The Buddhist-Scheduled Caste Mission of India

The Buddhist-Scheduled Caste Mission of India Concept :
Those who are scheduled caste they're supposed to be BUDDHIST. This is the only concept to unite near about 1200 Scheduled castes .

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�हमारा तीन सूत्री कार्यक्रम �
*एक धर्म! एक समाज!! एक पहचान!!!*
� � �
(Buddha) (SC) (Buddhist)
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*हमारा मुख्य उद्देश्य*
कन्याकुमारी से कश्मीर तक लगभग 1100 जाति, उपजातियों में बिखरे हुए लगभग 22 करोड़ अछूत, चमार जातियों (Scheduled Castes) को बौ

द्ध धर्मसूत्र से जोड़कर, आपसी भेदभाव मिटाकर उन्हें बुध्दिस्ट अल्पसंख्यक (Minority) समाज के रूप में प्रस्थापित करके एक ताकतवर समाज बनाने हेतू प्रयास करना हमारा मुख्य उद्देश्य है ।

28/04/2026

“जनगणना 2027 दलितों के लिए हिंदू धर्म से कानूनी रूप से बाहर निकलने का एक सुनहरा अवसर है”

1. भारत में जनगणना और धर्म की घोषणा

भारत की जनगणना में हर व्यक्ति को अपना धर्म स्वयं घोषित करने का अधिकार होता है।

👉 जनगणना केवल जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि:

* सरकारी नीतियाँ तय करना
* समाज के विभिन्न समूहों का प्रतिनिधित्व समझना
* आधिकारिक आँकड़े तैयार करना

👉 यदि बड़ी संख्या में दलित “हिंदू” के बजाय “बौद्ध” के रूप में अपनी पहचान दर्ज करते हैं, तो:

* देश के धार्मिक आँकड़ों में बदलाव आएगा
* समाज को एक मजबूत संदेश जाएगा
* इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं।

2. कानूनी पहलू

संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार:

* शुरुआत में अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदुओं के लिए था
* बाद में इसे सिख (1956) और बौद्ध (1990) समुदायों तक बढ़ाया गया

👉 इसका मतलब:

* यदि कोई दलित व्यक्ति बौद्ध धर्म अपनाता है, तो उसे SC आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा
* लेकिन यदि वह ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाता है, तो उसे SC का दर्जा नहीं मिलता

इसलिए बौद्ध धर्म को अनुसूचित जातियों के लिए एक व्यावहारिक और वैचारिक विकल्प माना जाता है।

निष्कर्ष

👉 जनगणना 2027:

* अपनी धार्मिक पहचान बदलने का एक कानूनी अवसर है
* समानता और स्वाभिमान व्यक्त करने का एक माध्यम है
* सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव डालने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है

जागरूक नवबौद्ध भाइयों-बहनों के लिए महत्वपूर्ण संदेश 🙏

बौद्ध धर्म जातिविहीन है। हम जातिवाद में विश्वास नहीं करते। लेकिन सामाजिक वास्तविकता यह है कि जातिवाद और असमानता को बढ़ावा देने वाली शक्तियों के खिलाफ हमारा संघर्ष अभी भी जारी है।

इस संघर्ष में हमें सचेत और रणनीतिक होना होगा। जब तक जातिगत अन्याय मौजूद है, हमें अपने अधिकारों के लिए "जाति" को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना होगा।

इसलिए, आगामी जनगणना में अपनी पहचान मजबूती से दर्ज कराएँ :
👉 धर्म : बौद्ध
👉 जाति : महार, चमार, जाटव, वाल्मिकी आदि।

यदि हम सभी नव-बौद्ध, धर्म और जाति के पंजीकरण की संवैधानिक पद्धति को स्पष्ट रूप से स्वीकार कर लें, तो देश के 25 करोड़ अनुसूचित जाति के लोग हमारे उदाहरण का अनुसरण करेंगे।

यह बाबा साहब डॉ. आंबेडकर के विचारों के खिलाफ नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का तरीका है।

संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) अधिनियम, 1990 (दिनांक 3 जून, 1990 से प्रभावी) के अनुसार, अनुसूचित जाति समुदायों से संबंधित वे व्यक्ति जिन्होंने 14 अक्टूबर, 1956 को बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के नेतृत्व में बौद्ध धर्म स्वीकार किया, तथा उनके वंशज एवं अन्य अनुयायी जो बौद्ध धर्म को मानते और उसका पालन करते हैं लेकिन आधिकारिक अभिलेखों में अभी भी हिंदू के रूप में दर्ज हैं, वे अपने धर्म के रूप में ‘बौद्ध’ दर्ज कराने के अधिकारी हैं और साथ ही अपनी मूल अनुसूचित जाति पहचान (जैसे महार, चमार, जाटव, वाल्मीकि आदि) को जनगणना तथा सभी संवैधानिक एवं कानूनी उद्देश्यों के लिए लिख सकते हैं।

👉 आपकी एक सही एंट्री = समाज की बड़ी ताकत 💪

हमारे लिए यह सिर्फ जनगणना नहीं — एक सामाजिक आंदोलन है!

