सनातन Bhakti Gyan

सनातन Bhakti Gyan * Sanatan Dharma | Eternal Way of Life � सनातन धर्मो रक्षति रक्षितः �

राधे व्रजदेवि कृष्णप्रियासि त्वं भक्तानामनुकम्पया सदा ।कृष्णेन सह तव नामगानं कल्याणं भवतु मे जगन्मये ॥अर्थ: हे व्रजदेवि ...
12/05/2026

राधे व्रजदेवि कृष्णप्रियासि त्वं भक्तानामनुकम्पया सदा ।कृष्णेन सह तव नामगानं कल्याणं भवतु मे जगन्मये ॥
अर्थ: हे व्रजदेवि राधे! आप श्रीकृष्ण की प्रिय हैं। आपकी और श्रीकृष्ण की भक्ति से ही भक्तों के जीवन में मंगल और कल्याण होता है।



महाभारत में द्रौपदी चीरहरण एक अत्यंत अपमानजनक और महत्वपूर्ण घटना है, जब द्यूतक्रीड़ा (जुए) में पांडवों के हारने के बाद द...
12/05/2026

महाभारत में द्रौपदी चीरहरण एक अत्यंत अपमानजनक और महत्वपूर्ण घटना है, जब द्यूतक्रीड़ा (जुए) में पांडवों के हारने के बाद दुर्योधन ने द्रौपदी का अपमान किया। दुशासन द्रौपदी को भरी सभा में खींचकर लाया और उनके वस्त्र उतारने का प्रयास किया। श्रीकृष्ण ने चमत्कारिक रूप से द्रौपदी की साड़ी बढ़ाकर उनकी लाज बचाई।


पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य भगवान (विवस्वान) ऋषि कश्यप और माता अदिति के पुत्र हैं। वे सृष्टि को ऊर्जा, प्रकाश और जीवन...
12/05/2026

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य भगवान (विवस्वान) ऋषि कश्यप और माता अदिति के पुत्र हैं। वे सृष्टि को ऊर्जा, प्रकाश और जीवन प्रदान करने वाले देवता माने जाते हैं, जिन्हें ऋग्वेद में भी प्रमुख स्थान प्राप्त है। सूर्य देव को ज्ञान, अनुशासन और आत्मा का कारक माना जाता है और वे 12 आदित्यों (सूर्य के 11 भाई) में से एक हैं।


With Vikash Pandey – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
12/05/2026

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यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।धर्...
12/05/2026

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥



12/05/2026

गणपति बप्पा (भगवान गणेश) की उत्पत्ति की सबसे प्रसिद्ध कथा माता पार्वती द्वारा अपने शरीर के चंदन लेप से बालक बनाकर प्राण फूंकना है, जिसे बाद में शिवजी द्वारा मस्तक काटने और हाथी का सिर (गजमुख) लगाने पर 'गजानन' नाम मिला। वे प्रथम पूज्य, बुद्धि और विघ्नहर्ता देवता हैं।



शिव-पार्वती की कथा अमर प्रेम, कठोर तपस्या और समर्पण की कहानी है। सती के आत्मदाह के बाद, महादेव समाधि में चले गए। पार्वती...
12/05/2026

शिव-पार्वती की कथा अमर प्रेम, कठोर तपस्या और समर्पण की कहानी है। सती के आत्मदाह के बाद, महादेव समाधि में चले गए। पार्वती (हिमालय की पुत्री) ने शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों कठोर तप किया। अंततः, शिवजी पार्वती की भक्ति से प्रसन्न हुए और दोनों का विवाह हुआ, जिससे संसार में शक्ति और चेतना का मिलन हुआ।



शिव-पार्वती की कथा अमर प्रेम, कठोर तपस्या और समर्पण की कहानी है। सती के आत्मदाह के बाद, महादेव समाधि में चले गए। पार्वती...
12/05/2026

शिव-पार्वती की कथा अमर प्रेम, कठोर तपस्या और समर्पण की कहानी है। सती के आत्मदाह के बाद, महादेव समाधि में चले गए। पार्वती (हिमालय की पुत्री) ने शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों कठोर तप किया। अंततः, शिवजी पार्वती की भक्ति से प्रसन्न हुए और दोनों का विवाह हुआ, जिससे संसार में शक्ति और चेतना का मिलन हुआ।



माँ काली हिंदू धर्म में शक्ति, विनाश और समय (काल) की देवी हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दुष्टों के संहार और राक्षसों से देवत...
12/05/2026

माँ काली हिंदू धर्म में शक्ति, विनाश और समय (काल) की देवी हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दुष्टों के संहार और राक्षसों से देवताओं की रक्षा के लिए जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ दुर्गा ने रक्तबीज और शुम्भ-निशुम्भ जैसे राक्षसों को मारने के लिए अपने ललाट से अत्यंत उग्र रूप में काली को प्रकट किया था।


राधा रानी, जिन्हें श्री कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति (आंतरिक शक्ति) और प्रेम का सर्वोच्च स्वरूप माना जाता है, द्वापर युग में ...
12/05/2026

राधा रानी, जिन्हें श्री कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति (आंतरिक शक्ति) और प्रेम का सर्वोच्च स्वरूप माना जाता है, द्वापर युग में बरसाना के वृषभानु महाराज और कीर्ति माता के घर प्रकट हुईं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वे यमुना में एक कमल के फूल पर मिली थीं और उन्होंने कृष्ण के दर्शन करने तक अपनी आंखें नहीं खोली थीं। वे कृष्ण की संगिनी और करुणा की प्रतिमूर्ति हैं।


खाटू श्याम जी की कहानी महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक से जुड़ी है, जो भीम के पौत्र थे। भगवान शिव से प्राप्त तीन दिव्...
12/05/2026

खाटू श्याम जी की कहानी महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक से जुड़ी है, जो भीम के पौत्र थे। भगवान शिव से प्राप्त तीन दिव्य बाणों से लैस, उन्होंने युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देने का वचन दिया था। श्रीकृष्ण ने परीक्षा लेकर उनका शीश दान में मांग लिया, जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने कलयुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया।



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