Gurudwara Burnpur

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शहीद शिवराम राजगुरु जी को जन्मजयंती पर कोटि-कोटि नमन! 🇮🇳उनका अदम्य साहस, देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान सदैव भारतवासियों को...
24/08/2026

शहीद शिवराम राजगुरु जी को जन्मजयंती पर कोटि-कोटि नमन! 🇮🇳

उनका अदम्य साहस, देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान सदैव भारतवासियों को प्रेरणा देता रहेगा।
जय हिंद! वंदे मातरम्! 🇮🇳

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Waheguru ji 🙏🏻    Darbar Sahib Amritsar Singh News.com
21/08/2026

Waheguru ji 🙏🏻

Darbar Sahib Amritsar
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18 अगस्त 1945 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि के अवसर पर हम भारत माता की स्वतंत्रता के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्...
18/08/2026

18 अगस्त 1945 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि के अवसर पर हम भारत माता की स्वतंत्रता के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले महान राष्ट्रनायक को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। उनका अडिग संकल्प, प्रखर राष्ट्रभक्ति और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) का वीरतापूर्ण नेतृत्व ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की नींव को हिला गया और लाखों भारतीयों को साहस एवं एकता के सूत्र में बांध दिया।

उनका प्रसिद्ध आह्वान “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा!” और अमर अभिवादन “जय हिन्द” आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति की भावना जगाते हैं।

आज, 18 अगस्त 1945 को उनके अंतिम बलिदान को स्मरण करते हुए, आइए हम एकता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण के उन आदर्शों को अपनाने का संकल्प लें, जिनके लिए नेताजी ने अपना जीवन समर्पित कर दिया।

ऐसे महान राष्ट्रनायक को शत-शत नमन, जिनकी विरासत सदैव अमर रहेगी।

जय हिन्द! 🇮🇳

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13/08/2026
🇮🇳 शहीद खुदीराम बोस जी — एक अमर बलिदानखुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को तत्कालीन बंगाल के मिदनापुर क्षेत्र में हुआ था...
10/08/2026

🇮🇳 शहीद खुदीराम बोस जी — एक अमर बलिदान

खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को तत्कालीन बंगाल के मिदनापुर क्षेत्र में हुआ था। बहुत छोटी उम्र में ही वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध चल रहे क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ गए। मात्र किशोर अवस्था में उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

उस समय ब्रिटिश अधिकारी डगलस किंग्सफोर्ड क्रांतिकारियों के प्रति कठोर रवैये के लिए कुख्यात थे। उन्हें निशाना बनाने के उद्देश्य से खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी को मुजफ्फरपुर भेजा गया।
,30 अप्रैल 1908 को मुजफ्फरपुर में दोनों क्रांतिकारियों ने किंग्सफोर्ड की बग्घी समझकर एक बग्घी पर बम फेंका। लेकिन दुर्भाग्य से उसमें किंग्सफोर्ड नहीं थे। उस घटना में दो ब्रिटिश महिलाओं की मृत्यु हो गई। खुदीराम बोस गिरफ्तार कर लिए गए, जबकि प्रफुल्ल चाकी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए आत्महत्या कर ली।
इसके बाद चला मुजफ्फरपुर षड्यंत्र मामला (Muzaffarpur Conspiracy Case)। मुकदमे के बाद खुदीराम बोस को मृत्युदंड सुनाया गया। अपील के बावजूद उनकी सजा बरकरार रही।
11 अगस्त 1908 — फांसी और अमर शहादत

11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में ब्रिटिश सरकार ने खुदीराम बोस को फांसी दे दी। उस समय उनकी उम्र लगभग 18 वर्ष थी। भारत सरकार के संसदीय रिकॉर्ड में भी 11 अगस्त 1908 को उनके शहीद होने और उनकी उम्र 18 वर्ष होने का उल्लेख मिलता है।

इतनी कम उम्र में भी उन्होंने मृत्यु के सामने भय दिखाने के बजाय अद्भुत साहस का परिचय दिया। इसी कारण वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे कम उम्र के और सबसे प्रसिद्ध क्रांतिकारी शहीदों में गिने जाते हैं।

खुदीराम बोस जी का बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि भारत की आजादी केवल राजनीतिक संघर्ष का परिणाम नहीं थी, बल्कि असंख्य वीरों के त्याग, साहस और बलिदान की देन थी।

शहीद खुदीराम बोस जी को शत-शत नमन। 🇮🇳🙏
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"In Light, She Healed; In Our Hearts, She Lives Forever."Today, on August 9th, we observe Shradhanjali Diwas to honor th...
09/08/2026

"In Light, She Healed; In Our Hearts, She Lives Forever."

