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10/02/2023

हरि ॐ❤️

हर महिने की 14 दिनांक को मातृ-पितृ पूजन दिवस मनायें ....मातृ देवो भव का अर्थ है कि माता भी भगवान कि तरह ही पूजनीय है, आद...
03/08/2022

हर महिने की 14 दिनांक को मातृ-पितृ पूजन दिवस मनायें ....
मातृ देवो भव का अर्थ है कि माता भी भगवान कि तरह ही पूजनीय है, आदरणीय है। और हमे इस संसार में लाने के लिए ९ महीने तक अपनी कोख में हमे पाला और पोषण किया तथा ९ महीने अपने पेट में हमारा बोजा उठाया है। और हमे इस संसार में लाई है इसलिए माता साक्षात भगवान ही है।
भारतीय संस्कृति मातृ देवो भवः पितृ देवो भवः अर्थात माता ,पिता एवं अतिथि को देव तुल्य मानना उनकी सेवा करनी चाहिए। जीवन में माता का स्थान है धरती का और पिता सूरज के समान है । सृष्टि जगत पृथ्वी से जन्म पा कर सूरज से ऊर्जा ले पनपता और जीवन यापन करता है । सूरज सौर परिवार का पिता है । हम प्रतिदिन की प्रार्थना में ईश्वर से कहते हैं " तुम्ही हो माता , पिता तुम्ही हो ' अर्थात् परमात्मा को भी निकटता का एहसास दिलवाने के लिए उसकी तुलना माता - पिता से करते हैं । श्री सदगुरु भगवान माता-पिता से भी अधिक पूजनीय है ।

आत्मज्ञानी, आत्म-साक्षात्कारी महापुरुष को जिसने गुरु के रुप में स्वीकार कर लिया हो उसके सौभाग्य का क्या वर्णन किया जाय ?...
09/07/2022

आत्मज्ञानी, आत्म-साक्षात्कारी महापुरुष को जिसने गुरु के रुप में स्वीकार कर लिया हो उसके सौभाग्य का क्या वर्णन किया जाय ? गुरु के बिना तो ज्ञान पाना असंभव ही है। कहते हैं :

ईश कृपा बिन गुरु नहीं, गुरु बिना नहीं ज्ञान ।

ज्ञान बिना आत्मा नहीं, गावहिं वेद पुरान ॥

बस, ऐसे गुरुओं में हमारी श्रद्धा हो जाय । श्रद्धावान ही ज्ञान पाता है। गीता में भी आता हैः

श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः ।

अर्थात् जितेन्द्रिय, तत्पर हुआ श्रद्धावान पुरुष ज्ञान को प्राप्त होता है।

ऐसा कौन-सा मनुष्य है जो संयम और श्रद्धा के द्वारा भवसागर से पार न हो सके ? उसे ज्ञान की प्राप्ति न हो ? परमात्म-पद में स्थिति न हो?

जिसकी श्रद्धा नष्ट हुई, समझो उसका सब कुछ नष्ट हो गया। इसलिए ऐसे व्यक्तियों से बचें, ऐसे वातावरण से बचें जहाँ हमारी श्र्द्धा और संयम घटने लगे। जहाँ अपने धर्म के प्रति, महापुरुषों के प्रति हमारी श्रद्धा डगमगाये ऐसे वातावरण और परिस्थितियों से अपने को बचाओ।

Guru Purnima Importance in Hindi. Guru Purnima History. Significance of Vyas Purnima [Story of Guru Purnima] Why is guru purnima celebrated

23/02/2020

hari om

विष्णुपदी संक्रांति Sant Shri Asharamji Ashram
16/12/2019

विष्णुपदी संक्रांति Sant Shri Asharamji Ashram

vishnu_24 Published October 30, 2014 at 352 × 435 in आँवला (अक्षय ) नवमी है फलदायी… (९ नबम्बर २०१६ ). ← Previous

27/01/2018

ग़लतफहमी में जीने का मज़ा कुछ और ही है 🤷🏻‍♂, वरना
हकीकतें तो अक्सर 😢रुला देती है..

