Shani mandir malda

Shani mandir malda भक्ति में ही शक्ति है

शिव जी की महिमा क्या हैशिव जी की महिमा बहुत विस्तृत और गहन है, जो हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता माने जाते हैं। शिव ...
25/05/2026

शिव जी की महिमा क्या है

शिव जी की महिमा बहुत विस्तृत और गहन है, जो हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता माने जाते हैं। शिव जी को संहारक, योगी, और देवों के देव के रूप में पूजा जाता है। उनकी महिमा में कई पहलू हैं:

1. संहारक रूप: शिव जी को विनाशक के रूप में देखा जाता है, जो नकारात्मकता और बुराई को दूर करते हैं।
2. योग और ध्यान: शिव जी योग और ध्यान के प्रतीक हैं, जो आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए मार्गदर्शन करते हैं।
3. देवों के देव: शिव जी को देवताओं के देवता के रूप में पूजा जाता है, जो उनकी श्रेष्ठता और शक्ति को दर्शाता है।
4. प्राकृतिक चक्र: शिव जी को प्राकृतिक चक्र के साथ जोड़ा जाता है, जैसे कि जन्म, जीवन, और मृत्यु।
5. आध्यात्मिक मार्गदर्शन: शिव जी की शिक्षाएं और कथाएं आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत हैं।

इन पहलुओं के अलावा, शिव जी की महिमा में उनकी पार्वती जी के साथ संबंध, उनके गणों और भक्तों के साथ संबंध, और उनकी लीलाओं का भी वर्णन किया जाता है। शिव जी की महिमा को समझने से व्यक्ति को जीवन के उद्देश्य और अर्थ को समझने में मदद मिल सकती है।@

25/05/2026

DARSHAN 25-05-2026
25/05/2026

DARSHAN 25-05-2026

🔱⚜️ *25 मई 2026 ( सोमवार )* ⚜️🔱 🚩🍁 *प्रथम ज्येष्ठ पुरूषोत्तम मास शुक्ल पक्ष "दशमी" 29:12 तक तत्पश्चात "एकादशी" वि.स. 208...
25/05/2026

🔱⚜️ *25 मई 2026 ( सोमवार )* ⚜️🔱

🚩🍁 *प्रथम ज्येष्ठ पुरूषोत्तम मास शुक्ल पक्ष "दशमी" 29:12 तक तत्पश्चात "एकादशी" वि.स. 2083* 🍁🚩

🔱🇮🇳🚩 *विशेष नौतपा प्रारंभ, मेला गंगादशहरा हरिद्वार, गंगा दशाश्वमेघ स्नान पूर्ण, गंगादशमी, विश्व थायरॉइड दिवस, रास बिहारी बोस जयंती* 🚩🇮🇳🔱

🙏🙏🌅 *आज का विचारपुष्प* 🌅🙏🙏

*वह जमाना और था जब रिश्ते निभाने के लिए...*
*लोग अपनी खुशियां तक कुर्बान कर देते थे...*
*अब तो जमाना यह है कि अपने स्वार्थ, मतलब...*
*और फायदे के लिए लोग रिश्ते तक कुर्बान कर देते है..!*

*अमीर तो हर गली में मिल जाते है...*
*मुश्किल तो जमीर वालों को ढूंढना है..!*

The mystical vision of Tripura Sundari seated upon a radiant lotus emerging from Lord Shiva symbolizes the inseparable r...
25/05/2026

The mystical vision of Tripura Sundari seated upon a radiant lotus emerging from Lord Shiva symbolizes the inseparable relationship between pure consciousness and divine creative energy in many spiritual interpretations of Sanatan tradition. In this sacred symbolism, Shiva represents the silent, infinite, and formless reality beyond creation, while the blossoming lotus signifies the unfolding of beauty, awareness, and cosmic manifestation through Shakti. Tripura Sundari, seated gracefully upon this lotus, is revered as the embodiment of supreme beauty, bliss, wisdom, and the subtle power through which the universe expresses itself. Her presence emerging from Shiva does not imply separation, but reveals that divine energy and divine consciousness are eternally united, like flame and its radiance. Devotees contemplate this sublime form as a reminder that all creation arises from the stillness of the Absolute and flowers into existence through the grace, beauty, and infinite compassion of the Divine Mother.

🔥 माँ भैरवी दशमहाविद्याओं में एक अत्यंत रहस्यमयी, तेजस्वी और दिव्य शक्ति मानी जाती हैं। उनका स्वरूप केवल उग्रता का प्रती...
25/05/2026

🔥 माँ भैरवी दशमहाविद्याओं में एक अत्यंत रहस्यमयी, तेजस्वी और दिव्य शक्ति मानी जाती हैं। उनका स्वरूप केवल उग्रता का प्रतीक नहीं, अपितु साधक के जीवन में चेतना, साहस, संरक्षण और आध्यात्मिक जागरण का स्रोत माना जाता है। तंत्र शास्त्रों में माँ भैरवी को कालभैरव की शक्ति कहा गया है, जिनमें भैरव के समस्त गुण — पालन, पोषण, रक्षा और दुष्ट शक्तियों के विनाश का तेज विद्यमान रहता है।

माँ भैरवी का वर्ण लाल बताया गया है, जो शक्ति, चेतना, ऊर्जा और साधना की अग्नि का प्रतीक माना जाता है। उनके गले की मुंडमाला इस बात का संकेत देती है कि जो साधक अहंकार, भय, क्रोध और अज्ञान पर विजय प्राप्त कर लेता है, वही वास्तविक ज्ञान को प्राप्त करता है। उनके हाथों में धारण किए गए ग्रंथ, माला और दिव्य आयुध यह दर्शाते हैं कि वे केवल संहार की देवी नहीं, अपितु ज्ञान, मंत्रशक्ति और साधना सिद्धि की अधिष्ठात्री भी हैं।

