28/01/2024
☘️🍃☘️‼️ॐ श्री सद्गुरुवे नमः‼️☘️🍃☘️
#गुरुकृपा_से_चूर_हड्डी_पूर्ववत्.....🕉️🧘
#दादू_जानै_ना_कोई_संतन_की_गति_गोई
#सच्ची_घटना
यह घटना सन् १ ९ ८२ ई ० के अक्टूबर माह की है । शहर नवादा जिला के सम्माननीय श्रीसच्चिदानंद सिंहजी मुजफ्फरपुर में होमगार्ड इंस्पेक्टर थे । ये आवश्यक कार्य के लिए पटना आये हुए थे । रात्रि में इन्हें मुजफ्फरपुर लौटना था । शाम हो गयी थी । गाड़ी छूटने के डर से इन्होंने रिक्शा चालक से कहा- ' मुझे जल्द बस - स्टैंड पहुँचाओ , नहीं तो गाड़ी छूट जाएगी । ' बस स्टैंड मुख्य डाकघर पटना से थोड़ा आगे था । महेन्द्र मुहल्ला से बस स्टैंड जाना था । रिक्शा चालक तेजी से रिक्शा चला रहा था । जैसे ही रिक्शा गाँधीमैदान के उत्तरी मेन गेट के पास पहुँचा , वहाँ पहले से ही एक कारगाड़ी खड़ी थी । कारगाड़ी चालक ने अपनी कारगाड़ी को स्टार्ट किया और तेजी के साथ आगे बढ़ा दिया । इसका परिणाम यह हुआ कि कारगाड़ी से रिक्शा में जोरों का धक्का लगा और सच्चिदानंद बाबू रिक्शा से ८-१० फीट ऊपर फेंकाकर बीच सड़क पर गिरे । इनके दाहिने जाँघ की हड्डी छः जगह चूर - चूर हो गयी । इनकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया । ये बहोश हो गये । दूसरे लोग ही इनको अस्पताल में भर्ती करवाये । हड्डी के सुप्रसिद्ध डॉक्टर आर.सी. राम की देखरेख में इलाज प्रारंभ हुआ । - डाक्टर साहब ने कहा- ' हड्डी चूर - चूर हो गयी है । इसलिए एक सीध में नहीं जुटेगी , टेढ़ी रह जाएगी , इसलिए जीवनभर वैशाखी के सहारे चलना पड़ेगा ।
यह सुनकर सच्चिदानंद बाबू काफी चिंतित होकर रातभर गुरु महाराज जी से प्रार्थना करते रहे कि मुझे इस दुःख से उबारिये । सुबह एक पोस्टकार्ड मँगाकर एक प्रार्थना - पत्र सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज के पास भेजा , जिसमें उन्होंने लिखा था- “ कारगाड़ी से धक्का लगने के कारण मेरे दाहिने जाँघ की हड्डी कई जगह टूट गई है । मैं बहुत कष्ट में हूँ । मैंने इस जीवन में कोई ऐसा पाप नहीं किया , जिससे हमको यह दुःख भोगना पड़े । डॉ ० बोलते हैं - ' जीवनभर वैशाखी के सहारे चलना पड़ेगा । ' मैं अपाहिज होकर जीना नहीं चाहता हूँ । मुझे स्वस्थ होने का आशीर्वाद दिया जाए या मौत दे दी जाए ।
" यह लिखकर पत्र महर्षि मेंहीँ आश्रम कुप्पाघाट भेज दिया । दो - चार दिन के बाद ही पूज्य गुरुदेव का पत्रोत्तर मिला । जिसमें लिखा हुआ था- “ मैं परमात्मा से प्रार्थ