06/06/2024
राजा जो बने कबीर परमेश्वर के शिष्य
बहुत कम लोग इस तथ्य से अवगत हैं कि दयालु सर्वशक्तिमान कबीर परमात्मा दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोदी के भी गुरु थे। वही कबीर परमात्मा जो वाराणसी यानी काशी में कमल पुष्प पर शिशु रूप में अवतरित हुए और 120 वर्ष एक जुलाहे की दिव्य लीला निभाकर मगहर से सशरीर अमरधाम सतलोक प्रस्थान कर गए। उन्हें संसार केवल एक समाज सुधारक कवि के रूप में जानता रहा लेकिन उन्होंने ही उस समय साढ़े तीन करोड़ की आबादी में से 64 लाख लोगों को अपने तत्वज्ञान से परिचित कराया। इन्ही में उन्होंने कई राजाओं को भी अपनी शरण में लेकर मोक्ष प्राप्ति योग्य बनाया। आज यहाँ हम दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोदी, काशी नरेश बीरदेव सिंह बघेल और मगहर के नवाब बिजली खान पठान के बारे में बताएंगे जिन्हें कबीर परमात्मा ने अपनी शरण में लिया।
सिकंदर लोदी ने माना कि कबीर अल्लाह हैं
कबीर साहेब के अनमोल ज्ञान के कारण उनकी बढ़ती प्रतिष्ठा से अनेकों हिंदू और मुस्लिम धार्मिक गुरुओं की दुकाने बंद हो रही थीं। एक बार बड़ी संख्या में उन्होंने सुल्तान सिकंदर लोदी से एक झूठी शिकायत की कि कबीर जुलाहा देवताओं की छवि को खराब कर रहा हैं और गलत संदेश दे रहा हैं कि भगवान /अल्लाह, मंदिर/ मस्जिद में नहीं मिलते। वह पशु बलि और मांसाहार के विरुद्ध भी प्रचार कर रहा है कि ऐसा करने से अल्लाह/ परमात्मा नाराज होता हैं। ऐसा करने वालों को स्वर्ग नहीं नरक मिलता है।
अपने सैनिकों द्वारा कबीर जी को गिरफ्तार कराके शाही अदालत में अज्ञानी सिकंदर लोदी ने पूछा, “आप कौन हो? आप खुद को अल्लाह कहते हैं।” कबीर जी ने उत्तर दिया कि मैं ही परमात्मा हूं। मैं ही संत तथा सतगुरु हूं । मेरा नाम कबीर (अल्लाह अकबर) है। मैं (खालिक) संसार का मालिक (धनी) हूं। मैं कबीर सर्वव्यापक हूं।
हम ही अलख अल्लाह हैं, कुतुब गौस और पीर।
गरीब दास खालिक धनी, हमारा नाम कबीर ।।
अहंकारी सिकंदर लोदी ने एक गर्भवती गाय को अपनी तलवार से दो हिस्सों में काटकर कबीर जी को चुनौती दी कि यदि तू परमात्मा है तो इस गाय को जीवित कर दें। हमारे नबी मोहम्मद ने मृत गाय को जीवित किया था। परमात्मा कबीर जी ने हाथ से थपकी मार कर दोनों मां बच्चे को जीवित कर दिया और दूध की बाल्टी भर दी और कबीर जी ने वह दूध पिया।
सिकंदर राजा ने कबीर अल्लाह का चमत्कार पहली बार देखा था। उसे शीघ्र ही आभास हो गया कि कबीर जी कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। उसने अपनी अज्ञानता और गलती के लिए माफी मांगी और कबीर जी को प्रणाम करके कहा
आप कबीर अल्लाह हैं, बख्शो इबकी बार।
दासगरीब शाह कुं, अल्लाह रूप दीदार।।
फिर, सिकंदर लोदी ने कबीर जी को एक पालकी में पूरी गरिमा के साथ उनके आवास पर भेज दिया ।
शेख तकी ने कबीर साहेब को तांत्रिक और जादूगर बताया
