Bharatiya Sanskriti

Bharatiya Sanskriti भारतीय संस्कृति- हिन्दुओं का गौरव

भारतीय संस्कृति विश्व के इतिहास में कई दृष्टियों से विशेष महत्त्व रखती है।

यह संसार की प्राचीनतम संस्कृतियों में से है। मोहनजोदड़ो की खुदाई के बाद से यह मिस्र, मेसोपोटेमिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं के समकालीन समझी जाने लगी है।

प्राचीनता के साथ इसकी दूसरी विशेषता अमरता है। चीनी संस्कृति के अतिरिक्त पुरानी दुनिया की अन्य सभी - मेसोपोटेमिया की सुमेरियन, असीरियन, बेबीलोनियन और खाल्दी प्रभृति

तथा मिस्र ईरान, यूनान और रोम की-संस्कृतियाँ काल के कराल गाल में समा चुकी हैं, कुछ ध्वंसावशेष ही उनकी गौरव-गाथा गाने के लिए बचे हैं; किन्तु भारतीय संस्कृति कई हजार वर्ष तक काल के क्रूर थपेड़ों को खाती हुई आज तक जीवित है।

उसकी तीसरी विशेषता उसका जगद्गुरु होना है। उसे इस बात का श्रेय प्राप्त है कि उसने न केवल महाद्वीप-सरीखे भारतवर्ष को सभ्यता का पाठ पढ़ाया, अपितु भारत के बाहर बड़े हिस्से की जंगली जातियों को सभ्य बनाया, साइबेरिया के सिंहल (श्रीलंका) तक और मैडीगास्कर टापू, ईरान तथा अफगानिस्तान से प्रशांत महासागर के बोर्नियो, बाली के द्वीपों तक के विशाल भू-खण्ड पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ा।

संस्कृति

सर्वांगीणता, विशालता, उदारता और सहिष्णुता की दृष्टि से अन्य संस्कृति

12/01/2024

स्वामी जी के संबोधन के अंश

मेरे अमरीकी भाइयो और बहनों!

आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया हैं उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा हैं। संसार में संन्यासियों की सबसे प्राचीन परम्परा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ; धर्मों की माता की ओर से धन्यवाद देता हूँ; और सभी सम्प्रदायों एवं मतों के कोटि कोटि हिन्दुओं की ओर से भी धन्यवाद देता हूँ।

मैं इस मंच पर से बोलने वाले उन कतिपय वक्ताओं के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ जिन्होंने प्राची के प्रतिनिधियों का उल्लेख करते समय आपको यह बतलाया है कि सुदूर देशों के ये लोग सहिष्णुता का भाव विविध देशों में प्रचारित करने के गौरव का दावा कर सकते हैं। मैं एक ऐसे धर्म का अनुयायी होने में गर्व का अनुभव करता हूँ जिसने संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृत- दोनों की ही शिक्षा दी हैं। हम लोग सब धर्मों के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं करते वरन समस्त धर्मों को सच्चा मान कर स्वीकार करते हैं। मुझे ऐसे देश का व्यक्ति होने का अभिमान है जिसने इस पृथ्वी के समस्त धर्मों और देशों के उत्पीड़ितों और शरणार्थियों को आश्रय दिया है। मुझे आपको यह बतलाते हुए गर्व होता हैं कि हमने अपने वक्ष में उन यहूदियों के विशुद्धतम अवशिष्ट को स्थान दिया था जिन्होंने दक्षिण भारत आकर उसी वर्ष शरण ली थी जिस वर्ष उनका पवित्र मन्दिर रोमन जाति के अत्याचार से धूल में मिला दिया गया था। ऐसे धर्म का अनुयायी होने में मैं गर्व का अनुभव करता हूँ जिसने महान जरथुष्ट जाति के अवशिष्ट अंश को शरण दी और जिसका पालन वह अब तक कर रहा है। भाईयो मैं आप लोगों को एक स्तोत्र की कुछ पंक्तियाँ सुनाता हूँ जिसकी आवृति मैं बचपन से कर रहा हूँ और जिसकी आवृति प्रतिदिन लाखों मनुष्य किया करते हैं:

रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम्। नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव।।

अर्थात जैसे विभिन्न नदियाँ भिन्न भिन्न स्रोतों से निकलकर समुद्र में मिल जाती हैं उसी प्रकार हे प्रभो! भिन्न भिन्न रुचि के अनुसार विभिन्न टेढ़े-मेढ़े अथवा सीधे रास्ते से जानेवाले लोग अन्त में तुझमें ही आकर मिल जाते हैं।

यह सभा, जो अभी तक आयोजित सर्वश्रेष्ठ पवित्र सम्मेलनों में से एक है स्वतः ही गीता के इस अद्भुत उपदेश का प्रतिपादन एवं जगत के प्रति उसकी घोषणा करती है:

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः।।

अर्थात जो कोई मेरी ओर आता है-चाहे किसी प्रकार से हो-मैं उसको प्राप्त होता हूँ। लोग भिन्न मार्ग द्वारा प्रयत्न करते हुए अन्त में मेरी ही ओर आते हैं।

🌸 भगवान श्रीकृष्ण के 5250वें प्राकट्योत्सवकी आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं🌸🙏🙏
06/09/2023

🌸 भगवान श्रीकृष्ण के 5250वें प्राकट्योत्सव
की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं🌸🙏🙏

26/01/2023

भारतीय संस्कृति परिवार की ओर से
आप सभी को गणतंत्र दिवस की बधाई
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

लोह पुरुष वल्लभभाई पटेल की स्मृति में उनके जन्मदिन 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है...
31/10/2022

लोह पुरुष वल्लभभाई पटेल की स्मृति में उनके जन्मदिन 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता हैं |

राष्ट्रीय एकता दिवस का ऐलान 2014 में किया गया इसे वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद में रखकर तय किया गया इसका ऐलान गृहमंत्री राज नाथ सिंह ने किया |

आज के समय में एकता इस तरह खंडित हो चुकी हैं कि इसका महत्व सबसे पहले परिवार जो कि समाज की सबसे छोटी इकाई हैं, को समझना चाहिये क्यूंकि आज परिवारों में ही एकता नहीं हैं | इसी कारण समाज में एकता नही हैं और अगर समाज में एकता नहीं होगी तो गाँव, शहर, राज्य एवम देश में कैसे हम एकता की उम्मीद रख सकेंगे |

एकता के लिए जरुरी हैं आज की पीढ़ी एवम पहले की पीढ़ी आपसी विचारों को व्यक्त करे एवम एक दुसरे को अपनी-अपनी स्थिती से अवगत करायें | साथ ही एक हल की उम्मीद में ही बातचीत शुरू की जाये | पीढ़ियों में जो विवाद होता हैं उसका कोई हल नहीं होता हर व्यक्ति अपने आपको सही मानता हैं ऐसे में परिवार टूट जाते हैं इसलिए जरुरी हैं कि बातचीत हो एवम ऐसा वातावरण हो कि परिवार का हर एक सदस्य अपनी बात कह सके और हल ढूंढा जा सके | परिवारों का टूट जाना तो आसान हैं | उनका एक साथ रहना मुश्किल हैं और इन टूटे हुए परिवारों का प्रभाव देश पर भी पड़ता हैं |

किसी भी देश का आधार उसकी एकता एवम अखंडता में ही निहित होता हैं | भारत देश कई वर्षो तक गुलाम था | इसका सबसे बड़ा कारण था आवाम के बीच एकता की कमी होना | इस एकता की कमी का सबसे बड़ा कारण उस समय में सुचना प्रसारण के साधनों का ना होना था | साथ ही अखंड भारत पर कई संस्कृतियों ने राज किया | इस कारण भारत देश में विभिन्न जातियों का विकास हुआ | शासन बदलते रहने के कारण एवम विचारो में भिन्नता के कारण मतभेद उत्पन्न होता गया और देश में सबसे बाद में ब्रिटिश हुकूमत ने राज किया और इन्होने इसी कमी का फायदा उठाकर फूट डालों एवम राज करो की नीति अपनाई | इसी एक हथियार के कारण अंग्रेजों से भारत पर 200 वर्षो की गुलामी की |

इससे जाहिर होता हैं कि देश का विकास, शांति, समृद्धि एवम अखंडता एकता के कारण ही संभव हैं |कौमी लड़ाई देश की नींव को खोखला करती हैं | इससे न निजी लाभ होता हैं ना ही राष्ट्रिय हित |आज भी हम कहीं न कहीं एकता में कमी के कारण ही अन्य देशों से पीछे हैं | जाति वाद के दलदल में फँसकर हम देश की एक

24/10/2022
बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयादशमी(दशहरा) पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं , भगवान श्रीराम व आदिशक्ति जगदम्बा आप...
05/10/2022

बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयादशमी
(दशहरा) पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं , भगवान श्रीराम व आदिशक्ति जगदम्बा आपको ढेर सारी खुशियाँ प्रदान करे , 🏹🌋

आदिशक्ति जगतजननी मां जगदम्बा के शक्ति दिन नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं , मां देवी दुर्गा आप पर कृपा बनाये रखें🙏🙏🌸🌸
26/09/2022

आदिशक्ति जगतजननी मां जगदम्बा के शक्ति दिन नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं , मां देवी दुर्गा आप पर कृपा बनाये रखें🙏🙏🌸🌸

Address

Banda
210001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Bharatiya Sanskriti posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Bharatiya Sanskriti:

Share