Gyan

Gyan Come and Feel the power of GOD | भगवान की भक्ति की शक्ति को महसूस करने का आनंद लें |

So True ...
28/04/2022

So True ...

*सुंदरकांड में एक प्रसंग अवश्य पढ़ें !**“मैं न होता, तो क्या होता?”*“अशोक वाटिका" में *जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवा...
05/04/2022

*सुंदरकांड में एक प्रसंग अवश्य पढ़ें !*
*“मैं न होता, तो क्या होता?”*
“अशोक वाटिका" में *जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा*
तब हनुमान जी को लगा कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सिर काट लेना चाहिये!
किन्तु, अगले ही क्षण, उन्होंने देखा
*"मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया !*
यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बढ़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि
*यदि मैं न होता, तो सीता जी को कौन बचाता?*
बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, *मैं न होता तो क्या होता* ?
परन्तु ये क्या हुआ?
सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया! तब हनुमान जी समझ गये,
*कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं!*
आगे चलकर जब "त्रिजटा" ने कहा कि "लंका में बंदर आया हुआ है, और वह लंका जलायेगा!"
*तो हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये, कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है*
और त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है,
*एक वानर ने लंका जलाई है! अब उन्हें क्या करना चाहिए? जो प्रभु इच्छा!*
जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमान जी को मारने के लिये दौड़े,
*तो हनुमान ने अपने को बचाने के लिए तनिक भी चेष्टा नहीं की*
और जब "विभीषण" ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो
*हनुमान जी समझ गये कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया है!*
आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि
*बंदर को मारा नहीं जायेगा, पर पूंछ में कपड़ा लपेट कर, घी डालकर, आग लगाई जाये*
तो हनुमान जी सोचने लगे कि लंका वाली त्रिजटा की बात सच थी,
*वरना लंका को जलाने के लिए मैं कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता, और कहां आग ढूंढता?*
पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया! जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं, तो
*मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !*
इसलिये *सदैव याद रखें,* कि *संसार में जो हो रहा है, वह सब ईश्वरीय विधान* है!
हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं!
इसीलिये *कभी भी ये भ्रम न पालें* कि...
*मैं न होता, तो क्या होता ?*

ना मैं श्रेष्ठ हूँ,
*ना ही मैं ख़ास हूँ,*

मैं तो बस छोटा सा,
*भगवान का दास हूँ॥*

🚩👏जय सियाराम🚩👏

27/02/2022
जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥एक दंत दयावंत,चार भुजा धारी ।माथे सिंदूर सोहे,मूसे की सवार...
01/02/2022

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

क्या आप जानते हैं हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का मतलब?जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।। इस पंक्ति मे...
22/01/2022

क्या आप जानते हैं हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का मतलब?

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।। इस पंक्ति में धरती से सूर्य की दूरी का

युग- 12,000

बिल्कुल सही माप दिया गया है: 8

सहस्त्र- 1,000 योजन

इन सबको गुना करने पर मिलता है:

9,60,00,000 यानि कि 9,60,00,000 मील एक मील यानि 1.6 किमी. 9,60,00,000 गुना 1.6 यानि

Bord HANUMAN

15,36,00,000 fanft

वैज्ञानिकों ने धरती से सूर्य की दूरी 18वीं सदी में मालूम की जबकि तुलसीदास जी ये दूरी सदियों पहले ही मालूम कर चुके थे।

दोस्तों, ये है हमारा हिंदु धर्म, आज कुछ लोग हमारे धर्म को बेकार व अंधविश्वासी करार देते हैं। हमें उन्हें बताना होगा कि हमारा धर्म कितना विराट है, क्यों न इसकी शुरुआत आज से की जाए?

🚩🚩🚩🙏जय वीर हनुमान जी🙏🚩🚩🚩
💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

21/01/2022

*" अपनी छवि का ध्यान रखें क्यूंकि इसकी आयु आपकी आयु से कहीं ज्यादा होती है । "*

21/11/2021

👉 Unhappiness is wishing that things were another way.
Comparison is the death of joy. Expectation is the death of satisfaction. Ego is the death of contentment.
Full acceptance of reality without judgement = Peace.
You can call it mindfulness, attentiveness, presence. Embrace the moment as it comes your way without judgement. Try it at least one day a week.

19/09/2021

Imagine life is a game of 5 balls that you manipulate in the air trying not to fall these balls. One of them is rubber, and the rest is glass.

The five balls are:
Work, family, health, friends, soul.

It will not be long before you realize that (work) is a rubber ball. Whenever you fall, you will jump again, while the other balls are made of glass. If one of them falls, it will not return to its previous form.

It will either be damaged, bruised, cracked or even scattered.

You have to be aware of that and strive for it.

Manage your work efficiently during working hours, take the time to be assured of your sincerity, give the necessary time to your family and friends, take appropriate rest, and take care of your health. If you are gone, it isn't easy to return as it was.

26/08/2021
25/08/2021

कृपा बरस रही है … समझो तो जानो ।

13/08/2021

भगवान की
एक पूजा सुबह, एक पूजा शाम
करदे हर ख़ास समस्या को आम

09/07/2021

सावधान !!!
लालच एक ऐसी बला है ।
जो इंसान के विवेक को नष्ट करके, उसे विनाश की ओर
धकेल देती है ।।

Address

Delhi
110059

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Gyan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share