शेख तकी सिकंदर लोदी का धार्मिक मुस्लिम गुरु था और अपने समुदाय के बीच अत्यधिक प्रभावशाली था। उसे कबीर जी से ईर्ष्या होने लगी। उसने सिकंदर को गुमराह किया कि “कबीर तंत्र मंत्र विशेषज्ञ हैं। वह एक जादूगर है। काला जादू करने वाला कोई भी व्यक्ति मृत गाय को जीवित कर सकता है।”
सर्वशक्तिमान कबीर जी द्वारा सिकंदर लोदी के असाध्य जलन के रोग को ठीक करना
एक बार दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोदी को जलन का रोग हो गया। उसे कोई औषधि, वैद्य हकीम, धार्मिक संत ठीक नहीं कर पाए। किसी ने बताया कि काशी शहर में एक कबीर नाम का महापुरुष है यदि वह कृपा कर दे तो आपका दुख निवारण अवश्य हो जाएगा। सिकंदर को मृत गाय को जिंदा करने का वृतांत याद आ गया। उधर वीर देव सिंह बघेल काशी नरेश पहले ही कबीर साहेब की महिमा और ज्ञान सुनकर उनके शिष्य हो चुके थे और पूर्ण रूप से अपने गुरुदेव में आस्था रखते थे। सिकंदर लोदी बनारस आकर बीर सिंह के साथ स्वामी रामानंद जी के आश्रम कबीर साहेब से मिलने पहुंचे। स्वामी रामानंद जो मुसलमानों से उनके मांसाहारी होने के कारण घृणा करते थे, उन्होंने कहा “इन मलेच्छों (मुसलमानों) की शक्ल भी मै नहीं देखना चाहता हूँ, उनसे कह दो कि वे बाहर बैठ जाए।” यह सुनते ही सिकंदर लोदी को क्रोध आ गया और उसने अंदर जाकर रामानंद जी की गर्दन तलवार से काट दिया और वापस चल पड़ा। ज्यों ही आश्रम से बाहर आया कबीर साहेब आते दिखाई दिए। वीर सिंह के साथ सिकंदर लोदी ने भी उन्हें दंडवत प्रणाम किया। कबीर परमेश्वर जी ने दोनों के सिर पर हाथ रखा तो सिकंदर का जलन का रोग तुरंत समाप्त हो गया। सच्चाई जानकर सिकंदर लोदी की आंखों में पानी आ गया। उसने परमेश्वर के पैर पकड़कर छोड़े नहीं और रोता ही रहा। परमेश्वर कबीर साहिब ने सिकंदर लोदी को माफ कर दिया और स्वामी रामानंद जी को जीवित किया।
शेख तकी ने परमेश्वर कबीर जी के साथ 52 बदमाशी की और हर बार मुँह की खानी पड़ी।
ईर्ष्यालु शेख तकी ने कबीर जी को उबलते हुए तेल में जलाने की साजिश रची लेकिन कबीर जी उस उबलते हुए तेल में ऐसे बैठ गए जैसे तेल बिल्कुल ठंडा हो। सिकंदर लोदी ने तेल के तापमान को जांचने के लिए तेल को ठंडा मानते हुए अपनी उंगली डुबो दी और तुरंत उसकी उंगली जल गई और अलग हो गई। अपार पीड़ा के कारण सिकंदर लोदी बेहोश हो गया। भगवान कबीर ने उसकी उंगली ठीक की।
सिकंदर ने परमात्मा को दिल्ली आने का निमंत्रण दिया ताकि उनके ज्ञान उपदेश से हिन्दू और मुसलमान का झगड़ा समाप्त हो और जन जन का उद्धार हो। कबीर साहेब ने सिकंदर लोदी को नाम उपदेश देकर सारे नियम समझाए जिसे उसने स्वीकार कर लिया। सिकंदर ने कहा प्रभु मैं जीव हिंसा नहीं करूंगा तथा न किसी को जीव हिंसा करने के लिए कहूँगा। परन्तु ये मुल्ला तथा काजी मेरे बस से बाहर हैं। बादशाह सिकंदर ने परमेश्वर कबीर साहेब को अपने साथ हाथी पर अम्बारी में बैठाया जिसमें राजा के अतिरिक्त कोई बैठ नहीं सकता था, परन्तु सिकंदर समझ चुका था कि कबीर जी साक्षात परमेश्वर हैं।
