के देव है तो मुस्लिम भाईयों के लिए रामसा पीर | मुस्लिम भक्त बाबा को रामसा पीर कह कर पुकारते है वैसे भी राजस्थान के जनमानस में पॉँच पीरों की प्रतिष्ठा है जिनमे बाबा रामसा पीर का विशेष स्थान है |
पाबू हड्बू रामदे , माँगाळिया मेहा |
पांचू पीर पधारजौ , गोगाजी जेहा ||
बाबा रामदेव ने छुआछुत के खिलाफ कार्य कर सिर्फ़ दलितों का पक्ष ही नही लिया वरन उन्होंने दलित समाज की सेवा भी की | डाली बाई नामक एक दलित कन्या का उन्होंने अपने घर बहन-बेटी की तरह रख कर पालन-पोषण भी किया | यही कारण है आज बाबा के भक्तो में एक बहुत बड़ी संख्या दलित भक्तों की है | बाबा रामदेव पोकरण के शासक भी रहे लेकिन उन्होंने राजा बनकर नही अपितु जनसेवक बनकर गरीबों, दलितों, असाध्य रोगग्रस्त रोगियों व जरुरत मंदों की सेवा भी की | यही नही उन्होंने पोकरण की जनता को भैरव राक्षक के आतंक से भी मुक्त कराया | प्रसिद्ध इतिहासकार मुंहता नैनसी ने भी अपने ग्रन्थ " मारवाड़ रा परगना री विगत " में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा है - भैरव राक्षस ने पोकरण नगर आतंक से सुना कर दिया था लेकिन बाबा रामदेव के अद्भुत एवं दिव्य व्यक्तित्व के कारण राक्षस ने उनके आगे आत्म-समर्पण कर दिया था और बाद में उनकी आज्ञा अनुसार वह मारवाड़ छोड़ कर चला गया | बाबा रामदेव ने अपने जीवन काल के दौरान और समाधी लेने के बाद कई चमत्कार दिखाए जिन्हें लोक भाषा में परचा देना कहते है | इतिहास व लोक कथाओं में बाबा द्वारा दिए ढेर सारे परचों का जिक्र है | जनश्रुति के अनुसार मक्का के मौलवियों ने अपने पूज्य पीरों को जब बाबा की ख्याति और उनके अलोकिक चमत्कार के बारे में बताया तो वे पीर बाबा की शक्ति को परखने के लिए मक्का से रुणिचा आए | बाबा के घर जब पांचो पीर खाना खाने बैठे तब उन्होंने बाबा से कहा की वे अपने खाने के बर्तन (सीपियाँ) मक्का ही छोड़ आए है और उनका प्रण है कि वे खाना उन सीपियों में खाते है तब बाबा रामदेव ने उन्हें विनयपूर्वक कहा कि उनका भी प्रण है कि घर आए अतिथि को बिना भोजन कराये नही जाने देते और इसके साथ ही बाबा ने अलौकिक चमत्कार दिखाया जो सीपी जिस पीर कि थी वो उसके सम्मुख रखी मिली | इस चमत्कार (परचा) से वे पीर इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बाबा को पीरों का पीर स्वीकार किया | आख़िर जन-जन की सेवा के साथ सभी को एकता का पाठ पढाते बाबा रामदेव ने भाद्रपद शुक्ला एकादशी वि.स.१४४२ को जीवित समाधी ले ली | आज भी बाबा रामदेव के भक्त दूर दूर से रुणिचा उनके दर्शनार्थ और अराधना करने आते है हर साल लगने मेले में तो लाखों की तादात में जुटी उनके भक्तो की भीड़ से उनकी महत्ता व उनके प्रति जन समुदाय की श्रद्धा का आकलन आसानी से किया जा सकता है

16/07/2021
बाबा रामदेव जी माता नेतल की शादी की सालगिरह की सभी भक्तों को शुभकामनाएं🌺🌹🌺🌹🌺🙏🙏🙏🌙
26/04/2020

बाबा रामदेव जी माता नेतल की शादी की सालगिरह की सभी भक्तों को शुभकामनाएं🌺🌹🌺🌹🌺🙏🙏🙏🌙

श्री रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ |
02/04/2020

श्री रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ |

New bhajan runicha ra ramdev ji.Please like and share ..Mukesh rajshtani and party thethliya fatehpur sekhawati...sikar ...
18/01/2020

New bhajan runicha ra ramdev ji.

Please like and share ..

Mukesh rajshtani and party thethliya fatehpur sekhawati...sikar rajsthan ..

