20/05/2026
18 मई को उर्स हज़रत ग़ौस पाक मनाया गया।
उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के बांगरमऊ बिल्हौर रोड पर नौबतगंज गांव के करीब खैरुद्दीनपुर में लगभग 65-70 साल पहले एक बुजुर्ग आकर रुके थे।आपने मुंबई में मोहम्मद अली रोड पर कुछ दिनों तक आर्मी की नौकरी भी की बाद में इस्तीफा देकर हिंदुस्तान के अलग अलग इलाकों में रहे।यहां आने से पहले आप कानपुर जिले के कई गांवों में जैसे रसूलाबाद के पास बिरहून व कैंझरी के पास औझान व बिक्रू भीटी,बनीपारा जैसे गांवों में क़याम किया और लोगों को अपनी दुवाओं से फैज़आब किया और जहां आपका राज़ खुल जाता वहां से आप जगह बदल लेते।आपको लोग अलग-अलग नाम से जैसे बगिया वाले बाबा, बाग वाले मौलवी साहब,हाजी सैयद बहादुर शाह कादरी,नूर मोहम्मद शाह फैजाबादी, मिसलन मौलवी साहब, रेल के साथ दौड़ लगाने की वजह से रेल वाले हाफिज जी या हाफिज तूफान आदि नाम से जानते हैं खैरूद्दीन पुर में धीरे-धीरे इलाके के लोग आपकी करामातों व दुआओं से फ़ैज़ पाने लगे।आपकी कुछ मशहूर करामाते जैसे सांप काटने पर काटने वाली जगह में चीरा लगाकर जहर पी लेना खैरूद्दीनपुर गांव में आग लगने पर गांववालों को गंगा नदी पैदल ही पार करा देना। 40 दिन जमीन के अंदर समाधि लेना आपके सिर व धड़ का अलग हो जाना, रेल के आगे दौड़ लगाना तथा अपनी दुआओं से मरीज व दुखियारों को शिफायाब करना। आपने 11 फरवरी सन 2011 रबी उल अव्वल की 7 तारीख को इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह दिया।आपने 48 साल हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के जंगलों में मुसलसल इबादत की, आप आखिरी वक्त तक एक कच्चे मकान में सादगी के साथ रहे और यहां पर कुम्हार के टूटे मिट्टी के बर्तन खाकर गंगा के किनारे तपती रेत पर और रात में गंगा नदी में खड़े होकर इबादत करते आपने पैदल ही हज किया और बगदाद शरीफ में बड़े पीर साहब के सिलसिले से बैत हुई और वहीं से खिलाफत पाई आपने लगभग 95 साल की उम्र में नाबीना के साथ निकाह किया ताकि यह सुन्नत अल्लाह के रसूल की ना छूटे। हर साल की तरह इस साल भी 18 मई को गौस पाक का उर्स आपकी दरगाह पर मनाया गया जिसमें क़ुरआनखानी क़व्वाली और लंगर का एहतमाम किया गया।आज भी आपकी मज़ार हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल बनी हुई है।
उर्स की शुरुआत गुस्ल व चादरपोशी व गुलपोशी से हुई उसके बाद हाफिज क़य्यूम रज़ा ने कुरआन शरीफ की तिलावत की व नातख्वानी की इसके बाद क़व्वाली का दौर शुरू हुआ जो कि रातभर चला।
उर्स में बाबा के तमाम चाहने वालों और मुरीदों के साथ साथ मेहमान ए खुसूसी मझगांवा शरीफ (बाराबंकी) से फ़रोज़ा आसिफ़ अप्पी तशरीफ लायी,इसके अलावा ग्राम प्रधान सेतुवाही सुरेश, डा. हसीन आरफी व देवेन्द्र प्रताप सिंह आरफी,हाजी सईद आरफी साहब,सूफी इजहार खां आरफी,सूफी जीशान आरफी साहब, शाहनवाज, सैफी,ताज अंसारी,नफीस भाई सुरसेनी, सपा युवा नेता गुलिस्तान खान व जाहिद खा,आलोक प्रजापति,राजू,आजाद प्रधान चहोलिया,गोगा प्रधान दसदान व तमाम चाहने वालों ने शिरकत की और सीतापुर से शकील लहरपुरी, उन्नाव से शहज़ाद ताज व लखनऊ से आए हुए मझगावां शरीफ़ के खानकाही कव्वाल जुनैद की कव्वाली सुनी और सुबह 4 बजे मुल्क की सलामती व अमन की दुआ के साथ महफ़िल का इख़्तेताम किया गया।