Maa Pitambara Bagalamukhi - माँ

Maa Pitambara Bagalamukhi - माँ Jai Mai Ki!

🙏🕉️ जय जय माँ विंध्यनिवासिनी 🕉️🙏 माँ सबका मंगल हो 🙏
17/11/2021

🙏🕉️ जय जय माँ विंध्यनिवासिनी 🕉️🙏 माँ सबका मंगल हो 🙏

🙏🕉️ जय जय माँ विंध्यवासिनी 🕉️🙏 माँ सबका मंगल हो 🙏
28/10/2021

🙏🕉️ जय जय माँ विंध्यवासिनी 🕉️🙏 माँ सबका मंगल हो 🙏

14/10/2021

जय माईं की

25/09/2021

दुनिया की सबसे बड़ी रसोई कहाँ है?

भगवान जगन्नाथ मंदिर,पुरी की रसोई दुनिया में सबसे बड़ी है।एक एकड़ में फैली 32 कमरों वाली इस विशाल रसोई में भगवान् को चढ़ाये जाने वाले महाप्रसाद को तैयार करने के लिए 752 चूल्हे इस्तेमाल में लाए जाते हैं और लगभग 500 रसोइए तथा उनके 300 सहयोगी काम करते हैं। सारा प्रसाद मिट्टी की सात सौ हंडियों में पकाया जाता है।

भोग पूरी तरह शाकाहारी होता है। मीठे व्यंजन तैयार करने के लिए यहाँ शक्कर के स्थान पर अच्छे किस्म का गुड़ प्रयोग में लाया जाता है। आलू, टमाटर और फूलगोभी का उपयोग मन्दिर में नहीं होता। भोग में प्याज व लहसुन का प्रयोग निषिद्ध है।

यहाँ रसोई के पास ही दो कुएं हैं, जिन्हें ‘गंगा’ व ‘यमुना’ कहा जाता है। केवल इनसे निकले पानी से ही भोग का निर्माण किया जाता है। इस रसोई में 56 प्रकार के भोगों का निर्माण किया जाता है। रोज़ कम से कम 10 तरह की मिठाइयाँ बनाई जाती हैं।

आठ लाख़ लड्डू एक साथ बनाने पर इस रसोई का नाम गिनीज़ बुक में भी दर्ज हो चुका है।

रसोई में एक बार में 50 हज़ार लोगों के लिए महाप्रसाद बनता है। मन्दिर की रसोई में प्रतिदिन बहत्तर क्विंटल चावल पकाने का स्थान है। प्रतिदिन नये बर्तन ही भोग बनाने के काम आते हैं।

सर्वप्रथम भगवान् को भोग लगाने के पश्चात् भक्तों को प्रसाद दिया जाता है। भगवान् श्री जगन्नाथ को दिन में छह बार महाप्रसाद चढ़ाया जाता है।

रथ यात्रा के दिन एक लाख़ चौदह हज़ार लोग रसोई कार्यक्रम में तथा अन्य व्यवस्था में लगे होते हैं। जबकि 6000 पुजारी पूजाविधि में कार्यरत होते हैं।

यहाँ भिन्न-भिन्न जातियों के लोग एकसाथ भोजन करते हैं, जात-पाँत का कोई भेदभाव नहीं रखा जाता।

24/09/2021

हरिद्वार से केदारनाथ मंदिर की यात्रा कम खर्च में कैसे करें ?
सबसे पहले तो आप यह जान लीजिए कि केदारनाथ मंदिर की यात्रा करने के लिए सबसे पहले आपको हरिद्वार आना पड़ेगा, जो देश के दिल्ली जैसे बड़े शहरों से सड़क मार्ग और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। यहां पर ट्रेन और बस दोनों से आ सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि हरिद्वार से कम खर्च में केदारनाथ मंदिर की यात्रा कैसे करें।

हरिद्वार से केदारनाथ मंदिर जाने के लिए सोनप्रयाग तक रेगुलर बस चलती है, जिसका किराया एक व्यक्ति का ₹ 350 के आसपास होता है। अगर आप बस, टैक्सी या खुद की कार से केदारनाथ मंदिर की यात्रा पर जाते हैं, तो आपको सोनप्रयाग में ही अपनी गाड़ी पार्क करनी पड़ेगी और सोनप्रयाग से गौरीकुंड की यात्रा टैक्सी द्वारा करनी पड़ेगी, जिसके बीच की दूरी करीब 5 किमी. है।