रूणिचे रा रामदेवजी || Runiche Ra Ramdevji || New Ramdevji Bhajan || Mukesh Rajasthani new ramdevji bhajan 2019 Baba Ramdevji maharaj Ka Sabse Sundra Bhajan ➽...

30/07/2019

जरा सोचिये हमने क्या किया

*1. चोटियां छोड़ी ,
*2. टोपी, पगडी छोड़ी ,
*3. तिलक, चंदन छोड़ा
*4. कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी ,
*5. यज्ञोपवीत छोड़ा ,
*6. संध्या वंदन छोड़ा ।
*7. रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा ,
*8. महिलाओं, लडकियों ने साड़ी छोड़ी , बिछिया छोड़े , चूड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी , मांग बिन्दी छोड़ी ।

*9. पैसे के लिये, बच्चे छोड़े (आया पालती है)
*10. संस्कृत छोड़ी , हिन्दी छोड़ी ,
*11. श्लोक छोडे, लोरी छोड़ी ।
*12. बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े ,
*13. सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी ,
*14. पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छुना छोड़े ,
*15. घर परिवार छोड़े ( अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)।

*अब कोई रीति या परंपरा बची है? ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो

*कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैनें ऐसे जीवित रखा हैं

जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगे।

*बौद्धों ने कभी सर मुंडाना नहीं छोड़ा!
*सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया!
*मुसलमान ने न दाढ़ी छोडी और न ही 5 बार नमाज पढ़ना!
*ईसाई भी संडे को चर्च जरूर जाता है!
फिर हिन्दू अपनी पहचान-संस्कारों से क्यों दूर हुआ?
कहाँ लुप्त हो गये- गुरुकुल की शिखा, यज्ञ, शस्त्र-शास्त्र, नित्य मंदिर जाने का संस्कार ?
हम अपने संस्कारों से विमुख हुए, इसी कारण हम विलुप्त हो रहे हैं।
अपनी पहचान बनाओ! अपने मूल-संस्कारों को अपनाओ!!!
सप्ताह मे कम से कम एक दिन तो मन्दिर जाना शुरु करो बचॉ ,के साथ।जियें अपनी ज़िन्दगी बिंदास...पर बस संस्कारो के साथ

*क्या सिखाता है भगवान कृष्ण का स्वरूप ..........?**कभी सोचा है भगवान कृष्ण का स्वरूप हमें क्या सिखाता है?**क्यों भगवान ज...
23/01/2019

*क्या सिखाता है भगवान कृष्ण का स्वरूप ..........?*

*कभी सोचा है भगवान कृष्ण का स्वरूप हमें क्या सिखाता है?*
*क्यों भगवान जंगल में पेड़ के नीचे खड़े बांसुरी बजा रहे हैं, मोरमुकुट पहने, तन पर पीतांबरी, गले में वैजयंती की माला, साथ में राधा, पीछे गाय। कृष्ण की यह छवि हमें क्या प्रेरणा देती है। क्यों कृष्ण का रूप इतना मनोहर लगता है।*
*दरअसल कृष्ण हमें जीवन जीना सिखाते हैं, उनका यह स्वरूप अगर गहराई से समझा जाए तो इसमें हमें सफल जीवन के कई सूत्र मिलते हैं।*
*विद्वानों का मत है कि भगवान विरोधाभास में दिखता है।*
*आइए जानते हैं कृष्ण की छवि के क्या मायने हैं।*

*1. मोर मुकुट -*
*भगवान के मुकुट में मोर का पंख है। यह बताता है कि जीवन में विभिन्न रंग हैं। ये रंग हमारे जीवन के भाव हैं। सुख है तो दुख भी है, सफलता है तो असफलता भी, मिलन है तो बिछोह भी। जीवन इन्हीं रंगों से मिलकर बना है। जीवन से जो मिले उसे माथे लगाकर अंगीकार कर लो। इसलिए मोर मुकुट भगवान के सिर पर है।*

*2. बांसुरी -*
*भगवान बांसुरी बजा रहे हैं, मतलब जीवन में कैसी भी घडी आए हमें घबराना नहीं चाहिए। भीतर से शांति हो तो संगीत जीवन में उतरता है। ऐसे ही अगर भक्ति पानी है तो अपने भीतर शांति कायम करने का प्रयास करें।*

*3. वैजयंती माला -*
*भगवान के गले में वैजयंती माला है, यह कमल के बीजों से बनती है। इसके दो मतलब हैं कमल के बीच सख्त होते हैं, कभी टूटते नहीं, सड़ते नहीं, हमेशा चमकदार बने रहते हैं।*

