14/09/2021
सनातन सम्मोहन है और कोई भी इस सम्मोहन से स्वयं को बचा नहीं सकता..
नित्य नए पर्व हैं, नित्य नए उत्सव हैं. ये पर्व और उत्सव मानव मात्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, जीवन को जीवंत करते हैं. और जीवन है तो व्यक्ति जीवंतता के प्रति सहज आकर्षित होगा.
समस्त वसुधा के एक छोर से दूसरे छोर तक जहाँ भी प्राणवायु बहती है, सूर्य की रश्मीयां पहुँचती हैं और जहाँ भी प्राणियों का अस्तित्व है, हम उसे अपना परिवार मानते हैं. व्यक्ति किसी भी मत, पंथ या विचारधारा का हो, हम तक आना चाहे तो हम बिना शर्त खुले हृदय से उसका स्वागत करते हैं. (हालांकि, हमारी इस सहिष्णुता को ही हमारी कमज़ोरी समझ लिया गया है.) जो भी चाहे, हमारे पर्व पर हर्षित और आनंदित हो सकता है. यहाँ जन्म भी एक उत्सव है, तो मृत्यु की भी परम्पराएं है.
इस समय सारे ही भारत में गणेशोत्सव की धूम है. पर्व का आरम्भ भले ही श्री लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र में हिन्दुओं की सुप्त चेतना को जागृत करने के लिए किया था परन्तु tv, फिल्मों और सोशल मीडिया ने वर्तमान सदी में इसे ग्लोबलाइज़ कर दिया है. मेरे लखनऊ में ही अनेकों जगहों पर गणपति विराजमान हैं.
पारम्परिक मराठी परिधानों में सजे लोग, हर्षित चेहरे, गणपति का भव्य विग्रह और साथ ही हृदय में अनन्य भक्ति और सर्वकल्याण की प्रार्थना... कोई कैसे न सम्मोहित हो जाए.. कोई क्यों न गणपति के रंग में रंग जाए...
इन तस्वीरों में वही चेहरे हैं जिन्हें सिर्फ हिंदुत्व और भारत के विरोध और सो कॉल्ड सेक्युलरिज़्म के लिए जाना जाता है.. पर गणेश उत्सव की धूम इनके भी घरों में है...
सनातन सिर्फ धर्म नहीं अपितु जीवनशैली है. चित्त और आत्मा से सब अब भी वही होंगे जो सृष्टि के आरम्भ में थे. बस दृष्टि पर पड़े आवरण के हटने भर की देर है.. और एक दिन वो भी होगा.. हमको बस संगठित हो कर रहना है और अपनी परम्पराओं से न सिर्फ जुड़े रहना है, बल्कि उनका प्रसार भी करना है और अगली पीढ़ी को इन्हें हस्तान्तरित भी करना है...
गौरी पुत्र गणेश सबका कल्याण करें...!!
🙏🏻🚩गणपति बप्पा मोरिया 🚩🙏🏻
Mishra Rai