अब आप सोंच रहे होंगे कि जब सोनप्रयाग से गौरीकुंड टैक्सी जा सकती है, तो हमारी खुद की कार, रेंटल टैक्सी, शेयर टैक्सी या बस क्यों नहीं जा सकती है। इसका कारण यह है कि जो सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक टैक्सी चलती है, वह टैक्सी वहां की लोकल होती है और वहां के लोकल लोग अपनी खुद की कमाई करने के लिए दूसरे जगह की टैक्सी, बस या खुद की कार वगैरह भी नहीं ले जाने देते हैं। वे लोग अपनी सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक अपनी खुद की ही टैक्सी चलाते हैं, जिसका किराया ₹ 30 होता है।

पहले दिन आप हरिद्वार से सुबह बस पकड़कर सोनप्रयाग आ सकते हैं, जिसका किराया एक व्यक्ति का ₹ 350 के आसपास रहता है। लेकिन ध्यान रहे आप जिस दिन हरिद्वार पहुंचे हैं, उसी दिन शाम को हरिद्वार से सोनप्रयाग जाने वाली बस की टिकट बुक करा लें, क्योंकि केदारनाथ मंदिर की यात्रा के सीजन में सुबह हरिद्वार से सोनप्रयाग जाने वाली बस में जगह नहीं बच पाती है और कहीं ऐसा ना हो कि ज्यादा भीड़ होने की वजह से आपको उस दिन सोनप्रयाग जाने के लिए बस भी ना मिले, इसलिए आप सोनप्रयाग जाने से एक दिन पहले ही बस का टिकट बुक करा लें, ताकि आप समय से सोनप्रयाग पहुंच सकें और रात को ठहरने के लिए रूम वगैरह ढूंढ सकें।

हरिद्वार से सोनप्रयाग जाने के लिए सुबह 4 बजे से ही बस खुलने लगती है, इसलिए आप जितना जल्दी हो सके हरिद्वार से सोनप्रयाग जाने के लिए बस पकड़ लें। सोनप्रयाग पहुंचने के बाद आप सबसे पहले बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन करवा लें, क्योंकि बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन का ऑफिस शाम 5 बजे के बाद बंद हो जाता है और फिर सुबह 5 बजे खुलता है। लेकिन अगर आप बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन सुबह करवाते हैं, तो आपको ऑफिस के बाहर लाइन में खड़ा होना भी पड़ सकता है और उसके बाद आपको सोनप्रयाग से गौरीकुंड जाने के लिए भी लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ेगा, जिससे आपको केदारनाथ पहुंचने में काफी देर हो सकती है।

अगर आपको बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन कराने में ज्यादा देर हो गई, तो आपको केदारनाथ मंदिर पहुंचने में अंधेरा भी हो सकता है, क्योंकि गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर की दूरी लगभग किमी. है और आप केदारनाथ जितना देर से पहुंचते हैं, वहां पर आपको होटल वगैरह उतना ही महंगा मिलेगा, इसलिए आप सोनप्रयाग 5 बजे से पहले पहुंचते हैं, तो आप उसी समय बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन करवा लें।

बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद आप सोनमार्ग में ही होटल की जगह डॉरमेट्री लेकर रात को ठहर सकते हैं, जिसका किराया ₹ 250 के आसपास होता है, लेकिन इसमें बेड नहीं मिलता है। यह एक बड़ा सा हॉल होता है, जिसमें आपको एक गद्दा, तकिया और कम्बल या रजाई दे दिया जाता है। अगर आप सस्ते में केदारनाथ की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको डॉरमेट्री में ही रात को ठहरना चाहिए। यहां पर आप किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद रात बिता सकते हैं। यहां पर भी आपको बहुत सारे तीर्थयात्री देखने को मिल जाएंगे।

सोनप्रयाग से गौरीकुंड जाने के लिए आप सुबह 3 या 4 बजे सोनप्रयाग के टैक्सी स्टैंड चले जाएं, वरना आप जितना देर करेंगे, आपको केदारनाथ मंदिर जाने में उतना ही देर होगा। इसलिए आप सुबह 3 या 4 बजे ही सोनप्रयाग के टैक्सी स्टैंड चले जाएं और वहां से टैक्सी पकड़कर गौरीकुंड पहुंचने के बाद केदारनाथ की यात्रा शुरू कर दें। गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर की दूरी लगभग 16 किमी. है, इसलिए अगर आप कम खर्च में केदारनाथ मंदिर की यात्रा करना चाहते हैं, तो गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर की यात्रा आपको पैदल ट्रेक करके ही पूरा करना होगा।