*भगवान कह रहे हैं जब तक जीवन है तब तक ऐसे रहो जिससे तुम्हें देखकर कोई दुखी न हो।*
*दूसरा यह माला बीज की है और बीज ही है जिसकी मंजिल होती है भूमि। भगवान कहते हैं जमीन से जुड़े रहो, कितने भी बड़े क्यों न बन जाओ, हमेशा अपने अस्तित्व की असलियत के नजदीक रहो।*

*4. पीतांबर -*
*पीला रंग सम्पन्नता का प्रतीक है। भगवान कहते हैं ऐसा पुरुषार्थ करो कि सम्पन्नता खुद आप तक चल कर आए। इससे जीवन में शांति का मार्ग खुलेगा।*

*5. कमरबंद -*
*भगवान ने पीतांबर को ही कमरबंद बना रखा है। इसका अर्थ है हमेशा चुनौतियों के लिए तैयार रहें। धर्म के पक्ष में जब भी कोई कर्म करना पड़े हमेशा तैयार रहें।*

*6. राधा -*
*कृष्ण के साथ राधा भी है। इसका अर्थ है जीवन में स्त्रीयों का महत्व भी है। उन्हें पूर्ण सम्मान दें। वे हमारी बराबरी में रहें, हमसे नीचे नहीं।*

*🙏जय श्री कृष्णा🙏*

21/01/2019

Jarur sune..

08/12/2018

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🌹 *चाहे कथा हो कहानी हो या फ़िल्म हो संघर्ष हमेशा हीरो के जीवन में ही होता है ।*

🌹 *सोने की लंका, पुष्पक विमान तो रावण के पास था, राम ने तो वनवास ही देखा ना ।*

🌹 *राज पाट तो कंस के पास था, जेल में जन्म तो कृष्ण ने लिया ना ।*

🌹 *राजमहल में तो कौरव रहते थे, वनवास तो पांडवों को ही भोगना पड़ा ना ।*

🌹 *इसलिए तो हम राम और कृष्ण को पूजते हैं, रावण या कंस को नहीं ।*

🌹 *राहु केतु अमृत पीने के बाद भी राक्षस हैं और शिव विष पीने के बाद भी देवों के देव महादेव हैं ।*

🌹 *जब हमारे भगवान का जीवन सरल नहीं था तो हम तो मनुष्य हैं,*

🌹 *अगर हमारे जीवन में संघर्ष लिखा है तो हम साधारण भी नहीं है ।*

🌹 *भगवान ने इस दुनिया में सबको कुछ न कुछ रोल दिए है, सबका अपना समय है स्टेज पर आने का*

🌹 *अगर हनुमान, राम जी को पहले मिल जाते तो सीता हरण ही नहीं होता, लेकिन वो तब मिले जब उनका रोल था ।*

🌹 *दुनिया में कितने ही देश हैं जहाँ सूर्योदय हमसे कई घंटो बाद होता है लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि वो हमसे पीछे हैं । वो अपने टाइम ज़ोन में हैं और हम अपने ।*

🌹 *सबका अपना टाइम ज़ोन होता है किसी के काम पहले हो जाते हैं तो किसी के देर से । तो अपने टाइम ज़ोन में रहो और ख़ुश रहो, सबका रोल महत्वपूर्ण है ।*

🙏❣️ *ओम शांति* ❣️🙏

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🔔🐚📿🔔🐚📿🕉🔔🐚📿🔔🐚📿              *०१  -  १२  -  २०१८* *मंदिर में जाने से पहले आखिर क्यों बजाते हैं घंटी  ?*🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐*मंदिर...
02/12/2018

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*०१ - १२ - २०१८*

*मंदिर में जाने से पहले आखिर क्यों बजाते हैं घंटी ?*

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*मंदिर के द्वार पर और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से ही चला आ रहा है । लेकिन इस घंटे या घंटी लगाने का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है ?*

*घंटियां ४ प्रकार की होती हैं :-*

*१) "गरूड़ घंटी" : गरूड़ घंटी छोटी-सी होती है जिसे एक हाथ से बजाया जा सकता है ।*

*२) "द्वार घंटी" : यह द्वार पर लटकी होती है । यह बड़ी और छोटी दोनों ही आकार की होती है ।*

*३) "हाथ घंटी" : पीतल की ठोस एक गोल प्लेट की तरह होती है जिसको लकड़ी के एक गद्दे से ठोककर बजाते हैं ।*

*४) "घंटा" : यह बहुत बड़ा होता है । कम से कम ५ फुट लंबा और चौड़ा । इसको बजाने के बाद आवाज कई किलोमीटर तक चली जाती है ।*

