Yash Singh

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I want to give a huge shout-out to my top Stars senders. Thank you for all the support!Yash Singh
30/12/2025

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Yash Singh

मछुआ और मंत्रीएक राजा था। उसे रोज तुरंत पकड़ी गई मछलियाँ खाने का शौक था। एक दिन समुद्र में भयंकर तूफान आया। कोई भी मछुआ ...
30/12/2025

मछुआ और मंत्री

एक राजा था। उसे रोज तुरंत पकड़ी गई मछलियाँ खाने का शौक था। एक दिन समुद्र में भयंकर तूफान आया। कोई भी मछुआ समुद्र में मछली मारने नही गया। इसलिए राजा को तुरंत पकड़ी हुई मछली नही मिल सकी। राजा ने घोषणा करा दी। कि उस दिन जो भी तुरंत पकड़ी हुई मछली राजा के पास लाएगा। उसे भरपूर इनाम दिया जाएगा। एक गरीब मछुए ने यह घोषणा सुनी जान जोखिम में डालकर समुद्र से मछलियाँ पकड़ी और राजमहल पहुँचा राजमहल के पहरेदारो ने उसे फाटक पर रोक दिया वे उसे राजा के मंत्री के पास ले गए।
मंत्री ने मछुए से कहा, "मैं तुम्हे राजा के पास जरूर जाने दूँगा पर तुम्हे राजा से जो ईनाम मिलेगा। उस में आधा हिस्सा होगा।" मछुए को मंत्री का यह प्रस्ताव पसंद नही आया। फिर भी उसने मन मारकर उसे स्वीकार किया।

इसके बाद पहरेदार उसे लेकर राजा के पास गए। मछुए ने राजा को मछलियाँ दी। राजा मछुए पर बहुत प्रसन्न हुआ। बताओ क्या इनाम चाहिए। तुम जो माँगोगे वह मैं तुम्हे अवश्य दूँगा। मछुए ने कहा, "महाराज मैं चाहता हूँ मेरी पीठ पर पचास कोड़े लगाए जाएँ। बस मुझे यही इनाम चाहिए।" मछुए की यह बात सुनकर सभी दरबारी चकित रहगए। राजा ने मछुए की पीठ पर पचास हल्के कोड़े लगाने का आदेश दिया जब नौकर मछुए की पीठ पर पच्चीस कोड़े लगा चुका। तो मछुए ने कहा, "रूको! अब बाकी के पच्चीस कोड़े मेरे साझेदार की पीठ पर लगाओ।" राजा ने मछुए से कहा, "तुम्हारा हिस्सेदार कौन है?"

मछुए ने कहा,"महाराज आपके मंत्री महोदय ही मेरे हिस्सेदार है।"
मछुए का जवाब सुनकर राजा गुस्से से तमतमा उठा। उसने मंत्री को अपने सामने हाजिर करने का आदेश दिया।
मंत्री के सामने आते ही राजा ने नौकर को आदेश दिया इन्हे गिनकर पच्चीस कोड़े लगाओ ध्यान रखो। इनकी पीठ पर कोड़े जोर जोर से लगने चाहिए। इसके बाद राजा ने बेईमान मंत्री को जेल मे डाल दिया। फिर राजा ने मछुए को मुँहमाँगा इनाम दिया।

शिक्षा -जैसी करनी वैसी भरनी।
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बिंदीकहानियांकाजू खाने वाला लड़काएक लड़का था। उसे काजू बहुत पसंद थे। इसलिए उसकी माँ उसे थोड़े थोड़े काजू खाने के लिए दे...
30/12/2025

बिंदी
कहानियां
काजू खाने वाला लड़का

एक लड़का था। उसे काजू बहुत पसंद थे। इसलिए उसकी माँ उसे थोड़े थोड़े काजू खाने के लिए देती थी। लड़का हमेशा माँ से ज्यादा काजू देने का हठ करता पर उसकी माँ उसे हर बार कहती नही बेटे एक साथ ज्यादा काजू नही खाने चाहिए। यदि एक साथ ज्यादा काजू खाओगे। तो तुम्हारे पेट में दर्द होने लगेगा। यह सुनकर लड़का चुप हो जाता पर उसने माँ की बात पर कभी ध्यान नही दिया।

