Hazrat Hajib Shakarbar

Hazrat Hajib Shakarbar हजीब Shakarbar 1213 एसी में हज़रत शम्स TabriziHazrat शम्स Sabzwari दो बेटों के युवा के रूप में पैदा हुआ था.

हजरत हजीब Shakarbar 1213 एसी में हज़रत शम्स TabriziHazrat शम्स Sabzwari दो बेटों के युवा के रूप में पैदा हुआ था. अपने भव्य माता पिता उसे नाम अलाउद्दीन मुहम्मद, लेकिन जब उसके पिता Tabriz से वापस करने के लिए अपने नवजात शिशु को देखने, वह अलाउद्दीन मुहम्मद सैयद अहमद का नाम बदल दिया, क्योंकि वह Tabriz में इस आशय का एक सपना देखा था. नए बच्चे के जन्म हाफिज के लक्षण दिखाई और तो जिंदा पीर के रूप में अपने ब

चपन से ही जाना जाने लगा. वह Sabzwar में और मक्का में हजीब Shakarbar का शीर्षक है, और हजीब Shakarbar की मीठी संयोजन के साथ इतना प्रसिद्ध है कि अपने मूल नाम कुल गुमनामी में चला गया हो गया. वह मुल्तान, पाकिस्तान में अपने पिता शामिल हो गए, उनके बड़े भाई हजरत नसीरुद्दीन के साथ, और 1289 रुपये में एक बड़ी तुर्की, इराक और काबुल सेनानियों की सशस्त्र अनुरक्षण. 1302 जल्दी में उन्होंने एक उपदेश मिशन, जहां एक लड़ाई उस पर लगाया गया था तब राजा, Narhar की जो Hajibi सेना जीता पर Narhar में उसके वफादार सैनिकों के साथ पहुंचे. तीन रातों के बाद, तथापि, पराजित राजा, जो सांभर के लिए भाग गया था एक देर रात आश्चर्य छापे का मंचन किया और शहीद हज़रत हजीब Shakarbar जो अपने देर रात प्रार्थना की पेशकश कर रही थी. Hajibi अंततः जीत बलों, राजा को मार डाला और Narhar शरीफ के रूप में शहर के नाम से पुनः नामकरण. ग्रैंड दरगाह परिसर एक गुजर हिंदू बनिया, जो मीठा सफेद granules के मूसलधार बारिश से महान संत कब्र पर और चारों ओर वर्ष 1445 में प्रभावित किया गया था द्वारा बनाया गया था. बाद में उन्होंने इस्लाम में परिवर्तित, कुरान याद और दरगाह नया बनाया मस्जिद के पहले कभी इमाम बन गया है.

11/07/2019

Today Langar Aggerwal Dharmshaala

23/05/2019

राजस्थान में भाजपा की जीत का अंतर

अजमेर - 411000
अलवर - 324000
बांसवाड़ा - 309000
भरतपुर - 307000
बाड़मेर - 310000
भीलवाड़ा - 610000
बीकानेर - 263000
चित्तौड़गढ़ - 553000
चुरू - 328000
दौसा - *81000*
श्रीगंगानगर - 404000
जयपुर - 366000
जयपुर ग्रामीण - 389000
जालोर - 261000
झालावाड़ - 454000
झुंझुनू - 291000
जोधपुर - 268000
करौली - *93000*
कोटा - 266000
नागौर - 175000
पाली - 477000
राजसमंद - 549000
सीकर - 275000
टोंक - 110000
उदयपुर - 389000

17/04/2019
कल दिनांक 13-4 2019 को झुंझुनू के कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी श्री श्रवण कुमार जी कां नरहड़ गांव मे नागरिक अभिनंदन किया...
15/04/2019