अच्युत भोईटे (बी कॉम एम बी ए)
संयोजक : दि बुध्दिस्ट शेड्युल कास्ट मिशन ऑफ इंडिया.
मी. 9870580728.

*📢 महत्वपूर्ण सूचना – जनगणना 2027 (राज्यवार कार्यक्रम - प्रथम चरण ) 🇮🇳* 📝 स्व-गणना (Self Enumeration) एवं मकानसूचीकरण का...
23/04/2026

*📢 महत्वपूर्ण सूचना – जनगणना 2027 (राज्यवार कार्यक्रम - प्रथम चरण ) 🇮🇳*

📝 स्व-गणना (Self Enumeration) एवं मकानसूचीकरण कार्यक्रम इस प्रकार है:-

🔹 *अंडमान-निकोबार, दिल्ली (NDMC/छावनी), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम* ⤵️

👉 स्व-गणना: 1 अप्रैल – 15 अप्रैल
👉 मकानसूचीकरण: 16 अप्रैल – 15 मई

🔹 *दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन और दीव* ⤵️

👉 स्व-गणना: 5 अप्रैल – 19 अप्रैल
👉 मकानसूचीकरण: 20 अप्रैल – 19 मई

🔹 *उत्तराखंड* ⤵️

👉 स्व-गणना: 10 अप्रैल – 24 अप्रैल
👉 मकानसूचीकरण: 25 अप्रैल – 24 मई

🔹 *मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हरियाणा* ⤵️

👉 स्व-गणना: 16 अप्रैल – 30 अप्रैल
👉 मकानसूचीकरण: 1 मई – 30 मई

🔹 *बिहार* ⤵️

👉 स्व-गणना: 17 अप्रैल – 1 मई
👉 मकानसूचीकरण: 2 मई – 31 मई

🔹 *तेलंगाना* ⤵️

👉 स्व-गणना: 26 अप्रैल – 10 मई
👉 मकानसूचीकरण: 11 मई – 9 जून

🔹 *पंजाब* ⤵️

👉 स्व-गणना: 30 अप्रैल – 14 मई
👉 मकानसूचीकरण: 15 मई – 13 जून

🔹 *दिल्ली (MCD), महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान, झारखंड*⤵️

👉 स्व-गणना: 1 मई – 15 मई
👉 मकानसूचीकरण: 16 मई – 14 जून

🔹 *उत्तर प्रदेश* ⤵️

👉 स्व-गणना: 7 मई – 21 मई
👉 मकानसूचीकरण: 22 मई – 20 जून

🔹 *जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पुडुचेरी* ⤵️

👉 स्व-गणना: 17 मई – 31 मई
👉 मकानसूचीकरण: 1 जून – 30 जून

🔹 *हिमाचल प्रदेश*⤵️

👉 स्व-गणना: 1 जून – 15 जून
👉 मकानसूचीकरण: 16 जून – 15 जुलाई

🔹 *केरल, नागालैंड* ⤵️

👉 स्व-गणना: 16 जून – 30 जून
👉 मकानसूचीकरण: 1 जुलाई – 30 जुलाई

🔹 *तमिलनाडु, त्रिपुरा*⤵️

👉 स्व-गणना: 17 जुलाई – 31 जुलाई
👉 मकानसूचीकरण: 1 अगस्त – 30 अगस्त

🔹 *असम* ⤵️

👉 स्व-गणना: 2 अगस्त – 16 अगस्त
👉 मकानसूचीकरण: 17 अगस्त – 15 सितंबर

🔹 *मणिपुर* ⤵️

👉 स्व-गणना: 17 अगस्त – 31 अगस्त
👉 मकानसूचीकरण: 1 सितंबर – 30 सितंबर

⚠️ गुजरात एवं पश्चिम बंगाल की तिथियाँ बाद में घोषित की जाएंगी।

🌐 आधिकारिक वेबसाइट:
https://censusindia.gov.in/

💻 Self-Enumeration Portal: https://se.census.gov.in/

👉 सभी नागरिक निर्धारित अवधि में स्व-गणना अवश्य करें.

👉 सही जानकारी दें और SE ID सुरक्षित रखें.

🙏 आपकी भागीदारी, देश के विकास की नींव है।

----------- *Any Query* -----------
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अच्युत भोईटे (बीकाॅम,एमबीए)
संस्थापक तथा राष्ट्रीय संयोजक.
📲 *9870580728*

सी. के. जाधव
(से.नि. उपसचिव मंत्रालय महाराष्ट्र.)
राष्ट्रीय संयोजक सह महाराष्ट्र प्रभारी.
📲 *9967835719*

हरेन्द्र कुमार अम्बेडकर(BCA,MCA,D.El.Ed)
राष्ट्रीय संयोजक सह बिहार प्रभारी
📲 *8210442088*

कमलाकर देवप्पा आयरे(Retd. IRS),
राष्ट्रीय संयोजक सह मुंबई प्रभारी
📲 *9833327072*
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*दि बुद्धिस्ट-शेड्यूल कास्ट मिशन ऑफ इंडिया*

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26/03/2026
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2026 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि ईसाई धर्म अप...
25/03/2026

सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2026 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि ईसाई धर्म अपनाने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खो देता है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन के बाद ऐसे व्यक्ति को SC समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता और वे आरक्षण या वैधानिक सुरक्षा का लाभ नहीं ले सकते।

फैसले की मुख्य बातें:-

संवैधानिक आदेश 1950: कोर्ट ने 'संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950' का हवाला देते हुए कहा कि SC दर्जा केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों तक ही सीमित है।

तत्काल प्रभाव: किसी अन्य धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) में परिवर्तन करने पर, व्यक्ति का SC दर्जा जन्म के बावजूद "तत्काल और पूरी तरह" समाप्त हो जाता है।

कानूनी सुरक्षा का अंत: धर्म परिवर्तन करने वाला व्यक्ति SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता।

मामले की पृष्ठभूमि: यह फैसला एक ईसाई पादरी के मामले में आया, जिसने ईसाई धर्म अपनाने के बावजूद SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने इसे खारिज कर दिया।

पूर्ण प्रतिबंध: अदालत ने इस नियम को "पूर्ण" (absolute) बताया और कहा कि इसमें कोई अपवाद नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कहा कि अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख या बौद्ध ध...
25/03/2026

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कहा कि अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के लोगों को ही प्राप्त है.

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया है कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद...
24/03/2026

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया है कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक जस्टिस पी. के. मिश्रा और एन. वी. अंजारिया की बेंच ने फैसला सुनाया कि किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पहले के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि जो लोग ईसाई धर्म अपना लेते हैं और सक्रिय रूप से उसका पालन करते हैं, वे अपना अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा बरकरार नहीं रख सकते।

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 24 मार्च को अपने एक फैसले में कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से संबंधित लोगों को ...
24/03/2026

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 24 मार्च को अपने एक फैसले में कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से संबंधित लोगों को ही अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से होने का दर्जा मिल सकता है. कोर्ट ने कहा है कि अगर एससी वर्ग का कोई व्यक्ति इन तीन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसका एससी दर्जा छिन जाएगा.
ज्यादा जानकारी 👉https://p.dw.com/p/5Aywl

12/03/2026

Self-Enumeration (स्व-गणना) पोर्टल 📱🖥️
( House Listing- 1st phase)

जनगणना 2027 की प्रक्रिया को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से Self-Enumeration (स्व-गणना) सुविधा प्रारंभ की गई है। यह सुविधा डिजिटल जनगणना प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से नागरिक स्वयं अपने घर और परिवार से संबंधित आवश्यक जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।

Self-Enumeration एक ऑनलाइन डिजिटल पोर्टल है, जिसके माध्यम से किसी भी परिवार का कोई वयस्क सदस्य अपने घर तथा परिवार के सभी सदस्यों से संबंधित जानकारी स्वयं भर सकता है।

इस सुविधा के अंतर्गत नागरिक बिना प्रगणक (Enumerator) की तत्काल उपस्थिति के भी अपनी जनगणना संबंधी जानकारी सुरक्षित और आधिकारिक रूप से दर्ज कर सकते हैं।

Self-Enumeration में दर्ज की गई जानकारी का बाद में जनगणना के लिए नियुक्त प्रगणक द्वारा सत्यापन किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि दर्ज किया गया डेटा सही, पूर्ण और विश्वसनीय है।

स्व-गणना पोर्टल लिंक- https://test.census.gov.in/se/

*जाति आधारित जनगणना - बिहार*🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏*बाबासाहेब डॉ.अम्बेडकर जी को मानने वाले अनुसूचित जाति के लोग जो की अपने-आप को हिन्दू...
28/04/2023

*जाति आधारित जनगणना - बिहार*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*बाबासाहेब डॉ.अम्बेडकर जी को मानने वाले अनुसूचित जाति के लोग जो की अपने-आप को हिन्दू नही बल्कि बौद्ध धर्मी मानते हैं वे सभी जाति आधारित गणना परिवार पत्रक में धर्म काॅलम संख्या- 7 में अपना धर्म - बौद्ध लिख सकते हैं और अनुसूचित जाति काॅलम संख्या - 8 में जाति - चमार, दूसाध, धोबी, परिया, भंगी, कोली, राजबंसी, बागड़ी, मुशहर, नमोशूद्रा आदि जो भी आपकी जाति हैं लिख सकते हैं।*

*इसके लिए आप को किसी प्रकार का कोई भी धर्म का प्रूफ न तो मांगा जायगा और न ही आपको कोई प्रूफ देने की आवश्यकता हैं। आप जिस धर्म का नाम बतायेंगे लिखा जाएगा।*

*धर्म - बौद्ध लिखेंगे तो आपके परिवार की गिनती बौद्धों मे होगी और अनुसूचित जाति लिखेंगे तो आप के बच्चों को आरक्षण भी मिलता रहेगा।*

अच्युत भोईटे (बी.कॉम एमबीए)
संस्थापक तथा राष्ट्रीय संयोजक,
दि बुध्दिस्ट शेड्यूल कास्ट मिशन ऑफ इंडिया
मो. 9870580728

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