03/09/2025
Padma Ekadashi/Parivartini Ekadashi
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🚩हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी या परिवर्तिनी एकादशी (Padma Ekadashi) कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन आषाढ़ मास से शेष शैय्या पर सोए भगवान विष्णुजी करवट बदलते हैं।
🔔इस शुभ दिन भगवान विष्णु और उनके अवतार वामन रूप की पूजा की जाती है तथा पालकी में मूर्तियों को स्थापित कर शोभा यात्रा निकाली जाती है।🔔
पद्मा एकादशी व्रत 2021 (Padma Ekadashi Vrat 2021)
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🌹पद्मा एकादशी व्रत विधि (Padma Ekadashi Vrat Vidhi in Hindi)🌹
🚩पद्मा एकादशी व्रत वाले दिन भगवान विष्णु तथा उनके वामन अवतार का धूप, तुलसी के पत्तों, दीप, नेवैद्ध व फूल आदि से पूजा करने का विधान है। इस शुभ व्रत तिथि के दिन सात कुम्भों यानि घड़ों को अलग- अलग अनाजों (गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौं, चावल और मसूर) से भरकर रखा जाता है।🚩
🌹पद्मा एकादशी से एक दिन पहले यानि दशमी के दिन गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौं, चावल तथा मसूर नहीं खानी चाहिए।🌹
🍁स्थापित किए हुए घड़े के ऊपर भगवान विष्णु तथा वामन अवतार की मूर्ति रखकर पूजा करने का विधान है। पद्मा एकादशी व्रत वाली रात को भगवान का भजन- कीर्तन या जागरण करना चाहिए।🍁
🍂पद्मा पुराण के अनुसार व्रत अगले यानि द्वादशी के दिन भगवान का पूजन कर ब्राह्मण को भोजन और दान देने का विधान बताया गया है। अंत में भोजन ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए।🍂
🚩पद्मा एकादशी व्रत का महत्त्व (Importance of Padma Ekadashi Vrat in Hindi)🚩
🌹पद्म पुराण के अनुसार पद्मा एकादशी व्रत करने से साधक के सभी पापों का नाश तथा सभी भोग वस्तुओं की प्राप्ति होती है।🌹
🌺इस महान व्रत के प्रभाव से व्रती, मोक्ष तथा मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम प्राप्त करता है।🌺
🚩पद्मा (परिवर्तिनी) एकादशी की प्रामाणिक व्रत कथा🚩
🌷युधिष्ठिर ने पूछा- हे भगवान! भाद्रपद शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। तब भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि इस पुण्य, स्वर्ग और मोक्ष को देने वाली तथा सब पापों का नाश करने वाली, उत्तम वामन एकादशी का माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूँ तुम ध्यानपूर्वक सुनो।🌷
🔱यह पद्मा/परिवर्तिनी एकादशी जयंती एकादशी भी कहलाती है। इसका यज्ञ करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पापियों के पाप नाश करने के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं।🔱
💐जो मनुष्य इस एकादशी के दिन मेरी (वामन रूप की) पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं। अत: मोक्ष की इच्छा करने वाले मनुष्य इस व्रत को अवश्य करें।💐
🍁जो कमलनयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं। जिसने भाद्रपद शुक्ल एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों का पूजन किया।🍁
🔔अत: हरिवासर अर्थात एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।
इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं।🔔
💐यह एकादशी जयंती एकादशी भी कहलाती है। इसका यज्ञ करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पापियों के पाप नाश करने के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं।💐