एक दिन उसकी माँ बाहर गई हुई थी। लड़का घर पर अकेला था।
उसने जल्दी जल्दी काजू का डिब्बा उतारा उस दिन घर पर उसे रोकने वाला कोई नही था। उसने भर पेट काजू खाए।
दूसरे दिन लड़का बीमार पड़ गया। उसके पेट में जोरो की पीड़ा होने लगी। उसे इस बात का बड़ा पछतावा हुआ कि उसने माँ का कहना नही माना।

शिक्षा -माता पिता तुम्हारे शुभचिंतक है। उनका कहना मानो।
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30/12/2025

ग्वालिन और उसका सपना

एक ग्वालिन थी। वह दूध बेचने जा रही थी। उसके सर पर दूध से भरा घड़ा था। चलते चलते मन ही मन विचार कर रही थी। इस दूध को बेचने से जो पैसा मिलेगा। उन पैसो से मैं अंडे खरीदूँगी उन अंडो से मुझे अनेक अच्छी अच्छी मुर्गियाँ मिलेगीं उन मुर्गियों को बेच कर मैं अपने लिए रेशमी साड़ी खरीदूंगी। उस रेशमी साड़ी मे मैं बहुत सुंदर दिखाई दूँगी फिर अच्छे अच्छे लड़के मेरे पास आएग। मुझसे शादी करना चाहेंगे। पर मैं इनकार में अपना सर झटकर कहूँगी नही।

यह सोचते हुए उसने अपने सर को जोर से झटका दिया। इसके करण उसके सरपर रखा दूध का घड़ा जमीन पर गिर गया। उसका सारा दूध जमीन पर फैल कर बर्बाद हो गया। इस तरह अंड़ो मुर्गियों रेशमी साड़ी तथा अच्छे अच्छे लड़को का ग्वालिन का सपना मिट्टी में मिल गया।

शिक्षा -हवा में महल बनाना अच्छा नही!

लकड़हारा और देवदूतएक लकड़हारा था। एक बार वह नदी के किनारे एक पेड़ से लकड़ी काट रहा था। एकाएक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छूटकर...
30/12/2025

लकड़हारा और देवदूत

एक लकड़हारा था। एक बार वह नदी के किनारे एक पेड़ से लकड़ी काट रहा था। एकाएक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छूटकर नदी मे गिर पड़ी। नदी गहरी थी। उसका प्रवाह भी तेज था। लकड़हारे ने नदी से कुल्हाड़ी निकालने की बहुत कोशिश की पर वह उसे नही मिली इससे लकड़हारा बहुत दुखी हो गया। इतने देवदूत मेवहाँ से गुजरा लकड़हारे को मुँह लटकाए खड़ा देख कर उसे दया आ गई। वह लकड़हारे के पास आया और बोला चिंता मत करो। मैं नदी से तुम्हारी कुल्हाड़ी अभी निकाल देता हूँ। यह कहकर देवदूत नदी मे कूद पड़ा देवदूत पानी से निकला तो उसके हाथ मे सोने की कुल्हाड़ी थी।
वह लकड़हारे को सोने की कुल्हाड़ी देने लगा। तो लकड़हारे ने कहा,"नही नही यह कुल्हाड़ी मेरी नही है। मैं इसे नही ले सकता।"

देवदूत ने फिर नदी में डुबकी लगाई इसबार वह चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया ईमानदार लकड़हारे ने कहा, "यह कुल्हाड़ी मेरी नही है।"

देवदूत ने तीसरी बार पानी मे डुबकी लगाई इस बार वह एक साधारण सी लोहे की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया। "हाँ यह मेरी कुल्हाड़ी है!" लकड़हारे ने खुश होकर कहा।

उस गरीब की ईमानदारी देखकर देवदूत बहुत प्रसन्न हुआ। उसने लकड़हारे को उसकी लोहे की कुल्हाड़ी दे दी। साथ ही उसने सोने और चाँदी की कुल्हाडि़याँ भी उसे पुरस्कार के रूप मे दे दीं।