गौरीकुंड से पैदल ट्रेक करके केदारनाथ मंदिर जाते हुए आपको बहुत सारे युवा और वृद्ध व्यक्ति खासकर वृद्ध महिलाएं देखने को मिल जाएंगी, जिनके साथ आप भगवान शिव के जय जयकार करते हुए आसानी से केदारनाथ मंदिर पहुंच सकते हैं। केदारनाथ के रास्ते में जगह-जगह पर पीने वाले पानी और कुछ खाने के लिए रेस्टोरेंट्स की व्यवस्था कराई गई है। रास्ते में जगह-जगह पर बाथरूम की व्यवस्था भी है।

केदारनाथ मंदिर में स्थापित भगवान शिव के शिवलिंग का दर्शन शाम 5 बजे के बाद भक्तों को नहीं करने दिया जाता है। मंदिर के बाहर से ही आपको शिवलिंग का दर्शन करना पड़ेगा। इसलिए अगर आप शाम 5 बजे से पहले केदारनाथ मंदिर पहुंच जाते हैं, तो आप शिवलिंग के दर्शन कर सकते हैं, वरना आपको सुबह में शिवलिंग का दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी।

केदारनाथ पहुंचने के बाद आप वहां पर टेंट में ही रुकें, जिसका किराया 24 घंटे का ₹ 300 के आसपास होता है। केदारनाथ मंदिर के आसपास के रेस्टोरेंट्स और होटल्स में खाना थोड़ा ज्यादा महंगा है। यहां पर आपको ब्रेकफास्ट का ₹ 100 और डिनर/लंच का ₹ 150 देना पड़ सकता है, जो कि कुछ ज्यादा ही महंगा हो जाता है। रात में खाना खाने के बाद आप सो जाएं और सुबह जल्दी उठकर भगवान शिव के दर्शन करने के लिए चले जाएं, क्योंकि मंदिर के बाहर सुबह 3 बजे से ही दर्शन करने के लिए लाइन लगी होती है।

केदारनाथ मंदिर के दर्शन करने के बाद आप ब्रेकफास्ट करके गौरीकुंड के लिए अपनी यात्रा शुरू कर दें। अगर आपको गौरीकुंड आते-आते शाम हो जाए, तो आप गौरीकुंड में ही रात को ठहर जाएं, लेकिन अगर आप गौरीकुंड 3-4 बजे तक भी आ जाते हैं, तो आप सोनप्रयाग आने के लिए शेयर टैक्सी पकड़ लें, क्योंकि गौरीकुंड में रात को ठहरना थोड़ा महंगा पड़ सकता है।

सोनप्रयाग में आप रात को ठहर जाएं और सुबह वहां से बस द्वार हरिद्वार की यात्रा शुरू कर दें।

हरिद्वार से केदारनाथ मंदिर जाने और वापस हरिद्वार आने का खर्च –

Day – 1

हरिद्वार – सोनप्रयाग (बस) – ₹ 350

दोनों तरफ – ₹ 350 + ₹ 350 = ₹ 700

ब्रेकफास्ट (₹ 40) + लंच (₹ 60) + डिनर (₹ 100) = ₹ 200

सोनप्रयाग (रात को डॉरमेट्री में ठहरने) – ₹ 250

Day – 2

सोनप्रयाग – गौरीकुंड (टैक्सी) – ₹ 30

गौरीकुंड – केदारनाथ मंदिर (ब्रेकफास्ट – ₹ 100 + लंच/डिनर – ₹ 300) = ₹ 400 (केदारनाथ मंदिर के पास खाने-पीने का प्राइस थोड़ा ज्यादा ही महंगा होता है।)

टेंट (केदारनाथ मंदिर के पास) – ₹ 300

प्रसाद (केदारनाथ मंदिर) – ₹ 50

केदारनाथ मंदिर – गौरीकुंड (ब्रेकफास्ट – ₹ 100 केदारनाथ + लंच – ₹ 100 गौरीकुंड) + डिनर (₹ 100 सोनप्रयाग) = ₹ 300

सोनप्रयाग (रात को डॉरमेट्री में ठहरने) – ₹ 250

सोनप्रयाग से बस द्वारा हरिद्वार जाने का किराया मैंने ऊपर में ही जोड़ दिया है। तो चलिए अब हरिद्वार से केदारनाथ मंदिर का पूरा खर्च जोड़ लेते हैं।

