20/07/2025
#आसान #निकाह — #मुस्लिम #समाज #की #नयी #सुबह #का #पैग़ाम"
जब दीन की रौशनी दिलों में उतरती है, तब समाज में सच्चा इंकलाब आता है। आज यही इंकलाब डॉ. इसरार देवबंद और उनके साथी हाजी सलीम उल्धन हाजी मेहरबान कुरैशी अलकार चौधरी मुस्तफा कुरैशी फैसल मेहरबान, मास्टर आशिक इलाही हाजी सलाउद्दीन, हाजी नवाब मुफ्ती खुर्शीद साहब हाजी इरशाद देहली उलेमा हजरात की कोशिशों से परवान चढ़ रहा है।
उनकी रहनुमाई में "निकाह को आसान बनाओ" मुहिम अब सिर्फ एक सोच नहीं, बल्कि एक तहरीक बन चुकी है — ऐसी तहरीक जो मुस्लिम समाज को बोझ से निजात और बरकत की राह दिखा रही है।
💔 क्या हम भूल गए हैं कि हमारी बेटियाँ निकाह के नाम पर भारी दहेज और दिखावे के बोझ तले दबती जा रही हैं?
💔 क्या हम नहीं देख रहे कि मां-बाप करज़ में डूबकर अपनी बेटी की शादी कर रहे हैं — सिर्फ़ इसलिए कि समाज क्या कहेगा?
💔 क्या हमें इस बात की फिक्र नहीं कि निकाह की देरी और बोझ उन्हें मुरतद होने जैसे खतरनाक रास्तों की तरफ़ ढकेल रही है?
अब और नहीं!
अब वक़्त आ गया है कि हम इस बोझ को उतार फेंकें।
अब वक़्त है रस्मों को मिटाने और सुन्नतों को ज़िंदा करने का।
🌿 हमारा मक़सद क्या है?
निकाह को आसान बनाना
दिखावे, बारात, फिजूलखर्ची, वीडियोग्राफ़ी और दहेज जैसी बेबुनियाद रस्मों को अलविदा कहना
बेटी वालों को राहत देना
माँ-बाप को करज़ से बचाना
समाज के माल को तालीम, कारोबार और बेहतरी में लगाना
और सबसे बढ़कर — सुन्नतों को अपनाकर अल्लाह की रज़ा पाना
याद रखिए:
✨ "जब हम सुन्नतों को ज़िंदा करेंगे, अल्लाह हमारी ज़िन्दगियों में बरकतें उतारेगा।"
✨ "जब निकाह आसान होगा, गुनाह मुश्किल हो जाएगा।"
✨ "जब हम दिखावे को छोड़ेंगे, तब हमारी बेटियाँ असल इज़्ज़त पाएँगी।"
आइए, इस मुहिम का हिस्सा बनें।
✊ आइए, अपनी बेटियों को मुरतद होने से बचाएँ
✊ आइए, माँ-बाप को करज़ से निजात दिलाएँ
✊ आइए, अपने समाज को रस्मों से आज़ाद कराकर सुन्नतों से रोशन करें
यही है असली दीन की राह — और यही है तरक़्क़ी का रास्ता।
अब खामोश रहना गुनाह है। अब बोलना और चलना फ़र्ज़ है।
🚩 आओ... इस मुहिम को आगे बढ़ाएँ।
ताकि हमारी आने वाली नस्लें कहें:
"हमें निकाह नहीं डराता, बल्कि राहत देता है। हमें इस्लाम ने सादगी सिखाई है, बोझ नहीं!"
– एक इंकलाबी पैग़ाम, हर मुसलमान के दिल तक पहुँचे –