Birasini Dham

Birasini Dham जय हो माई की �

जगदंबा मैया बिरासिनी महिषासुर मर्दिनी का पुरातात्विक इतिहास
बिरासिनी देवी मंदिर में दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी की कलचुरी कालीन दसभुजी आदम कद महिषासुर मर्दनी आदिशक्ति माँ दुर्गा की वीर आसन में असुरों का संहार करती "माँ बिरासिनी देवी" की विशाल मूर्ति विराजित है | जहाँ वासंतीय नवरात्रि (रामनवमी) तथा शारदीय नवरात्रि (दशहरा) पर्व पर देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु भक्त नवरात्रि में माता के दर्शन करने

तथा ज्योति एवं जवारों की स्थापना करने दरबार में आते हैं |

नवरात्रि रामनवमी में लगभग तेरह हजार जवारा कलशों तथा नवरात्रि दशहरा में लगभग चार हजार पांच सौ जवारा कलशों की स्थापना भक्तों द्वारा कराई जाती है, जो धीरे-धीरे बढती जा रही है |

नवरात्रि के प्रथम दिवस बैठकी को शुभ मुहूर्त में जवारा कलशों की स्थापना आरंभ होती है तथा नवमी को भारत वर्ष का सबसे अदभुत विशाल जवारा जुलूस नगर के मुख्य मार्गों से होता हुआ सगरा तालाब में विसर्जित होता है | जब हजारों की संख्या में हरे-भरे जवारा कलशों को भक्त माताएँ, बहनें, पुरुष एवं बच्चे अपने सिरों पर रखकर जुलूस में सम्मिलित होकर मुख्य मार्गों से निकलते है तो ऐसा प्रतीत होता है की बीरसिंहपुर पाली नगर के मुख्य मार्गों पर प्रकृति की सुन्दरतम हरियाली की चादर माँ बिरासिनी की चरणों में इस शक्ति नगरी में उतर आयी हो | जिसे देखने के लिए देश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में लोगों का आगमन होता है | चैत्र रामनवमी के अवसर पर नगर पालिका परिषद् पाली द्वारा सैकड़ों वर्षों से 15 दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जाता है |

शहडोल जिले में वैसे तो अनेक शक्ति प्रतिमाएँ हैं, परन्तु बीरसिंहपुर पाली की जगदंबा बिरासिनी माता अपना एक विशेष स्थान रखती है | यह बीरसिंहपुर पाली नामक स्थान पर एक विशाल मंदिर के गर्भ-गृह में स्थापित है| पहले तो यहाँ पर छोटा सा मंदिर था, परन्तु अब बहुत बड़ा दर्शनीय मंदिर बना दिया गया है | इस मंदिर के गर्भ-गृह में जगदंबा सिंह-वाहिनी बिरासिनी माता विराजमान है | मैया के दाहिनी तरफ हरि-हर की विशाल प्रतिमा है, यह प्रतिमा अदभुत है क्योंकि इसके आधे भाग में भगवान् विष्णु और आधे भाग में भगवान् शिव को अंकित किया गया है | इसके अतिरिक्त ज्रमिक्का माता तथा भगवान् सूर्य को स्थान दिया गया है | मंदिर के प्रांगन में चारो तरफ अनेक प्रतिमाएं जो प्रायः कलचुरी कालीन मूर्तियों के उदाहरण हैं, दर्शाएँ गए हैं | गजासुर संहार प्रतिमा भगवान् शिव की दर्शनीय है, भगवान् सूर्य सात घोड़ों एवं एक चक्र के रथ में सवार है, यह एक नयनाभिराम प्रतिमा है | यहाँ की प्रतिमाएँ अपने पुरातात्विक विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं | बिरासिनी मैया का भव्य दर्शन नव-रात्रि के समय होता है, जब इनका श्रृंगार प्रतिदिन नए - नए रूपों में किया जाता है |

जग्दंबाजहं अवतरी सो पुर बरनिन जाय |ऋद्धि-सिद्धि सुख संपदा नित नूतन अधिकाय || जगदंबा माँ बिरासिनी देवी मंदिर की भोगोलिक स्थिति
बिरासिनी देवी का मंदिर मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के बीरसिंहपुर पाली नगर में मैकल पर्वत श्रंखला के उत्तर की ओर पावन धाम अमरकंटक से उद्गमित जोहिला नदी के दाएं तट पर दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के कटनी-बिलासपुर रूट में कटनी से 88 किलोमीटर तथा राष्ट्रीय राजमार्ग 78 में शहडोल नगर से 38 किलोमीटर की दूरी पर 23" 21' 47 08' उत्तर एवं 81" 02' 45 40' पूर्व में रेल्वे स्टेशन बीरसिंहपुर से 600 मीटर दक्षिण की ओर नगर के मध्य संगमरमर का विशाल मंदिर बना हुआ है|
शहडोल जिले में वैसे तो अनेक शक्ति प्रतिमाएं हैं, परन्तु बीरसिंहपुर पाली की जगदंबा बिरासिनी माता अपना एक विशेष स्थान रखती है | यह बीरसिंहपुर पाली नामक स्थान पर एक विशाल मंदिर के गर्भ-गृह में स्थापित है | पहले तो यहाँ पर छोटा सा मंदिर था परन्तु अब बहुत बड़ा दर्शनीय मंदिर बना दिया गया है | इस मंदिर के गर्भ-गृह में जगदंबा सिंह-वाहिनी बिरासिनी माता विराजमान है | मैया के दाहिनी तरफ हरि-हर की विशाल प्रतिमा है, यह प्रतिमा अद्भुत है क्यूंकि इसके आधे भाग में विष्णु भगवान और आधे भाग में बह्ग्वान शिव को अंकित किया गया है | मंदिर के प्रांगढ़ में चारो तरफ अनेक प्रतिमाएं जो प्रायः कलचुरी कालीन मूर्तियों के उदाहरण हैं, दर्शाए गए हैं | बिरासिनी मैया का भव्य दर्शन नव-रात्रि के समय होता है, जब इनका श्रृंगार प्रतिदिन नय-नय रूपों में किया जाता है |

संस्कृति
यह क्षेत्र विंध्य क्षेत्र के रीवा राज्य का एक हिस्सा है, जहाँ आदिवासियों की बाहुल्तया है जो अपने सामाजिक रीति-रिवाजों एवं धार्मिक संस्कृति से परिपूर्ण है | यहाँ बघेलखंडी एवं गोंड संस्कृति का मिलाजुला प्रभाव है |

धार्मिक आस्था
आदिशक्ति माँ बिरासिनी देवी मंदिर में विराजित दस भुजी माता की मूर्ति 10वीं शताब्दी के काल की है | सैकड़ों वर्षों से यहाँ श्रद्धालु देश के कोने-कोने से आकर माँ बिरासिनी के दरबार में बड़ी श्रध्दा से पूजा अर्चना के साथ मनौती करते है और उसका उचित फल पाकर भाग्यशाली बनते हैं | माँ बिरासिनी मंदिर में माँ के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने या मनौती मनाने के लिए भक्तजनों द्वारा नवरात्रि के अवसर पर 10 हजार की संख्या में जवारे कलश बुवाये जाते हैं | इतनी बड़ी संख्या में जवारे बुवाने एवं इन बुवाये गए जवारों का नवमें दिवस निकलने वाले जवारा जुलूस को देखने आना अपनें आप में अलोकिक एवं देश में अनूठा आयोजन है |

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