Day – 1 – ₹ 700 (बस) + ₹ 200 (भोजन) + ₹ 250 (सोनप्रयाग के डॉरमेट्री का किराया) = ₹ 1150

Day – 2 – ₹ 30 (taxi) + ₹ 400 (भोजन) + ₹ 300 (टेंट – केदारनाथ मंदिर के पास) + ₹ 50 (प्रसाद) + ₹ 300 + ₹ 250 (सोनप्रयाग के डॉरमेट्री का किराया) = ₹1330

कुल खर्च – ₹1150 + ₹1330 = ₹2480

यानी की आप ₹2500-3000 के बीच में हरिद्वार से केदारनाथ मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।

22/09/2021
20/09/2021

पितरों को प्रसन्न करने के उपाय- पितरों को प्रसन्न करके पितृ दोष को आसानी से दूर किया जा सकता है. श्राद्ध के पहले दिन भाद्रपद पूर्णिमा का का व्रत करें. घर या व्यापार स्थल पर स्वर्गीय पितरों की अच्छी तस्वीरें लगाएं. ये तस्वीर दक्षिण-पश्चिम दीवार या कोने पर लगाएं.

दिन शुरू करने के बाद सबसे पहले उनको प्रणाम करें. हर दिन उन्हें माला चढ़ाएं और धूपबत्ती दिखाकर उनका आशीर्वाद लें. उनके नाम पर जरूरतमंदों को खाना बांटें. पितरों के नाम से धार्मिक स्थल पर धन या सामग्री दान करें.

घर या बाहर के बड़े बुजुर्गों की सेवा कर उनका आशीर्वाद लें. अमावस्या पर तर्पण, पिंड दान कर ब्राह्मणों को भोजन कराएं. गाय, कुत्ते, चीटियों, कौवों या अन्य पशु पक्षियों को खाना खिलाएं.

11/09/2021

Goddess Baglamukhi Temple, Nalkheda, Agar Malwa (MP)

कण कण में ईश्वर।
10/09/2021

कण कण में ईश्वर।

The festival of is around the corner and all of us are busy preparing for it.
The festival, which is also known as Vinayaka Chaturti celebrates the arrival of to earth from Kailash Parvat with his mother Goddess Parvati.


गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं।
10/09/2021

गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं।

FB/TheFourthMusketeer
During this sad phase of doctors have proved themselves at par with God with their priceless service. Thank you.

शाकंभरी नवरात्रि घट स्थापना तथा महा पूजन:-(नि:शुल्क)सर्वकार्य सिद्धि श्री ब्रह्मास्त्रविद्या बगलामुखी पूजा समय:- रात्रि ...
03/01/2020

शाकंभरी नवरात्रि घट स्थापना तथा महा पूजन:-
(नि:शुल्क)

सर्वकार्य सिद्धि श्री ब्रह्मास्त्रविद्या बगलामुखी पूजा
समय:- रात्रि 10:00:pm
Date:- 03/01/20 *TODAY*

शाकंभरी नवरात्रि साल की प्रथम नवरात्रि कही जाती है। इस नवरात्रि की पूर्णिमा के दिन देवी अंबा का प्रागट्य दिन होता है!
आज शाकंभरी नवरात्रि के दिन धन धान्य सम्पति प्राप्ति तथा शत्रु एवं पीड़ा निवारण के लिए बगलामुखी देवी के दिव्यास्त्र युक्त यह प्रतिमा की आराधना उत्तम फलदायी होती है !

💐श्री बगलामुखी ब्रह्मास्त्रविद्या देवी दर्शन💐

मारण तंत्र एवं मंदार तंत्र आधारित
विविध आयुध एवं ब्रह्मास्त्र सहित श्रीबगलामुखी देवी के अलौकिक रूप का दर्शन इस सिध्दपीठ मंदिरमे विराजमान है!
भक्त को आशीष देती हुई एवं चक्र, खडग,ब्रह्मास्त्र, पाश, मुदगर, त्रिशूल आदि आयुध सहित मुष्टिका सह रिपु जिह्वा कीलित करती हुई मणीमंडप मध्ये कमलासन पर विराजमान अप्रतिम मूर्ति के दिव्य दर्शन कर के पुलकित हो!

सभी को श्री बगलामुखी ब्रह्मास्त्रविद्या सिद्धपीठ मंदिर की और से मंगल शुभकामना !

Sadguru darbar
Shree Bagalamukhi BrahmastraVidhya Siddha Pith temple
Daaji Nagar
Beside kalavati Hospital
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Harni warasia Ring rd
Vadodara ( +91 9998976119)
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