सभी वहाँ से दिल्ली के लिए चल पड़े। रास्ते में शेखतकी ने कबीर जी परीक्षा लेने की ठानी और कहा यदि वे मेरे सामने कोई मुर्दा जीवित करे तो मै इसे अल्लाह मान लूंगा। नहीं तो दिल्ली जाकर मैं पूरे मुसलमान समाज को कह दूँगा कि यह बादशाह हिन्दू हो गया है। सिकंदर लोदी डर गया कि कहीं ऐसा न हो कि यह जाते ही राज पलट दे।
डरे बादशाह ने कबीर साहेब से प्रार्थना की, उन्होंने कहा कि ठीक है शेखतकी ढूंढ ले कोई मुर्दा। सुबह एक 10-12 वर्ष की आयु के लड़के का शव जो पानी में तैरता हुआ आ रहा था, कबीर साहेब के कहने से जीवित होकर बाहर आ गया। सबने कहा कि कमाल कर दिया तो उस लड़के का नाम कमाल रख दिया। यह बात दूर दूर तक फैल गई और कबीर साहेब की महिमा पहले से ज्यादा बढ़ गई।
अब शेखतकी ने उसकी अपनी तेरह वर्षीय लड़की जिसको मृत्यु पश्चात् जमीन में दबा रखा था उसे जीवित करने को कहा। पूज्य कबीर परमेश्वर ने भारी भीड़ के सामने कहा कि हे शेखतकी की लड़की जीवित हो जा और वह लड़की जीवित होकर बाहर आई, कबीर साहेब के चरणों में दण्डवत् प्रणाम किया। उस लड़की ने डेढ घण्टे तक कबीर साहेब की कृपा से प्रवचन किया। उसने कहा “हे भोली जनता! ये भगवान आए हुए हैं। पूर्ण ब्रह्म अनंत कोटि ब्रह्मण्ड के परमेश्वर हैं। इनके चरणों में गिरकर जन्म-मरण का दीर्घ रोग कटवाओ और सत्यलोक चलो।” कबीर साहेब ने लड़की का नाम कमाली रख दिया और अपनी बेटी की तरह रखा और नाम दीक्षा दी। उसके साथ हजारों की संख्या में लोगों ने कबीर परमेश्वर से नाम उपदेश ग्रहण किया।
एक अन्य षड्यंत्र के तहत शेख तकी ने कबीर साहेब जी को बाँधकर एक गहरे कुएँ में डलवा दिया और फिर मिट्टी से पाट दिया। बाद में जब शेख तकी ने सिकंदर को यह सब बताया तो उसने कहा कि मेरे पूज्य गुरुदेव कबीर साहेब जी तो कमरे में बैठे हैं, वे तो कहीं पर गये ही नहीं। शेखतकी ने अंदर जाकर देखा तो पूज्य कबीर साहेब अंदर कमरे में आसन पर आराम से बैठे थे।
शेखतकी ने रात्रि के समय कुछ गुंडों द्वारा तलवार से पूज्य कबीर साहेब जी के टुकड़े-टुकड़े करवा दिए। मरा जानकर जब वह झोपड़ी से बाहर निकला तो कबीर साहेब ने आवाज दी, “शेखतकी पीर जी, दूध पीकर जाना।” गुंडों ने सोचा कि यह भूत है। वह वहाँ से भाग गये। गुंडों को बुखार हो गया। कई दिन तक बुखार नहीं उतरा। कबीर साहेब उनके पास गये और उनको ठीक किया। तब उन्होंने कबीर साहेब से क्षमा याचना की।
सिकंदर लोदी ने परमेश्वर कबीर का अनादर किया और नाना प्रकार की यातनाएं दी
बंदी छोड़ कबीर परमेश्वर जी द्वारा उनके तत्वज्ञान और अनेकों अनहोनी लीलाओं से प्रभावित होकर उनके 64 लाख शिष्य बने थे। एक दिन परमेश्वर कबीर जी अपने शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए परम शिष्य रविदास जी और अपनी एक शिष्या जो वैश्या थी उसके साथ हाथी पर सवार होकर शराब पीने का अभिनय करते हुए सुबह काशी नगर के मुख्य बाजार में से गुजरने लगे। यह दृश्य देख उनके चौसठ लाख शिष्य हतप्रभ हो गए और