17/08/2026
इस शिल्प में भगवान श्री कृष्ण को बाँसुरी बजाते हुए दर्शाया गया है। प्रतिमा की सबसे खास बात इसकी बारीक शिल्पकारी है—आभूषणों की सूक्ष्म नक्काशी, शरीर की लयबद्ध मुद्रा और पत्थर पर उकेरे गए छोटे-छोटे विवरण इसे असाधारण बनाते हैं।
लगभग 12वीं शताब्दी की यह कलाकृति उस दौर के शिल्पकारों की तकनीकी दक्षता को दिखाती है। कठोर पत्थर पर इतनी महीन और संतुलित नक्काशी करना अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
एक ही पत्थर… और उसमें इतनी बारीकी कि सदियाँ बीत जाने के बाद भी शिल्प आज भी जीवंत दिखाई देता है।
📍 Chennakeshava Temple, Belur, Karnataka 🇮🇳
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