शिक्षा -ईमानदारी से बढ़कर कोई चीज नही।

गधा और मूर्तिएक गाँव मे एक मूर्तिकार रहता था। वह देवी देवी देवताओ की सुन्दर मूर्तिया गढ़ा करता था। एक बार उसने भगवान की ...
30/12/2025

गधा और मूर्ति

एक गाँव मे एक मूर्तिकार रहता था। वह देवी देवी देवताओ की सुन्दर मूर्तिया गढ़ा करता था। एक बार उसने भगवान की एक बहुत सुंदर मूर्ति गढ़ी। वह मूर्ति उसे ग्राहक के पास पहुचानी थी। इसलिए उसने कुम्हार से गधा किराए पर लिया। फिर उसने मूर्ति गधे पर लादी और चल पड़ा रास्ते मे जो उस मूर्ति को जो देखता पल भर रूककर मूर्ति की तारीफ जरूर करता। कुछ लोग उस मूर्ति को देखते ही झुककर प्रणाम करते।

यह देख कर उस मूर्ख गधे ने सोचा कि लोग उसी की प्रशंसा कर रहे हैं। और उसी को झुककर प्रणाम कर रहे है वह अकड़कर सड़क के बीच खड़ा हो गया। और जोर जोर से रेंकने लगा। मूतिकार ने गधे को पुचकार कर चुप करने की।

बहुत कोशिश की। पर गधा रेकंता ही रहा। अंत मे उस मूर्तिकार ने डंडे से उसकी खूब पिटाई की। मार खाने के बाद गधे का सारा घंमड उतर गया। उसका होश ठिकाने आया। और वह फिर चुपचाप चलने लगा।

शिक्षा -समझदार के लिए इशारा और मूर्खो के लिए डंडा
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सच्चा मित्रश्याम और राम अच्छे मित्र थे। एक दिन वे जंगल से होकर जा रहे थे। रास्ते में उन्हे एक रीछ दिखाई दिया, वह उनकी तर...
30/12/2025

सच्चा मित्र

श्याम और राम अच्छे मित्र थे। एक दिन वे जंगल से होकर जा रहे थे। रास्ते में उन्हे एक रीछ दिखाई दिया, वह उनकी तरफ आ रहा था। श्याम तुरंत भाग कर पास के पेड़ पर चढ़ गया। राम को पेड़ पर चढ़ना नही आता था। पर उसने सुना था। कि जानवर मरे हुए लोगो को कुछ नही करते। इस लिये वह स्थिर होकर जमीन पर लेट गया। उसने अपनी आँखे मूँद ली। और साँस रोक ली रीछ राम के पास आया। उसने चेहरे को सूघाँ।

उसे लगा कि वह मर चुका है। और रीछ आगे बढ गया। जब रीछ कुछ दूर चला गया। तो श्याम पेड़ से उतरा उसने राम से पूँछा, "रीछ तुम्हारे कान मे क्या कह रहा था?" राम ने जवाब दिया, "उसने कहा कि स्वार्थी लोगो से दूर रहो।"

शिक्षा -समय पर काम मे आने वाला मित्र ही सच्चा मित्र है
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दो मेढकएक बार दो मेढ़क दूध से भरे एक मटके में गिर गए। मटके से बाहर आने के लिये वे दूध में गोल गोल तैरने लगे। मगर उनके पै...
30/12/2025

दो मेढक

एक बार दो मेढ़क दूध से भरे एक मटके में गिर गए। मटके से बाहर आने के लिये वे दूध में गोल गोल तैरने लगे। मगर उनके पैरो को कोई ठोस आधार नही मिल रहा था। इस लिये छलांग लगाकर बाहर आना उनके मुश्किल हो गया। कुछ देर बाद एक मेढ़क ने दूसरे से कहा, "मै बहुत थक गया हूॅ।

अब मै ज्यादा तैर नही सकता!" वह हिम्मत हार गया। उसने मटके से बाहर निकलने की कोशिश छोड़ दी। इसलिए वह मटके के दूध मे डूब कर मर गया।