सतज्ञान से विमुख होकर पहले वाली साधना करने लगे। हजारों की संख्या में जुटी जनता ने राज दरबार में कबीर जी को सजा देने की गुहार लगाई। उस दिन दिल्ली का सम्राट सिकंदर लोदी भी काशी में आया हुआ था। शिकायत सुनकर सम्राट सिकंदर क्रोधित होकर बोला कि कबीर को बुलाकर लाओ। तुरंत सिपाही परमात्मा को पकड़ कर लाए। सिकंदर के पूछने पर कबीर जी ने कहा कि हे बादशाह! मेरी अर्ज सुनो मेरी तथा मेरे भक्ति की रक्षा भी वही करेगा जिसने यह कर्म मेरे से करवाया है जिसने सर्व सृष्टि की रचना की है।
कहो, कबीर यह क्या किया, गणिका लीन्ही संग | गरीबदास, शाह कह, पड़या भक्ति में भंग ||
कह कबीर शाह से सुनो अर्ज आवाज़ | गरीबदास, वह राखसी जिन्ह यो साज्या साज।।
सिकंदर लोदी ने जनता को शांत करने के लिए अपने हाथों से कबीर जी के हाथों में हथकड़ी लगाई, पैरों में बेड़ी तथा गले में तौक ( लोहे की भारी बेल ) डाली और आदेश दिया कि जनता की इच्छा अनुसार इनको नौका में बैठाकर गंगा दरिया के मध्य में डालकर डुबोकर मार दो। गंगा दरिया में अथाह जल था। कबीर परमेश्वर जी की हथकड़ी, बेड़ी तथा गले की तौक अपने आप टूट गई। कबीर परमेश्वर जी जल के ऊपर सुखासन लगाकर बैठे रहे। जल में डूबे नहीं।
शेख तकी के कहने पर उनके शरीर के साथ भारी पत्थर बांधकर गंगा के मध्य ले जाकर जल में फेंका गया। इस बार भी सब पत्थर बंधन मुक्त होकर जल में डूब गए परंतु परमेश्वर कबीर जी जल के ऊपर सुखासन लगाए बैठे रहे। नीचे से गंगाजल की लहरें बह रही थी परमेश्वर आराम से जल के ऊपर बैठे थे।
शेख तकी ने लोगों से कहा कि इन्हें पत्थर से मार दो, लेकिन अल्लाह कबीर का बाल भी बांका नहीं हुआ।
तीरंदाजों को कबीर जी को मारने का आदेश दिया गया, लेकिन कोई तीर उन्हें छू भी नहीं सका, बल्कि उनकी दिशा बदल गई।
सैनिकों ने कबीर जी को मारने के लिए लगातार 12 घंटे तक तोप से गोले दागे, लेकिन उनका कुछ भी नहीं बिगड़ा।
कबीर जी ने उन पर दया की और 12 घंटे के बाद उन्होंने खुद को पानी में डुबो दिया ताकि थके हुए सैनिकों को आराम मिल जाए। शेख तकी खुश हो गया कि आखिरकार कबीर साहेब डूब गए और मारे गए। शेख तकी अपने प्रशंसकों के साथ संत रविदास जी की कुटिया पर पहुंचा तो देखा कबीर जी वहाँ उपस्थित थे और एकतारे से शब्द गा रहे थे। शेख तकी लज्जा और क्रोध वश होकर सीधा सिकंदर लोदी राजा के पास विश्राम गृह में गया तथा बताया कि कबीर ना तो जल में डूबा ना तोप से मरा।
इस बार शेख तकी ने खूनी हाथी से मरवाने का निश्चय किया। लेकिन हाथी और महावत दोनों को कबीर साहेब के पास एक शेर दिखाई दिया और दोनों भागने को विवश हो गए। वह कबीर जी का कुछ नहीं बिगड़ पाए। तभी सिकंदर राजा को दिखा कि परमात्मा खड़े होकर आसमान को छू रहे थे और उनके शरीर से अजब प्रकाश निकल रहा था जिसे देखकर वह भयभीत हो गया। मचान से उतरकर उसने परमेश्वर के चरणो में गिर कर क्षमा याचना की ।
बिजली खान पठान ने भी कबीर साहेब को गुरु माना