Today, on August 9th, we observe Shradhanjali Diwas to honor the sacred memory of our departed daughter, colleague, and dedicated healer. Two years have passed since that dark day, but her spirit, her dedication to humanity, and the brilliance of her dreams remain unextinguished.

We Remember: Her relentless service as a frontline healer.
We Reflect: On the profound void left in the medical fraternity and our nation.
We Resolve: To never forget, to keep seeking justice, and to fight for safe, dignified workspaces for every doctor.

May her soul rest in eternal peace. Our thoughts and prayers remain with her courageous family.






ੴ एक ओंकार सतनाम श्री वाहेगुरु जी ॥धन-धन श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ...
06/08/2026

ੴ एक ओंकार सतनाम श्री वाहेगुरु जी ॥

धन-धन श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।

आठवें सिख गुरु, बाला पीर श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने अल्पायु में ही सेवा, करुणा, विनम्रता और मानवता का अनुपम संदेश देकर सम्पूर्ण विश्व को प्रेरित किया। उनका जीवन हमें निस्वार्थ सेवा, प्रेम और सभी प्राणियों के कल्याण का मार्ग दिखाता है।

आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी गुरु साहिब के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें और मानवता की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें।

वाहेगुरु जी से अरदास है कि वे समस्त संगतों पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें तथा सभी को सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और चढ़दी कला का आशीर्वाद प्रदान करें।

सादर,
बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक समिति
सेवादार: सरदार सुरेन्द्र सिंह
एवं समस्त सेवादार

वाहेगुरु जी का खालसा। वाहेगुरु जी की फतेह। 🙏

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🇮🇳 31 जुलाई 1940 – शहीद ऊधम सिंह जी का शहादत दिवस 🇮🇳,आज, 31 जुलाई, भारत के महान क्रांतिकारी शहीद ऊधम सिंह जी के शहादत दि...
31/07/2026

🇮🇳 31 जुलाई 1940 – शहीद ऊधम सिंह जी का शहादत दिवस 🇮🇳

,आज, 31 जुलाई, भारत के महान क्रांतिकारी शहीद ऊधम सिंह जी के शहादत दिवस पर उन्हें शत-शत नमन।

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग नरसंहार में हजारों निहत्थे भारतीयों पर गोलियां चलवाई गईं। इस अमानवीय घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। उस नरसंहार के घाव युवा ऊधम सिंह के हृदय में जीवनभर बने रहे। उन्होंने संकल्प लिया कि इस अन्याय के जिम्मेदार लोगों को उनके अपराध का उत्तर अवश्य मिलेगा।

13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में ऊधम सिंह जी ने पंजाब के तत्कालीन पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ'ड्वायर को गोली मारकर जलियांवाला बाग के पीड़ितों के लिए न्याय का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का नहीं, बल्कि भारत की जनता पर हुए अत्याचार का प्रतिकार था।

मुकदमे के दौरान उन्होंने निर्भीक होकर अपने विचार रखे और अपने नाम के साथ "राम मोहम्मद सिंह आज़ाद" लिखकर भारत की धार्मिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया। यह नाम इस बात का प्रतीक था कि भारत की आज़ादी की लड़ाई किसी एक धर्म की नहीं, बल्कि पूरे देश की लड़ाई थी।

31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में उन्हें फांसी दे दी गई। वे हंसते-हंसते मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर अमर हो गए।

शहीद ऊधम सिंह जी का जीवन हमें सिखाता है कि अन्याय के विरुद्ध साहस, आत्मसम्मान और राष्ट्रप्रेम के साथ खड़े होना ही सच्ची देशभक्ति है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

शहीद ऊधम सिंह जी अमर रहें।
भारत माता की जय।
जो बोले सो निहाल... सत श्री अकाल।

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