कल दिनांक 13-4 2019 को झुंझुनू के कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी श्री श्रवण कुमार जी कां नरहड़ गांव मे नागरिक अभिनंदन किया गया । जिसमें कांग्रेस के नेता पूर्व प्रधान इंदिरा जी डूडी पूर्व प्रधान उमराव जी डांगी, पुर्व प्रधान शेर सिंह नेहरा, सुरेन्द्र बेनिवाल,संजय झोथड़ा, सूरजगढ़ के ब्लॉक अध्यक्ष राजकुमार राठी आदि ने कार्यक्रम में पहुंचकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। गांव के गणमान्य नागरिक जीवन सिंह खड़िया, महावीर धायल, इंद्रराज डंडियां, जगदीश हवलदार, दिलीप मेघवाल,मैजर रामकुमार ,अजीज पठान, रघुवीर धायल, फखरुद्दीन बहलीम, हनुमान जी पूर्व सरपंच, मोहनलाल कुमावत , पितराम जांगिड़,मैजर रामकुमार कहानियां, बिहारीलाल धायल,,चंपालाल शर्मा, हजारी लाल कुमावत ,जागेश्वर कुमावत, बलवीर रणवा,कालू शर्मा,, इस्लाम अंसारी, जागेश्वर सिंह पहलवान, अनवर सलीम, सलीम पिरजी्, बनवारीलाल रणवा, यासीन मणियार ,जाहिद अंसारी, महेंद्र मेघवाल , जयसिंह गढ़वाल, निहाल सिंह रणवा,जयलाल खड़िया, हवासिंह धायल,अनवर सलीम,
दिनेश शर्मा, लालजी पठान ,शेर सिंह लोहार, मनोहर जी सुनार ,शेर सिंह घायल, दीपचंद धायल राकेश धाायल, प्रभु दयाल रणवीर धायल, राजेन्द्र धायल,मोबिन लोहार, भगवानाराम जी मास्टर, परमानंद जांगिड़, चांद पठान, शहजाद पीर जी, महेश मेघवाल ,बलवीर मेघवाल ,मनोहर मीणा, रोहिताश्व कुमावत,राजेंद्र मेघवाल, मुन्ना इलाई , रतन सिंह झोरड़ा, उमेद स्वामी, विनोद स्वामी पुत्र श्री नागरमल जी स्वामी ,मोहब्बत माजू,कैलाश माजू, सुल्तान जी मांजू ,इकबाल खान ,बशीर अहमद ।तैयब खान, इमरान खान, मुकेश कुमावत, मंगतू पीर जी ,सूरत सिंह रणवा, बलवीर मेघवाल, तारा चंद सैनी खेड़ला, सुभाष खानपुरिया, उमराव मास्टर ,राम जी ,रोताश रणवा, कृष्ण कुमार जांगिड़, राजू कुरैशी, असगर, मोहम्मद शकील मणियार, मग्गु पिरजी,सुशील पांडे, सिराज मैनेजर ,लतीफ पठान, परमानंद बुढ़ानिया , बाबू कुरैशी , ,बाबू कुरैशी, पिंटू शर्मा, गणेश शर्मा, ,चिंटू शर्मा ,कालू शर्मा मंच का संचालन अनिल रणवा ने किया।

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14/04/2019

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देश मे कितना भी हिन्‍दू मुस्लिम का झगड़ा हो पर एक जगह ऐसी है जो हिन्‍दू मुस्लिम की खाई को पाट कर कौमी एकता की सबसे बड़ी ...
03/09/2018

देश मे कितना भी हिन्‍दू मुस्लिम का झगड़ा हो पर एक जगह ऐसी है जो हिन्‍दू मुस्लिम की खाई को पाट कर कौमी एकता की सबसे बड़ी मिसाल है। यहां हिन्‍दू मुस्लिम एक साथ त्‍यौहार मनाते हैं। जन्‍माष्‍टमी के अवसर पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है। मेले मे दूर-दूर से भक्‍त यहां दरगाह के साथ रतजगे का भी लुफ्त उठाते हैं। यहां के लोगों की माने तो सैकड़ो वर्षो से इस दरगाह पर श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
शक्करबार शाह की दरगाह पर होता है जन्‍माष्‍टमी का पर्व
हम बात कर रहे है राजस्थान झुंझुनू जिले के नरहड़ कस्बे में स्थित पवित्र शक्करबार शाह की दरगाह की जो आज के दौर मे कौमी एकता की जीवन्त मिसाल है। कौमी एकता के प्रतीक के रूप में ही यहां प्राचीन काल से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशाल तीन दिवसीय मेला लगता है। मेले मे हिन्दुओं के साथ मुसलमान भी पूरी शिद्दत के साथ शामिल होते हैं। जायरीन यहां हजरत हाजिब की मजार पर चादर, कपड़े, नारियल, मिठाइयां और नकद रुपया भी भेंट करते हैं। हाजिब शक्करबार साहब की दरगाह के परिसर में एक विशाल पेड़ है जिस पर जायरीन अपनी मन्नत के धागे बांधते हैं। मन्नत पुरी होने पर गांवों में राती जगा होता है जिसमें महिलाएं बाबा के बखान के लोकगीत जकड़ी गाती हैं।