बिजली खान पठान मगहर रियासत का नवाब था। एक समय मगहर रियासत (वर्तमान जिला संत कबीर नगर) में दुर्भिक्ष पड़ा। त्राहि-त्राहि मच गई। सर्व उपाय जैसे जन्त्र-मंत्र, पाठ, हवन करा लिए, परंतु सब व्यर्थ रहा।
किसी ने बिजली ख़ान को बताया कि काशी नगर में एक कबीर नाम के महात्मा बड़े सिद्ध पुरूष हैं। यदि वे आशीर्वाद दे देंगे तो वर्षा निश्चित रूप से हो जाएगी। नवाब बिजली खान पठान अपने अंगरक्षकों के साथ काशी गया और कबीर परमेश्वर जी को अपनी दुख भरी कहानी सुनाई। उसके साथ कबीर परमेश्वर के शिष्य काशी नरेश बीर देव सिंह बघेल भी साथ था।
कबीर परमेश्वर घोड़े पर बैठकर नवाब के साथ मगहर के लिए चल दिए। रास्ते में गोरखनाथ दिखे। परमेश्वर कबीर जी घोड़ा रोककर नीचे उतरे और नवाब से कहा कि हे बिजली खान! यह महात्मा जी जो चाहें कर सकते हैं। इनसे प्रार्थना करो। नवाब बिजली खान ने सिद्ध पुरूष से वर्षा कराने की प्रार्थना की। गोरखनाथ जी ने अपना त्रिशूल तलैया के बीच जमीन में गाड़ा और निकाल लिया। पानी का फव्वारा निकला। तलैया भरने के पश्चात् रूक गया। बिजली खान ने कहा, हे महात्मा जी! इस जल से तो एक समय भी पशु तृप्त नहीं हो सकते। वर्षा कराने की कृपा करें। गोरखनाथ जी क्रोध से बोले कि इस क्षेत्र के व्यक्तियों के भाग्य में दो वर्ष तक बारिश होने का संयोग नहीं है। पाप कर्म बढ़ा है, बारिश कैसे हो सकती है? यदि किसी में शक्ति है तो वर्षा करा के दिखा दे।
उस समय गोरखनाथ जी कबीर जी पर व्यंग्य कर रहे थे। कबीर जी ने नवाब और उसके साथ आए लोगों से कहा, मैं यहाँ बैठकर परमात्मा में धुन लगाता हूँ। आप घर को जाओ, यदि परमेश्वर ने सुन ली तो आधे घण्टे में वर्षा हो जाएगी। यह कहकर परमेश्वर कबीर जी गोरखनाथ की तलैया से 200 फुट की दूरी पर बैठ गए। नवाब तथा प्रजा कैसे गाँव जा सकती थी? उनके पैर नहीं चल रहे थे। 10 मिनट के अंदर ही जोर की घटा उठी, मूसलाधार वर्षा हुई। सब सरोवर भर गए, खेतों में पानी-पानी हो गया। यह लीला देखकर बिजली खान पठान कबीर जी को प्रार्थना करके गाँव ले गए। स्वयं नाम लिया, पूरे नगर के हिन्दु तथा मुसलमानों ने दीक्षा ली।
एक वृतांत है जब कबीर परमेश्वर मगहर आए वहाँ उन्होंने सशरीर अमरलोक सतलोक प्रस्थान किया। लेकिन उससे पहले उन्होंने बहते पानी में स्नान करने की इच्छा जताई। बिजली ख़ान पठान ने शिवजी के श्राप के कारण आमी नदी के सूखने की बात बताई। तब कबीर परमेश्वर जी ने आमी नदी की ओर इशारा किया और सूखी नदी पानी से भर गई।
काशी नरेश बीरदेव सिंह बघेल ने कबीर परमेश्वर जी से सपरिवार नाम दीक्षा ली
बीर सिंह बघेल वाराणसी के नरेश थे जिन्होंने परमेश्वर कबीर साहेब जी की शरण ली और उनके शिष्य बने। वीर सिंह बघेल काशी नरेश कबीर साहेब की महिमा और ज्ञान सुनकर कबीर साहेब के शिष्य बने थे और पूर्ण रूप से अपने गुरुदेव में आस्था रखते थे। उन्हें कबीर साहेब की महिमा का ज्ञान था।