दूसरे मेढ़क ने सोचा, "मै अपनी कोशिश नही छोडूगा। मैं तब तक तैरता रहूँगा जब तक कोई रास्ता नही निकल आता" वह तैरता ही रहा इस प्रकार उसके लगातार तैरने से दूध मठ उठा और उसके ऊपर माखन जमा हो गया कुछ देर बाद मेढ़क ने माखन के गोल पर चढकर जोर की छलांग लगाई वह मटके के बाहर आ गिरा।

शिक्षा -ईश्वर उसी की मदद करता है जो स्वयं अपनी मदद करता है
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चिंतू और बेरवालाचिंतू बड़ा चतुर एंव निडर लड़का था। एक बार उसने बेरवाले से बेर खरीदे। बेरवाले ने उसे वजन मे कम बेर दिए। च...
30/12/2025

चिंतू और बेरवाला

चिंतू बड़ा चतुर एंव निडर लड़का था। एक बार उसने बेरवाले से बेर खरीदे। बेरवाले ने उसे वजन मे कम बेर दिए। चिंतू बेरवाले की चालाकी देख रहा था। उसने तुरंत बेरवाले से पूछा, तुम मुझे कम बेर क्यों दे रहे हो?
बेरवाले ने मक्कारी से कहा, तुम्हे ले जाने में आसानी हो, इसलिए। चिंतू ने झटपट कुछ पैसे बेरवाले की हथेली पर रखे और जल्दी-जल्दी जाने लगा।
बेरवाले ने पैसे गिने। पैसे कम थे। उसने चिंतू को वापस बुलाकर कहा, तुमने मुझे कम पैसे क्यों दिए?
चिंतू ने फौरन कहा, ताकि तुम्हे गिनने मे आसानी हो।

शिक्षा -चालाक के साथ चालाकी नहीं चलती ।
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बंदर का इंसाफदो बिल्लियाँ थीं। उन्हे एक दिन रास्ते पर एक केक दिखाई दिया। एक बिल्ली ने उछल कर फौरन उस केक को उठा लिया। दू...
30/12/2025

बंदर का इंसाफ

दो बिल्लियाँ थीं। उन्हे एक दिन रास्ते पर एक केक दिखाई दिया। एक बिल्ली ने उछल कर फौरन उस केक को उठा लिया। दूसरी बिल्ली उससे केक छीनने लगी।

पहली बिल्ली ने कहा, चल हट! यह केक मेरा है पहले मैंने ही इसे उठाया है।

दूसरी बिल्ली ने कहा, इसे पहले मैने देखा था, इसलिए यह मेरा हुआ।

उसी समय वहाँ से एक बंदर जा रहा था। दोनो बिल्लियो ने उससे प्रार्थना की, भाई तुम्ही निर्णायक बनो और हमारा झगड़ा निपटाओ।

बंदर ने कहा, लाओ यह केक मुझे दो। मैं इसके दो बराबर बराबर हिस्से करूँगा और दोनों को एक-एक हिस्सा दे दूँगा।

बंदर ने केक के दो टुकड़े किये। उसने दोनो टुकडो़ को बारी-बारी से देखा, फिर अपना सिर हिलाते हुए कहा, दोनो टुकड़े बराबर नही हैं। यह टुकड़ा दूसरे टुकड़े से बड़ा है। उसने बड़े टुकड़े से थोड़ा हिस्सा खा लिया। दोनो हिस्से बराबर नही हुए। बंदर ने फिर बड़े हिस्से में से थोड़ा खा लिया। बंदर बार बार बडे टुकड़े में से थोड़ा-थोड़ा खाता रहा। अंत मे केक के केवल दो छोटे-छोटे टुकड़े बचे। बंदर नें बिल्लयो से कहा, ओ-हो-हो! अब भला इतने छोटे-छोटे टुकड़े मैं तुम्हे कैसे दे सकता हूँ? चलो मैं ही खा लेता हूँ। यह कहकर बंदर केक के दोनो टुकड़े मुँह में डालकर चलता बना।

शिक्षा -दो की लड़ाई मे तीसरे का फायदा
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बैल और मेढ़कएक बार एक तालाब के किनारे छोटे-छोटे मेढक खेल रहे थे। तभी वहाँ एक बैल पानी पीने के लिए आया। उसने पानी पीकर जो...
30/12/2025