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*मंदिर में घंटी लगाये जाने के पीछे न सिर्फ "धार्मिक" बल्कि "वैज्ञानिक कारण" भी है । वैज्ञानिकों का कहना है कि जब घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाता है । इस कंपन का लाभ यह है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु , विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है । अत: जिन स्थानों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती है , वहां का वातावरण सर्वदा "शुद्ध और पवित्र" बना रहता है और इससे नकारात्मक शक्तियां हटती हैं ।नकारात्मकता हटने से समृद्धि के द्वार खुलते हैं ।*

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*" धार्मिक कारणों " में सर्वप्रथम कारण घंटी बजाने से देवताओं के समक्ष आपकी हाजिरी लग जाती है । मान्यता अनुसार घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है जिसके फलस्वरूप उनकी पूजा और आराधना अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है ।*

*दूसरा कारण यह है कि घंटी की मनमोहक एवं कर्णप्रिय ध्वनि मन-मस्तिष्क को "अध्यात्म भाव" की ओर ले जाने का सामर्थ्य रखती है । मन घंटी की लय से जुड़कर शांति का अनुभव करता है । मंदिर में घंटी बजाने से मानव के कई जन्मों के पाप तक नष्ट हो जाते हैं । सुबह और शाम जब भी मंदिर में पूजा या आरती होती है तो एक लय और विशेष धुन के साथ घंटियां बजाई जाती हैं जिससे वहां मौजूद लोगों को शांति और दैवीय उपस्थिति की अनुभूति होती है ।*

*तीसरा कारण यह है कि जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ , तब जो नाद (आवाज) गूंजी थी वही आवाज घंटी बजाने पर भी आती है । घंटी उसी "नाद का प्रतीक" है । कृपया ध्यान रखें कि यही नाद " ओंकार के उच्चारण" से भी जागृत होता है ।।*

*🙏 श्रीकृष्णायसमर्पणमस्तु 🙏*

*🙏 Զเधे Զเधे जी 🙏*

*🙏 🌹*

*Զเधे Զเधे Զเधे Զเधे Զเधे Զเधे Զเधे Զเधे Զเधे Զเधे*

सत्य वचन..जो जीवन की एक सच्चाई है जिस पर हर व्यक्ति को गौर करना चाहिए जैसा कि इस चित्र में दर्शाया गया
19/10/2018

सत्य वचन..जो जीवन की एक सच्चाई है जिस पर हर व्यक्ति को गौर करना चाहिए जैसा कि इस चित्र में दर्शाया गया

संस्कार दो मिनट का समय निकाल कर हमारा ये article जरूर पढ़िए और अगर दिल को छू जाए तो इस पोस्ट को शेयर जरूर किजिये 🏘️एक घर...
19/07/2018

संस्कार
दो मिनट का समय निकाल कर हमारा ये article जरूर पढ़िए और अगर दिल को छू जाए तो इस पोस्ट को शेयर जरूर किजिये 🏘️

एक घर मे तीन भाई और एक बहन थी...बड़ा और छोटा पढ़ने मे बहुत तेज थे। उनके मा बाप उन चारो से बेहद प्यार करते थे मगर मझले बेटे से थोड़ा परेशान से थे।

बड़ा बेटा पढ़ लिखकर डाक्टर बन गया।
छोटा भी पढ लिखकर इंजीनियर बन गया। मगर मझला बिलकुल अवारा और गंवार बनके ही रह गया। सबकी शादी हो गई । बहन और मझले को छोड़ दोनों भाईयो ने Love मैरीज की थी।

बहन की शादी भी अच्छे घराने मे हुई थी।
आखीर भाई सब डाक्टर इंजीनियर जो थे।

अब मझले को कोई लड़की नहीं मिल रही थी। बाप भी परेशान मां भी।
बहन जब भी मायके आती सबसे पहले छोटे भाई और बड़े भैया से मिलती। मगर मझले से कम ही मिलती थी। क्योंकि वह न तो कुछ दे सकता था और न ही वह जल्दी घर पे मिलता था।

वैसे वह दिहाडी मजदूरी करता था। पढ़ नहीं सका तो...नौकरी कौन देता। मझले की शादी कीये बिना बाप गुजर गये ।

माँ ने सोचा कहीं अब बँटवारे की बात न निकले इसलिए अपने ही गाँव से एक सीधी साधी लड़की से मझले की शादी करवा दी।
शादी होते ही न जाने क्या हुआ की मझला बड़े लगन से काम करने लगा ।
दोस्तों ने कहा... ए चन्दू आज अड्डे पे आना।

