16/11/2015
तोमर गोत्र का परिचय
रोबिन तोमर ( जाट ) ,ग्राम - वाजिदपुर
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तोमर ,तंवर,शिरा तंवर ,तुर ,सुलखलान ,सुलख,चाबुक,भिण्ड तोमर ,पांडव,जाखौदिया,कुंतल एक ही जाट गोत्र है जिसकी 10 उप गोत्र शाखाएं है| तोमर गोत्र जाटों में जनसंख्या के अनुसार बड़े गोत्रो में से एक है ।तोमर जाट गोत्र बहुत अधिक प्राचीन गोत्र है ।तोमर जाट गोत्र भरतवंशी (राजा भरत के वंशज ) पांडू पुत्र अर्जुन के वंशज है । तोमर जाट गोत्र की 10 शाखाये है । तोमर गोत्र का ही अपभ्रश तंवर है इतिहासकारों ने दिल्ली के तोमर राजाओ के लिए कही पर तोमर तो कही पर तंवर शब्द का उपयोग किया है तोमरो का दिल्ली पर शासन था उनकी शान में यह कहावत प्रचलित थी की जद कद दिल्ली तंवरा तोमरा तोमर जाट गोत्र उत्तर प्रदेश ,हरियाणा , पंजाब , राजस्थान , मध्य प्रदेश दिल्लीमें निवास करते है । तोमर गोत्र हिन्दू और सिख जाटो में भी है । जट सिख में तोमरो को तुर कहते है । तुर जाटो की एक शाखा है । जिसको गरचा कहते है । तोमर जाटों के 50 गाँव ऐसे है जिनकी जनसंख्या 10,000 से अधिक है । जैसे बावली , पृथला आदि ।
तोमर जाट गोत्र की उप गोत्र शाखाएं है
1.कुंतल/(खुटेल), 2.पांडव, 3.सलकलायन, 4.चाबुक, 5.तंवर, 6.भिण्ड तोमर (भिंडा), 7.जाखौदिया, 8.सुलख, 9.देशवाले, 10.शिरा तंवर 11. मोटा,12.कपेड या कपेड़ा उप गोत्र शाखाएं है, लेकिन गोत्र तोमरहै ।
उत्पत्ति
तोमर गोत्र (कुंतल/(खुटेल), पांडव, सलकलायन,तंवर, भिण्ड तोमर (भिंडा), [ सुलख , शिरा तंवर ) की उत्पत्ति पांड्वो से है इस कारण तोमर गोत्र पाण्डुवन्शी ,कुंतलवंशी (कुंती के) भी कहलाते है तोमर जाट अर्जुन के वंशज है उनकी कुल देवी मनसा देवी (योगमाया कृषण की बहिन) ,और शाकुम्भरी देवी है । यह देवी पांड्वो की भी कुल देवी थी |
तोमर एक संस्कृत शब्द है जिस मतलब भाला या लोहदंड है| तोमर जो कि माँ दुर्गा का एक हथियार है तोमर हथियार का वर्णन दुर्गा कवच पथ में दुर्गा माँ के हथियार के रूप उल्लेख कियागया है यह हथियार अर्जुन को महाभारत युद्ध में माँ से मिला था तोमर एक हथियार है जो अर्जुन द्वारा महाभारत युद्ध में इस्तेमाल किया गया था जो यह इंगित करता है कि तोमर महाभारत अवधि मे तोमर हथियार के साथ विशेषज्ञ योद्धा थे|. कुंतल जाट खाप मथुरा और भरतपुर में पाया जाता है तोमर जाट कुंती और पांडु के वंशज हैं, तो उन्हें कुंतल बुलाया . 36 राजवंशों के गिनाये हुए नामों के अधिकांश राजवंश जाटों में भी पाये जाते हैं। कर्नल टॉड ने तो पूरी जाट जाति को 36 राजवंशों में से एक राजवंश माना है|। कर्नल टाड ने इसी बात को इस भांति लिखा है-
“जिन जाट वीरों के प्रचण्ड पराक्रम से एक समय सारा संसार कांप गया था, आज उनके वंशधर खेती करके अपना जीवन-निर्वाह करते हैं।“
तोमर जाट गोत्र ने बहुत बार अपनी वीरता के दम पर इतिहास बनाया है|तोमर गोत्र के जाट बहुत सादा जीवन, उच्च विचार, बोल्ड और मजबूत व्यक्तियों रहे हैं. दिलीप सिंह अहलावत ने तोमर जाट को मध्य एशिया में सत्तारूढ़ जाट कुलों के रूप में उल्लेख किया है.
तोमर जाट गोत्र की उप गोत्र शाखाएं है
कुंतल जाट मथुरा और भरतपुर में पाया जाता है वे कुंती और पांडु के वंशज हैं, तो उन्हें कुंतल बुलाया| राजा अनंगपाल के सगे परिवार के लोग फिर मथुरा क्षेत्र में चले गए। इन्हीं लोगों ने सौख क्षेत्र की खुटेल, (कुंतल) पट्टी में महाराजा अनंगपाल की बड़ी मूर्ति स्थापित करवाई जो आज भी देखी जा सकती है। उसी समय इनके कुछ लोगों ने पलवल के पूर्व दक्षिण में (12 किलोमीटर) दिघेट गांव बसाया। आज इस गांव की आबादी 12000 के लगभग है। इन्हीं के पास बाद में चौहान जाटों ने मित्रोल और नौरंगाबाद गांव बसाए जिन्हें आज भी जाट कहा जाता है राजपूत नहीं।
पांडू- तोमर जाट पांडू पुत्र अर्जुन के वंशज होने के कारन पांडू या पांडव भी कहते है तोमर जाटो के पांडु वंशी होने के कारनपांडव जाट टाइटल कुछ तोमर आगरा और जयपुर में पांडू और पांडव उपनाम के रूप में काम लेते है
भिंडा-तोमर जाट जो भिण्ड शहर से फैल उन्हें भिण्ड तोमर बुलाया तोमर जाट गोत्र की उप गोत्र भिंडा (भिण्ड तोमर) है.भिण्ड मध्य परदेश में एक जिला है
तूर (तुअर) जाट गोत्र हिन्दी में तोमर और पंजाबी और देसी बोली में Taur (तुअर जट) कहा जाता है
जाखौदिया तंवर- जाखौदिया गोत्र नहीं होता है इनका गोत्र तोमर है तोमर(तंवर ) जाट 1857 के आसपास जब दिल्ली के जाखौद गॉव से आकर भरतपुर के छोंकरवाड़ा गाव में बसे तो यह के स्थानीय निवासयो ने इनको इनके पैतृक गाँव जाखौद के नाम पर जखोदिया कहना शुरू कर दिया . पुरे भारतवर्ष में यह एक मात्र गाँव है जाखौदिया तंवर जाटों का और किस जगह पर यदि कोई जाखौदिया तोमर निवास करते है तो वो मूल रूप से छोंकरवाड़ा से गए हुए है । दिल्ली पर तोमर जाटों का राज्य रहा है उनको ही तंवर बोला जाता है दोनों एक ही गोत्र है जाखौद गांव को एक महाराजा अनंगपाल तोम