🌺जो मनुष्य इस एकादशी के दिन मेरी (वामन रूप की) पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं।🌺
🔔भगवान के वचन सुनकर युधिष्ठिर बोले कि भगवान! मुझे अतिसंदेह हो रहा है कि आप किस प्रकार सोते और करवट लेते हैं तथा किस तरह राजा बलि बलि को बाँधा और वामन रूप रखकर क्या-क्या लीलाएँ कीं?🔔
🍂चातुर्मास के व्रत की क्या विधि है तथा आपके शयन करने पर मनुष्य का क्या कर्तव्य है। सो आप मुझसे विस्तार से बताइए।🍂
🚩श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! अब आप सब पापों को नष्ट करने वाली कथा का श्रवण करें।🚩
🔱त्रेतायुग में बलि नामक एक दैत्य था। वह मेरा परम भक्त था। विविध प्रकार के वेद सूक्तों से मेरा पूजन किया करता था और नित्य ही ब्राह्मणों का पूजन तथा यज्ञ के आयोजन करता था,🔱
🌷लेकिन इंद्र से द्वेष के कारण उसने इंद्रलोक तथा सभी देवताऒं को जीत लिया। इस कारण सभी देवता एकत्र होकर सोच-विचारकर भगवान के पास गए। बृहस्पति सहित इंद्रादिक देवता प्रभु के निकट जाकर और नतमस्तक होकर वेद मंत्रों द्वारा भगवान का पूजन और स्तुति करने लगे।🌷
🍁अत: मैंने वामन रूप धारण करके पाँचवाँ अवतार लिया और फिर अत्यंत तेजस्वी रूप से राजा बलि को जीत लिया।🍁
💐इतनी वार्ता सुनकर राजा युधिष्ठिर बोले कि हे जनार्दन! आपने वामन रूप धारण करके उस महाबली दैत्य को किस प्रकार जीता? श्रीकृष्ण कहने लगे- मैंने (वामन रूपधारी ब्रह्मचारी) बलि से तीन पग भूमि की याचना करते हुए कहा- ये मुझको तीन लोक के समान है और हे राजन यह तुमको अवश्य ही देनी होगी।💐
⚜️राजा बलि ने इसे तुच्छ याचना समझकर तीन पग भूमि का संकल्प मुझको दे दिया और मैंने अपने त्रिविक्रम रूप को बढ़ाकर यहाँ तक कि भूलोक में पद, भुवर्लोक में जंघा, स्वर्गलोक में कमर, मह:लोक में पेट, जनलोक में हृदय, यमलोक में कंठ की स्थापना कर सत्यलोक में मुख, उसके ऊपर मस्तक स्थापित किया।⚜️
🌹सूर्य, चंद्रमा आदि सब ग्रह गण, योग, नक्षत्र, इंद्रादिक देवता और शेष आदि सब नागगणों ने विविध प्रकार से वेद सूक्तों से प्रार्थना की। तब मैंने राजा बलि का हाथ पकड़कर कहा कि हे राजन! एक पद से पृथ्वी, दूसरे से स्वर्गलोक पूर्ण हो गए। अब तीसरा पग कहाँ रखूँ?🌹
🙏🏻तब बलि ने अपना सिर झुका लिया और मैंने अपना पैर उसके मस्तक पर रख दिया जिससे मेरा वह भक्त पाताल को चला गया।🙏🏻
🔔फिर उसकी विनती और नम्रता को देखकर मैंने कहा कि हे बलि! मैं सदैव तुम्हारे निकट ही रहूँगा। विरोचन पुत्र बलि से कहने पर भाद्रपद शुक्ल एकादशी के दिन बलि के आश्रम पर मेरी मूर्ति स्थापित हुई।🔔
🔱इसी प्रकार दूसरी क्षीरसागर में शेषनाग के पष्ठ पर हुई! हे राजन! इस एकादशी को भगवान शयन करते हुए करवट लेते हैं, इसलिए तीनों लोकों के स्वामी भगवान विष्णु का उस दिन पूजन करना चाहिए। ताँबा, चाँदी, चावल और दही का दान करना उचित है। रात्रि को जागरण अवश्य करना चाहिए।🔱
🍁जो विधिपूर्वक इस एकादशी का व्रत करते हैं, वे सब पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में जाकर चंद्रमा के समान प्रकाशित होते हैं और यश पाते हैं। जो पापनाशक इस कथा को पढ़ते या सुनते हैं, उनको हजार अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।🍁
💐।।इति संपूर्णंम्।।💐
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