महामाया धाम ग्राम नौगई ,
परिचय …
रतनपुर राज्य की उपराजधानी रही ग्राम नगोई (नौगई ,नवगई) रतनपुर से मात्र चार कोस (14 कि.मी.) की दुरी पर पूर्व दिशा में स्थित है ।नौगई कुल 45-47 सौ रकबा का था , आश्रित गाँव की संख्या पांच थी -: बैमा, खपराखोल, हरदीडीह, उरैहापारा, ढबहिपारा। ( कुछ साल पहले ग्राम बैमा अलग पंचायत बन गया)।ग्राम नौगई आज 27 सौ रकबा का है, इसके तीन आश्रित गाँव है - हरदीडीह,उरैहपारा,ढबरीपारा । गाँव में आदिशक्ति माँ महामाया का मन्दिर पश्चिम दिशा में (रतनपुर जाने वाली मार्ग पर स्थित है,/ राजाओं के आने जाने वाली मार्ग/ )।ग्राम में रतनपुर नरेश द्वारा निर्मित "बादल महल" के अवशेष आज भी खुदाई करने पर मिलते है। यहाँ राजा सागर, रानी सागर (रानी तालाब), व बंधवा तालाब (महामाया मन्दिर के पीछे) मुख्य तालाब है। बंधवा राजा के पुत्र का नाम था जिसकी याद मे यह तालाब खुदाया गया
रतनपुर की उपराजधानी रही ग्राम नौगई मे आदिशक्ति महामाया मन्दिर की स्थापना स्व. श्री सीताराम जी शास्त्री द्वारा रतनपुर नरेश के सहयोग से कराया गया , स्व. श्री शास्त्री जी माँ महामाया के अनन्य भक्त थे, उन पर माँ की असीम कृपा थी, जानकारों के अनुसार माँ उन्हें साक्षात् दर्शन देती थी,माँ के निर्देश से ही वे गाँव की व्यवस्था व् न्याय किया करते थे। एक बार गाँव के चौबे ब्राम्हण की फरियाद पर अपने ही ज्येष्ठ पुत्र को श्राप दे दिया और एक ज़मीन जो तालाब का पैठू था खेत बनाए जाने पर श्रापित हुआ जिसमे आज भी कोई पनप नही पाता जन और धन की हानि होती है जिसे आज भी गाँव का बच्चा बच्चा जानता है। रतनपुर नरेश द्वारा प्रदत्त आठ गाँव की मालगुजारी इन्ही के पास थी, जानकार बताते हैं की अंग्रेज अफसर भी श्रद्धा से जूते टोपी बेल्ट उतारकर इनसे मिलने आते थे । शास्त्री जी द्वारा गाँव के पाण्डेय परिवार को महामाया का पुजारी नियुक्त किया गया जो आज तक हैं। गाँव मे शास्त्री लोगों के आलावा कुलीन ब्राम्हण ज्योतिषी, गुरुदिवान, पाण्डेय, दुबे, मिश्र, तिवारी, पाठक, चौबे आदि हैं। इस गाँव में माँ महामाया की कृपा आज भी प्रत्यक्ष देखाई देता है- "बस सच को देखने वाली आँखे और महसूस करने वाला हृदय हो"।माँ की कृपा के संबंध मे ये जानना ज़रूरी है कि यहाँ बिना शासकीय मदद के (बगैर साक्षरता अभियान के) शिक्षा का प्रतिशत शुरू से ही (पुराने ज़माने से) 85-90-95% रहा है । यहाँ हर वर्ग के लोग आप को शिक्षित मिलेंगे ।जबकि आस-पास के गाँवो में शिक्षा का प्रतिशत बहुत कम है ।
आइये ग्राम के अन्य देवस्थल के बारे में जाने, गाँव के मुख्य तालाब सागर में 11-12 वीं शताब्दी का प्रसिद्ध शिव मन्दिर है जहाँ महाशिवरात्रि को भव्य रुद्राभिषेक होता है। गाँव के मध्य (गुडी) मे रामभिक्षुक महाराज (बिरकोना वाले) द्वारा स्थापित राम चौरा , श्री राम मन्दिर (दादूराम मिश्र स्थापित), श्री हनुमान मन्दिर (नाथू श्रीवास स्थापित), गाँव के पूर्व दिशा में ठाकुरदेव विराजमान हैं, पश्चिम दिशा में महामाया, महादेव, परउ बैगा विराजमान है । परोस का गाँव बैमा (जो कुछ वर्ष पहले आश्रित ग्राम था) वहां गाँव के पश्चिम में माँ काली (कंकाली) देवी का मन्दिर है। यहाँ ये बताना ज़रूरी है कि- "माँ महामाया मन्दिर ग्राम पंचायत नगोई में है।" कुछ लोग यूँ ही महामाया बैमा कहते रहते है ,अख़बार वाले भी अधूरी जानकारी के चलते ऐसा ही छापते रहते है। उनसे विनम्र निवेदन है कि वे आम जन को सही जानकारी दें।
साभार :- ब्रजेश शास्त्री