तांत्रिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि माँ भैरवी की उपासना साधक के भीतर छिपी नकारात्मकता, भय और मानसिक दुर्बलता को समाप्त कर अद्भुत आत्मबल प्रदान करती है। उनकी कृपा से साधक में तेज, आकर्षण, निर्भयता और आध्यात्मिक स्थिरता का विकास होता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा, संयम और गुरु मार्गदर्शन में उनकी साधना करता है, उसके जीवन में आने वाली अनेक अदृश्य बाधाएँ शांत होने लगती हैं।

परशुरामकल्पसूत्र, तंत्रसार और अनेक प्राचीन ग्रंथों में माँ भैरवी को अत्यंत गूढ़ एवं शीघ्र प्रसन्न होने वाली देवी बताया गया है। उनका स्मरण साधक के भीतर सुप्त चेतना को जागृत करता है तथा साधना में एकाग्रता और दिव्य अनुभूति प्रदान करता है। इसलिए तंत्र मार्ग में माँ भैरवी को विशेष स्थान प्राप्त है।

माँ भैरवी यह संदेश देती हैं कि जीवन में केवल बाहरी शक्ति पर्याप्त नहीं होती, अपितु भीतर की चेतना, साहस और आत्मजागरण ही वास्तविक शक्ति है। जो साधक अपने भय पर विजय प्राप्त कर लेता है, वही आध्यात्मिक उन्नति के उच्च स्तर तक पहुँचता है।

॥ श्री भैरवी स्तोत्र ॥

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

रक्तवर्णां चतुर्बाहुं त्रिनेत्रां वरदायिनीम् ।
पाशांकुशधरां देवीं भैरवीं प्रणमाम्यहम् ॥

खड्गकपालसंयुक्तां मुंडमालाविभूषिताम् ।
सिंहासनस्थितां देवीं भैरवीं प्रणमाम्यहम् ॥

उद्यद्भानुसहस्राभां नानालंकारभूषिताम् ।
दिव्यरत्नमयीं देवीं भैरवीं प्रणमाम्यहम् ॥

महाभयं विनाशाय महापातकहारिणीम् ।
महाशक्तिस्वरूपां तां भैरवीं प्रणमाम्यहम् ॥

भूतप्रेतपिशाचादि भयक्लेशविनाशिनीम् ।
सर्वसिद्धिप्रदां देवीं भैरवीं प्रणमाम्यहम् ॥

॥ ॐ ऐं ह्रीं श्रीं भैरव्यै नमः ॥

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Maa Kamakhya seated upon a throne formed through the symbolism of Brahma as the lotus, Lord Vishnu as the lion, and Lord...
24/05/2026

Maa Kamakhya seated upon a throne formed through the symbolism of Brahma as the lotus, Lord Vishnu as the lion, and Lord Shiva in the form associated with the transcendent seat of stillness is interpreted in certain Shakta traditions as a profound expression of the supremacy of Divine Shakti. In this sacred imagery, the lotus symbolizes creation and unfolding consciousness, the lion represents preservation, courage, and royal divine power, while Shiva signifies transcendence and the silent foundation beyond all forms. Maa Kamakhya seated above these sacred principles symbolizes the Divine Mother as the primordial energy through which creation, preservation, and transformation become possible. Rather than separation among deities, this mystical portrayal expresses unity, showing that all cosmic functions rest within the infinite power of Adi Shakti. Devotees meditate upon this form as a representation of divine completeness, where all forms of existence ultimately arise from and return to the eternal source of consciousness and sacred energy.

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⚜️🔱 *24 मई 2026 ( रविवार )* 🔱⚜️🚩🍁 *प्रथम ज्येष्ठ पुरूषोत्तम मास शुक्ल पक्ष "नवमी" 28:32 तक तत्पश्चात "दशमी" वि.स. 2083*🍁...
24/05/2026

⚜️🔱 *24 मई 2026 ( रविवार )* 🔱⚜️

🚩🍁 *प्रथम ज्येष्ठ पुरूषोत्तम मास शुक्ल पक्ष "नवमी" 28:32 तक तत्पश्चात "दशमी" वि.स. 2083*🍁 🚩

🔱🇮🇳🚩 *विशेष राष्ट्रमण्डल दिवस* 🚩🇮🇳🔱

🙏🙏🌅 *आज का विचारपुष्प* 🌅🙏🙏

*मतलब कि दीवार इतनी भी ऊँची मत करो कि...*
*जब खुद को जरूरत पड़े तो कूदा भी न जाए...*
*उड़ने में बुराई नहीं है आप भी उड़े लेकिन...*
*उतना ही ऊँचा जहां से जमीन साफ दिखाई दे...*
*अहंकार की छत पर चढ़कर देखोगे तो...*
*दुनिया तो दिखेगी मगर अपना कोई नहीं दिखेगा..!*

ऊँ शं शनैश्चराय नमः। ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।श्री श्री शनि महारा...
23/05/2026

ऊँ शं शनैश्चराय नमः। ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।

श्री श्री शनि महाराज की जय
भक्तों द्वारा तेल स्नान धूपदान प्रदीप दान
श्री श्री शनि महाराज मंदिर मालदा पश्चिम बंगाल
23.05.2026
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