बैल और मेढ़क

एक बार एक तालाब के किनारे छोटे-छोटे मेढक खेल रहे थे। तभी वहाँ एक बैल पानी पीने के लिए आया। उसने पानी पीकर जोर से डकारा। बैल के डकारने की अवाज सुनकर सभी मेढक भयभीत हो गये। वे सरपट भागते हुए अपनी दादी माँ के पास पहुँचे।

दादी माँ ने अपने पोते से पूछा, क्यों रे, क्या हुआ? तुम लोग घबराए हुए क्यों हो?

छोटे मेढक ने कहा, अरे दादी, अभी एक बहुत बड़ा जानवर तालाब में पानी पीने आया था। उसकी आवाज बहुत ही तेज और भंयकर थी।

दादी माँ ने पूछा, कितना बड़ा था वह जानवर? नन्हे मेढक ने जवाब दिया, अरे, बहुत ही बड़ा था वह। दादी माँ ने अपने चारो पैर फैलाकर और गाल फुलाकर कहा, वह इतना बड़ा था, क्या?

छोटे मेढक ने कहा, अरे नही दादी वह इससे भी बहुत बड़ा था। दादी माँ दादी ने फिर गाल पेट फुलाकर कहा इससे बड़ा तो नही होगा। है न!

नन्हे मेढक नें जवाब दिया, नही दादी वह इससे भी बहुत बहुत बड़ा था। दादी माँ ने अपने शारीर को और फुलाया। इस प्रकार वह अपने शरीर को फुलाती गई। आखिरकार उसका पेट फट गया और वह मर गई।

शिक्षा -थोथा अभिमान विनाश का कारण होता है।

चूहा और बैलएक नन्हा-सा चूहा था। वह अपने बिल से बाहर आया। उसने देखा कि एक बड़ा बैल पेड़ की छाया में सोया हुआ है। बैल जोर-...
30/12/2025

चूहा और बैल

एक नन्हा-सा चूहा था। वह अपने बिल से बाहर आया। उसने देखा कि एक बड़ा बैल पेड़ की छाया में सोया हुआ है। बैल जोर-जोर से खर्राटें भर रहा था। चूहा बैल की नाक के पास गया और मजा लेने के लिए उसने उसकी नाक में काट लिया।

बैल हड़बड़ा कर जाग गया। दर्द के मारे वह जोर से डकारा। इससे घबरा कर चूहा सरपट भागा। बैल ने पूरी ताकत से उसका पीछा किया। चूहा दौडकर झटपट दीवार के छेद में घुस गया। अब वह बैल की पहुँच से बाहर था।

पर बैल ने चूहे को सजा देने की ठान ली थी। उसने गुस्से से चिल्लाकर कहा, "अबे नालायक! मैं तुझे एक ताकतवर बैल को काटने का मजा चखाऊँगा।" बैल ताकतवर था। उसने अपने सिर से दीवार पर जोर से धक्का मारा। पर दीवार भी बहुत मजबूत थी। उस पर कोई असर नही हुआ, बल्कि बैल के सिर में ही चोट लगी। यह देख कर चूहे ने बैल को चिढ़ाते हुए कहा, "अरे मूर्ख, बिना मतलब अपना सिर क्यों फोड़ रहा है? तू कितना ही बलवान क्यों न हो, पर हमेशा तेरे मन की तो नहीं हो सकती।"

बैल अब भी चूहे को बिना दंड दिए छोड़ देने को तैयार नहीं था। चूहे जैसे एक तुच्छ प्राणी ने उसका अपमान किया था। इस समय वह बहुत क्रोध में था।

पर धीरे-धीरे उसका जोश कम हुआ। उसे चूहे की बात सही मालूम हुई। इसलिए वह चुपचाप वहाँ से चला गया।

चूहे के ये शब्द अब भी उसके कान में गूँज रहे थे तू कितना ही बलवान क्यों न हो, पर हमेशा तेरे ही मन की तो नहीं हो सकती।

शिक्षा -बुद्धि शक्ति से बड़ी होती है।
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