चंदू - आज नहीं फिर कभी
दोस्त - अरे तू शादी के बाद तो जैसे बिबी का गुलाम ही हो गया?
चंदू - अरे ऐसी बात नहीं । कल मैं अकेला एक पेट था तो अपने रोटी के हिस्से कमा लेता था। अब दो पेट है आज
कल और होगा।

घरवाले नालायक कहते थे कहते हैं मेरे लिए चलता है।
मगर मेरी पत्नी मुझे कभी नालायक कहे तो मेरी मर्दानगी पर एक भद्दा गाली है। क्योंकि एक पत्नी के लिए उसका पति उसका घमंड इज्जत और उम्मीद होता है। उसके घरवालो ने भी तो मुझपर भरोसा करके ही तो अपनी बेटी दी होगी...फिर उनका भरोसा कैसे तोड़ सकता हूँ । कालेज मे नौकरी की डिग्री मिलती है और ऐसे संस्कार मा बाप से मिलते हैं ।

इधर घरपे बड़ा और छोटा भाई और उनकी पत्नीया मिलकर आपस मे फैसला करते हैं की...जायदाद का बंटवारा हो जाये क्योंकि हम दोनों लाखों कमाते है मगर मझला ना के बराबर कमाता है। ऐसा नहीं होगा।

मां के लाख मना करने पर भी...बंटवारा की तारीख तय होती है। बहन भी आ जाती है मगर चंदू है की काम पे निकलने के बाहर आता है। उसके दोनों भाई उसको पकड़कर भीतर लाकर बोलते हैं की आज तो रूक जा? बंटवारा कर ही लेते हैं । वकील कहता है ऐसा नहीं होता। साईन करना पड़ता है।

चंदू - तुम लोग बंटवारा करो मेरे हिस्से मे जो देना है दे देना। मैं शाम को आकर अपना बड़ा सा अगूंठा चिपका दूंगा पेपर पर।
बहन- अरे बेवकूफ ...तू गंवार का गंवार ही रहेगा। तेरी किस्मत अच्छी है की तू इतनी अच्छे भाई और भैया मिलें
मां- अरे चंदू आज रूक जा।

बंटवारे में कुल दस विघा जमीन मे दोनों भाई 5- 5 रख लेते हैं ।
और चंदू को पुस्तैनी घर छोड़ देते है
तभी चंदू जोर से चिल्लाता है।

अरे???? फिर हमारी छुटकी का हिस्सा कौन सा है?
दोनों भाई हंसकर बोलते हैं
अरे मूरख...बंटवारा भाईयो मे होता है और बहनों के हिस्से मे सिर्फ उसका मायका ही है।

चंदू - ओह... शायद पढ़ा लिखा न होना भी मूर्खता ही है।
ठीक है आप दोनों ऐसा करो।
मेरे हिस्से की वसीएत मेरी बहन छुटकी के नाम कर दो।
दोनों भाई चकीत होकर बोलते हैं ।
और तू?

चंदू मां की और देखके मुस्कुराके बोलता है
मेरे हिस्से में माँ है न......
फिर अपनी बिबी की ओर देखकर बोलता है..मुस्कुराके...क्यों चंदूनी जी...क्या मैंने गलत कहा?

चंदूनी अपनी सास से लिपटकर कहती है। इससे बड़ी वसीएत क्या होगी मेरे लिए की मुझे मां जैसी सासु मिली और बाप जैसा ख्याल रखना वाला पति।
बस येही शब्द थे जो बँटवारे को सन्नाटा मे बदल दिया ।
बहन दौड़कर अपने गंवार भैया से गले लगकर रोते हुए कहती है की..मांफ कर दो भैया मुझे क्योंकि मैं समझ न सकी आपको।

चंदू - इस घर मे तेरा भी उतना ही अधिकार है जीतना हम सभी का।
बहुओं को जलाने की हिम्मत कीसी मे नहीं मगर फिर भी जलाई जाती है क्योंकि शादी के बाद हर भाई हर बाप उसे पराया समझने लगते हैं । मगर मेरे लिए तुम सब बहुत अजीज हो चाहे पास रहो या दुर।

माँ का चुनाव इसलिए कीया ताकी तुम सब हमेशा मुझे याद आओ। क्योंकि ये वही कोख है जंहा हमने साथ साथ 9 - 9 महीने गुजारे। मां के साथ तुम्हारी यादों को भी मैं रख रहा हूँ।

दोनों भाई दौड़कर मझले से गले मिलकर रोते रोते कहते हैं
आज तो तू सचमुच का बाबा लग रहा है। सबकी पलको पे पानी ही पानी। सब एक साथ फिर से रहने लगते है।

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