दरगाह पर पहुंचने के लिए पार करने होते हैं तीन दरवाजे
नरहड़ गांव कभी राजपूत राजाओं की राजधानी हुआ करता था। उस समय यहां 52 बाजार थे। मजार तक पहुंचने वाले प्रत्येक जायरीन को यहां तीन दरवाजों से गुजरना पड़ता है। पहला दरवाजा बुलंद दरवाजा है, दूसरा बसंती दरवाजा और तीसरा बगली दरवाजा है। इसके बाद मजार शरीफ और मस्जिद है। बुलंद दरवाजा 75 फुट ऊंचा और 48 फुट चौड़ा है। मजार का गुंबद चिकनी मिट्टी से बना हुआ है। जिसमें पत्थर नहीं लगाया गया है। कहते हैं कि इस गुंबद से शक्कर बरसती थी इसलिए बाबा को शक्कर बार नाम मिला। नरहड़ के इस जौहड़ में दूसरी तरफ पीर बाबा के साथी दफन हैं जिन्हें घरसों वालों का मजार के नाम से जाना जाता है।

सात सौ वर्षो से चली आ रही है परंपरा
यह ऐतिहासिक मेला और अष्टमी की रात होने वाला रतजगा सूफी संत हजरत शक्करबार शाह की इस दरगाह मे अद्भुत आस्था केंद्र माना जाता है। दरगाह के खादिम एवं इंतजामिया कमेटी करीब सात सौ वर्षों से चली आ रही है। सांप्रदायिक सद्भाव को प्रदर्शित करने वाली इस अनूठी परंपरा आज भी पूरी शिद्दत से पीढ़ी दर पीढ़ी निभाते चले आ रहे हैं। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की छठ से शुरू होने वाले इस धार्मिक आयोजन में दूर-दराज से नरहड़ आने वाले हिंदू श्रद्धालु दरगाह में नवविवाहितों के गठजोड़े की जात एवं बच्चों के जड़ूले उतारते हैं।

जन्‍माष्‍टमी के दिन दरगाह पर होती है श्रीकृष्‍ण लीला
दरगाह के वयोवृद्ध खादिम हाजी अजीज खान पठान बताते हैं कि देश विभाजन एवं उसके बाद और कहीं संप्रदाय, धर्म-मजहब के नाम पर भले ही हालात बने-बिगड़े हों पर नरहड़ ने सदैव हिंदू-मुस्लिम भाई-चारे की मिसाल ही पेश की है। वह बताते हैं कि जन्माष्टमी पर जिस तरह मंदिरों में रात्रि जागरण होते हैं ठीक उसी प्रकार अष्टमी को पूरी रात दरगाह परिसर में चिड़ावा के प्रख्यात दूलजी राणा परिवार के कलाकार ख्याल श्रीकृष्ण चरित्र नृत्य नाटिकाओं की प्रस्तुति देकर रतजगा कर पुरानी परम्परा को आज भी जीवित रखे हुए हैं। यह मेला अष्टमी एवं नवमी को पूरे परवान पर रहता है।

शक्करबार शाह ख्वाजा की दरगाह पर चढ़ता है दही का भोग
शक्करबार शाह अजमेर के सूफी संत ख्वाजा मोइनुदीन चिश्ती के समकालीन थे तथा उन्हीं की तरह सिद्ध पुरुष थे। शक्करबार शाह ने ख्वाजा साहब के 57 वर्ष बाद देह त्यागी थी। राजस्थान व हरियाणा में तो शक्करबार बाबा को लोक देवता के रूप में पूजा जाता है। शादी, विवाह, जन्म, मरण कोई भी कार्य हो बाबा को अवश्य याद किया जाता है। इस क्षेत्र के लोग गाय, भैंसों के बछड़ा पैदा होने पर उसके दूध से जमे दही का प्रसाद पहले दरगाह पर चढ़ाते हैं। इसके बाद ही पशु का दूध घर में इस्तेमाल होता है।

18/03/2017

Address

Narhar
Chirawa
333035

Telephone

+919872500864

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