22 अप्रैल 2017 शनिवार को वरुथिनी एकादशी (स्मार्त) है एवं 23 अप्रैल 2017 रविवार को वरुथिनी एकादशी (भागवत) है ।विशेष ~ 23 ...
22/04/2017

22 अप्रैल 2017 शनिवार को वरुथिनी एकादशी (स्मार्त) है एवं 23 अप्रैल 2017 रविवार को वरुथिनी एकादशी (भागवत) है ।
विशेष ~ 23 अप्रैल 2017 रविवार को वरुथिनी एकादशी (भागवत) के दिन व्रत (उपवास) रखें ।

इस लोक और परलोक में भी सौभाग्य प्रदान करने वाली है ।जो फल दस हजार वर्षों तक तपस्या करने के बाद मनुष्य को प्राप्त होता है, वही फल इस वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने मात्र से प्राप्त हो जाता है ।यमराज से डरनेवाला मनुष्य अवश्य वरुथिनी एकादशी का व्रत करें ।
इस दिन ॐ नमो भगवते वासुदेव मंत्र का जप, श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ और रात्रि जागरण करने से पुण्य की प्राप्ति होती हैं ।

वरूथिनी एकादशी
युधिष्ठिर ने पूछा : हे वासुदेव ! वैशाख मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है? कृपया उसकी महिमा बताइये।
भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन् ! वैशाख (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार चैत्र ) कृष्णपक्ष की एकादशी ‘वरुथिनी’ के नाम से प्रसिद्ध है । यह इस लोक और परलोक में भी सौभाग्य प्रदान करनेवाली है । ‘वरुथिनी’ के व्रत से सदा सुख की प्राप्ति और पाप की हानि होती है । ‘वरुथिनी’ के व्रत से ही मान्धाता तथा धुन्धुमार आदि अन्य अनेक राजा स्वर्गलोक को प्राप्त हुए हैं । जो फल दस हजार वर्षों तक तपस्या करने के बाद मनुष्य को प्राप्त होता है, वही फल इस ‘वरुथिनी एकादशी’ का व्रत रखनेमात्र से प्राप्त हो जाता है ।
नृपश्रेष्ठ ! घोड़े के दान से हाथी का दान श्रेष्ठ है । भूमिदान उससे भी बड़ा है । भूमिदान से भी अधिक महत्त्व तिलदान का है । तिलदान से बढ़कर स्वर्णदान और स्वर्णदान से बढ़कर अन्नदान है, क्योंकि देवता, पितर तथा मनुष्यों को अन्न से ही तृप्ति होती है । विद्वान पुरुषों ने कन्यादान को भी इस दान के ही समान बताया है । कन्यादान के तुल्य ही गाय का दान है, यह साक्षात् भगवान का कथन है । इन सब दानों से भी बड़ा विद्यादान है । मनुष्य ‘वरुथिनी एकादशी’ का व्रत करके विद्यादान का भी फल प्राप्त कर लेता है । जो लोग पाप से मोहित होकर कन्या के धन से जीविका चलाते हैं, वे पुण्य का क्षय होने पर यातनामक नरक में जाते हैं । अत: सर्वथा प्रयत्न करके कन्या के धन से बचना चाहिए उसे अपने काम में नहीं लाना चाहिए । जो अपनी शक्ति के अनुसार अपनी कन्या को आभूषणों से विभूषित करके पवित्र भाव से कन्या का दान करता है, उसके पुण्य की संख्या बताने में चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं । ‘वरुथिनी एकादशी’ करके भी मनुष्य उसीके समान फल प्राप्त करता है ।
राजन् ! रात को जागरण करके जो भगवान मधुसूदन का पूजन करते हैं, वे सब पापों से मुक्त हो परम गति को प्राप्त होते हैं । अत: पापभीरु मनुष्यों को पूर्ण प्रयत्न करके इस एकादशी का व्रत करना चाहिए । यमराज से डरनेवाला मनुष्य अवश्य ‘वरुथिनी एकादशी’ का व्रत करे । राजन् ! इसके पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है और मनुष्य सब पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है ।
(सुयोग्य पाठक इसको पढ़ें, सुनें और गौदान का पुण्यलाभ प्राप्त करें ।)
https://www.youtube.com/watch?v=onABoIfDuxc

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21/06/2015

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गीता में वर्णित कर्मयोग, ज्ञानयोग, अविकंप-योग प्राणों की कसरत मात्र नहीं है । गीता का योग तो ऐसा है जिसे दैनिक जीवन के क्रिया-कलापों के मध्य भी सिद्ध कर सकते हैं। भोजन पकाते हुए, रोजी-रोजगार चलाते ...

https://www.facebook.com/santshriasharamjiashram/posts/855661967842186
14/06/2015

https://www.facebook.com/santshriasharamjiashram/posts/855661967842186

किसी देश की सैद्धांतिक विचारधारा का नष्टीकरण यह एक खुल्लम-खुल्ला तरीका है जिसके जरिये किसी भी देश, जाति, धर्म के सिद्धांत, विचारधारा और व्यवस्था का नाश करके दूसरे देश की विचारधारा और व्यवस्था स्थाप...

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