20/08/2026
दर्शन शनिश्चरा मंदिर मुरैना: जहाँ लंका से आकर गिरे थे शनिदेव!
क्या आप जानते हैं देश के उस प्राचीन शनि मंदिर के बारे में, जहाँ हनुमान जी ने शनिदेव को लंका से फेंका था? ☄️✨
शनि पर्वत, मुरैना: जहाँ लंका से आकर गिरे थे शनिदेव! ☄️🔱
मध्य प्रदेश में ग्वालियर के पास स्थित ऐंती गाँव का 'शनि पर्वत' सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि त्रेतायुग के रहस्यों और चमत्कारों का केंद्र है। आइए जानते हैं इस प्राचीन सिद्धपीठ से जुड़ी कुछ बेहद अद्भुत बातें:
🐒 हनुमान जी ने किया था लंका से प्रक्षेपित
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण ने अन्य देवताओं के साथ शनिदेव को भी बंदी बना रखा था। जब हनुमान जी लंका दहन कर रहे थे, तब शनिदेव के आग्रह पर उन्होंने उन्हें आज़ाद किया। शक्तिहीन हो चुके शनिदेव को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के लिए बजरंगबली ने उन्हें लंका से सीधे यहाँ (शनि पर्वत पर) प्रक्षेपित किया। शनिदेव की तिरछी नज़र का ही प्रभाव था कि रावण की सोने की लंका खाक में मिल गई!
☄️ आज भी मौजूद हैं उल्कापात के निशान
जब शनिदेव यहाँ आकर गिरे, तो एक बड़ा उल्कापात सा हुआ। उनके शिला रूप में स्थापित होने से यहाँ एक विशाल गड्ढा बन गया, जो आज भी मौजूद है। माना जाता है कि यहाँ स्थापित प्रतिमा आसमान से टूटे एक उल्कापिंड से ही निर्मित है!
🪨 लौह-प्रधान बन गया यह क्षेत्र
ज्योतिष और खगोल विज्ञान के अनुसार, यह स्थान बेहद प्रभावशाली है। शनिदेव (जो लोहे के कारक हैं) के यहाँ आगमन से यह पूरा इलाका लौह-प्रधान हो गया। आज भी यहाँ के भू-गर्भ में प्रचुर मात्रा में लौह-अयस्क (Iron Ore) पाया जाता है। (आपको जानकर हैरानी होगी कि महाराष्ट्र के प्रसिद्ध 'शनि शिंगणापुर' की शिला भी इसी शनि पर्वत से ले जाई गई थी!)
📜 राजा विक्रमादित्य से लेकर सिंधिया राजवंश तक का इतिहास
इस त्रेतायुगीन मंदिर का निर्माण सर्वप्रथम राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। बाद में सिंधिया शासकों (दौलतराव सिंधिया जी और जीवाजी राव सिंधिया जी) ने इसका जीर्णोद्धार कराया। वर्तमान में इसका प्रबंधन मुरैना जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है।
हर शनिश्चरी अमावस्या पर यहाँ देश भर से लाखों श्रद्धालु न्याय के देवता से इंसाफ की गुहार लगाने आते हैं।
शनि पर्वत, मुरैना: जहाँ लंका से आकर गिरे थे शनिदेव! ☄️🔱मध्य प्रदेश...