एक बार वह कबीर परमेश्वर के मना करने पर भी उनको वन में हिरण के शिकार के लिए जबरन लेकर गया। परमेश्वर ने राजा से कहा कि आपको वन में हिरण नहीं मिलेगा और ऐसा ही हुआ, हिरण नहीं मिला। और उनकी भूख प्यास के मारे जान जाने को हो गई। परमेश्वर कबीर जी के प्रताप से उन्हें बंजर पहाड़ी पर फलों का बाग और मेवा सभी कुछ मिल गया। सबने छक कर खाया। चलते हुए मुड़कर देखा तो वहाँ पर बाग था ही नहीं। वह तो कबीर साहेब की कृपा का फल था। इस घटना के बाद में राजा बीरदेव सिंह की पत्नियों ने भी नाम लेकर अपना कल्याण कराया।
निष्कर्ष
जैसा कि ऊपर चर्चा की गई है, कबीर परमात्मा की तरह ही आज वर्तमान में महान तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी वही सतनाम और सारनाम जाप प्रदान कर रहे हैं जिससे आत्माओं को जन्म और मृत्यु के रोग से सदा के लिए मुक्ति मिलती है। वह अपनी अमृत वाणी में बताते हैंः-
रामपाल सच्ची कहे, करो विवेक विचार।
सतनाम वा सारनाम, यही मंत्र है सार।।
इस साल मनाया जा रहा है 627वा कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस
इस वर्ष 20 जून से 22 जून 2024 तक, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में 627वें कबीर प्रकट दिवस के अवसर पर एक विशेष समागम का आयोजन किया जा रहा है। इस समागम पर आयोजित किए जाने वाले विशेष कार्यक्रम कुछ इस प्रकार है:
* निःशुल्क भंडारा: सभी आगंतुकों के लिए 20 से 22 जून 2024 तक निःशुल्क भंडारे का आयोजन होगा।
* निःशुल्क नाम दीक्षा: इस अद्वितीय अवसर पर संत रामपाल जी महाराज से निःशुल्क नाम दीक्षा प्राप्त की जा सकती हैं।
* 3 दिवसीय अखंड पाठ: 20 से 22 फरवरी 2024 तक, 3 दिनों तक अखंड पाठ का आयोजन होगा।
* रक्तदान शिविर, निशुल्क नेत्र व दांतो की जांच, दहेज मुक्त विवाह और आध्यात्मिक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है।
* विशेष सत्संग प्रसारण: 22 जून 2024 को संत रामपाल जी महाराज के सत्संग का विशेष प्रसारण साधना टीवी चैनल पर सुबह 9:15 बजे (IST) से होगा।
* सोशल मीडिया प्रसारण: इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण निम्नलिखित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर भी उपलब्ध होगा:
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आप सभी इस महान अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करें और इस आध्यात्मिक आयोजन का लाभ उठाएं। वहीं इस कार्यक्रम में आने के लिए आप निम्न सतलोक आश्रम में आ सकते हैं:
1. सतलोक आश्रम धनाना धाम, सोनीपत, हरियाणा
2. सतलोक आश्रम मुंडका, दिल्ली
3. सतलोक आश्रम धूरी, पंजाब
4. सतलोक आश्रम खमाणो, पंजाब
5. सतलोक आश्रम सोजत, राजस्थान
6. सतलोक आश्रम शामली, उत्तर प्रदेश
7. सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र, हरियाणा
8. सतलोक आश्रम भिवानी, हरियाणा
9. सतलोक आश्रम बैतूल, मध्य प्रदेश
10. सतलोक आश्रम इंदौर, मध्य प्रदेश
11. सतलोक आश्रम धनुषा, नेपाल
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